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पीएम केयर्स फंड को RTI के तहत प्राप्त है निजता का अधिकार: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण कानूनी टिप्पणी में कहा है कि PM CARES फंड को सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत निजता (Privacy) का अधिकार प्राप्त है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल सार्वजनिक कार्य करने से किसी इकाई की निजता स्वतः समाप्त नहीं हो जाती। यह निर्णय पारदर्शिता कानूनों, तीसरे पक्ष के अधिकारों और RTI अधिनियम में दिए गए अपवादों की व्याख्या के लिहाज़ से महत्वपूर्ण है।

क्यों खबर में?

दिल्ली हाईकोर्ट ने यह फैसला दिया कि भले ही PM CARES फंड को सार्वजनिक प्राधिकरण माना जाए, फिर भी उसे RTI अधिनियम के तहत निजता संरक्षण प्राप्त होगा।

दिल्ली हाईकोर्ट की प्रमुख टिप्पणियाँ

यह निर्णय मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने दिया। अदालत ने कहा कि किसी संस्था का सार्वजनिक होना या सार्वजनिक कार्य करना, उसके निजता अधिकार को स्वतः समाप्त नहीं करता। PM CARES फंड, यदि ‘राज्य’ भी माना जाए, तो भी वह एक ज्यूरिस्टिक पर्सन (कानूनी इकाई) है और केवल सरकारी नियंत्रण या पर्यवेक्षण के आधार पर उससे निजता अधिकार नहीं छीना जा सकता।

कानूनी आधार: RTI अधिनियम की धारा 8(1)(j)

अदालत ने RTI अधिनियम की धारा 8(1)(j) का हवाला दिया, जो व्यक्तिगत या तीसरे पक्ष की जानकारी के प्रकटीकरण से छूट देती है, जब तक कि कोई बड़ा सार्वजनिक हित सिद्ध न हो। पीठ ने स्पष्ट किया कि यह निजता अधिकार संवैधानिक नहीं बल्कि वैधानिक (Statutory) है और RTI के तहत सभी तीसरे पक्षों पर समान रूप से लागू होता है—चाहे वे सार्वजनिक हों या निजी।

तीसरे पक्ष के अधिकारों पर अदालत की व्याख्या

अदालत ने कहा कि RTI कानून सार्वजनिक और निजी तीसरे पक्षों में कोई भेद नहीं करता। ट्रस्ट, सोसायटी, सहकारी संस्था या निजी व्यक्ति—किसी की भी जानकारी बिना निर्धारित प्रक्रिया के सार्वजनिक नहीं की जा सकती। अदालत ने उदाहरण देते हुए कहा कि ट्रस्ट द्वारा संचालित स्कूल या क्लब की जानकारी के प्रकटीकरण से पहले तीसरे पक्ष को नोटिस देना अनिवार्य है। अतः केवल सार्वजनिक चरित्र होने से निजता अधिकार समाप्त नहीं होता।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला गिरीश मित्तल द्वारा दायर RTI आवेदन से जुड़ा है, जिसमें PM CARES फंड द्वारा कर छूट के लिए जमा दस्तावेज़ों की जानकारी मांगी गई थी। केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने पहले आयकर विभाग को जानकारी देने का निर्देश दिया था। हालांकि, दिल्ली हाईकोर्ट के एकल न्यायाधीश ने इस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके बाद मित्तल ने डिवीजन बेंच में अपील की।

RTI और निजता का संतुलन

RTI अधिनियम, 2005 पारदर्शिता को बढ़ावा देता है, लेकिन साथ ही संवेदनशील और तीसरे पक्ष की जानकारी की सुरक्षा भी सुनिश्चित करता है। धारा 8 के अंतर्गत दिए गए अपवाद पारदर्शिता और निजता के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए हैं।

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