पूर्व गृह मंत्री शिवराज पाटिल का निधन

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल का 12 दिसंबर 2025 को महाराष्ट्र के लातूर में निधन हो गया। वे 90 वर्ष के थे। परिवार के अनुसार पाटिल का निधन उनके निवास ‘देवघर’ में अल्पकालिक बीमारी के बाद हुआ।

उनका जाना भारतीय राजनीति के एक महत्वपूर्ण दौर का अंत माना जा रहा है। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने उन्हें मर्यादित व्यवहार, शांत स्वभाव और संवैधानिक मामलों की गहरी समझ के लिए याद किया।

प्रारंभिक जीवन और राजनीतिक शुरुआत

12 अक्टूबर 1935 को जन्मे शिवराज पाटिल ने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत लातूर नगरपालिका परिषद के प्रमुख के रूप में की। स्थानीय स्तर पर नेतृत्व ने उनकी लंबी और प्रभावशाली राजनीतिक यात्रा की नींव रखी। वे 1970 के दशक की शुरुआत में विधायक बने, जिसके बाद वे महाराष्ट्र के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल हो गए। उन्होंने लातूर लोकसभा सीट से सात बार चुनाव जीतकर क्षेत्र में मजबूत जन समर्थन हासिल किया।

मुख्य पद और उनका योगदान

1. केंद्रीय गृह मंत्री (2004–2008)

इस दौरान देश में कई आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ा। पाटिल अपने संयमित और संतुलित नेतृत्व के लिए जाने गए।

2. लोकसभा अध्यक्ष (1991–1996)

वे 10वें लोकसभा अध्यक्ष बने। उनकी निष्पक्षता, अनुशासन और संसदीय प्रक्रियाओं की गहरी समझ के लिए उन्हें व्यापक सम्मान मिला।

3. पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक (2010–2015)

इस संवैधानिक पद पर उन्होंने प्रशासनिक स्थिरता और सुशासन को प्राथमिकता दी।

उनका राजनीतिक करियर कई दशकों तक चला, जो उनके सार्वजनिक सेवा, लोकतांत्रिक मूल्यों और संसदीय मर्यादा के प्रति समर्पण को दर्शाता है।

राजनीतिक चुनौतियाँ

लातूर से कई बार जीतने के बावजूद, वे 2004 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की रुपताई पाटिल निलंगेकर से हार गए।
इसके बावजूद उन्होंने राजनीतिक और संवैधानिक भूमिकाओं में सक्रिय बने रहकर योगदान जारी रखा।

मर्यादा और गंभीरता के प्रतीक नेता

शिवराज पाटिल को उनके इन गुणों के लिए विशेष रूप से याद किया जाता है:

  • गरिमापूर्ण और मर्यादित व्यवहार

  • संवैधानिक विषयों का गहरा अध्ययन

  • मराठी, हिंदी और अंग्रेजी में उत्कृष्ट वक्तृत्व कौशल

  • शांत, संयमित और संतुलित राजनीतिक दृष्टिकोण

पार्टी सदस्यों के अनुसार वे हमेशा उच्च स्तर का राजनीतिक संवाद और शालीनता कायम रखते थे।

International Mountain Day 2025: 11 दिसंबर को क्यों मनाते हैं अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस?

अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस 11 दिसंबर को मनाया जाता है। यह दिन पर्वतों और पहाड़ों के महत्व को समझने और उनके संरक्षण के लिए वैश्विक समुदाय को जागरूक करने के उद्देश्य से मनाया जाता है। पर्वतों का महत्व न केवल प्राकृतिक सौंदर्य में है, बल्कि ये पृथ्वी के जलवायु और पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। इनका प्रभाव नदियों, जलवायु, वनस्पति, और जीव-जंतुओं पर पड़ता है। पर्वतों में रहने वाले समुदायों की जीवनशैली, उनकी संस्कृति और रोज़मर्रा की जरूरतों के बारे में भी जागरूकता फैलाने के लिए यह दिन मनाया जाता है।

पर्वत दिवस 2025 की थीम

हर वर्ष पर्वत दिवस की एक विशेष थीम होती है। 11 दिसंबर को आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस 2025 की थीम है “ग्लेशियर पहाड़ों और उसके बाहर पानी, भोजन और आजीविका के लिए महत्वपूर्ण हैं।” यह विषय संयुक्त राष्ट्र द्वारा 2025 को अंतर्राष्ट्रीय ग्लेशियर संरक्षण वर्ष के रूप में घोषित किए जाने के साथ मेल खाता है, जिसका उद्देश्य पिघलते ग्लेशियरों की रक्षा करने की तत्काल आवश्यकता और अरबों लोगों के जीवन, कृषि और जल सुरक्षा को बनाए रखने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देना है।

अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस का उद्देश्य

अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस का उद्देश्य पर्वतों के संरक्षण और उनके महत्व के बारे में वैश्विक जागरूकता फैलाना है। यह दिन न केवल प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए आवश्यक है, बल्कि पर्वतों में रहने वाले समुदायों के जीवन की रक्षा के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। 2025 की थीम और इसके महत्व को ध्यान में रखते हुए, हम सभी को पर्वतों के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और उनके संरक्षण में अपना योगदान देना होगा।

पर्वत दिवस का इतिहास

अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस की शुरुआत 2002 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा की गई थी। इसका उद्देश्य पर्वतों के संरक्षण और उनके स्थिर विकास को बढ़ावा देना था। इस दिन का ऐतिहासिक महत्व इस बात से भी जुड़ा है कि पर्वतों में रहने वाले लोगों के जीवन और उनके सामने आने वाली चुनौतियों पर ध्यान आकर्षित किया जा सके।

भारत की पहली ज़ीरो-एमिशन इलेक्ट्रिक टग प्रोजेक्ट का उद्घाटन

भारत ने स्वच्छ और आधुनिक पोर्ट संचालन की ओर एक अहम कदम बढ़ाया है। केंद्रीय मंत्री सरबानंद सोनोवाल ने वर्चुअली देश के पहले पूरी तरह इलेक्ट्रिक ग्रीन टग के स्टील-कटिंग समारोह की शुरुआत की। यह परियोजना भारत के बंदरगाहों को अधिक स्वच्छ, हरित और भविष्य-उन्मुख बनाने के राष्ट्रीय प्रयास का हिस्सा है।

ग्रीन समुद्री विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

यह नया इलेक्ट्रिक टग कांडला स्थित दीनदयाल पोर्ट प्राधिकरण (DPA) के लिए ग्रीन टग ट्रांजिशन प्रोग्राम (GTTP) के तहत बनाया जा रहा है। सोनोवाल ने बताया कि यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर और पर्यावरण-अनुकूल समुद्री क्षेत्र के विज़न को मजबूत करती है। यह मेक इन इंडिया, ग्रीन ग्रोथ और ग्रीन शिपिंग टेक्नोलॉजी में भारत की नेतृत्व क्षमता को भी प्रदर्शित करती है।

पूरी तरह इलेक्ट्रिक टग की मुख्य विशेषताएँ

इस इलेक्ट्रिक टग में आधुनिक तकनीक शामिल होगी, जिसका उद्देश्य उत्सर्जन को कम करना और प्रदर्शन को बेहतर बनाना है।

मुख्य फीचर्स:

  • 60 टन बोलार्ड पुल क्षमता

  • शून्य कार्बन उत्सर्जन

  • शांत और स्मूथ ऑपरेशन

  • उन्नत नेविगेशन सिस्टम

  • उच्च ऊर्जा दक्षता

विशेषज्ञों का मानना है कि यह टग संचालन लागत को कम करेगा और भारत के अन्य बंदरगाहों को भी स्वच्छ तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित करेगा।

ग्रीन टग ट्रांजिशन प्रोग्राम (GTTP) के तहत प्रगति

सरकार का लक्ष्य 2030 तक 50 ग्रीन टग को शामिल करना है।

  • पहले चरण (2024–2027) में 16 ग्रीन टग शामिल किए जाएंगे।

  • दीनदयाल पोर्ट (DPA), कांडला सबसे पहला पोर्ट है जहाँ निर्माण कार्य शुरू हो चुका है।

  • परादीप, जेएनपीए, और वीओसी पोर्ट भी कार्य आदेश जारी कर चुके हैं।

टग कहाँ और कैसे बनाया जा रहा है?

यह टग अत्रेय शिपयार्ड में भारतीय और वैश्विक तकनीकी साझेदारों के सहयोग से निर्मित किया जा रहा है।
पूरा होने के बाद इसका उपयोग इन कार्यों के लिए किया जाएगा:

  • हार्बर ऑपरेशन

  • एस्कॉर्ट ड्यूटी

  • आपातकालीन प्रतिक्रिया

इससे पोर्ट की सुरक्षा और संचालन क्षमता में सुधार होगा।

भारत की वैश्विक प्रतिबद्धताओं के अनुरूप

यह परियोजना भारत के जलवायु लक्ष्यों और अंतरराष्ट्रीय डिकार्बोनाइज़ेशन वादों के अनुरूप है। यह Maritime India Vision 2030 और अमृत काल के दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों को भी समर्थन देती है।

भारतीय बंदरगाहों के लिए स्थायी भविष्य की शुरुआत

सोनोवाल ने कहा कि इलेक्ट्रिक टग की शुरुआत भारत के लिए एक नई दिशा का संकेत है। यह दर्शाता है कि भारत एक स्थायी, प्रतिस्पर्धी और विश्वस्तरीय समुद्री इकोसिस्टम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

बैंक ऑफ बड़ौदा को ‘द बैंकर’ द्वारा ‘भारत में सर्वश्रेष्ठ बैंक’ के रूप में मान्यता मिली

बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) को फ़ाइनेंशियल टाइम्स की प्रतिष्ठित प्रकाशन द बैंकर द्वारा आयोजित बैंक ऑफ द ईयर अवॉर्ड्स 2025 – एशिया-पैसिफ़िक में ‘बेस्ट बैंक इन इंडिया’ के सम्मान से नवाज़ा गया है। यह उपलब्धि बैंक के तेज़ी से हुए परिवर्तन, नवोन्मेषी बैंकिंग सेवाओं और भारत की वित्तीय प्रणाली को मज़बूत करने में इसकी बढ़ती भूमिका को दर्शाती है। सरकारी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए यह ख़बर महत्वपूर्ण है, क्योंकि पुरस्कारों, बैंकिंग सुधारों, वित्तीय समावेशन और प्रमुख संस्थानों से जुड़े प्रश्न अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाते हैं।

बैंक ऑफ बड़ौदा को ‘बेस्ट बैंक इन इंडिया’ अवॉर्ड क्यों मिला?

1. फ़िजिटल बैंकिंग मॉडल का विस्तार
बैंक ऑफ बड़ौदा को यह सम्मान उसके सफल फिजिटल (Physical + Digital) बैंकिंग मॉडल के कारण मिला है। इस मॉडल में ग्राहक पा सकते हैं:

  • त्वरित स्टेटमेंट

  • आयकर भुगतान प्रमाणपत्र

  • नामिनी अपडेट की सुविधा

ग्राहक वीडियो कॉल के माध्यम से डिजिटल रूप से बैंक से जुड़ सकते हैं, या ज़रूरत पड़ने पर शाखा में जाकर यूनिवर्सल सर्विस डेस्क पर सहायता ले सकते हैं। यह हाइब्रिड मॉडल बैंक की ग्राहक सेवा को आधुनिक और सुविधाजनक बनाता है।

2. मजबूत ग्राहक सहायता और पहुंच
बैंक ने देशभर में 184 नई शाखाएँ खोलकर अपने नेटवर्क को और मज़बूत किया है, जिससे:

  • स्थानीय व्यापार को बढ़ावा

  • क्रेडिट तक बेहतर पहुंच

  • वित्तीय समावेशन में सुधार

The Banker मैगज़ीन के अनुसार, बैंक का यह विस्तार ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में लोगों के लिए बैंकिंग को अधिक सरल और सुलभ बनाता है।

3. छोटे व्यवसायों के लिए Smart OD सुविधा
MSMEs को मज़बूत करने के लिए बैंक ने Smart OD (ओवरड्राफ्ट) सुविधा लॉन्च की। यह छोटे व्यवसायों को त्वरित वर्किंग कैपिटल उपलब्ध कराती है।

डिजिटल वेरिफिकेशन के जरिए तेज़ लोन
BoB अब ग्राहकों को इन आंकड़ों के आधार पर फंडिंग प्रदान करता है:

  • B2B सेल्स डेटा

  • GST रिटर्न

  • करेंट अकाउंट लेनदेन

ऐसे लोन 24 घंटे से भी कम समय में स्वीकृत हो जाते हैं। यह तेज़ और तकनीक-आधारित प्रणाली छोटे व्यवसायों के लिए बड़ी राहत है।

4. खुदरा ग्राहकों के लिए नवोन्मेषी बैंकिंग उत्पाद
बैंक ने लिक्विड फिक्स्ड डिपॉज़िट जैसे उत्पाद पेश किए हैं, जिनमें:

  • FD की ऊंची ब्याज दरें

  • सेविंग अकाउंट जैसी निकासी सुविधा

ग्राहक बिना पूरे FD को तोड़े कुछ हिस्सा निकाल सकते हैं और शेष राशि पर ब्याज मिलता रहता है। यह सुविधा घर-परिवार और नौकरीपेशा लोगों के लिए बेहद उपयोगी है।

5. राष्ट्र निर्माण और समावेशी विकास के प्रति प्रतिबद्धता
BoB के MD & CEO, देबदत्ता चंद ने कहा कि बैंक का लक्ष्य है:

  • समावेशी और सतत विकास को बढ़ावा देना

  • वित्तीय पहुंच को मजबूत करना

  • भारत की वैश्विक वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ करना

यह भारत के डिजिटल बैंकिंग, क्रेडिट एक्सेस और आर्थिक विकास के राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप है।

भारत के बैंकिंग सेक्टर के लिए इस पुरस्कार का महत्व

भारत की वैश्विक साख बढ़ी
यह सम्मान दर्शाता है कि भारतीय बैंकिंग प्रणाली डिजिटल नवाचार और ग्राहक-केंद्रित सेवाओं में तेज़ी से प्रगति कर रही है।

निवेशकों और ग्राहकों का भरोसा बढ़ा
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली यह पहचान बैंक में विश्वास और विश्वसनीयता को बढ़ाती है।

स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा
ऐसे अवॉर्ड अन्य बैंकों को भी नवाचार, डिजिटल सेवाओं और ग्राहक सुविधा पर ध्यान देने के लिए प्रेरित करते हैं।

भारत में होगी पहली राष्ट्रमंडल खो खो चैंपियनशिप

भारत 9 मार्च से 14 मार्च 2026 तक पहली बार कॉमनवेल्थ खो-खो चैम्पियनशिप की मेजबानी करने जा रहा है। कॉमनवेल्थ के 24 से अधिक देशों के इसमें भाग लेने की उम्मीद है, जो पारंपरिक भारतीय खेल खो-खो के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है।

कॉमनवेल्थ स्पोर्ट्स से मंजूरी

कॉमनवेल्थ स्पोर्ट्स ने आधिकारिक रूप से भारत को 2026 खो-खो चैम्पियनशिप की मेजबानी की मंजूरी दे दी है। यह फैसला इस खेल के प्रति बढ़ती वैश्विक रुचि और भारत की खेल विरासत की पहचान को दर्शाता है।

वैश्विक भागीदारी

एशिया, यूरोप, अफ्रीका, ओशिनिया और अमेरिका सहित कॉमनवेल्थ के 24 से अधिक देश इस चैम्पियनशिप में हिस्सा लेंगे। कॉमनवेल्थ 56 स्वतंत्र देशों का संगठन है, जिसकी जनसंख्या लगभग 2.7 अरब है—जिससे यह आयोजन वास्तव में अंतरराष्ट्रीय बन जाता है।

खो-खो वर्ल्ड कप के बाद अगला बड़ा आयोजन

इस वर्ष नई दिल्ली में आयोजित पहले खो-खो वर्ल्ड कप के बाद यह चैम्पियनशिप खो-खो का अगला प्रमुख वैश्विक कार्यक्रम मानी जा रही है। वर्ल्ड कप में 23 देशों ने हिस्सा लिया था, जिसमें 20 पुरुष और 19 महिला टीमें शामिल थीं।

2026 चैम्पियनशिप में भी 16 पुरुष टीमों और 16 महिला टीमों के एक साथ मुकाबले होंगे।

स्थान और भविष्य की योजनाएँ

खो-खो फेडरेशन ऑफ इंडिया कई राज्यों से बातचीत कर रहा है ताकि आयोजन स्थल को अंतिम रूप दिया जा सके। उम्मीद है कि अहमदाबाद—जो 2030 में कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी करेगा—इस आयोजन से लाभान्वित होगा।

फेडरेशन के महासचिव उपकार सिंह विर्क के अनुसार, यह चैम्पियनशिप खो-खो को भविष्य के अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में शामिल कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है, जैसे:

  • दोहा एशियाई खेल 2030

  • कॉमनवेल्थ गेम्स 2030

  • ब्रिस्बेन ओलंपिक 2032

भारतीय पारंपरिक खेलों को बढ़ावा

यह अंतरराष्ट्रीय आयोजन भारतीय पारंपरिक खेलों की लोकप्रियता को वैश्विक स्तर पर बढ़ाने में मदद करेगा। साथ ही, यह भारत के युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करेगा और खो-खो के अंतरराष्ट्रीय विस्तार के लिए नए अवसर खोलेगा।

राष्ट्रपति ने 2023 और 2024 के लिए शिल्प गुरु और राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार प्रदान किए

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 9 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में वर्ष 2023 और 2024 के लिए शिल्प गुरु पुरस्कार और राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार प्रदान किए। ये सम्मान राष्ट्रीय हस्तशिल्प सप्ताह 2025 का हिस्सा थे, जिसका आयोजन 8 से 14 दिसंबर तक वस्त्र मंत्रालय द्वारा किया गया था। समारोह में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और राज्य मंत्री पाबित्रा मार्गेरिटा भी उपस्थित रहे।

ये पुरस्कार क्या हैं?

राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार: वर्ष 1965 में शुरू किए गए ये पुरस्कार कुशल शिल्पकारों को उनकी कलात्मक प्रतिभा और भारत की सांस्कृतिक विरासत में महत्वपूर्ण योगदान के लिए सम्मानित करते हैं।

शिल्प गुरु पुरस्कार: वर्ष 2002 में शुरू किए गए ये पुरस्कार भारत के हस्तशिल्प क्षेत्र में उत्कृष्ट महारत रखने वाले शिल्प गुरुओं को दिया जाने वाला सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान है।

वर्ष 2023–24 के लिए कुल 48 पुरस्कार प्रदान किए गए, जिनमें 12 शिल्प गुरु पुरस्कार, 36 राष्ट्रीय पुरस्कार, और 2 विशेष डिज़ाइन एवं नवाचार पुरस्कार शामिल थे, जो कारीगर–डिज़ाइनर सहयोग को प्रोत्साहित करते हैं।

हस्तशिल्प में महिला सशक्तिकरण

पुरस्कार पाने वालों में 20 महिलाएँ शामिल थीं, जो इस क्षेत्र में महिलाओं की मजबूत भागीदारी को दर्शाता है। वास्तव में, भारत की हस्तशिल्प कार्यबल में 68% महिलाएँ हैं, जो देशभर में 32 लाख से अधिक आजीविकाएँ समर्थित करती हैं।

मान्यता प्राप्त शिल्प और कारीगर

पुरस्कार विजेताओं ने भारत की विविध पारंपरिक कलाओं का प्रतिनिधित्व किया, जिनमें शामिल हैं:

  • धातुकला और लकड़ी का शिल्प

  • हाथ से प्रिंट किए गए वस्त्र

  • पत्तचित्र चित्रकला

  • चमड़े की कठपुतली कला

  • टेराकोटा और पत्थर की नक्काशी

  • कालीन और बांस-बेंत शिल्प

ये पुरस्कार इस बात पर जोर देते हैं कि पारंपरिक शिल्प न सिर्फ सांस्कृतिक धरोहर हैं, बल्कि कारीगरों की आजीविका का महत्वपूर्ण आधार भी हैं।

शिल्प गुरु पुरस्कार – मुख्य झलकियाँ

2023 के शिल्प गुरु पुरस्कार विजेता:

  • अजीत कुमार दास – हस्त-चित्रित वस्त्र, पश्चिम बंगाल

  • सुधीर कुमार महाराणा – पत्तचित्र पेंटिंग, ओडिशा

  • डी. सिवम्मा – चमड़े की कठपुतली कला, आंध्र प्रदेश

  • डोलोन कुंडु मंडल – टेराकोटा, पश्चिम बंगाल

  • खत्री गुलामहुसैन उमर – कलात्मक वस्त्र (बांधनी), गुजरात

  • माधुरी मिश्रा – कलात्मक वस्त्र (बाटिक प्रिंटिंग), उत्तर प्रदेश

2024 के शिल्प गुरु पुरस्कार विजेता:

  • कमलेश शर्मा – वुड क्राफ्ट, राजस्थान

  • सुबHASH अरोड़ा – मेटल क्राफ्ट (ढोकरा), हरियाणा

  • शहीन अंजुम – वुड क्राफ्ट (ज्वेलरी बॉक्स), दिल्ली

  • मो. दिलशाद – वुड कार्विंग (शीशम टेबल), उत्तर प्रदेश

  • तारित पॉल – क्ले मॉडलिंग (कृष्ण जी का विश्वरूप), पश्चिम बंगाल

  • शोभारानी पोद्दार – जूट क्राफ्ट (देवी दुर्गा), पश्चिम बंगाल

भारत में हस्तशिल्प का महत्व

भारत का हस्तशिल्प क्षेत्र न केवल सांस्कृतिक धरोहर है, बल्कि एक महत्वपूर्ण आर्थिक शक्ति भी है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ:

  • ग्रामीण आजीविका और महिला सशक्तिकरण को मजबूत समर्थन

  • पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ शिल्प पर आधारित उत्पादन

  • GI टैग, ODOP पहल और वोकल फॉर लोकल कार्यक्रमों का लाभ

  • जीएसटी में कमी (18% से 5%) से निर्यात में बढ़ोतरी, लक्ष्य — 2031–32 तक ₹1 लाख करोड़

वस्त्र मंत्रालय के बारे में

  • केंद्रीय मंत्री: गिरिराज सिंह (बेगूसराय, बिहार)

  • राज्य मंत्री (MoS): पबित्रा मरघेरिटा (राज्यसभा, असम)

वस्त्र मंत्रालय का उद्देश्य भारत की पारंपरिक कला और शिल्प को बढ़ावा देना, कारीगरों का समर्थन करना और देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखना है।

नागालैंड ने वाटरशेड महोत्सव 2025 के दौरान मिशन पुनरुत्थान लॉन्च किया

केंद्र सरकार ने कोहिमा स्थित नागा सॉलिडैरिटी पार्क में स्टेट-लेवल वाटरशेड महोत्सव 2025 और मिशन वाटरशेड पुनरुत्थान की शुरुआत की है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्राकृतिक जल स्रोतों की सुरक्षा, मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार, और ग्रामीण समुदायों को बेहतर जल प्रबंधन के लिए सक्षम बनाना है। यह पारंपरिक जल प्रणालियों के महत्व को रेखांकित करता है और लोगों को दीर्घकालिक जल सुरक्षा के लिए मिलकर काम करने के लिए प्रेरित करता है।

मिशन वाटरशेड पुनरुत्थान के मुख्य उद्देश्य

मिशन वाटरशेड पुनरुत्थान का मुख्य लक्ष्य गाँवों को जल-सुरक्षित और पर्यावरणीय रूप से मजबूत बनाना है। यह मिशन विशेष रूप से निम्न बातों पर केंद्रित है:

  • प्राकृतिक झरनों का पुनर्जीवन

  • वाटरशेड संरचनाओं को बेहतर बनाना

  • ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़ाना

इस मिशन में समुदाय की सहभागिता को भी बड़ी प्राथमिकता दी गई है, जहाँ ग्रामीण स्वयं जल स्रोतों के संरक्षण में नेतृत्व करते हैं। मनरेगा जैसी योजनाएँ इन प्रयासों को मज़बूत बनाती हैं क्योंकि वे रोजगार पैदा करती हैं और ग्रामीण आजीविका में सुधार लाती हैं।

सरकारी दृष्टिकोण

कार्यक्रम के शुभारंभ के दौरान ग्रामीण विकास और संचार राज्य मंत्री ने कहा कि जल सुरक्षा राष्ट्रीय प्राथमिकता है। उन्होंने नागालैंड की सामुदायिक संरक्षण परंपराओं की सराहना की और बताया कि प्राकृतिक संसाधनों का पुनर्जीवन पर्यावरण की रक्षा करने और भविष्य की जलवायु चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक है।

नागालैंड में पीएमकेएसवाई के तहत प्रगति

नागालैंड ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) और वाटरशेड विकास कार्यक्रमों के तहत उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं। प्रमुख प्रगति इस प्रकार है:

  • राज्य में 14 वाटरशेड परियोजनाएँ स्वीकृत

  • ₹140 करोड़ की मंजूरी, जिसमें से ₹80 करोड़ जारी

  • 555 जल-संग्रहण संरचनाओं की मरम्मत और सुदृढ़ीकरण

  • 120 प्राकृतिक झरनों का पुनर्जीवन

  • 6,500 से अधिक किसानों को लाभ

पूर्वोत्तर राज्यों को 90% केंद्रीय सहायता भी मिलती है, जिससे विकास कार्यों की गति तेज होती है।

राष्ट्रीय जल लक्ष्यों को कैसे समर्थन मिलता है?

भारत के पास दुनिया के कुल मीठे पानी का केवल लगभग 4% हिस्सा है, जबकि वह विशाल जनसंख्या का समर्थन करता है। इस वजह से PMKSY जैसे कार्यक्रम अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि वे जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और बहु-फसल चक्रों को समर्थन देते हैं। ऐसे प्रयास गाँवों को जल संकट से निपटने, मिट्टी की नमी बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों को जलवायु-सहिष्णु बनाने में मदद करते हैं।

केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने सुजलाम भारत ऐप का शुभारंभ किया

भारत सरकार ने ग्रामीण पेयजल प्रणालियों को ट्रैक करने, प्रबंधित करने और बेहतर बनाने के लिए सुजलाम भारत ऐप की शुरुआत की है। यह नया डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म नागरिकों और अधिकारियों को जल आपूर्ति योजनाओं से जुड़ी वास्तविक-समय की जानकारी उपलब्ध कराता है, जिससे गांवों को यह समझने में मदद मिलती है कि उनका पानी कहाँ से आता है और पूरी प्रणाली कितनी अच्छी तरह काम कर रही है। यह ऐप जल जीवन मिशन के तहत पारदर्शिता बढ़ाने, सामुदायिक भागीदारी मजबूत करने और बेहतर योजना बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

सुजलाम भारत ऐप — जल शक्ति मंत्रालय द्वारा लॉन्च
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल ने सुजलाम भारत ऐप को आधिकारिक रूप से लॉन्च करते हुए कहा कि यह ग्रामीण जल सेवाओं को सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि यह प्लेटफ़ॉर्म गांवों को अपनी पेयजल प्रणालियों की अधिक जिम्मेदारी लेने में सक्षम बनाएगा और जल योजनाओं के संचालन में पारदर्शिता को बढ़ावा देगा।

उन्नत तकनीक के लिए BISAG-N का सहयोग
इस ऐप को भास्कराचार्य राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुप्रयोग एवं भू-सूचना संस्थान (BISAG-N) के सहयोग से विकसित किया गया है। BISAG-N की टीम ने उन्नत जियो-रेफ़रेंसिंग तकनीक विकसित की है, जिससे प्रत्येक जल स्रोत, पाइपलाइन, टैंक और योजना को स्पष्ट रूप से मैप किया जा सकता है। यह तकनीक अधिकारियों को जल अवसंरचना की स्थिति और कार्यप्रणाली की निगरानी करने में बड़ी सुविधा प्रदान करेगी।

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए प्रशिक्षण
लॉन्च के बाद BISAG-N ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों को विस्तृत प्रशिक्षण दिया। उन्हें ऐप के उपयोग, डेटा अपलोड करने और जल आपूर्ति संपत्तियों को मैप करने की प्रक्रिया समझाई गई। यह प्रशिक्षण उन्हें एक पूर्णत: डिजिटल प्रणाली की ओर सुगम रूप से आगे बढ़ने में सहायता करेगा।

सुझल गांव आईडी: हर जल योजना के लिए एक अनूठी पहचान
सुजलाम भारत प्लेटफ़ॉर्म की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक है सुझल गांव आईडी
इस अनोखी पहचान संख्या से प्रत्येक गांव और जल योजना की स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी, जैसे:

  • कौन-सी योजना किन घरों को पानी उपलब्ध करा रही है

  • पानी का स्रोत क्या है

  • जल आपूर्ति कितनी विश्वसनीय है

  • पाइप, टैंक और मोटर की स्थिति क्या है

  • पानी की गुणवत्ता की वर्तमान स्थिति

  • समुदाय की प्रतिक्रिया और मेंटेनेंस रिकॉर्ड

यह आईडी ग्रामीण जल प्रबंधन के लिए आधार जैसी भूमिका निभाएगी, जिससे हर योजना की पहचान राष्ट्रीय डेटाबेस में दर्ज रहेगी।

हर जल आपूर्ति प्रणाली का एक ही डिजिटल दृश्य
सुजलाम भारत डेटाबेस पानी के स्रोतों, अवसंरचना, दैनिक संचालन रिकॉर्ड, पुराने मरम्मत कार्य, और जल गुणवत्ता रिपोर्ट सहित सभी महत्वपूर्ण सूचनाओं को एक ही प्लेटफ़ॉर्म पर लाता है।
इससे ग्राम पंचायतों, वी.डब्ल्यू.एस.सी. (ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति) और सेवा प्रदाताओं को अपनी जल योजनाओं को ट्रैक करने और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत कार्रवाई करने में आसानी होगी।

बेहतर योजना और दीर्घकालिक स्थिरता
ऐप प्रत्येक जल योजना का पूरा इतिहास भी सुरक्षित रखेगा, जिसमें शामिल है:

  • अवसंरचना की स्थिति

  • मरम्मत और मेंटेनेंस का विवरण

  • समय के साथ जल आपूर्ति का प्रदर्शन

क्योंकि यह प्रणाली पीएम गतिशक्ति जीआईएस प्लेटफ़ॉर्म से जुड़ी हुई है, इसलिए पाइपलाइन और जल नेटवर्क का सटीक मैप भी उपलब्ध होगा। इससे भविष्य की मरम्मत और विस्तार की योजनाओं में काफी मदद मिलेगी।

मजबूत डिजिटल जल प्रणाली की ओर बड़ा कदम
अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश समय पर अपना डेटा अपलोड करें ताकि यह सिस्टम सुचारू रूप से काम कर सके।
सुजलाम भारत ऐप से ग्रामीण जल प्रबंधन अधिक विश्वसनीय, पारदर्शी और नागरिक-अनुकूल बनने की उम्मीद है। इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि हर घर को सुरक्षित और नियमित पेयजल मिलता रहे।

ऐप की उपलब्धता
सुजलाम भारत ऐप जल्द ही गूगल प्ले स्टोर पर डाउनलोड के लिए उपलब्ध होगा।

गूगल ने अमीन वहदात को AI इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए नया चीफ टेक्नोलॉजिस्ट नियुक्त किया

सेमाफोर द्वारा उद्धृत एक आंतरिक मेमो के अनुसार, अल्फाबेट के स्वामित्व वाली गूगल ने वरिष्ठ कार्यकारी अमीन वहदात को एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के नए चीफ टेक्नोलजिस्ट के रूप में नियुक्त किया है। यह कदम इस बात को रेखांकित करता है कि गूगल बड़े पैमाने पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल, सेवाओं और क्लाउड वर्कलोड्स को संचालित करने के लिए आवश्यक कंप्यूटिंग आधारभूत संरचना को मजबूत करने पर अपना ध्यान तेजी से बढ़ा रहा है। ऐसे समय में जब वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियाँ उन्नत चिप्स, सुपरकंप्यूटर और डेटा सेंटर में बड़े स्तर पर निवेश कर रही हैं, गूगल का यह नेतृत्व परिवर्तन तेजी से बदलते एआई परिदृश्य में आगे बने रहने की उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है?

यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब गूगल अपनी अब तक की सबसे बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार योजनाओं में से एक के लिए तैयारी कर रहा है। कंपनी का पूंजीगत व्यय 2025 के अंत तक 90 अरब डॉलर से अधिक होने की उम्मीद है, जिसका बड़ा हिस्सा निम्न क्षेत्रों में निवेश होगा:

  • एआई-अनुकूलित डेटा सेंटर बनाना

  • आंतरिक हार्डवेयर नवाचार को बढ़ाना

  • वैश्विक कंप्यूट क्षमता का विस्तार

  • क्लाउड-आधारित एआई सेवाओं में सुधार

Google Cloud के सीईओ थॉमस कुरियन के अनुसार, यह परिवर्तन “एआई इंफ्रास्ट्रक्चर को कंपनी के एक प्रमुख फोकस क्षेत्र के रूप में स्थापित करता है”, जो जनरेटिव एआई के दौर में कंप्यूट संसाधनों के बढ़ते रणनीतिक महत्व को दर्शाता है।

अमीन वहदात कौन हैं?

अमीन वहदात गूगल के एक लंबे समय से कार्यरत वरिष्ठ कार्यकारी हैं, जिन्होंने नेटवर्किंग सिस्टम, क्लाउड आर्किटेक्चर और बड़े पैमाने की कंप्यूटिंग से संबंधित कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का नेतृत्व किया है। उनकी नेतृत्व क्षमता ने निम्न नवाचारों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है:

  • टेंसर प्रोसेसिंग यूनिट (TPUs)

  • गूगल की स्वामित्व वाली नेटवर्किंग तकनीकें

  • Google Cloud में वितरित कंप्यूटिंग मॉडल

एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के चीफ टेक्नोलॉजिस्ट के रूप में, उनके ऊपर गूगल के अगले हार्डवेयर और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास चरण का नेतृत्व करने की ज़िम्मेदारी होगी।

कम्प्यूट डॉमिनेंस की वैश्विक रेस

वैश्विक एआई उछाल ने तकनीकी कंपनियों के बीच जोरदार प्रतिस्पर्धा छेड़ दी है, जहां कम्प्यूट क्षमता — सिर्फ एल्गोरिदम नहीं — सबसे बड़ा रणनीतिक लाभ बन गई है।

गूगल की रणनीति

गूगल के कस्टम-निर्मित TPU, आंतरिक सिस्टम और हाइपर-स्केल डेटा सेंटर्स में निवेश का उद्देश्य बढ़त हासिल करना है:

  • एआई ट्रेनिंग और इन्फरेंस क्षमता में

  • क्लाउड कंप्यूटिंग प्रदर्शन में

  • Gemini जैसे बड़े एआई मॉडलों की स्केलेबिलिटी में

प्रतिस्पर्धी कंपनियों की चालें

  • Microsoft — डेटा सेंटर का तेजी से विस्तार और OpenAI के साथ गहरी साझेदारी।

  • Amazon Web Services (AWS) — Trainium और Inferentia जैसी नई कस्टम एआई चिप्स लॉन्च कर क्लाउड हार्डवेयर इकोसिस्टम को मजबूत करना।

एआई इंफ्रास्ट्रक्चर की यह लड़ाई पूरी सिलिकॉन वैली की प्राथमिकताओं को बदल रही है, और कम्प्यूट पावर को अब अंतिम अंतर-निर्माता (ultimate differentiator) माना जा रहा है।

वित्तीय आधार: गूगल क्लाउड का मजबूत प्रदर्शन

यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई “अनुशासित खर्च” पर जोर दे रहे हैं — जबकि कंपनी इतिहास के सबसे बड़े एआई निवेशों में से एक का नेतृत्व भी कर रही है।

Google Cloud के पास आज 155 अरब डॉलर का बैकलॉग है, जो क्लाउड और एआई सेवाओं की भारी एंटरप्राइज मांग को दर्शाता है। इस मांग के साथ कदम मिलाकर चलने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाना गूगल की दीर्घकालिक एआई रणनीति के केंद्र में है।

IAS सुप्रिया साहू ने जीता संयुक्त राष्ट्र का सर्वोच्च पर्यावरण सम्मान

तमिलनाडु सरकार में अतिरिक्त मुख्य सचिव सुप्रिया साहू को संयुक्त राष्ट्र के सर्वोच्च पर्यावरण सम्मान “चैंपियंस ऑफ द अर्थ पुरस्कार 2025” से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) द्वारा नैरोबी में आयोजित संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सभा (UNEA-7) के दौरान घोषित किया गया। उन्हें यह सम्मान टिकाऊ शीतलन (sustainable cooling), पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्स्थापन (ecosystem restoration) और जलवायु अनुकूलन (climate adaptation) के क्षेत्र में उनके अग्रणी योगदान के लिए दिया गया है।

सुप्रिया साहू को यह पुरस्कार ‘इंस्पिरेशन एंड एक्शन’ श्रेणी में मिला है, जो उन व्यक्तियों को सम्मानित करता है जो मानवता और पृथ्वी के लिए मापनीय और परिवर्तनकारी पर्यावरणीय लाभ पैदा करते हैं।

सुप्रिया साहू को क्यों चुना गया

UNEP के अनुसार, सुप्रिया साहू की जलवायु पहलों ने:

  • 25 लाख हरित नौकरियाँ सृजित कीं

  • तमिलनाडु के वन आवरण में वृद्धि की

  • सार्वजनिक स्थलों और बुनियादी ढाँचे में हीट-अनुकूलन उपाय शामिल किए

  • लगभग 1.2 करोड़ लोगों की जलवायु सहनशीलता (climate resilience) में सुधार किया

  • तमिलनाडु को अनुकूलन (adaptation) और टिकाऊ शीतलन (sustainable cooling) के क्षेत्र में एक वैश्विक नेता के रूप में स्थापित किया

उनका कार्य विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि आने वाले दशक में वैश्विक तापमान 1.5°C से ऊपर जा सकता है, जिससे हीटवेव और जलवायु-संबंधी आपदाएँ और तीव्र होंगी।

सुप्रिया साहू के प्रमुख जलवायु योगदान

1. टिकाऊ शीतलन (Sustainable Cooling) नवाचार

उनके नेतृत्व में तमिलनाडु ने कई हीट-रेज़िलिएंट सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे विकसित किए, जैसे:

  • पेड़ों से घिरे शहरी मार्ग

  • प्रकृति-आधारित छाया प्रणाली

  • संवेदनशील समुदायों के लिए हीट एक्शन प्लान

2. पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्स्थापन 

उनकी नीतियों ने निम्नलिखित को मज़बूत किया:

  • मैंग्रोव पुनर्स्थापन

  • आर्द्रभूमि (wetland) संरक्षण

  • घासभूमि (grassland) पुनर्जीवन

इन प्रयासों से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी आती है और पर्यावरणीय संतुलन बेहतर होता है।

3. समुदाय-केंद्रित जलवायु शासन 

साहू के कार्यक्रमों ने लो-टेक और हाई-टेक समाधानों को मिलाया है, यह दिखाते हुए कि नागरिक सहभागिता और सरकारी कार्रवाई का संयोजन दीर्घकालिक पर्यावरणीय बदलाव ला सकता है।

अन्य 2025 चैंपियंस ऑफ द अर्थ पुरस्कार विजेता

इस वर्ष के वैश्विक विजेताओं ने जलवायु और पर्यावरण चुनौतियों के लिए क्रांतिकारी समाधान प्रस्तुत किए:

  • प्रशांत द्वीपों का युवा समूह – जलवायु न्याय पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) की ऐतिहासिक सलाहकारी राय सुनिश्चित की

  • मरियम इसूफू (साहेल) – जलवायु-सहनशील वास्तुकला डिजाइन के लिए सम्मानित

  • Imazon (ब्राज़ील) – AI आधारित वनों की कटाई निगरानी के लिए पुरस्कार

  • मैनफ्रेडी काल्टाजिरोने (मरणोपरांत) – मीथेन में कमी पर आजीवन शोध के लिए सम्मान

ये सभी विजेता यह बतलाते हैं कि जलवायु समाधान नवीन, विस्तार योग्य और न्याय-आधारित होने चाहिए।

चैंपियंस ऑफ द अर्थ पुरस्कार का महत्व

2005 में स्थापित, यह UNEP का सबसे प्रतिष्ठित पर्यावरणीय सम्मान है।
इसके 20वें वर्ष में, यह निम्न क्षेत्रों में परिवर्तनकारी पर्यावरण नेतृत्व को पहचान देता है:

  • नीति नेतृत्व

  • उद्यमी दृष्टि

  • प्रेरणा और कार्रवाई

  • विज्ञान और नवाचार

UNEP ने यह भी बताया कि 2025 के विजेता ऐसे समय में साहसिक कदम उठा रहे हैं जब विकासशील देशों के लिए अनुकूलन लागत 2035 तक 365 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच सकती है।

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