प्रसिद्ध मृत्तिका कला (Ceramic art) आर्टिस्ट, ज्योत्सना भट्ट का निधन। उनका जन्म 1940 में कच्छ में हुआ था और बाद में वह जे. जे. स्कूल ऑफ आर्ट्स ज्वाइन करने के लिए मुंबई शिफ्ट हो गई थी। वह एक भारतीय सेरेमनी और कुम्हार थी। भारत में समकालीन मृत्तिका कला के क्षेत्र में उनका अहम योगदान है।
ज्योत्सना ने बड़ौदा के महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय में अध्ययन किया और बाद में चालीस वर्षों तक छात्रों को पढ़ाया। सिरेमिक के अलावा, उन्होंने पत्थर के पात्र और टेराकोटा के साथ भी प्रयोग किया था। वह अक्सर क्षारीय अर्थ, अनाकार सांचों और विभिन्न खनिजों का उपयोग किया करती थी।



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