FILE PHOTO: A man walks past the Reserve Bank of India (RBI) logo outside its headquarters in Mumbai, India, June 6, 2025. REUTERS/Francis Mascarenhas/File Photo
भारत के एक्सटर्नल सेक्टर में 2025 में सुधार दिखा है। रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने बताया है कि अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) में काफ़ी कमी आई है। करंट अकाउंट डेफिसिट 30.1 बिलियन डॉलर रहा। यह CAD GDP का 1% है और इसकी तुलना पिछले साल इसी समय के 36.6 बिलियन डॉलर से की जा सकती है। भारत के बैलेंस ऑफ़ पेमेंट्स पर RBI की लेटेस्ट रिपोर्ट में बढ़ते FDI इनफ्लो और सर्विसेज़ एक्सपोर्ट ग्रोथ और फॉरेन एक्सचेंज रिज़र्व में बदलाव पर रोशनी डाली गई है।
अप्रैल–दिसंबर 2025 के दौरान विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) में 4.3 अरब डॉलर की शुद्ध निकासी दर्ज की गई। पिछले वर्ष इसी अवधि में 9.4 अरब डॉलर का शुद्ध निवेश प्रवाह हुआ था। एफपीआई में शेयरों और बॉन्ड में किए जाने वाले निवेश शामिल होते हैं, जो आमतौर पर अल्पकालिक और अधिक अस्थिर होते हैं। यह निकासी वैश्विक वित्तीय अनिश्चितताओं से जुड़ी हो सकती है। हालांकि एफपीआई में निकासी के बावजूद भारत की समग्र बाहरी स्थिरता संतुलित बनी रही। एफपीआई रुझान दर्शाते हैं कि अल्पकालिक पूंजी प्रवाह, स्थिर एफडीआई प्रवाह की तुलना में अधिक उतार-चढ़ाव वाले होते हैं।
2025 में भुगतान संतुलन (Balance of Payments) आधार पर विदेशी मुद्रा भंडार में 30.8 अरब डॉलर की कमी आई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 13.8 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई थी। यह कमी पूंजी निकासी या भारतीय रिज़र्व बैंक के हस्तक्षेप का संकेत हो सकती है। विदेशी मुद्रा भंडार मुद्रा को स्थिर रखने और बाहरी झटकों से निपटने में सहायक होता है। कमी के बावजूद भारत के पास पर्याप्त भंडार स्तर बना हुआ है।
Reserve Bank of India (RBI) की रिपोर्ट के अनुसार सेवा निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। विशेष रूप से कंप्यूटर सेवाओं और अन्य व्यावसायिक सेवाओं में मजबूत प्रदर्शन देखने को मिला। सेवा निर्यात, वस्तुओं के व्यापार घाटे की भरपाई में मदद करता है और चालू खाता घाटे (CAD) को कम करने में सहायक होता है। यह जानकारी RBI की 2025-26 की तीसरी तिमाही (Q3) की भुगतान संतुलन रिपोर्ट का हिस्सा है। सेवा क्षेत्र का बढ़ता योगदान भारत के बाहरी क्षेत्र की प्रमुख ताकत बना हुआ है।
चालू खाता घाटा (Current Account Deficit – CAD) तब होता है जब किसी देश का कुल आयात (वस्तुएं, सेवाएं और अंतरण) उसके निर्यात से अधिक हो जाता है। यह दर्शाता है कि देश विश्व से जितनी कमाई करता है, उससे अधिक खर्च विदेशों में कर रहा है। CAD को जीडीपी के प्रतिशत के रूप में व्यक्त किया जाता है, ताकि उसकी स्थिरता को मापा जा सके। मध्यम स्तर का CAD प्रबंधनीय होता है, लेकिन अत्यधिक घाटा मुद्रा पर दबाव और बाहरी उधारी बढ़ा सकता है। भारतीय रिज़र्व बैंक नियमित रूप से भुगतान संतुलन ढांचे के तहत CAD की निगरानी करता है।
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