पुडुचेरी सरकार ने 2025 में अवैध निर्माणों और भवन योजना उल्लंघनों से निपटने के लिए एकमुश्त नियमितीकरण योजना (OTRS) शुरू की है। इस योजना का उद्देश्य कानूनी राहत प्रदान करना और शहरी नियोजन के मानकों का पालन सुनिश्चित करना है। यह योजना उन भवनों पर लागू होती है जो 1 मई 1987 से 16 जुलाई 2025 के बीच निर्मित हुए हैं।
पृष्ठभूमि
पिछले कई वर्षों में पुडुचेरी में अनेक निर्माण बिना उचित स्वीकृति के या स्वीकृत योजनाओं से भटक कर किए गए हैं। इससे बिजली, पानी, सीवेज जैसी बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता में समस्याएँ आईं और संपत्ति पंजीकरण में भी कठिनाइयाँ हुईं। इन जटिलताओं को हल करने और प्रशासनिक बोझ को कम करने के लिए सरकार ने OTRS की शुरुआत की है।
उद्देश्य
इस योजना का मुख्य उद्देश्य मौजूदा बिना अनुमति या मानकों से भटके हुए निर्माणों को नियमित करना है, नियोजन मानदंडों का अनुपालन सुनिश्चित करना, और ध्वस्तीकरण, सीलिंग या सार्वजनिक सेवाओं से वंचित किए जाने जैसी कार्यवाहियों से बचाना है। साथ ही, डिजिटल आवेदन प्रक्रिया के माध्यम से पारदर्शिता लाना भी इसका उद्देश्य है।
प्रमुख विशेषताएँ
लागू क्षेत्र: पुडुचेरी के सभी क्षेत्रों में 1 मई 1987 से 16 जुलाई 2025 के बीच निर्मित भवनों पर लागू।
आवेदन प्रक्रिया: केवल ऑनलाइन बिल्डिंग परमिशन सिस्टम (OBPS) के माध्यम से, जिसे NIC ने विकसित किया है।
शुल्क विवरण
आवेदन शुल्क: ₹5,000 (आवासीय), ₹10,000 (अन्य)।
जांच शुल्क: ₹20 प्रति वर्ग मीटर (आवासीय), ₹50 प्रति वर्ग मीटर (गैर-आवासीय)।
नियमितीकरण शुल्क:
₹500/वर्ग मीटर (आवासीय),
₹750/वर्ग मीटर (मिश्रित उपयोग/विशेष भवन),
₹1,000/वर्ग मीटर (मल्टी-स्टोरी इमारतें)।
छूट: सरकारी भवनों को छूट दी गई है; सहायता प्राप्त स्कूलों से केवल 50% शुल्क लिया जाएगा।
अपवाद
यह योजना उन संपत्तियों पर लागू नहीं होगी जिनके पास स्वामित्व दस्तावेज़ नहीं हैं, जो सरकारी भूमि पर अतिक्रमण में हैं, या जो सार्वजनिक विकास परियोजनाओं के लिए आरक्षित भूखंडों पर स्थित हैं।
महत्व
यह योजना शहरी प्रशासन को अधिक सुव्यवस्थित बनाएगी, अवैध निर्माणों में कमी लाएगी और नियोजन मानकों के अनुपालन को बढ़ाएगी। इससे संपत्ति मालिकों को राहत मिलेगी और बेहतर बुनियादी ढांचा प्रबंधन सुनिश्चित होगा।
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