भारत में सतत ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने हरियाणा के रेवाड़ी ज़िले में एक बायोमास पेलेट प्लांट का उद्घाटन किया और एक बायो-एथेनॉल प्लांट की आधारशिला रखी। ये दोनों परियोजनाएँ भारत के नेट ज़ीरो 2070 लक्ष्य और E20 मिशन को पूरा करने की दिशा में अहम भूमिका निभाएँगी। इनका उद्देश्य कृषि अवशेष (फसल का बरड़ा), जिसे पहले कचरा माना जाता था, को स्वच्छ ऊर्जा के उपयोगी स्रोत में बदलना है—जिससे पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय, दोनों को लाभ मिलेगा।
रेवाड़ी में स्थापित यह नया पेलेट प्लांट प्रतिदिन 240 टन बायोमास पेलेट का उत्पादन करेगा। इसमें निम्नलिखित कृषि अवशेषों का उपयोग होगा—
धान का पुआल
सरसों का ठूंठ
कपास के डंठल
ये पेलेट थर्मल पावर प्लांट में को-फायरिंग (कोयले के साथ जलाने) के लिए उपयोग किए जाएँगे, जिससे कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी। यह भारत सरकार की उस अनिवार्य नीति के अनुरूप है, जिसमें थर्मल प्लांट्स को बायोमास और कचरे का एक हिस्सा ईंधन के रूप में उपयोग करना जरूरी किया गया है।
पराली जलाने और वायु प्रदूषण में कमी
ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन
किसानों को फसल अवशेष से अतिरिक्त आय
नवीकरणीय ऊर्जा मिश्रण को बढ़ावा
पेलेट प्लांट के साथ ही K2 बायो-एथेनॉल प्लांट की आधारशिला रखी गई, जो इसी तरह के कृषि अवशेषों से बायो-एथेनॉल तैयार करेगा—जो पेट्रोल में मिलाए जाने वाला स्वच्छ ईंधन है।
यह प्लांट भारत के E20 लक्ष्य (2025 तक पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिश्रण) को पूरा करने में अहम योगदान देगा। फसल अवशेषों से बनने वाला एथेनॉल, ईंधन आयात पर निर्भरता कम करता है और प्रदूषण भी घटाता है।
पराली को एथेनॉल में परिवर्तित कर ईंधन मिश्रण में उपयोग
तेल आयात में कमी और कार्बन उत्सर्जन में घटौती
ग्रामीण उद्योगों और किसानों की आय में वृद्धि
पर्यावरण समस्याओं का स्थायी समाधान
कार्यक्रम में मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बताया कि पहले कृषि अवशेष को बोझ समझा जाता था, जिससे पराली जलाने की समस्या होती थी। अब सरकारी नीतियों के कारण वही अवशेष ऊर्जा उत्पादन का बहुमूल्य संसाधन बन रहा है।
उन्होंने यह भी बताया—
थर्मल पावर प्लांटों में बायोमास को-फायरिंग अब अनिवार्य है
सरकार ग्रामीण ऊर्जा ढाँचे को मजबूत कर रही है
विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों पर समान ध्यान दिया जा रहा है
यह परियोजना हरियाणा में हरित अवसंरचना और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में तेज़ी से हो रहे बदलाव का हिस्सा है। रेवाड़ी जैसे कृषि-प्रधान क्षेत्रों में बायो-फ्यूल और पेलेट प्लांट बनने से राज्य आगे बढ़ेगा—
नवीकरणीय ईंधन नवाचार में
विकेंद्रीकृत ऊर्जा उत्पादन में
ग्रामीण औद्योगिक विकास में
यह प्रयास किसानों को ऊर्जा उत्पादक के रूप में सशक्त बनाता है और विकास व पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखने की भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
स्थान: रेवाड़ी, हरियाणा
शामिल मंत्री: प्रह्लाद जोशी (केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री)
पेलेट प्लांट क्षमता: 240 टन प्रतिदिन
कच्चा माल: धान पुआल, सरसों अवशेष, कपास डंठल
उपयोग: थर्मल पावर प्लांट को-फायरिंग
बायो-एथेनॉल प्लांट: K2 सुविधा की आधारशिला रखी गई
लक्ष्य मिशन: E20 (2025 तक 20% एथेनॉल मिश्रण)
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