सरकार द्वारा ₹17.2 लाख करोड़ का रिकॉर्ड उधार-इसका क्या मतलब है

केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026–27 (FY27) के लिए अब तक की सबसे अधिक ₹17.2 लाख करोड़ की उधारी योजना घोषित की है, जिसने बाजारों, अर्थशास्त्रियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वालों का ध्यान खींचा है। यह घोषणा GDP के 4.3% के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य के साथ की गई है, जो निरंतर लेकिन धीमे राजकोषीय समेकन का संकेत देती है। सरकार जहां विकास की जरूरतों और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन साधना चाहती है, वहीं इतनी बड़ी उधारी ऋण स्थिरता, ब्याज दरों और दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता पर अहम सवाल खड़े करती है। इस कदम को समझना प्रतियोगी परीक्षाओं और आर्थिक जागरूकता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

सरकार ने क्या घोषणा की है

  • सरकार ने FY27 में ₹17.2 लाख करोड़ की सकल बाजार उधारी का अनुमान रखा है, जो FY26 के ₹14.8 लाख करोड़ से अधिक है।
  • इसमें से ₹11.7 लाख करोड़ की शुद्ध बाजार उधारी दिनांकित सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) के माध्यम से होगी, जबकि शेष राशि लघु बचत और अन्य स्रोतों से जुटाई जाएगी।
  • FY26 में शुद्ध उधारी ₹12.5 लाख करोड़ बजट में रखी गई थी।
  • सरकार ने यह भी दोहराया कि FY26 का 4.4% राजकोषीय घाटा लक्ष्य पूरा किया जाएगा, जिससे घोषित लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्धता दिखती है।

राजकोषीय घाटा और उधारी को समझना

  • राजकोषीय घाटा तब होता है जब सरकार का कुल व्यय (उधार को छोड़कर) उसकी कुल प्राप्तियों से अधिक होता है।
  • इस अंतर को पाटने के लिए सरकार बाजार से उधार लेती है, मुख्यतः दिनांकित सरकारी प्रतिभूतियों के जरिए।
  • FY27 में राजकोषीय घाटा GDP का 4.3% रखा गया है, जो FY26 से केवल 0.1 प्रतिशत अंक कम है।
  • इससे स्पष्ट है कि समेकन जारी है, लेकिन उसकी गति धीमी है।
  • अधिक उधारी से अवसंरचना, कल्याण योजनाओं और विकास को वित्त मिलता है, लेकिन इससे सार्वजनिक ऋण और ब्याज दायित्व भी बढ़ते हैं।

बाजार और क्रेडिट रेटिंग का नजरिया

  • मूडीज़ रेटिंग्स के अनुसार, महामारी के बाद भारत ने राजकोषीय समेकन के प्रति स्पष्ट प्रतिबद्धता दिखाई है।
  • हालांकि, मूडीज़ ने यह भी कहा कि FY27 में सिर्फ 0.1% की कमी हाल के वर्षों में समेकन की सबसे धीमी गति है।
  • एजेंसी ने यह भी रेखांकित किया कि घाटा सरकार के पहले कार्यकाल के स्तरों की तुलना में अब भी अधिक है।
  • ऐसे आकलन महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि क्रेडिट रेटिंग विदेशी निवेश, उधारी लागत और वैश्विक भरोसे को प्रभावित करती है।

समेकन के बावजूद उधारी इतनी अधिक क्यों है

  • कम राजकोषीय घाटे के बावजूद रिकॉर्ड उधारी के पीछे कई कारण हैं।
  • भारत अवसंरचना, रक्षा, सामाजिक कल्याण और पूंजीगत व्यय में भारी निवेश जारी रखे हुए है ताकि विकास बना रहे।
  • बढ़ते ब्याज भुगतान और सब्सिडी प्रतिबद्धताएं भी वित्त पर दबाव डालती हैं।
  • वैश्विक अनिश्चितता के बीच आर्थिक गति बनाए रखने के लिए उच्च सार्वजनिक खर्च आवश्यक माना जा रहा है।
  • सरकार की रणनीति तीव्र कटौती के बजाय विकासोन्मुख खर्च और क्रमिक राजकोषीय अनुशासन के संतुलन पर आधारित है, ताकि अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी न पड़े।
[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]
vikash

Recent Posts

कार्यस्थल पर सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए विश्व दिवस 2026

कार्यस्थल पर सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए विश्व दिवस 2026 हर साल 28 अप्रैल को…

12 minutes ago

जानें कौन हैं Sanjay Jamuar, जिन्हें बनाया गया दिल्ली मेट्रो इंटरनेशनल का पहला CEO

संजय जमुआर (Sanjay Jamuar) को दिल्ली मेट्रो इंटरनेशनल लिमिटेड (डीएमआईएल) का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी…

16 hours ago

नवजात शिशुओं के लिए पहली बार Malaria की खास दवा को मिली मंजूरी

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने बच्चों में मलेरिया के मामले और इससे मौत के जोखिमों…

16 hours ago

फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों का बड़ा ऐलान, मैं राजनीति छोड़ दूंगा; जानें वजह

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा है कि वे साल 2027 में अपना दूसरा…

16 hours ago

आंध्र प्रदेश ने ₹13,000 करोड़ का विशाल मशरूम मिशन शुरू किया

आंध्र प्रदेश राज्य सरकार ने लगभग ₹13,000 करोड़ के निवेश के साथ पहले 'मशरूम मिशन'…

16 hours ago

केन्‍या के Sebastian Sawe ने 2 घंटे के अंदर पूरी की मैरानथन, बनाया वर्ल्‍ड रिकॉर्ड

केन्‍या के सेबास्टियन सावे (Sebastian Sawe) ने लंदन मैराथन में इतिहास रच दिया। सावे दुनिया…

17 hours ago