भारत की डिजिटल भुगतान क्रांति ने एक और ऐतिहासिक मुकाम हासिल कर लिया है। जनवरी 2026 में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के माध्यम से होने वाले लेन-देन ने संख्या और मूल्य—दोनों के लिहाज से अब तक का सर्वोच्च स्तर छू लिया। आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, केवल एक महीने में भारतीयों ने 21.7 अरब से अधिक UPI लेन-देन किए, जिनका कुल मूल्य ₹28.33 लाख करोड़ रहा। यह तेज़ बढ़ोतरी दर्शाती है कि UPI अब छोटे खुदरा भुगतान से लेकर बड़े मूल्य के लेन-देन तक, रोज़मर्रा के भुगतानों की रीढ़ बन चुका है और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भारत की वैश्विक नेतृत्वकारी स्थिति को और मजबूत करता है।
जनवरी 2026 में UPI लेन-देन का कुल मूल्य ₹28.33 लाख करोड़ तक पहुँच गया, जो दिसंबर 2025 के ₹27.97 लाख करोड़ से अधिक है। मूल्य के लिहाज से यह लगभग 21% की मासिक वृद्धि को दर्शाता है। वहीं, लेन-देन की संख्या 21.70 अरब तक पहुँच गई, जो उपयोगकर्ताओं और व्यवसायों दोनों के बीच UPI पर बढ़ते भरोसे और निर्भरता को दिखाती है। इन आँकड़ों का पैमाना यह स्पष्ट करता है कि UPI अब केवल एक भुगतान विकल्प नहीं रहा, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था में लेन-देन का डिफ़ॉल्ट माध्यम बन चुका है।
UPI की वृद्धि केवल मासिक आँकड़ों तक सीमित नहीं है। जनवरी में औसतन प्रतिदिन लगभग 70 करोड़ UPI लेन-देन हुए, जिनका दैनिक मूल्य करीब ₹91,403 करोड़ रहा। यह UPI की बेजोड़ गति, सुविधा और विश्वसनीयता को दर्शाता है, जो बिना किसी बाधा के अत्यधिक बड़े लेन-देन भार को संभालने में सक्षम है।
UPI के तेजी से विस्तार के पीछे कई प्रमुख कारण हैं। इनमें स्मार्टफोन की व्यापक पहुँच, व्यापारियों द्वारा UPI को बढ़ते स्तर पर अपनाना, उपयोगकर्ताओं के लिए शून्य लागत वाले लेन-देन और बैंकों व ऐप्स के साथ सहज एकीकरण शामिल हैं। डिजिटल इंडिया के तहत सरकार के निरंतर समर्थन, साथ ही QR-कोड आधारित भुगतान और आवर्ती भुगतान (रिकरिंग मेंडेट) जैसी उपयोगकर्ता-अनुकूल नवाचारों ने इसके प्रसार को और गति दी है। यह निरंतर वृद्धि व्यवहार में आए बदलाव को दर्शाती है, जहाँ छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी डिजिटल भुगतान रोज़मर्रा की आदत बनते जा रहे हैं।
UPI भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (Digital Public Infrastructure) का एक प्रमुख स्तंभ बनकर उभरा है, जिसने वित्तीय समावेशन और पारदर्शिता को मजबूती दी है। इससे नकद पर निर्भरता में कमी आई है, कर अनुपालन में सुधार हुआ है और छोटे व्यवसायों को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जुड़ने का अवसर मिला है। विशेषज्ञों के अनुसार, UPI की लगभग 28% की वार्षिक वृद्धि दर यह संकेत देती है कि यह केवल अस्थायी अपनाने की प्रवृत्ति नहीं, बल्कि दीर्घकालिक और टिकाऊ डिजिटल भुगतान प्रणाली के रूप में स्थापित हो चुका है।
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