तमिलनाडु सरकार ने कोयंबटूर स्थित अनामलाई टाइगर रिज़र्व (ATR) में गुजार संरक्षण हेतु उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence for Hornbill Conservation) की स्थापना को मंजूरी दी है। यह निर्णय प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं प्रधान वन्यजीव प्रतिपालक के प्रस्ताव के बाद लिया गया है। यह पहल लुप्तप्राय प्रजाति संरक्षण निधि (Endangered Species Conservation Corpus Fund) से ₹1 करोड़ की राशि द्वारा वित्तपोषित होगी। इसका उद्देश्य पश्चिमी घाट जैसे जैव विविधता से समृद्ध क्षेत्र में पाए जाने वाले चार प्रजातियों के गुजार पक्षियों की रक्षा करना है।
पृष्ठभूमि
पश्चिमी घाट में चार प्रमुख गुजार प्रजातियाँ पाई जाती हैं—ग्रेट हॉर्नबिल, मलाबार ग्रे हॉर्नबिल, मलाबार पाइड हॉर्नबिल और इंडियन ग्रे हॉर्नबिल। ये पक्षी बीज फैलाने वाले (seed dispersers) के रूप में महत्वपूर्ण पारिस्थितिकीय भूमिका निभाते हैं और उष्णकटिबंधीय वन पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने में सहायक होते हैं। हालांकि, आवास विनाश, वनों की कटाई और जलवायु परिवर्तन के कारण ये प्रजातियाँ संकट में हैं। प्रस्तावित संरक्षण केंद्र का उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान और आवास प्रबंधन के माध्यम से इन चुनौतियों का समाधान करना है।
केंद्र के उद्देश्य
यह संरक्षण केंद्र निम्नलिखित प्रमुख कार्य करेगा:
डिस्टेंस सैंपलिंग और GPS टेलीमेट्री के माध्यम से गुजार पक्षियों की आबादी की निगरानी
घोंसले बनाने और भोजन जुटाने की पारिस्थितिकी का अध्ययन कर वनों के पुनर्स्थापन में मार्गदर्शन
भोजन और घोंसले वाले पेड़ों का मानचित्रण कर प्राथमिकता वाले संरक्षण क्षेत्र की पहचान
स्थानीय समुदायों को गुजार संरक्षण में शामिल करना
क्षतिग्रस्त क्षेत्रों में प्रजनन को बढ़ावा देने हेतु कृत्रिम घोंसला पेटियों की स्थापना
पहल की प्रमुख विशेषताएँ
नर्सरी विकास: फाइकस और साइजिजियम जैसी देशज वृक्ष प्रजातियों की एक नर्सरी विकसित की जाएगी, जो वनों के पुनरुत्थान में सहायता करेगी।
घोंसला गोद लेने का कार्यक्रम: स्थानीय समुदायों को गुजार पक्षियों के घोंसलों को गोद लेने और संरक्षण के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे आजीविका को संरक्षण से जोड़ा जा सकेगा।
सिटीजन साइंस ऐप: यह ऐप GBIF और eBird जैसे वैश्विक प्लेटफार्मों से जुड़ा होगा, और आम लोगों को गुजार निगरानी में भाग लेने के लिए प्रेरित करेगा।
शैक्षणिक सहायता: गुजार पारिस्थितिकी पर शोध करने वाले छात्रों को छात्रवृत्तियाँ प्रदान की जाएँगी।
सहयोग: यह केंद्र नेचर कंज़र्वेशन फाउंडेशन, सलीम अली पक्षीविज्ञान और प्राकृतिक इतिहास केंद्र तथा IUCN हॉर्नबिल विशेषज्ञ समूह जैसे संगठनों के साथ मिलकर वैज्ञानिक शोध को आगे बढ़ाएगा।
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