भारत के प्रधानमंत्री ने नवंबर 2025 में भूटान की राजकीय यात्रा की, जो भारत–भूटान संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई। इस यात्रा के दौरान कई प्रमुख उद्घाटन, महत्वपूर्ण घोषणाएँ तथा समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए, जिनका उद्देश्य ऊर्जा, स्वास्थ्य, संस्कृति और सीमा प्रबंधन के क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को और मज़बूत करना है। यह यात्रा दोनों देशों के बीच रणनीतिक और विकासात्मक साझेदारी की गहराई को दर्शाती है।
प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान 1020 मेगावॉट क्षमता वाली पुनात्सांगछू-II जलविद्युत परियोजना का उद्घाटन किया गया। भारत–भूटान के द्विपक्षीय सहयोग से विकसित यह परियोजना निम्नलिखित उद्देश्यों को पूरा करेगी —
भूटान की बिजली उत्पादन क्षमता को बढ़ाना।
भारत–भूटान ऊर्जा सहयोग को सशक्त करना।
क्षेत्र में सतत अवसंरचनात्मक विकास को बढ़ावा देना।
प्रधानमंत्री की इस यात्रा में कई अहम घोषणाएँ की गईं —
पुनात्सांगछू-I परियोजना का पुनःआरंभ: 1200 मेगावॉट की मुख्य बांध संरचना पर कार्य फिर से शुरू होगा।
वाराणसी में भूमि आवंटन: भूटानी मंदिर/मठ और अतिथि गृह के निर्माण के लिए भूमि दी गई।
हटीसर (गेलफू के पास) में इमीग्रेशन चेक पोस्ट: सीमापार आवागमन को सुगम बनाने के लिए नई चौकी की स्थापना।
₹4000 करोड़ की ऋण सहायता (Line of Credit): भूटान के अवसंरचना एवं विकास परियोजनाओं के लिए आर्थिक सहयोग।
भारत और भूटान के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को मज़बूत करने हेतु कई MoUs पर हस्ताक्षर हुए —
| समझौता ज्ञापन (MoU) | उद्देश्य | भूटानी हस्ताक्षरकर्ता | भारतीय हस्ताक्षरकर्ता |
|---|---|---|---|
| नवीकरणीय ऊर्जा में सहयोग | सौर, पवन, बायोमास, ग्रीन हाइड्रोजन, ऊर्जा भंडारण एवं क्षमता निर्माण पर ध्यान | ल्योंपो जेम त्शेरिंग, ऊर्जा मंत्री | श्री प्रल्हाद जोशी, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री |
| स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सहयोग | दवाओं, निदान, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, रोग-निवारण, टेलीमेडिसिन व प्रशिक्षण में सहयोग | श्री पेम्बा वांगचुक, स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव | श्री संदीप आर्य, भारत के राजदूत (भूटान) |
| PEMA–NIMHANS संस्थागत समझौता | मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में क्षमता निर्माण, अनुसंधान एवं कोर्स संचालित करना | सुश्री देचेन वांगमो, PEMA सचिवालय प्रमुख | श्री संदीप आर्य, भारत के राजदूत (भूटान) |
प्रधानमंत्री की भूटान यात्रा भारत की समग्र विदेश नीति का प्रतीक है, जो पड़ोसी देशों के सतत विकास और क्षेत्रीय स्थिरता पर केंद्रित है।
मुख्य फोकस क्षेत्र —
ऊर्जा सुरक्षा: जलविद्युत और नवीकरणीय ऊर्जा सहयोग का विस्तार।
स्वास्थ्य सहयोग: सार्वजनिक स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य एवं डिजिटल हेल्थ के क्षेत्र में साझेदारी।
सांस्कृतिक एवं धार्मिक संबंध: वाराणसी में भूटानी सांस्कृतिक केंद्र की स्थापना।
सीमा प्रबंधन: हटीसर में नई इमीग्रेशन चौकी से सुगम आवागमन।
वित्तीय सहयोग: ₹4000 करोड़ की ऋण सहायता के माध्यम से भूटान की अवसंरचना को मज़बूती।
उद्घाटन परियोजना: 1020 मेगावॉट पुनात्सांगछू-II जलविद्युत परियोजना
वित्तीय सहायता: ₹4000 करोड़ की ऋण सुविधा
हस्ताक्षरित MoUs: नवीकरणीय ऊर्जा, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा, PEMA–NIMHANS सहयोग
सांस्कृतिक एवं सीमा पहल: वाराणसी में मठ हेतु भूमि, हटीसर में नया चेक पोस्ट
रणनीतिक प्रभाव: भारत–भूटान साझेदारी को ऊर्जा, स्वास्थ्य, संस्कृति एवं अवसंरचना क्षेत्रों में सुदृढ़ बनाना
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