भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों के प्रसिद्ध नारे

भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई को प्रेरणादायक नारों ने बल दिया, जिन्होंने राष्ट्रवाद की भावना को जगाया और लाखों लोगों को ब्रिटिश शासन के खिलाफ एकजुट किया। साहसी नेताओं और क्रांतिकारियों द्वारा रचे गए ये नारे विरोध और आशा की सशक्त आवाज़ बन गए। उन्होंने लोगों को स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के लिए प्रेरित किया और आज भी हमें उन वीरों की बहादुरी और बलिदान की याद दिलाते हैं, जिन्होंने राष्ट्र के लिए संघर्ष किया।

भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों के प्रसिद्ध नारे

भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा दिए गए प्रसिद्ध नारों ने देश की आज़ादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भगत सिंह, महात्मा गांधी और सुभाष चंद्र बोस जैसे नेताओं द्वारा गढ़े गए ये सशक्त शब्द लाखों लोगों को ब्रिटिश शासन का विरोध करने के लिए प्रेरित करते थे। “इंकलाब ज़िंदाबाद”, “सुराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है” और “करो या मरो” जैसे नारे आंदोलन के दौरान गूंजते रहे, लोगों को स्वतंत्रता की राह पर एकजुट किया और भारत के इतिहास पर अमिट छाप छोड़ गए।

नारा स्वतंत्रता सेनानी
“वन्दे मातरम्” बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय
“जय हिन्द” नेताजी सुभाष चन्द्र बोस
“इंकलाब ज़िंदाबाद” मौलाना हसरत मोहानी
“सत्यमेव जयते” पंडित मदन मोहन मालवीय
“करो या मरो” महात्मा गांधी
“सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है” राम प्रसाद बिस्मिल
“स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, और मैं इसे लेकर रहूँगा” बाल गंगाधर तिलक
“पूर्ण स्वराज” जवाहरलाल नेहरू
“भारत छोड़ो” महात्मा गांधी
“दिल्ली चलो” सुभाष चन्द्र बोस
“मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा” सुभाष चन्द्र बोस
“क्विट इंडिया” (भारत छोड़ो) महात्मा गांधी
“जय जवान, जय किसान” लाल बहादुर शास्त्री
“आराम हराम है” जवाहरलाल नेहरू
“दुश्मन की गोलियों का हम सामना करेंगे, आज़ाद ही रहे हैं, आज़ाद ही रहेंगे” चंद्रशेखर आज़ाद

भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा दिए गए प्रसिद्ध नारे (संक्षेप में):

इंकलाब ज़िंदाबाद – शहीद भगत सिंह

अर्थ “क्रांति ज़िंदाबाद” है। यह नारा मौलाना हसरत मोहानी ने दिया था, जिसे भगत सिंह ने 1929 में दिल्ली की केंद्रीय असेंबली बम कांड के दौरान लोकप्रिय बनाया।

जय हिन्द – नेताजी सुभाष चन्द्र बोस

ज़ैन-उल-अबिदीन हसन द्वारा गढ़ा गया यह नारा, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान एकता और देशभक्ति को प्रेरित करने के लिए अपनाया।

तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा – नेताजी सुभाष चन्द्र बोस

नेताजी ने आज़ाद हिंद फ़ौज का नेतृत्व करते हुए लोगों से स्वतंत्रता संग्राम में शामिल होने और बलिदान देने का आह्वान किया।

सत्यमेव जयते – पंडित मदन मोहन मालवीय

अर्थ “सत्य की ही विजय होती है”। यह नारा हिंदू धर्मग्रंथ मुण्डक उपनिषद से लिया गया और 1950 में भारत का राष्ट्रीय आदर्श वाक्य बना।

सरफ़रोशी की तमन्ना – राम प्रसाद बिस्मिल

बिस्मिल अज़ीमाबादी की कविता से प्रेरित यह नारा राम प्रसाद बिस्मिल ने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई के आह्वान के रूप में दिया।

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दुस्तान हमारा – मुहम्मद इक़बाल

1904 में मुहम्मद इक़बाल द्वारा लिखित “तराना-ए-हिन्द” में दिया गया यह नारा भारत को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ देश बताता है।

आराम हराम है – जवाहरलाल नेहरू

भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने यह नारा निरंतर संघर्ष और ब्रिटिश उपनिवेशवाद के खिलाफ सक्रियता के लिए दिया।

जय जवान, जय किसान – लाल बहादुर शास्त्री

1965 में प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री द्वारा दिया गया यह नारा देश की शक्ति में सैनिकों और किसानों के महत्व को रेखांकित करता है।

साइमन गो बैक – लाला लाजपत राय

1928 में साइमन कमीशन के विरोध के दौरान यह नारा ब्रिटिश नीतियों के खिलाफ जनाक्रोश का प्रतीक बना।

स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, और मैं इसे लेकर रहूँगा – बाल गंगाधर तिलक

बाल गंगाधर तिलक ने स्वराज को अपना जन्मसिद्ध अधिकार बताते हुए भारतीयों को पूर्ण स्वतंत्रता की मांग के लिए प्रेरित किया।

वन्दे मातरम् – बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय

1870 में लिखी गई बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय की यह कविता स्वतंत्रता आंदोलन का शक्तिशाली नारा बनी, जो मातृभूमि के प्रति समर्पण का प्रतीक है।

दिल्ली चलो – नेताजी सुभाष चन्द्र बोस

1944 में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने भारतीय राष्ट्रीय सेना को ब्रिटिश शासन से देश को मुक्त कराने के लिए दिल्ली की ओर बढ़ने का आह्वान किया।

करो या मरो – महात्मा गांधी

1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान गांधीजी ने यह नारा देकर किसी भी कीमत पर स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा दी।

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vikash

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