भारत के लोक सेवा प्रसारक: दूरदर्शन के 65 वर्ष पूरे होने का उत्सव

भारत का लोक सेवा प्रसारक दूरदर्शन इस वर्ष बेहद गर्व के साथ अपनी 65वीं वर्षगांठ मना रहा है। 15 सितंबर 1959 को अपनी स्थापना के बाद से ही दूरदर्शन भारतीय मीडिया का आधार रहा है, जो राष्ट्र की आवाज़ के रूप में सेवा प्रदान करते हुए एकता, संस्कृति और शिक्षा को बढ़ावा देता रहा है। दिल्ली में एक प्रायोगिक प्रसारण के साथ अपनी सादगीपूर्ण शुरुआत से लेकर दूरदर्शन आज दुनिया के सबसे बड़े प्रसारण संगठनों में से एक बन चुका है।

प्रसारण का विकास

यह लोक सेवा प्रसारण के लिए अपनी प्रतिबद्धता को दृढ़ता से कायम रखते हुए प्रौद्योगिकी और दर्शकों की सहभागिता में आए महत्वपूर्ण परिवर्तनों का साक्षी रहा है। श्‍वेत-श्‍याम टेलीविज़न के दिनों से लेकर डिजिटल और उपग्रह प्रसारण के वर्तमान युग तक, दूरदर्शन अपने विविध दर्शकों की बदलती रुचियों और पसंद की कसौटी पर खरा उतरने के लिए लगातार खुद को विकसित करता आया है। श्‍वेत-श्‍याम प्रसारण के युग से लेकर अपने नेटवर्क में 35 चैनलों तक, अपने 6 राष्ट्रीय चैनलों, 28 क्षेत्रीय चैनलों और 1 अंतर्राष्ट्रीय चैनल के माध्यम से हर क्षेत्र को उसकी अपनी भाषा में अनुभव प्रदान करते हुए; दूरदर्शन अग्रणी लोक सेवा प्रसारक की प्रतिबद्धता के साथ अपनी यात्रा जारी रखे हुए है।

भारतीय समाज पर प्रभाव

बीते 65 वर्षों में, दूरदर्शन ने भारत के सामाजिक-सांस्कृतिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह पौराणिक महाकाव्यों “रामायण” और “महाभारत” से लेकर लोकप्रिय “चित्रहार”, “सुरभि” और “हम लोग” सरीखे कुछ बेहद प्रतिष्ठित टेलीविजन कार्यक्रमों का मंच रहा है, जिन्होंने कई पीढ़ियों को परिभाषित किया है। दूरदर्शन ने सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए स्थान प्रदान किया है, ग्रामीण और शहरी भारत को एक साथ करीब लाया है, और इसने विभिन्न शैक्षिक और सूचनाप्रद कार्यक्रमों के माध्यम से महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दों के बारे में जागरूकता फैलाई है।

विशेष वर्षगांठ कार्यक्रम

डीडी नेशनल इस उपलब्धि का उत्सव मनाने के लिए एक विशेष कार्यक्रम “दिल से दूरदर्शन, DD @65” को प्रसारित करने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह प्रसिद्ध मास्टर जयवीर बंसल और अनिल सिंह, वेंट्रिलोक्विस्ट द्वारा आयोजित एक भव्य कार्यक्रम है, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय जादूगर व मेंटलिस्ट और गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड्स धारक श्री प्रमोद कुमार जैसे प्रतिष्ठित कलाकार प्रस्‍तुति देंगे। उन्हें अनेक राज्य और राष्ट्रीय स्‍तर के पुरस्कारों से सम्‍मानित किया जा चुका है। उनके अलावा देश की सबसे कुशल रेत कलाकारों में से एक और आईडीसी, आईआईटी बॉम्बे की पूर्व छात्रा सुश्री मनीषा स्वर्णकार (रेत कलाकार) हैं। वह बीते 13 वर्षों से रेत कला का प्रदर्शन कर रही हैं और भारत की पहली महिला रेत कलाकार हैं। दूरदर्शन की 65वीं वर्षगांठ पर डीडी नेशनल अपने दर्शकों को बेहतरीन प्रस्तुतियों से मंत्रमुग्ध करने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस कार्यक्रम का प्रसारण 15 सितंबर को सुबह 10 बजे होगा और रात 8 बजे इसका दोबारा प्रसारण किया जाएगा। इस कार्यक्रम में दूरदर्शन की समृद्ध विरासत का कीर्तिगान किया जाएगा।

नवीनीकृत प्रतिबद्धता

इस महत्वपूर्ण अवसर पर दूरदर्शन भारत के प्रत्येक नागरिक को विश्वसनीय, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण सामग्री प्रदान करने के अपने मिशन के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराता है। यह प्रसारक समाचार, मनोरंजन और सूचना का एक प्रासंगिक और विश्वसनीय स्रोत बना रहना सुनिश्चित करने के लिए सभी मंचों पर – टेलीविज़न से लेकर मोबाइल फ़ोन तक – दर्शकों तक पहुंच कायम करने के लिए तकनीकी प्रगति को अपनाना जारी रखे हुए है।

 

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य एम.सिंधिया ने ‘अष्टलक्ष्मी महोत्सव’ वेबसाइट लॉन्च की

केंद्रीय संचार और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री (डोनर) ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने बहुप्रतीक्षित अष्टलक्ष्मी महोत्सव के लिए आधिकारिक वेबसाइट लॉन्च की। लॉन्च कार्यक्रम संचार भवन, नई दिल्ली में हुआ, जिसने राष्ट्रीय और वैश्विक मंच पर पूर्वोत्तर की विशाल क्षमता को आगे बढ़ाने की सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

कार्यक्रम का अवलोकन

6 से 8 दिसंबर, 2024 तक भारत मंडपम, प्रगति मैदान, नई दिल्ली में आयोजित होने वाला अष्टलक्ष्मी महोत्सव एक ऐतिहासिक उत्सव होने वाला है। यह महोत्सव आठ पूर्वोत्तर राज्यों- अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा से प्रेरणा लेता है, जिन्हें सामूहिक रूप से “अष्टलक्ष्मी” के रूप में जाना जाता है, जो समृद्धि के आठ रूपों का प्रतिनिधित्व करते हैं। वेबसाइट, www.ashtalakshmimahotsav.com, इवेंट अपडेट, शेड्यूल और भागीदारी विवरण के लिए वन-स्टॉप समाधान के रूप में काम करेगी, जिससे देश भर के भागीदारों के लिए सहज जुड़ाव सुनिश्चित होगा।

महोत्सव के उद्देश्य

शुभारंभ के अवसर पर बोलते हुए सिंधिया ने पूर्वोत्तर भारत और देश के बाकी हिस्सों के बीच सांस्कृतिक और आर्थिक अंतर को पाटने में इस आयोजन के महत्व को बताया। उन्होंने कहा कि अष्टलक्ष्मी महोत्सव न केवल पूर्वोत्तर की सांस्कृतिक समृद्धि को प्रदर्शित करेगा, बल्कि आर्थिक विकास के लिए उत्प्रेरक का काम भी करेगा, जिससे क्षेत्र के कारीगरों, बुनकरों और उद्यमियों के लिए नए अवसर पैदा होंगे।

कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएं

  • फैशन और डिजाइन कॉन्क्लेव: इसमें पारंपरिक पूर्वोत्तर परिधानों की एक फैशन शो और क्षेत्रीय वस्त्रों पर प्रकाश डालने वाला एक डिजाइन कॉन्क्लेव शामिल है।
  • कारीगरी शिल्प और जीआई उत्पाद: इसमें मुगा और एरी सिल्क बुनाई का लाइव प्रदर्शन और भौगोलिक संकेत (जीआई) उत्पादों का प्रदर्शन शामिल है।
  • व्यापार और निवेश के अवसर: इसमें व्यापारिक सहयोग और निवेश को सुविधाजनक बनाने के लिए एक क्रेता-विक्रेता बैठक और एक निवेश गोलमेज सम्मेलन शामिल है।

विकास के लिए मंच

अष्टलक्ष्मी महोत्सव का उद्देश्य क्षेत्रीय कारीगरों और उद्यमियों को नए व्यावसायिक अवसरों और निवेशों से जुड़ने के लिए एक मंच प्रदान करके दीर्घकालिक आर्थिक लाभ प्रदान करना है।

 

इंडस-एक्स शिखर सम्मेलन का तीसरा संस्करण कैलिफोर्निया में संपन्न हुआ

इंडस-एक्स शिखर सम्मेलन का तीसरा संस्करण संयुक्त राज्य अमेरिका में संपन्न हुआ, जो भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका में संयुक्त रक्षा नवाचार इकोसिस्टम के विकास में हुई प्रगति का प्रतीक है। 9-10 सितंबर 2024 को यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम (यूएसआईएसपीएफ) और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित, यह शिखर सम्मेलन एक ऐतिहासिक कार्यक्रम था।

मुख्य परिणाम

इस शिखर सम्मेलन के दौरान, रक्षा नवाचार में सहयोग बढ़ाने और विभिन्न हितधारकों के बीच उद्योग, अनुसंधान एवं निवेश संबंधी साझेदारी को सुविधाजनक बनाने के लिए सहयोग को घनिष्ठ बनाने हेतु आईडेक्स और अमेरिकी रक्षा विभाग के तहत डिफेंस इनोवेशन यूनिट (डीआईयू) के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। शिखर सम्मेलन के अन्य मुख्य आकर्षणों में इंडस-एक्स के तहत एक नई चुनौती की घोषणा, इंडस-एक्स के प्रभाव रिपोर्ट को जारी करना और आईडेक्स एवं डीआईयू वेबसाइटों पर आधिकारिक इंडस-एक्स वेबपेज का शुभारंभ शामिल था।

तकनीकी प्रदर्शन और विशेषज्ञ संवाद

यह शिखर सम्मेलन स्टार्टअप्स/एमएसएमई द्वारा अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों के संयुक्त प्रदर्शन के लिए एक मंच प्रदान करता है। यह इंडस-एक्स के तहत दो सलाहकार मंचों, वरिष्ठ सलाहकार समूह और वरिष्ठ नेता मंच के माध्यम से महत्वपूर्ण संवाद को भी सक्षम बनाता है। चर्चा में अन्य बातों के अलावा, भविष्य की प्रौद्योगिकी संबंधी रुझानों, स्टार्टअप्स की क्षमता निर्माण, रक्षा नवाचारों के लिए वित्त पोषण के अवसर और रक्षा आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने पर ध्यान केन्द्रित किया गया। दोनों देशों के रक्षा उद्योग, निवेश फर्मों, स्टार्टअप, शिक्षा जगत के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों, विचारकों, उत्प्रेरकों, नीति निर्माताओं आदि ने भाग लिया।

नेतृत्व और प्रतिबद्धता

भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने वाले संयुक्त सचिव (रक्षा उद्योग संवर्धन) अमित सतीजा ने कहा कि इंडस-एक्स शिखर सम्मेलन के तीसरे संस्करण ने नवाचार और रणनीतिक सहयोग के माध्यम से रक्षा प्रौद्योगिकी को आगे बढ़ाने के प्रति दोनों देशों की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

इंडस-एक्स पहल का संचालन रक्षा मंत्रालय की ओर से इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सीलेंस (आईडेक्स) एवं संयुक्त राज्य अमेरिका के रक्षा विभाग (डीओडी) के तहत डिफेंस इनोवेशन यूनिट (डीआईयू) द्वारा किया जा रहा है। जून 2023 में प्रधानमंत्री की संयुक्त राज्य अमेरिका की राजकीय यात्रा के दौरान इंडस-एक्स के शुभारंभ के बाद से, यह पहल बेहद कम समय में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने में समर्थ रही है।

DRDO ने किया हल्के टैंक ‘जोरावर’ का सफल परीक्षण

भारतीय लाइट टैंक ‘ज़ोरावर’ का शुरुआती ऑटोमोटिव परीक्षण किया गया है। भारतीय लाइट टैंक के डेवलपमेंटल फील्ड फायरिंग ट्रायल का पहला चरण सफल रहा। फील्ड ट्रायल ने रेगिस्तानी इलाकों में इच्छित उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया है। टेस्ट के दौरान टैंक ने तय टारगेट पर अपेक्षित सटीकता से निशाना साध। यह टेस्ट रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने सफलतापूर्वक किया।

पहाड़ी इलाकों में तैनाती के लिए सक्षम

जोरावर टैंक उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों जैसे कि पहाड़ी इलाकों में तैनाती के लिए सक्षम है। पहाड़ी इलाकों में तैनाती के लिए जोरावर को एक अत्यधिक बहुमुखी प्लेटफॉर्म माना जा रहा है। लेकिन, यह न केवल पहाड़ी इलाकों के लिए एक बेहतरीन टैंक है, बल्कि रेगिस्तानी इलाके में भी इसने अपना प्रभाव दिखाया है। रेगिस्तान में किए गए फील्ड परीक्षणों के दौरान, इस भारतीय लाइट टैंक ने सभी इच्छित उद्देश्यों को कुशलतापूर्वक पूरा किया। यहां ट्रायल के दौरान जोरावर टैंक ने असाधारण प्रदर्शन किया है।

फायरिंग प्रदर्शन का कठोरता से मूल्यांकन

प्रारंभिक चरण में, जोरावर टैंक की फायरिंग प्रदर्शन का कठोरता से मूल्यांकन किया गया है। इस मूल्यांकन के दौरान टैंक ने निर्धारित लक्ष्यों पर सटीकता से प्रहार क‍िया। जोरावर को लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड के सहयोग से डीआरडीओ की एक इकाई, लड़ाकू वाहन अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (सीवीआरडीई) द्वारा सफलतापूर्वक विकसित किया गया है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों सहित कई भारतीय उद्योग (एमएसएमई) ने देश के भीतर स्वदेशी रक्षा विनिर्माण क्षमताओं की ताकत का प्रदर्शन करते हुए विभिन्न उप-प्रणालियों के विकास में योगदान दिया है।

सामरिक महत्व

मंत्रालय ने बताया कि भारतीय सेना 350 से अधिक हल्के टैंक की तैनाती पर विचार कर रही है, जिनमें से अधिकतर को पहाड़ी सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात किया जाएगा।

केंद्र सरकार ने पोर्ट ब्लेयर का नाम बदलकर श्री विजयपुरम रखा

भारत सरकार ने अंडमान और निकोबार द्वीप की राजधानी पोर्ट ब्लेयर का नाम बदल दिया है। सरकार ने पोर्ट ब्लेयर का नाम बदलकर ‘श्री विजयपुरम’ कर दिया है। इसकी जानकारी देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि ‘श्री विजयपुरम’ नाम हमारे स्वाधीनता के संघर्ष और इसमें अंडमान और निकोबार के योगदान को दर्शाता है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पर किए पोस्ट में कहा कि देश को गुलामी के सभी प्रतीकों से मुक्ति दिलाने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प से प्रेरित होकर गृह मंत्रालय ने पोर्ट ब्लेयर का नाम ‘श्री विजयपुरम’ करने का फैसला लिया है। इस भारतीय द्वीप का हमारे देश की स्वाधीनता और इतिहास में अद्वितीय स्थान रहा है।

इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने 23 जनवरी 2023 को नेताजी की 126वीं बर्थ एनिवर्सरी पर अंडमान और निकोबार आइलैंड के 21 द्वीपों का नाम परमवीर चक्र विजेताओं के नाम पर करने का फैसला लिया था।

पहले भी बदले थे तीन द्वीपों के नाम

2018 में भी जब पीएम मोदी अंडमान-निकोबार पहुंचे थे तब उन्होंने तीन द्वीपों के नाम बदलने का ऐलान किया था। उन्होंने हैवलॉक द्वीप, नील द्वीप और रॉस द्वीप के नाम बदल दिए थे। पीएम मोदी ने कहा था कि हैवलॉक द्वीप को अब स्वराज द्वीप, नील द्वीप को शहीद द्वीप और रॉस द्वीप को नेताजी सुभाष चंद्र द्वीप के नाम से जाना जाएगा।

भारत ने रूस में ब्रिक्स लिटरेचर फोरम 2024 में भाग लिया

ब्रिक्स साहित्य फोरम 2024 का आरंभ 11 सितंबर 2024 को रूस के कजान में हुआ। सम्मेलन का आधिकारिक उद्घाटन कजान के मेयर इल्सुर मेत्शिन ने किया। साहित्यिक ब्रिक्स के 2024 संस्करण का थीम “नए यथार्थ में विश्व साहित्य, परंपराओं, राष्ट्रीय मूल्यों और संस्कृतियों का संवाद” है। यह सम्मेलन ब्रिक्स देशों के लेखकों, कवियों, दार्शनिकों, कलाकारों और विद्वानों का संगम है। भारत का प्रतिनिधित्व साहित्य अकादमी के अध्यक्ष माधव कौशिक और साहित्य अकादमी के सचिव डॉ. के. श्रीनिवासराव कर रहे हैं। पूर्ण सत्र में, माधव कौशिक ने इस विषय पर बात की कि आज की दुनिया में साहित्य कितना महत्त्वपूर्ण है और साहित्य विश्व के तमाम समाजों के बीच किस तरह एकता और सहयोग को बढ़ावा देता है।

भारतीय प्रतिभागियों से जुड़े दूसरे कार्यक्रम में, “भारत के लेखकों से मिलें” विषय के साथ, “वोल्गा से गंगा: परंपरा और बहुसांस्कृतिकवाद का उत्सव, संचालक: एवगेनी अब्दुल्लाव,” डॉ. के. श्रीनिवासराव ने इस विषय पर प्रकाश डाला कि नदी आधारित संस्कृतियों ने विश्व में कैसे बहुसांस्कृतिकवाद को बढ़ावा दिया और बहुसांस्कृतिकवाद किस तरह एकता को बढ़ावा देता है और सामाजिक प्रगति के आगे बढ़ाता है, वहीं श्री माधव कौशिक ने भारत व रूस के मध्य साहित्यिक परंपरा पर प्रकाश डाला और बताया कि कैसे उनमें कई सांस्कृतिक मूल्य समाहित हैं।

हिंदी दिवस 2024: 14 सितंबर

हर साल 14 सितंबर को भारत में हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह हिंदी भाषा का प्रचार-प्रसार करने के लिए एक अहम दिन है। हिंदी देश की सांस्कृतिक एकता को दर्शाती है। यह दिन हमें हमारी सांस्कृतिक धरोहर की याद दिलाता है और नई पीढ़ी को अपनी मातृभाषा के प्रति गर्व महसूस कराता है। इस दिन विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिससे हिंदी का महत्व और भी बढ़ जाता है।

हिंदी दिवस मनाने का उद्देश्य

हिंदी दिवस मनाने का उद्देश्य हिंदी के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देना और इसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है। युवाओं को हिंदी के महत्व और उसके साहित्य से परिचित कराना है। हिंदी के माध्यम से भारतीय संस्कृति और परंपराओं की रक्षा करना है। हिंदी के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना और नई पीढ़ी को अपनी मातृभाषा के प्रति गर्व महसूस कराना है।

हिंदी दिवस कब मनाया जाता है?

हिंदी दिवस 14 सितंबर को मनाया जाता है। इसी दिन 1949 में संविधान सभा ने हिंदी को भारत की राजभाषा के रूप में मान्यता दी थी। यह दिन भारत के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है। यह हिंदी भाषा के महत्त्व को दर्शाता है। हिंदी दिवस न केवल हिंदी भाषा की प्रतिष्ठा का प्रतीक है, बल्कि यह देश की सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक है।

हिंदी दिवस का महत्व

हिंदी देश के विभिन्न हिस्सों में लोगों के बीच बात चीत करने की प्रमुख भाषा है। हिंदी दिवस का महत्व हिंदी भाषा को बढ़ावा देने में है। यह दिवस हमें हिंदी की विरासत की याद दिलाता है। भारत में हिंदी साहित्य का भी बहुत बड़ा योगदान है।

​हिंदी दिवस का इतिहास

साल 1953 में, पहली बार 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया गया था। इसका उद्देश्य हिंदी भाषा के महत्व और प्रसार को बढ़ावा देना था। राजभाषा आयोग ने इस दिन को मनाने का विचार प्रस्तुत किया था। इसका उद्देश्य हिंदी को राष्ट्रीय स्तर पर प्रसारित करना था। 14 सितंबर 1949 को भारतीय संविधान सभा ने हिंदी को देवनागरी लिपि में भारत की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया। 1953 से हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है।

 

अल्जीरिया ब्रिक्स न्यू डेवलपमेंट बैंक में शामिल हुआ

अल्जीरिया को ब्रिक्स न्यू डेवलपमेंट बैंक के सबसे नए सदस्य के रूप में मंजूरी दी गई है, जो विश्व बैंक और आईएमएफ जैसे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के विकल्प तलाशने वाले अन्य देशों में शामिल हो गया है। अल्जीरिया के अलावा, ब्रिक्स न्यू डेवलपमेंट बैंक ने अपनी बढ़ती सदस्यता के हिस्से के रूप में मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, ईरान और सऊदी अरब सहित अन्य देशों का स्वागत किया है। 2015 में ब्रिक्स देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) द्वारा स्थापित एनडीबी का उद्देश्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों में बुनियादी ढांचे और सतत विकास परियोजनाओं का समर्थन करना है।

विस्तार और सदस्यता

अपनी स्थापना के बाद से, NDB ने संस्थापक ब्रिक्स देशों से परे नए सदस्यों को शामिल करने के लिए विस्तार किया है। 2021 में, बांग्लादेश, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात और उरुग्वे को इसमें जोड़ा गया। अपने व्यापक आर्थिक संकेतकों के अनुकूल मूल्यांकन के बाद अल्जीरिया का प्रवेश वैश्विक वित्तीय प्रणाली में इसके एकीकरण में एक महत्वपूर्ण कदम है।

आर्थिक प्रभाव

अफ्रीका के प्रमुख प्राकृतिक गैस निर्यातक के रूप में, अल्जीरिया की सदस्यता से उसके आर्थिक विकास की संभावनाओं को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। एनडीबी की भूमिका विकास परियोजनाओं के लिए संसाधन जुटाना है, जो विश्व बैंक और आईएमएफ जैसे पारंपरिक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों का विकल्प प्रदान करता है।

 

राजनाथ सिंह ने जोधपुर में IDAX-24 एक्सपो का उद्घाटन किया

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 12 सितंबर, 2024 को जोधपुर में भारत रक्षा विमानन प्रदर्शनी (IDAX-24) का उद्घाटन किया। यह प्रमुख आयोजन भारतीय वायु सेना द्वारा आयोजित सबसे बड़े बहुराष्ट्रीय हवाई अभ्यासों में से एक, अभ्यास तरंग शक्ति-24 के साथ मेल खाता है। 12-14 सितंबर तक चलने वाला IDAX-24 भारतीय विमानन उद्योग की महत्वपूर्ण प्रगति और योगदान को प्रदर्शित करता है।

12 से 14 सितंबर तक IDAX-24 की प्रदर्शनी

गौरतलब हो, 12 से 14 सितंबर तक आयोजित इस प्रदर्शनी में विभिन्न उत्पादों और प्रौद्योगिकियों के साथ रक्षा उद्योग की भागीदारी रहेगी। इस अवसर पर रक्षा उत्पादों और प्रौद्योगिकियों की एक विस्तृत श्रृंखला का प्रदर्शन किया जाएगा।

इसमें विदेशी मित्र देशों और भारतीय दर्शकों को सार्वजनिक क्षेत्र के रक्षा उपक्रमों, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन, विभिन्न श्रेणी के निजी उद्योगों और नवीन उद्यम सहित भारतीय विमानन उद्योग से संबंधित प्रतिभागियों से मिलने और वार्तालाप करने का अवसर मिलेगा।

IDAX का लक्ष्य

IDAX का लक्ष्य तरंग शक्ति 2024 में भाग लेने वाले वैश्विक वायु सेनाओं के निर्णय-कर्ताओं और अंतिम उपयोगकर्ताओं के समक्ष भारतीय विमानन उद्योग के स्वदेशी कौशल को प्रदर्शित करना है।

भारत के एयरोस्पेस क्षेत्र की बढ़ती ताकत

इसी क्रम मेंभारतीय वायु सेना का एयरोस्पेस डिजाइन निदेशालय (डीएडी) साझेदार स्टार्टअप्स के साथ प्रदर्शनी में भाग लेगा। इन स्टार्टअप्स से मानव रहित हवाई खतरे का मुकाबला करने के लिए आरएफगन, हाई एल्टीट्यूड छद्म उपग्रह (एचएपीएस), लोइटरिंग गोला बारूद, एयर-लॉन्च फ्लेक्सिबल एसेट, संवर्धित वास्तविकता/आभासी वास्तविकता (एआर/वीआर) स्मार्ट ग्लास तकनीक उपकरण जैसीविशिष्ट प्रौद्योगिकियों और उत्पादों का प्रदर्शन करने की संभावना है। प्रशिक्षण के लिए, रनवे की त्वरित मरम्मत करने के लिए एक्सपेंडेबल एक्टिव डिकॉय, रियल-टाइम एयर-क्रू स्वास्थ्य निगरानी प्रणालीऔर फोल्डेबल फील्ड मैट, भारत के एयरोस्पेस क्षेत्र की बढ़ती ताकत और क्षमता को प्रदर्शित करते हैं।

अगस्त में खुदरा महंगाई 3.65% पर, लगातार दूसरे महीने 4% से कम

भारत के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा मुद्रास्फीति जुलाई में 3.6% से अगस्त में मामूली रूप से बढ़कर 3.65% हो गई, जो लगभग पाँच वर्षों में दूसरी बार भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के 4% के मध्यम अवधि लक्ष्य से नीचे रही। यह मामूली वृद्धि पिछले वर्ष के उच्च आधार प्रभाव के कारण है। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में भी मामूली वृद्धि देखी गई, जो जून में 4.72% की तुलना में जुलाई में 4.83% तक पहुँच गई।

खाद्य मुद्रास्फीति की गतिशीलता

जुलाई में 5.42% से अगस्त में खाद्य मुद्रास्फीति बढ़कर 5.66% हो गई। यह वृद्धि कई श्रेणियों में बढ़ी कीमतों के कारण हुई है: सब्जियाँ (10.71%), फल (6.45%), खाद्य और पेय पदार्थ (5.30%), अंडे (7.14%), और गैर-मादक पेय पदार्थ (2.40%)। इसके विपरीत, अनाज (7.31%), दूध (2.98%), और मांस और मछली (4.30%) की मूल्य वृद्धि धीमी हो गई, जबकि दालों में 13.6% की गिरावट देखी गई, हालाँकि यह दोहरे अंकों में रही। घरेलू खाद्य तेल की कीमतों में चल रही गिरावट ने कुछ मूल्य दबावों को कम किया है, लेकिन हाल ही में वैश्विक मूल्य वृद्धि घरेलू मुद्रास्फीति के लिए जोखिम पैदा करती है।

कोर मुद्रास्फीति और ईंधन की कीमतें

कोर मुद्रास्फीति, अस्थिर खाद्य और ईंधन घटकों को छोड़कर, 3.5% पर स्थिर रही। कपड़ों और जूतों (2.72%), और मनोरंजन (2.31%), शिक्षा (3.74%), और स्वास्थ्य (4.10%) जैसी सेवाओं की कीमतों में मामूली वृद्धि देखी गई। ईंधन की कीमतों में -5.31% की गिरावट जारी रही।

आर्थिक पूर्वानुमान

केयर रेटिंग्स की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा ने अगस्त में मुद्रास्फीति में वृद्धि का कारण खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों को बताया, जो दालों और तिलहनों की बुआई में देरी के कारण और बढ़ गई। आईसीआरए की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने सेवाओं की मांग और कपास की बुआई में कमी के कारण पूरे वित्तीय वर्ष में कोर सीपीआई मुद्रास्फीति में मामूली वृद्धि की संभावना जताई। बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने संकेत दिया कि मुद्रास्फीति के रुझान में लगातार गिरावट आने तक आरबीआई दरों में कटौती नहीं करेगा।

आईआईपी क्षेत्रीय विश्लेषण

आईआईपी डेटा ने मिश्रित प्रदर्शन को उजागर किया: विनिर्माण उत्पादन में 4.6% की वृद्धि हुई, जबकि खनन और बिजली उत्पादन में क्रमशः 3.7% और 7.9% की गिरावट आई। खाद्य उत्पाद, कपड़ा, चमड़ा और रसायन सहित 23 विनिर्माण क्षेत्रों में से आठ में संकुचन का अनुभव हुआ। पूंजीगत वस्तुओं (12%) और मध्यवर्ती वस्तुओं (6.8%) में वृद्धि मजबूत रही, लेकिन उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं (8.2%) में गिरावट आई और उपभोक्ता गैर-टिकाऊ वस्तुओं (-4.4%) में संकुचन हुआ, जो ग्रामीण मांग में चल रहे तनाव को दर्शाता है।

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