भारतीय सेना का बड़ा कदम: 11 देशों के साथ ‘प्रगति’ सैन्य अभ्यास

भारतीय सेना ‘अभ्यास प्रगति’ (Exercise PRAGATI) के पहले संस्करण के लिए 11 मित्र देशों के सैन्य प्रतिनिधिमंडलों की मेज़बानी करने के लिए तैयार है। यह अभ्यास मेघालय के उमरोई स्थित ‘विदेशी प्रशिक्षण केंद्र’ (Foreign Training Node) में आयोजित किया जाएगा। यह आयोजन, भाग लेने वाले देशों के बीच सैन्य सहयोग, आपसी तालमेल और आपसी विश्वास को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह कदम हिंद महासागर क्षेत्र में सामूहिक सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देने में देश की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है।

अभ्यास ‘प्रगति’ क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?

अभ्यास ‘प्रगति’ (PRAGATI) का पूरा नाम ‘हिंद महासागर क्षेत्र में विकास और परिवर्तन के लिए क्षेत्रीय सेनाओं की साझेदारी’ (Partnership of Regional Armies for Growth and Transformation in the Indian Ocean Region) है। यह भारत के उस रणनीतिक दृष्टिकोण को प्रदर्शित करता है, जिसका उद्देश्य मज़बूत रक्षा साझेदारियाँ बनाना और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करना है।

इस अभ्यास के मुख्य उद्देश्य

  • साझेदार देशों के बीच रक्षा सहयोग को मज़बूत करना।
  • देशों की सशस्त्र सेनाओं के बीच आपसी तालमेल (interoperability) को बढ़ाना।
  • साथ ही, आपसी विश्वास और समन्वय स्थापित करना।
  • और हिंद महासागर क्षेत्र में सामूहिक सुरक्षा को बढ़ावा देना।

भागीदार राष्ट्र और क्षेत्रीय पहुँच

भारतीय सेना ने 15 देशों को निमंत्रण भेजे थे, जिनमें शामिल हैं:

  • बांग्लादेश, भूटान, कंबोडिया, इंडोनेशिया
  • लाओस, मलेशिया, मालदीव, म्यांमार
  • नेपाल, फिलीपींस, सेशेल्स, सिंगापुर
  • श्रीलंका, थाईलैंड, वियतनाम

इनमें से कुल 11 देश इस पहले संस्करण में भाग ले रहे हैं, और यह दर्शाता है कि क्षेत्रीय रुचि और सहयोग कितना मज़बूत है।

कई देशों की यह व्यापक भागीदारी आसियान (ASEAN) देशों और पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को और गहरा करने के भारत के प्रयासों को उजागर करती है।

उमरोई, मेघालय क्यों महत्वपूर्ण है?

यह अभ्यास उमरोई स्थित ‘फॉरेन ट्रेनिंग नोड’ में आयोजित किया जाएगा, जो पूर्वोत्तर भारत का एक प्रमुख सैन्य प्रशिक्षण केंद्र है।

सामरिक महत्व

  • यह पूर्वोत्तर क्षेत्र में भारत की सैन्य उपस्थिति को सुदृढ़ करेगा।
  • साथ ही, यह पड़ोसी देशों के साथ संपर्क और जुड़ाव को भी बढ़ावा देगा।
  • और यह संयुक्त प्रशिक्षण तथा ज्ञान साझा करने के लिए एक मंच के रूप में कार्य करेगा।

स्थान का चयन भारत के इस उद्देश्य को भी दर्शाता है कि वह पूर्वोत्तर को वैश्विक रणनीतिक ढांचों में एकीकृत करे।

क्षेत्रीय सुरक्षा में भारत की बढ़ती भूमिका

‘प्रगति’ (PRAGATI) जैसी पहलों के माध्यम से, भारत खुद को हिंद-प्रशांत सुरक्षा ढांचे में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित कर रहा है।

व्यापक रणनीतिक लक्ष्य

  • यह मित्र देशों के साथ संबंधों को मज़बूत करेगा।
  • साथ ही, उभरती हुई सुरक्षा चुनौतियों का मुकाबला करेगा।
  • और यह समुद्री क्षेत्रों में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देगा।
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vikash

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