सर क्रीक विवाद: भारत और पाकिस्तान के बीच रणनीतिक टकराव का बिंदु

भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चला आ रहा सर क्रीक विवाद हाल ही में फिर चर्चा में आया है, जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने क्षेत्र में किसी भी शत्रुतापूर्ण कार्रवाई के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी और “गूंजती और निर्णायक प्रतिक्रिया” की बात कही, जो “इतिहास और भूगोल” को बदल सकती है। कश्मीर और सियाचिन जैसे बड़े मुद्दों के बावजूद, यह विवाद रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बना हुआ है।

सर क्रीक क्या है?

  • स्थान: रन्न ऑफ कच्छ, गुजरात (भारत) और सिंध (पाकिस्तान) के बीच

  • लंबाई: 96 किलोमीटर

  • प्रवाह: अरब सागर में

  • महत्व: यह दोनों देशों के बीच समुद्री सीमा का अंतिम बिंदु है

महत्व के क्षेत्र:

  • सुरक्षा और सैन्य पहुँच

  • तटीय समुदायों के मछली पकड़ने के अधिकार

  • तेल और गैस खोज की संभावना

  • अरब सागर में विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) का निर्धारण

विवाद का स्वरूप

विवाद का मूल 1914 की बॉम्बे सरकार के प्रस्ताव (Bombay Government Resolution) की अलग-अलग व्याख्याओं में निहित है, जिसे ब्रिटिश शासन के तहत सिंध और कच्छ के शासक ने हस्ताक्षरित किया था।

प्रतिस्पर्धी दावे:

  • पाकिस्तान का दृष्टिकोण: सीमा पूर्वी किनारे के अनुसार होनी चाहिए, जिससे क्रीक पाकिस्तान को मिले।

  • भारत का दृष्टिकोण: सीमा थालवेग (Thalweg) सिद्धांत – यानी नौगम्य जलधारा के मध्य मार्ग के अनुसार – होनी चाहिए, जिससे भारत को अधिक क्षेत्र मिल सके।

    • पाकिस्तान का दावा है कि सर क्रीक नौगम्य नहीं है, इसलिए थालवेग नियम लागू नहीं होता।

    • भारत का कहना है कि यह उच्च ज्वार पर नौगम्य है, जो अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत EEZ दावे को सही ठहराता है।

रणनीतिक और कूटनीतिक महत्व

  1. सैन्य तनाव

    • अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास होने के कारण क्षेत्र संवेदनशील है। किसी भी घुसपैठ या उकसावे से तनाव तेज़ हो सकता है।

    • भारतीय नौसेना और तटरक्षक क्षेत्र की गश्त करते हैं, जबकि पाकिस्तानी बल दूसरी ओर मौजूद हैं।

  2. EEZ और संसाधन दावे

    • सर क्रीक पर नियंत्रण समुद्री दावों को प्रभावित करता है।

    • EEZ (200 समुद्री मील) तेल, गैस और मछली संसाधनों के लिए महत्वपूर्ण है।

    • व्याख्या में अंतर हजारों वर्ग किलोमीटर समुद्री क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है।

  3. कूटनीतिक स्थिति

    • विवाद को संयुक्त संवाद और ट्रैक-II कूटनीति में उठाया गया, लेकिन आपसी अविश्वास और रणनीतिक गणनाओं के कारण यह अनसुलझा रहा।

नवीनतम विकास

अक्टूबर 2025 में, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सर क्रीक के पास किसी भी पाकिस्तानी आक्रमण का जवाब निर्णायक रूप से दिया जाएगा।

  • यह भारत की सुरक्षा स्थिति को मजबूत करने का संकेत है

  • पाकिस्तान की बढ़ती समुद्री गतिविधि या सैनिक मूवमेंट पर प्रतिक्रिया हो सकती है

  • मछली पकड़ने से जुड़े घुसपैठ और क्षेत्रीय अतिक्रमण को रोकने का प्रयास

इस चेतावनी ने सर क्रीक को क्षेत्रीय सुरक्षा के संवेदनशील क्षेत्रों की सूची में जोड़ दिया है।

मुख्य तथ्य

  • सर क्रीक लंबाई: 96 किलोमीटर, रन्न ऑफ कच्छ में

  • भारत का दावा: थालवेग (मध्य जलधारा) सिद्धांत

  • पाकिस्तान का दावा: पूर्वी किनारा सीमा

  • कानूनी मूल: 1914 बॉम्बे सरकार का प्रस्ताव

  • हालिया अपडेट: अक्टूबर 2025 में राजनाथ सिंह की चेतावनी

  • रणनीतिक महत्व: EEZ, संसाधन पहुँच, सैन्य सुरक्षा

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vikash

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