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प्रसिद्ध कला इतिहासकार पद्मश्री प्रो. बीएन गोस्वामी का निधन

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मशहूर कला इतिहासकार और लेखक बीएन गोस्वामी का चंडीगढ़ के स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (पीजीआईएमईआर) में निधन हो गया। उनकी आयु 90 वर्ष थी। उनके निधन से देश-विदेश के कलाप्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गई। फेफड़ों में संक्रमण की वजह से उन्हें सांस लेने में दिक्कत थी।

कला इतिहासकार के रूप में उल्लेखनीय कार्य के लिए उन्हें भारत सरकार की ओर से पद्मश्री और पद्मभूषण जैसे श्रेष्ठ राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था। पंजाब के राज्यपाल और यूटी के प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित ने उनके निधन पर गहरा शोक जताते हुए कहा कि कला समीक्षक और इतिहासकार के रूप में प्रो. गोस्वामी ऐसी विरासत छोड़ गए हैं जो आने वाली पीढि़यों के लिए प्रेरणा का काम करती रहेगी।

प्रो. बीएन गोस्वामी के बारे में

प्रो. बीएन गोस्वामी का जन्म 15 अगस्त 1933 को ब्रिटिश भारत के पंजाब प्रांत (वर्तमान में पाकिस्तान में) के सरगोधा में जिला एवं सत्र न्यायाधीश रहे बीएल गोस्वामी के घर हुआ था। प्रांत के विभिन्न स्कूलों में प्रारंभिक स्कूली शिक्षा के बाद उन्होंने अपनी इंटरमीडिएट की पढ़ाई हिंदू कॉलेज अमृतसर से की और 1954 में पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ से मास्टर डिग्री हासिल की। वह 1956 में भारतीय प्रशासनिक सेवा में शामिल हुए और बिहार कैडर में काम करने के बाद दो साल के लिए उन्होंने कला में अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए 1958 में सेवा से इस्तीफा दे दिया।

वह पंजाब यूनिवर्सिटी लौट आए और 1961 में डॉक्टरेट की डिग्री (पीएचडी) प्राप्त करने के लिए प्रसिद्ध इतिहासकार हरि राम गुप्ता के मार्गदर्शन में निचले हिमालय की कांगड़ा चित्रकला और इसकी सामाजिक पृष्ठभूमि पर शोध किया। उनके परीक्षक आर्थर लेवेलिन बाशम, इंडोलॉजिस्ट और कला समीक्षक, डब्ल्यूजी आर्चर थे।

अपने शोध के दौरान, वह कला इतिहास संकाय के सदस्य के रूप में पंजाब यूनिवर्सिटी में शामिल हो गए, जहां उन्होंने अपना पूरा कॅरिअर बिताया और अंततः एक प्रोफेसर के रूप में सेवानिवृत्त हुए। वहां काम करते हुए उन्होंने एक ब्रेक लिया और 1973 से 1981 तक हीडलबर्ग विश्वविद्यालय के दक्षिण एशियाई संस्थान में विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में काम किया। उन्होंने कैलिफोर्निया, बर्कले, पेंसिल्वेनिया और ज्यूरिख जैसे कई अन्य अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों में विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में भी काम किया।

पीयू में उन्होंने इसके निदेशक के रूप में ललित कला संग्रहालय विकसित किया। अपने शैक्षणिक कॅरियर के अलावा उन्होंने सेंटर फॉर कल्चरल रिसोर्सेज एंड ट्रेनिंग (सीसीआरटी) के उपाध्यक्ष के रूप में कार्य किया, जो भारत सरकार के तहत एक नोडल एजेंसी है। वह भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद (आईसीएचआर) की गवर्निंग कमेटी के सदस्य भी रहे और चंडीगढ़ ललित कला अकादमी की अध्यक्षता कर चुके हैं। गोस्वामी का विवाह कला इतिहासकार, शिक्षाविद और पंजाब यूनिवर्सिटी की पूर्व प्रोफेसर करुणा से हुआ था।

 

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FAQs

इतिहास कितने प्रकार के होते हैं?

इतिहास तीन प्रकार के होते है । प्राचीन काल का इतिहास, मध्य काल का इतिहास, वर्तमान काल का इतिहास।