क्या आप जानते हैं कि कोयला दुनिया के सबसे पुराने और व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले ऊर्जा स्रोतों में से एक है? यह बिजली उत्पादन और विभिन्न उद्योगों को चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। घरों को ऊर्जा देने से लेकर फैक्ट्रियों को संचालित करने तक, कोयला आज भी एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन बना हुआ है। वर्तमान समय में कई विकासशील और विकसित देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस पर काफी हद तक निर्भर हैं।
विभिन्न देश बड़े पैमाने पर कोयला उत्पादन करते हैं, लेकिन उत्पादन का स्तर प्राकृतिक भंडार, तकनीक और मांग पर निर्भर करता है। कुछ देशों के पास विशाल कोयला भंडार हैं, जो उन्हें घरेलू जरूरतों के साथ-साथ वैश्विक मांग को भी पूरा करने में सक्षम बनाते हैं। हाल के वर्षों में स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर चर्चाओं ने कोयला उत्पादन को प्रभावित किया है, फिर भी चीन दुनिया में सबसे अधिक कोयला उत्पादन करने वाला देश बना हुआ है और वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र में एक प्रमुख भूमिका निभाता है।
दुनिया में कोयले का सबसे बड़ा उत्पादक चीन है। वर्ष 2025–26 तक चीन का कोयला उत्पादन लगभग 4.8 अरब टन प्रति वर्ष तक पहुंच गया है, जो किसी भी अन्य देश से कहीं अधिक है। चीन में मुख्य कोयला भंडार इनर मंगोलिया और शिनजियांग जैसे क्षेत्रों में पाए जाते हैं। यह कोयला वहां की फैक्ट्रियों, स्टील उद्योग और बिजली उत्पादन का प्रमुख आधार है। हालांकि चीन सौर और पवन ऊर्जा में निवेश कर रहा है, फिर भी उद्योगों के लिए कोयला उसकी मुख्य ऊर्जा बना हुआ है।
भारत कोयला उत्पादन में दूसरे स्थान पर है। भारत 2030 तक 1.5 अरब टन उत्पादन का लक्ष्य रखता है। देश की बढ़ती जनसंख्या और ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में कोयले की अहम भूमिका है। सरकार नई खदानें खोल रही है और कोयला गैसीकरण जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाकर इसे अधिक स्वच्छ और कुशल बनाने का प्रयास कर रही है। भारत अपने अधिकांश कोयले का उपयोग देश के भीतर ही बिजली उत्पादन और उद्योगों में करता है।
इंडोनेशिया कोयला उत्पादन में तीसरे स्थान पर है और यह दुनिया के सबसे बड़े निर्यातकों में से एक है। इंडोनेशिया का बड़ा हिस्सा कोयला भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों को निर्यात किया जाता है, जिससे यह वैश्विक कोयला व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
शीर्ष तीन देशों के अलावा कई अन्य देश भी बड़े पैमाने पर कोयला उत्पादन करते हैं, जैसे:
इनमें से ऑस्ट्रेलिया उच्च गुणवत्ता वाले कोयले के निर्यात के लिए जाना जाता है, जबकि अमेरिका में स्वच्छ ऊर्जा की ओर झुकाव के कारण उत्पादन में गिरावट देखी गई है।
कोयला आज भी वैश्विक ऊर्जा व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है:
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