अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च 2026) से पहले UN Women ने खुलासा किया है कि दुनिया भर में महिलाओं के पास पुरुषों की तुलना में केवल 64% कानूनी अधिकार ही हैं। यह जानकारी संयुक्त राष्ट्र के महासचिव की नई रिपोर्ट “सभी महिलाओं और लड़कियों के लिए न्याय तक पहुँच सुनिश्चित करना और उसे मज़बूत करना” के साथ जारी की गई। रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया का कोई भी देश अभी तक महिलाओं और लड़कियों के लिए पूर्ण कानूनी समानता हासिल नहीं कर पाया है। यह स्थिति उन न्यायिक प्रणालियों में मौजूद संरचनात्मक और प्रणालीगत कमियों को उजागर करती है, जिनका उद्देश्य नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना और कानून के शासन को मजबूत करना है।
UN Women रिपोर्ट 2026 के प्रमुख निष्कर्ष
UN Women की रिपोर्ट 2026 में दुनिया भर में महिलाओं के अधिकारों से जुड़े कई गंभीर कानूनी अंतर (Legal Gaps) सामने आए हैं। प्रमुख निष्कर्ष इस प्रकार हैं—
- वैश्विक स्तर पर महिलाओं को पुरुषों की तुलना में केवल 64% कानूनी अधिकार ही प्राप्त हैं।
- 54% देशों में बलात्कार (Rape) की कानूनी परिभाषा सहमति (Consent) के आधार पर निर्धारित नहीं है।
- लगभग तीन-चौथाई देशों में अभी भी कुछ परिस्थितियों में बाल विवाह (Child Marriage) की अनुमति है।
- 44% देशों में समान काम के लिए समान वेतन (Equal Pay for Equal Work) देने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है।
ये निष्कर्ष इस बात को रेखांकित करते हैं कि दुनिया के कई देशों में अब भी संरचनात्मक भेदभाव (Structural Discrimination) मौजूद है, जो महिलाओं की न्याय तक पहुँच (Access to Justice) को प्रभावित करता है।
कानूनी खामियाँ और बढ़ती प्रतिक्रिया
Sima Bahous, जो UN Women की कार्यकारी निदेशक हैं, के अनुसार जब महिलाओं और लड़कियों को न्याय से वंचित किया जाता है, तो इसका प्रभाव केवल व्यक्तियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे संस्थाओं पर जनता का विश्वास भी कमजोर होता है।
रिपोर्ट में निम्नलिखित चिंताओं के बारे में भी चेतावनी दी गई है—
- लैंगिक समानता (Gender Equality) के प्रति वैश्विक प्रतिबद्धताओं के खिलाफ बढ़ती प्रतिक्रिया।
- कुछ क्षेत्रों में महिलाओं की स्वतंत्रता को सीमित करने के लिए कानूनों में बदलाव किए जा रहे हैं।
- तकनीक के तेजी से आगे बढ़ने के कारण डिजिटल हिंसा (Digital Violence) के मामलों में वृद्धि हो रही है, जबकि इसके नियमन उतनी तेजी से नहीं बढ़ रहे।
- संघर्ष की स्थितियों में यौन हिंसा (Sexual Violence) का उपयोग एक हथियार के रूप में किया जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो वर्षों में यौन हिंसा के मामलों में 87% की वृद्धि दर्ज की गई है, जो इस क्षेत्र में तत्काल सुधार (Urgent Reform) की आवश्यकता को दर्शाती है।
प्रगति हुई, लेकिन बाधाएँ अब भी मौजूद
हालाँकि रिपोर्ट में कई गंभीर चिंताएँ सामने आई हैं, फिर भी कुछ सकारात्मक प्रगति भी दर्ज की गई है—
- दुनिया के 87% देशों ने घरेलू हिंसा (Domestic Violence) के खिलाफ कानून बनाए हैं।
- पिछले दस वर्षों में 40 से अधिक देशों ने महिलाओं के लिए अपने संवैधानिक संरक्षण को मजबूत किया है।
फिर भी केवल कानूनी सुधार पर्याप्त नहीं हैं। कई सामाजिक बाधाएँ अब भी महिलाओं को न्याय पाने से रोकती हैं, जैसे—
- सामाजिक कलंक (Stigma)
- पीड़िता को दोष देना (Victim-blaming)
- न्याय प्रक्रिया की उच्च लागत
- भाषा संबंधी बाधाएँ
- संस्थाओं पर विश्वास की कमी


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