हेमंत रूपानी हिंदुस्तान कोका-कोला बेवरेजेज के नए सीईओ नियुक्त

कोका-कोला कंपनी ने हेमंत रुपानी को हिंदुस्तान कोका-कोला बेवरेजेस प्राइवेट लिमिटेड (HCCB) का नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति 8 सितंबर 2025 से प्रभावी होगी। वे वर्तमान CEO जुआन पाब्लो रोड्रिगेज का स्थान लेंगे, जो कोका-कोला समूह में नई भूमिका निभाने जा रहे हैं। यह बदलाव भारत की सबसे बड़ी पेय उत्पाद बोतलिंग कंपनियों में से एक के लिए एक महत्वपूर्ण नेतृत्व परिवर्तन है।

HCCB में एक नया अध्याय

हेमंत रुपानी वर्तमान में मॉनडेलीज इंटरनेशनल इंक में साउथईस्ट एशिया के बिजनेस यूनिट प्रेसिडेंट हैं। वे इंडोनेशिया, फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया, सिंगापुर और थाईलैंड जैसे बाज़ारों का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्हें दो दशकों से अधिक का अनुभव है, जिसमें उन्होंने एफएमसीजी, टेक्नोलॉजी और टेलीकॉम सेक्टर में नेतृत्व भूमिकाएं निभाई हैं।

रुपानी ने 2016 में मॉंडेलीज जॉइन किया था और भारत में सेल्स डायरेक्टर के रूप में शुरुआत की थी। इसके बाद वे वियतनाम में वाइस प्रेसिडेंट और एमडी बने और 2022 में साउथईस्ट एशिया के प्रमुख पद पर पदोन्नत हुए।

नेतृत्व परिवर्तन और भविष्य की दिशा

हेमंत रुपानी, जुआन पाब्लो रोड्रिगेज का स्थान लेंगे, जो HCCB के मौजूदा CEO हैं। रोड्रिगेज कोका-कोला समूह में नई भूमिका में जाएंगे, हालांकि उनकी अगली नियुक्ति की जानकारी अभी साझा नहीं की गई है। यह बदलाव ऐसे समय पर हो रहा है जब HCCB भारत में अपने बाजार को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है।

HCCB की पृष्ठभूमि और भविष्य की योजनाएं

HCCB, कोका-कोला उत्पादों की भारत की सबसे बड़ी बोतलिंग कंपनी है। दिसंबर 2024 में कोका-कोला ने जुबिलेंट भारतीया ग्रुप के साथ एक साझेदारी की घोषणा की थी, जिसमें इस समूह ने हिंदुस्तान कोका-कोला होल्डिंग्स प्रा. लि. (HCCB की मूल कंपनी) में 40% हिस्सेदारी खरीदने का निर्णय लिया था। इस कदम का उद्देश्य भारत में स्थानीय भागीदारी और विकास को बढ़ावा देना है।

रुपानी की नियुक्ति से इन लक्ष्यों को समर्थन मिलने की उम्मीद है, क्योंकि उन्होंने PepsiCo India, Vodafone, Infosys, Britannia और ICI India Ltd जैसे प्रतिष्ठित संगठनों में काम कर गहरा व्यावसायिक अनुभव अर्जित किया है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने नाश्ते के पोषण पर अभियान शुरू किया

भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय ने लोकप्रिय भारतीय स्नैक्स में मौजूद पोषण संबंधी तथ्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए एक नई अभियान की शुरुआत की है। इस पहल की शुरुआत AIIMS नागपुर में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में हुई है। इसका उद्देश्य है कि खाने में छिपी हुई चीनी, वसा और तेल के कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं को कम किया जाए और लोगों को बेहतर खान-पान के विकल्प चुनने के लिए प्रेरित किया जाए, ताकि जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों पर नियंत्रण पाया जा सके।

स्नैक्स में क्या है, अब दिखेगा पोस्टर पर

AIIMS नागपुर में इस अभियान के तहत लोकप्रिय खाद्य स्टॉलों के पास ऐसे पोस्टर लगाए गए हैं जो यह दर्शाते हैं कि समोसे, बिस्किट, जलेबी जैसे रोज़ खाए जाने वाले स्नैक्स में कितनी मात्रा में चीनी, फैट और ट्रांस फैट मौजूद है। इन पोस्टरों में यह भी बताया गया है कि यदि इन चीज़ों का नियमित रूप से सेवन किया जाए तो यह हृदय रोग, मधुमेह और मोटापे जैसी बीमारियों का कारण बन सकती हैं।

इन पोस्टरों का उद्देश्य डराना नहीं, बल्कि लोगों को संतुलन और संयम की सीख देना है ताकि वे स्वाद का आनंद लेते हुए भी स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं। सरकार की योजना है कि इस पहल को जल्द ही अन्य शहरों और सार्वजनिक स्थानों तक भी फैलाया जाएगा।

कार्यालयों में भी दिखेगा बदलाव

स्वास्थ्य सचिव ने सभी सरकारी विभागों से इस अभियान को समर्थन देने को कहा है, जिसमें शामिल हैं:

  • कार्यालय की स्टेशनरी और प्रकाशनों पर स्वास्थ्य संबंधी संदेश

  • ऑफिस कैंटीन में फल और कम वसा वाले विकल्प

  • शक्कर युक्त पेय और तले-भुने स्नैक्स को कम करना

  • सीढ़ियों के इस्तेमाल और हल्के व्यायाम को प्रोत्साहन देना

छिपे हुए खतरे और भारत में मोटापे की चुनौती

पकौड़े, समोसे, जलेबी और बिस्किट जैसे स्नैक्स स्वादिष्ट जरूर होते हैं, लेकिन इनमें छिपी अस्वास्थ्यकर वसा, चीनी और ट्रांस फैट लोगों को धीरे-धीरे गंभीर बीमारियों की ओर ले जाते हैं। अक्सर लोग इनका सेवन करते समय यह नहीं जानते कि ये मोटापा, डायबिटीज़, स्ट्रोक, हृदय रोग और यहां तक कि कैंसर जैसी बीमारियों के लिए ज़िम्मेदार हो सकते हैं।

The Lancet की एक रिपोर्ट के अनुसार, यदि यही स्थिति रही तो 2050 तक भारत में 45 करोड़ लोग मोटापे या अधिक वजन की श्रेणी में आ सकते हैं, जो चीन के बाद सबसे अधिक होगा। इसका एक मुख्य कारण है कि सस्ते और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की उपलब्धता और इनका अत्यधिक प्रचार लोगों को गलत खाने की ओर आकर्षित कर रहा है।

इस नई पहल के तहत पोस्टर और विजुअल संकेतों के ज़रिए लोगों को “नजिंग” तकनीक से प्रेरित किया जाएगा — यानी बिना किसी सख्त नियम के उन्हें बेहतर भोजन विकल्पों की ओर सहज रूप से प्रेरित किया जाएगा।

NCDEX और IMD ने मिलाया हाथ, भारत के पहले मौसम डेरिवेटिव्स की शुरुआत

नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज (NCDEX) ने भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत भारत में पहली बार “मौसम डेरिवेटिव्स” शुरू किए जाएंगे। यह नई वित्तीय व्यवस्था किसानों और मौसम-आधारित उद्योगों को अनियमित वर्षा, लू और असमय तूफानों जैसी जलवायु जोखिमों से बचाने में मदद करेगी।

क्या होते हैं मौसम डेरिवेटिव्स?

मौसम डेरिवेटिव्स विशेष वित्तीय उपकरण होते हैं, जो किसानों, परिवहनकर्ताओं और अन्य मौसम-आधारित व्यवसायों को मौसम से होने वाले नुकसान से सुरक्षा प्रदान करते हैं। इस समझौते के तहत, NCDEX IMD के विश्वसनीय मौसम डेटा का उपयोग कर वर्षा आधारित फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट विकसित करेगा। ये कॉन्ट्रैक्ट स्थान-विशिष्ट और मौसम-आधारित होंगे, जिससे वास्तविक खेती की परिस्थितियों को ध्यान में रखा जा सकेगा।

यह भारत में पहली बार है जब इस प्रकार का उत्पाद बाजार में आएगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में जलवायु लचीलापन (climate resilience) को मजबूती मिलेगी।

नेतृत्व की प्रतिक्रियाएं

अरुण रस्ते, प्रबंध निदेशक और सीईओ, NCDEX, ने कहा कि यह कदम कमोडिटी बाजार में एक नए युग की शुरुआत है। उन्होंने बताया कि बदलते जलवायु पैटर्न फसलों और आय पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहे हैं, ऐसे में बाजार आधारित समाधान जैसे मौसम डेरिवेटिव्स किसानों को बेहतर तैयारी का अवसर देंगे। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह नवाचार पर्यटन और परिवहन जैसे अन्य उद्योगों को भी लाभ पहुंचा सकता है।

डॉ. एम. मोपात्रा, महानिदेशक, IMD, ने कहा कि IMD पहले से ही कृषि और आपदा चेतावनी प्रणाली में सहयोग करता आया है। उन्होंने कहा, “इस समझौते के जरिए अब IMD का डेटा वित्तीय स्थिरता में भी योगदान देगा और किसानों तथा अन्य क्षेत्रों को जलवायु प्रभावों से निपटने में सहायता करेगा।”

प्रशिक्षण, अनुसंधान और विस्तार योजनाएं

यह साझेदारी न केवल नए मौसम-आधारित उत्पादों के विकास को बढ़ावा देगी, बल्कि:

  • किसानों, एफपीओ (किसान उत्पादक संगठन) और व्यापारियों के लिए प्रशिक्षण और कार्यशालाएं

  • मौसम जोखिम की बेहतर समझ के लिए संयुक्त शोध

  • कीमतों और जोखिम प्रबंधन के लिए अधिक कुशल बाजार टूल्स

जैसी पहल को भी समर्थन देगी। ये डेरिवेटिव्स ऐतिहासिक और रीयल-टाइम मौसम डेटा पर आधारित होंगे, जिससे इनकी विश्वसनीयता और सटीकता बढ़ेगी।

साझेदार संस्थाओं के बारे में

NCDEX भारत का सबसे बड़ा कृषि कमोडिटी एक्सचेंज है, जो किसानों और व्यापारियों को कीमत निर्धारण और जोखिम प्रबंधन की सुविधा देता है। 2003 में स्थापित यह संस्था आधुनिक और तकनीकी रूप से सक्षम एग्री-मार्केट सिस्टम तैयार करने में अग्रणी रही है।

IMD, जिसकी स्थापना 1875 में हुई थी, भारत की राष्ट्रीय मौसम एजेंसी है। यह विभाग मौसम पूर्वानुमान, आपदा चेतावनी और कृषि, उड्डयन, सिंचाई, तेल खोज आदि क्षेत्रों में सेवाएँ प्रदान करता है, और चरम मौसम घटनाओं से जीवन व संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।

OpenAI, गूगल, एंथ्रोपिक, एक्सएआई को अमेरिकी रक्षा विभाग से 200 मिलियन डॉलर का अनुबंध मिला

संयुक्त राज्य अमेरिका के रक्षा विभाग (DoD) ने OpenAI, Google, Anthropic और एलन मस्क की कंपनी xAI को 200-200 मिलियन डॉलर के अनुबंध (contracts) दिए हैं। इन अनुबंधों का उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग करके राष्ट्रीय रक्षा प्रणाली को अधिक स्मार्ट और तेज़ बनाना है, ताकि अमेरिका वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों में आगे बना रहे।

सेना के लक्ष्यों के लिए AI का उपयोग

यह परियोजना एजेंटिक AI सिस्टम बनाने पर केंद्रित है — यानी ऐसे स्वायत्त सॉफ़्टवेयर एजेंट, जो जटिल कार्य अपने आप कर सकें। इन टूल्स का उपयोग लड़ाकू अभियानों और रक्षा क्षेत्र की दैनिक गतिविधियों में किया जाएगा।
CDAO (Chief Digital and Artificial Intelligence Office) ने बताया कि यह कदम पेंटागन को नई AI तकनीक तक पहुंच दिलाएगा और तकनीकी कंपनियों को राष्ट्रीय सुरक्षा की वास्तविक जरूरतों को समझने में मदद करेगा।

AI की अग्रणी कंपनियाँ करेंगी सहयोग

  • OpenAI, जो ChatGPT के लिए प्रसिद्ध है, मिशन-क्रिटिकल कार्यों के लिए AI टूल्स विकसित करेगा।

  • Google अपनी DeepMind इकाई के साथ रीइन्फोर्समेंट लर्निंग और भाषा मॉडल में विशेषज्ञता लाएगा।

  • Anthropic, जो सुरक्षित और भरोसेमंद AI पर केंद्रित है, अपनी उन्नत तकनीक के साथ सहयोग करेगा।

  • xAI, एलन मस्क द्वारा स्थापित तेजी से उभरती कंपनी, इस साझेदारी का हिस्सा बनेगी।

इन कंपनियों को इसलिए चुना गया क्योंकि वे ऐसी अग्रणी AI तकनीकों का विकास कर रही हैं, जो सरकारी और सामरिक उपयोग के लिए विश्वसनीय और प्रभावी मानी जाती हैं।

सरकार की सुरक्षित और प्रतिस्पर्धी AI की दिशा में पहल

व्हाइट हाउस ने अप्रैल 2025 में अपने एक निर्देश में सभी सरकारी एजेंसियों से कहा था कि वे अमेरिका में मजबूत और प्रतिस्पर्धी AI इकोसिस्टम को बढ़ावा दें। इसमें AI को जनहित और राष्ट्रीय सुरक्षा, दोनों उद्देश्यों के लिए अपनाने पर ज़ोर दिया गया है।

यह नया रक्षा अनुबंध उसी दिशा में एक बड़ा कदम है, जिसमें शीर्ष AI कंपनियों और सेना के बीच सहयोग को प्रोत्साहित किया गया है, ताकि बनाए गए AI टूल्स सुरक्षित, प्रभावशाली और वास्तविक उपयोग के लिए तैयार हों।

मार्कराम, मैथ्यूज जून 2025 के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बने

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने दक्षिण अफ्रीका के ऐडन मार्कराम और वेस्टइंडीज की हेले मैथ्यूज़ को जून 2025 के लिए पुरुष और महिला वर्ग में ‘प्लेयर ऑफ द मंथ’ चुना है। दोनों खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन ने उनकी टीमों को अहम मुकाबलों में जीत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

लॉर्ड्स में ऐडन मार्कराम की विजयी पारी

30 वर्षीय ऐडन मार्कराम को ICC वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ लॉर्ड्स में खेले गए मैच में शानदार प्रदर्शन के लिए यह सम्मान मिला। उन्होंने दूसरी पारी में 207 गेंदों में 136 रनों की मैच जिताऊ पारी खेली और कप्तान टेम्बा बावुमा के साथ 147 रन की साझेदारी की। इस पारी की बदौलत दक्षिण अफ्रीका ने 282 रनों का लक्ष्य हासिल कर मैच को पाँच विकेट से जीत लिया।

यह जीत 1998 की चैंपियंस ट्रॉफी के बाद दक्षिण अफ्रीका का पहला ICC खिताब है। मार्कराम ने बल्लेबाज़ी के साथ-साथ गेंदबाज़ी में भी योगदान दिया, उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की दोनों पारियों में एक-एक विकेट लिया। इस पुरस्कार के लिए उन्होंने कगिसो रबाडा (दक्षिण अफ्रीका) और पथुम निसांका (श्रीलंका) को पछाड़ा।

हेले मैथ्यूज़ का ऐतिहासिक चौथा पुरस्कार

वेस्टइंडीज महिला टीम की कप्तान हेले मैथ्यूज़ को जून माह की ICC महिला प्लेयर ऑफ द मंथ का खिताब मिला। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तीन मैचों की वनडे श्रृंखला में 104 रन बनाए और 4 विकेट लिए, जिसमें तीसरे मुकाबले में अर्धशतक भी शामिल था।

इसके बाद टी20 श्रृंखला में भी उनका शानदार प्रदर्शन जारी रहा। उन्होंने 147 रन बनाए, जिसमें दो अर्धशतक शामिल थे और साथ ही 2 विकेट भी लिए। इस श्रृंखला को वेस्टइंडीज ने 2–1 से जीत लिया और मैथ्यूज़ को प्लेयर ऑफ द सीरीज घोषित किया गया।

यह चौथी बार है जब हेले मैथ्यूज़ को यह मासिक पुरस्कार मिला है। वे ऑस्ट्रेलिया की एशले गार्डनर के बाद यह उपलब्धि हासिल करने वाली दूसरी खिलाड़ी बन गई हैं।

भारतीय सेना ने मेरठ में ‘प्रचंड शक्ति’ का प्रदर्शन किया

भारतीय सेना की राम डिवीजन ने उत्तर प्रदेश के मेरठ स्थित खड़गा कोर फील्ड ट्रेनिंग एरिया में एक शक्तिशाली सैन्य प्रदर्शन का आयोजन किया, जिसे ‘प्रचंड शक्ति’ नाम दिया गया। इस आयोजन में यह दिखाया गया कि ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) प्रणाली, और लॉइटरिंग हथियारों जैसी आधुनिक तकनीकें सेना की अग्रिम इकाइयों की ताकत और गति को कैसे बढ़ा सकती हैं।

आधुनिक युद्धक क्षमताओं का प्रदर्शन

‘प्रचंड शक्ति’ प्रदर्शन का उद्देश्य सेना की स्ट्राइक कोर अभियानों में शामिल पैदल सेना को अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित करना था। इसमें निम्नलिखित उन्नत प्रणालियों को प्रदर्शित किया गया:

  • मानवरहित हवाई वाहन (UAVs)

  • AI-सक्षम युद्ध प्रणाली

  • स्वचालित प्लेटफॉर्म

  • लॉइटरिंग म्युनिशन्स (बार-बार हमला करने वाले हथियार)

इन तकनीकों से सैनिकों को शत्रु क्षेत्र के भीतर गहराई तक हमले के दौरान अधिक फुर्ती, सटीकता और सुरक्षा मिलती है।

तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम

यह प्रदर्शन सेना के ‘Year of Tech Absorption’ अभियान का हिस्सा है। इस पहल के तहत सेना स्वदेशी और अत्याधुनिक तकनीकों को अपनाने का प्रयास कर रही है, ताकि युद्धक्षेत्र में उनकी प्रभावशीलता बढ़े।

रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार, इस अभियान का उद्देश्य है विदेशी उपकरणों पर निर्भरता कम करना और भारतीय प्रतिभा व नवाचार के जरिए सेना को भविष्य के लिए तैयार करना।

स्ट्राइक कोर की क्षमताओं को मज़बूत करना

राम डिवीजन, जो कि स्ट्राइक कोर अभियानों में एक प्रतिष्ठित इकाई मानी जाती है, ने इस आयोजन के माध्यम से यह परखा कि कैसे नई तकनीकें आक्रामक अभियानों के तरीके को पूरी तरह बदल सकती हैं। लक्ष्य यह है कि पैदल सेना को तेज़, शक्तिशाली और खतरनाक परिस्थितियों में अधिक टिकाऊ बनाया जाए।

इस सैन्य अभ्यास ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारतीय सेना अब तकनीक-आधारित रणनीतियों को गंभीरता से अपना रही है, ताकि वह वैश्विक खतरों का बेहतर सामना कर सके।

भारत-ग्रीस ने नौसैनिक सहयोग बढ़ाने के लिए PASSEX का आयोजन किया

भारतीय नौसेना और ग्रीस की नौसेना (हेलेनिक नेवी) ने हाल ही में अरब सागर में मुंबई के पास एक संयुक्त पासेक्स (PASSEX – Passing Exercise) अभ्यास किया। यह सैन्य अभ्यास भारत और ग्रीस के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग को दर्शाता है और दोनों नौसेनाओं के बीच समन्वय और समुद्री संचालन क्षमताओं को मजबूत करने में मदद करता है।

भारत-ग्रीस रक्षा संबंधों को मजबूती
भारत और ग्रीस के बीच यह PASSEX अभ्यास उस व्यापक प्रयास का हिस्सा है, जिसके तहत दोनों देशों ने अपने रक्षा और रणनीतिक संबंधों को सुदृढ़ किया है। वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ग्रीस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) के स्तर पर पहुँचाया था। तब से, दोनों देशों के सशस्त्र बलों ने 2024 और 2025 में अंतरराष्ट्रीय वायु अभ्यासों में भी भाग लिया है।

INS तरकश और HS प्सारा ने किया नेतृत्व
भारतीय नौसेना की ओर से इस अभ्यास का नेतृत्व INS तरकश ने किया, जो पश्चिमी नौसेना कमान का एक स्टेल्थ युद्धपोत है। इसके साथ ग्रीस की नौसेना का युद्धपोत HS Psara भी शामिल हुआ। इस दौरान दोनों नौसेनाओं ने कई संयुक्त गतिविधियाँ कीं, जैसे:

  • सामरिक संचालन अभ्यास

  • सतही हथियारों से फायरिंग

  • हेलिकॉप्टर का क्रॉस-डेक लैंडिंग

  • समुद्र में ईंधन और संसाधन की आपूर्ति

  • संचार और अग्निशमन प्रशिक्षण

इन अभ्यासों के ज़रिए दोनों नौसेनाओं ने श्रेष्ठ संचालन तकनीकों को साझा किया और साझा कार्य करने की क्षमता को और मज़बूत किया।

INS तरकश के बारे में
INS तरकश एक तालवार श्रेणी की स्टेल्थ फ्रिगेट है, जिसे रूस में बनाया गया था और नवंबर 2012 में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया। इसमें निम्नलिखित उन्नत हथियार और क्षमताएँ हैं:

  • ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल

  • पनडुब्बी रोधी रॉकेट

  • एक मल्टी-रोल हेलिकॉप्टर

INS तरकश को पूर्ण युद्ध अभियानों से लेकर समुद्री गश्ती और आपदा प्रबंधन जैसे बहुआयामी मिशनों के लिए तैनात किया जाता है। यह अभ्यास भारत और ग्रीस के बीच समुद्री सहयोग को नई दिशा देने में सहायक साबित हुआ है।

कर्नाटक बैंक ने राघवेंद्र एस. भट को अंतरिम प्रबंध निदेशक और सीईओ नियुक्त किया

कर्नाटक बैंक ने राघवेंद्र श्रीनिवास भट को अंतरिम प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (MD & CEO) नियुक्त किया है। यह नियुक्ति 16 जुलाई 2025 से प्रभावी होगी और वे तीन माह तक या स्थायी सीईओ की नियुक्ति तक इस पद पर बने रहेंगे। यह निर्णय हाल ही में हुई नेतृत्व संकट के बाद लिया गया है, जब पूर्व एमडी और सीईओ ने इस्तीफा दे दिया था।

कौन हैं राघवेंद्र एस. भट?
राघवेंद्र एस. भट कर्नाटक बैंक के दीर्घकालिक कर्मचारी हैं। उन्होंने 1981 में क्लर्क के रूप में बैंक में अपना करियर शुरू किया था। वर्षों के अनुभव के बाद, वे 2019 में बैंक के मुख्य परिचालन अधिकारी (COO) बने। उन्हें 1 जुलाई 2025 को फिर से COO नियुक्त किया गया और अब वे अंतरिम एमडी और सीईओ की भूमिका निभा रहे हैं। बैंक के साथ उनका लंबा जुड़ाव उन्हें संक्रमण काल में एक विश्वसनीय विकल्प बनाता है।

नेतृत्व में बदलाव और इस्तीफे
यह बदलाव तब सामने आया जब पूर्व एमडी और सीईओ श्रीकृष्णन हरि हरा शर्मा ने 29 जून 2025 को व्यक्तिगत कारणों से पद छोड़ दिया। उनका आधिकारिक कार्यकाल 15 जुलाई को समाप्त हो रहा है। साथ ही, कार्यकारी निदेशक शेखर राव ने भी व्यक्तिगत कारणों और मंगलुरु स्थानांतरण में असमर्थता के चलते इस्तीफा दिया है, जो 31 जुलाई 2025 से प्रभावी होगा।

अब आगे क्या?
स्थायी एमडी, सीईओ और कार्यकारी निदेशक की नियुक्ति के लिए कर्नाटक बैंक के बोर्ड ने एक खोज समिति (Search Committee) का गठन किया है। बैंक ने यह भी स्पष्ट किया है कि राघवेंद्र भट पर SEBI या किसी अन्य संस्था द्वारा कोई प्रतिबंध नहीं है और वे बैंक के किसी भी वर्तमान निदेशक से संबंधित नहीं हैं। आने वाले समय में बैंक के लिए स्थिरता बनाए रखना और नई नेतृत्व टीम की तलाश प्राथमिकता होगी।

विश्व युवा कौशल दिवस 2025: इतिहास और महत्व

हर साल 15 जुलाई को दुनियाभर में विश्व युवा कौशल दिवस (World Youth Skills Day) मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य युवाओं को रोजगार, उद्यमिता और व्यक्तिगत विकास के लिए आवश्यक कौशल प्रदान करने के महत्व को उजागर करना है। वर्ष 2025 में यह अवसर और भी खास है क्योंकि यह इस दिवस की 10वीं वर्षगाँठ है, जिसे संयुक्त राष्ट्र ने 2014 में घोषित किया था। इस वर्ष की थीम है: “कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल कौशल के माध्यम से युवा सशक्तिकरण”, जो दर्शाता है कि तकनीक अब करियर और समाज को आकार देने में बड़ी भूमिका निभा रही है।

विश्व युवा कौशल दिवस का महत्व
इस दिवस की शुरुआत इसलिए की गई ताकि वैश्विक स्तर पर कौशल की कमी की ओर ध्यान दिया जा सके, जो कई युवाओं को अच्छे रोजगार पाने और समाज में पूरी भागीदारी से वंचित करती है। बड़ी संख्या में युवा NEET (Not in Employment, Education or Training) श्रेणी में आते हैं। हालिया रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 26.7 करोड़ युवा NEET श्रेणी में हैं, और यह संख्या जल्द ही 27.3 करोड़ तक पहुँच सकती है।

यह दिवस यह भी दर्शाता है कि कौशल विकास सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति, गरीबी उन्मूलन और आर्थिक वृद्धि के लिए आवश्यक है। यह तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा (TVET) को युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए एक सशक्त माध्यम के रूप में प्रोत्साहित करता है।

2025 की थीम: एआई और डिजिटल कौशल
2025 की थीम “Youth Empowerment Through AI and Digital Skills” यह दर्शाती है कि युवा पीढ़ी को डिजिटल युग के लिए तैयार करना जरूरी है, जहाँ AI हमारे काम करने, सीखने और जीने के तरीकों को बदल रहा है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, जहाँ AI नए अवसर ला रहा है, वहीं यदि युवाओं को उचित प्रशिक्षण और समान अवसर न मिले, तो यह जोखिम भी उत्पन्न कर सकता है।

कुछ प्रमुख चुनौतियाँ:

  • 86% छात्र खुद को AI-आधारित कार्यस्थल के लिए तैयार नहीं मानते

  • निम्न आय वाले देशों में 90% लड़कियाँ और युवा महिलाएँ अभी भी ऑनलाइन नहीं हैं

  • अमीर देशों में केवल 1 में से 10 किशोर ही डिजिटल उपकरणों से सप्ताह में एक घंटे से अधिक पढ़ाई करते हैं

  • अधिकांश देशों में युवाओं को साइबर बुलिंग और अन्य ऑनलाइन खतरों से बचाने के लिए कानूनों की कमी है

TVET (तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण) की भूमिका
संयुक्त राष्ट्र और उसके साझेदारों द्वारा समर्थित TVET कार्यक्रम युवाओं को तकनीशियन, कारीगर या डिजिटल प्रोफेशनल बनने के लिए तैयार करते हैं। यह कार्यक्रम व्यावहारिक अनुभव और कक्षा-आधारित शिक्षा का मिश्रण होते हैं। इनके लाभ हैं:

  • रोजगार पाने की संभावना बढ़ती है

  • आय स्तर में सुधार होता है

  • आत्मविश्वास और जीवन भर सीखने की प्रवृत्ति बढ़ती है

  • नौकरी में लचीलापन और संतोष मिलता है

#WorldYouthSkillsDay के लिए आयोजन और योगदान के तरीके
हर साल न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय और अन्य जगहों पर विभिन्न कार्यक्रम होते हैं:

  • फोटो और निबंध प्रतियोगिताएँ

  • कौशल प्रदर्शन कार्यक्रम

  • युवाओं, शिक्षकों और नियोक्ताओं के साथ पैनल चर्चा

आप इस दिवस को इन तरीकों से समर्थन दे सकते हैं:

  • युवाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जोड़ना

  • सोशल मीडिया पर #WorldYouthSkillsDay के साथ कुशल युवाओं की कहानियाँ साझा करना

  • छात्रों और बच्चों के साथ करियर स्किल्स पर चर्चा करना

  • कौशल-आधारित शिक्षण कार्यक्रमों में स्वयंसेवक बनकर सहयोग करना

केंद्रीय मंत्री बी.एल. वर्मा ने उत्तर प्रदेश में नए पीएमडीके का उद्घाटन किया

उत्तर प्रदेश के बदायूं स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज में 75वाँ प्रधानमंत्री दिव्याशा केंद्र (PMDK) स्थापित किया जाएगा। इस केंद्र का उद्घाटन केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री श्री बी.एल. वर्मा करेंगे। यह केंद्र दिव्यांगजनों (विकलांग व्यक्तियों) और वरिष्ठ नागरिकों को महत्वपूर्ण सहायता सेवाएँ प्रदान करेगा, जिससे उन्हें अब घर के पास ही ज़रूरी सहायता मिल सकेगी।

बदायूं में उद्घाटन समारोह
बदायूं का यह नया PMDK केंद्र केंद्र सरकार की उस पहल का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य दिव्यांगजनों और बुज़ुर्गों तक सीधी पहुँच बनाना है। उद्घाटन समारोह सरकारी मेडिकल कॉलेज, बदायूं में आयोजित होगा, जिसमें केंद्रीय मंत्री श्री बी.एल. वर्मा मुख्य अतिथि होंगे। इसके अलावा सामाजिक न्याय मंत्रालय, एएलआईएमसीओ (Artificial Limbs Manufacturing Corporation of India) और जिला प्रशासन के अधिकारी भी मौजूद रहेंगे।

यह कार्यक्रम सरकार के ‘सुगम भारत, सशक्त भारत‘ मिशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जहाँ कोई भी नागरिक अपंगता या उम्र के कारण पीछे न छूटे।

PMDK में मिलने वाली सेवाएँ
प्रधानमंत्री दिव्याशा केंद्र (PMDK) एक विशेष केंद्र है जहाँ दिव्यांगजन और बुज़ुर्ग एक ही स्थान पर मूल्यांकन, परामर्श, सहायक उपकरणों का वितरण और फॉलो-अप देखभाल जैसी सेवाएँ प्राप्त कर सकते हैं। यह केंद्र दो प्रमुख योजनाओं के अंतर्गत सहायता प्रदान करेगा:

  • ADIP योजना – दिव्यांगजनों के लिए

  • राष्ट्रीय वयोश्री योजना (RVY) – वरिष्ठ नागरिकों के लिए

इन योजनाओं के तहत लाभार्थियों को वॉकर, व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, श्रवण यंत्र, कृत्रिम अंग जैसे सहायक उपकरण निःशुल्क प्रदान किए जाएँगे।

अब तक का प्रभाव और सरकारी प्रतिक्रिया
इस नए केंद्र के साथ, भारत में संचालित प्रधानमंत्री दिव्याशा केंद्रों की संख्या 75 हो गई है। अब तक इन केंद्रों के माध्यम से 1.40 लाख से अधिक लोगों को सहायता दी गई है और ₹179.15 लाख मूल्य के सहायक उपकरण वितरित किए जा चुके हैं। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने बताया कि इन सेवाओं को लोगों के निकट लाने का उद्देश्य यात्रा की परेशानी को कम करना और जीवन को सुगम बनाना है।

यह पहल विशेष रूप से ग्रामीण समुदायों द्वारा सराही जा रही है, जहाँ पहले लोगों को ऐसी सुविधाओं के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, लेकिन अब सहायता उनके द्वार तक पहुँच रही है।

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