भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 29 सितंबर 2025 को एक महत्वपूर्ण सुधार पैकेज की घोषणा की है, जिसके तहत अब बैंक उन कंपनियों को भी कार्यशील पूंजी ऋण (Working Capital Loan) दे सकेंगे, जो अपने उत्पादन में सोना या चांदी को कच्चे माल के रूप में उपयोग करती हैं। यह सुविधा पहले केवल ज्वैलर्स तक सीमित थी। नए नियम 1 अक्टूबर 2025 से लागू होंगे।
मुख्य नीति परिवर्तन: सोने के विरुद्ध कार्यशील पूंजी ऋण
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अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक (SCBs) और शहरी सहकारी बैंक (UCBs) (टियर 3 और 4) अब निर्माण और औद्योगिक इकाइयों को ऋण दे सकेंगे।
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ये ऋण सोना या चांदी के विरुद्ध होंगे, जिसे कच्चे माल के रूप में उत्पादन में उपयोग किया जाएगा।
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बैंकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि:
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उधारकर्ता सोने को निवेश या सट्टेबाज़ी के लिए न खरीदें।
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वित्तपोषण केवल औद्योगिक या विनिर्माण गतिविधि से जुड़ा हो।
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ब्याज दर नियमों में लचीलापन
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पहले सभी फ्लोटिंग रेट खुदरा और MSME ऋणों को बाहरी बेंचमार्क से जोड़ा जाता था।
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अब बैंक स्प्रेड के नॉन-क्रेडिट रिस्क घटकों को 3 साल से पहले भी संशोधित कर सकेंगे।
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साथ ही, उधारकर्ताओं को रीसेट के समय फ्लोटिंग से फिक्स्ड ब्याज दर चुनने का विकल्प मिलेगा।
इससे ऋण चुकाने में अधिक लचीलापन और राहत मिलेगी।
बैंकों की पूंजी जुटाने की क्षमता में बढ़ोतरी
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आरबीआई ने Perpetual Debt Instruments (PDI) और विदेशी मुद्रा/रुपये-मूल्यवर्गीय बॉन्ड से जुड़े नियमों में ढील दी है।
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इन साधनों की सीमा (limit) बढ़ा दी गई है, जिससे बैंक अंतरराष्ट्रीय बाज़ार से अधिक Tier 1 पूंजी जुटा सकेंगे।
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इसका सीधा असर तरलता (liquidity) में सुधार और ऋण विस्तार पर होगा।
प्रभावी तिथि
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सभी नए प्रावधान (सोने पर ऋण, ब्याज दर लचीलापन और पूंजी साधन) 1 अक्टूबर 2025 से लागू होंगे।
महत्व
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औद्योगिक वित्तपोषण को बढ़ावा।
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उधारकर्ताओं के हितों की रक्षा।
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बैंकिंग क्षेत्र की मज़बूती और लचीलापन।


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