तमिलनाडु राज्य की ऋतिका श्री भारत की पहली ट्रांसजेंडर क्रिकेट अंपायर बन गई हैं। यह ऐतिहासिक उपलब्धि तमिलनाडु क्रिकेट एसोसिएशन द्वारा अपने ‘स्टेट पैनल अंपायर’ परीक्षा आवेदन में ‘अन्य’ (Other) श्रेणी शुरू किए जाने के बाद हासिल हुई है। यह कदम क्रिकेट के क्षेत्र में लैंगिक प्रतिनिधित्व में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है, और साथ ही यह पेशेवर खेलों में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए बढ़ती स्वीकार्यता और अवसरों को भी उजागर करता है।
अंपायर के आवेदनों में ‘तीसरे लिंग’ (थर्ड जेंडर) का विकल्प शामिल करना भले ही एक छोटी-सी बात लगे, लेकिन यह समानता और पहचान की दिशा में एक बड़ा कदम है।
यह क्यों ज़रूरी है
यह पॉलिसी बदलाव श्री की लगन और खेल के प्रति उनके डेडिकेशन की वजह से हुआ।
उनका जन्म सेलम में आर. मुथुराज के रूप में हुआ था; उनका सफ़र उनके दृढ़ संकल्प और जुझारूपन को दर्शाता है।
शुरुआती जीवन और प्रेरणा
उन्होंने वर्ष 2021 में अंपायरिंग का सफ़र शुरू किया और सेलम तथा कोयंबटूर सर्किट में मैचों में अंपायरिंग करना शुरू किया।
भारत ने 2014 में सुप्रीम कोर्ट के एक ऐतिहासिक फ़ैसले के बाद ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को कानूनी तौर पर ‘तीसरे लिंग’ के रूप में मान्यता दी।
तब से, शिक्षा, रोज़गार और खेल जैसे विभिन्न क्षेत्रों में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को शामिल करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
हालाँकि, ज़मीनी स्तर पर इन प्रयासों को लागू करने की गति काफ़ी धीमी रही है, और इसी वजह से ‘श्री’ की उपलब्धि और भी ज़्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है।
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