मारुति सुजुकी ने मानेसर में भारत की सबसे बड़ी इन-प्लांट रेलवे साइडिंग खोली

हरित परिवहन और टिकाऊ लॉजिस्टिक्स की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, मारुति सुज़ुकी इंडिया लिमिटेड (MSIL) ने हरियाणा के मानेसर प्लांट में देश की सबसे बड़ी इन-प्लांट ऑटोमोबाइल रेलवे साइडिंग का उद्घाटन किया है। ₹452 करोड़ की लागत से विकसित यह परियोजना प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप है और रेल आधारित वाहन डिस्पैच को बढ़ाकर ईंधन की खपत और कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद करेगी।

समाचार में क्यों?

17 जून 2025 को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मानेसर इन-प्लांट रेलवे साइडिंग का उद्घाटन किया। यह भारत की सबसे बड़ी इन-प्लांट साइडिंग है और मारुति सुज़ुकी की हरित लॉजिस्टिक्स रणनीति का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य FY2030–31 तक 35% वाहन रेल के जरिए भेजना है। यह मारुति का दूसरा इन-प्लांट रेलवे साइडिंग प्रोजेक्ट है, पहला गुजरात में है।

परियोजना का विवरण

  • स्थान: मारुति सुज़ुकी मानेसर प्लांट, हरियाणा

  • निवेश: ₹452 करोड़

    • ₹325 करोड़ – कॉरिडोर (JV के तहत)

    • ₹127 करोड़ – यार्ड निर्माण

  • कार्यकारी एजेंसी: हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (HORCL)

  • साइडिंग क्षेत्रफल: 46 एकड़

  • रेल ट्रैक लंबाई: 8.2 किमी

    • 4 फुल-लेंथ रेक ट्रैक + 1 इंजन एस्केप ट्रैक

  • क्षमता: प्रति वर्ष 4.5 लाख वाहनों का डिस्पैच

सतत विकास और पर्यावरणीय प्रभाव

  • सालाना 1.75 लाख टन CO₂e उत्सर्जन में कमी

  • 6 करोड़ लीटर ईंधन की बचत

  • भारत के 2070 नेट जीरो उत्सर्जन लक्ष्य के अनुरूप

  • PM गति शक्ति योजना को समर्थन

संचालन की मुख्य विशेषताएं

  • मानेसर और गुरुग्राम संयंत्रों से वाहनों को 380 भारतीय शहरों के 17 लॉजिस्टिक्स हब तक पहुंचाया जाएगा

  • मुंद्रा और पीपावाव बंदरगाहों तक निर्यात के लिए भी रेल सुविधा

  • उद्घाटन के अवसर पर पहली ऑटोमोबाइल ट्रेन रवाना की गई

पृष्ठभूमि और उपलब्धियां

  • FY2014–15 से अब तक 25 लाख वाहन रेलवे के ज़रिए भेजे जा चुके हैं

  • मार्च 2024 में गुजरात प्लांट पर देश की पहली इन-प्लांट रेलवे साइडिंग शुरू की गई थी

  • इस विकास की रीढ़ है हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर (HORC), जो सोनीपत से पलवल तक 126 किमी फैला है

रणनीतिक लक्ष्य और भविष्य की योजनाएं

  • लक्ष्य: FY2030–31 तक 35% वाहन रेलवे द्वारा भेजना

  • उद्देश्य:

    • हरित लॉजिस्टिक्स को बढ़ावा देना

    • सड़क यातायात में भीड़ कम करना

    • लागत प्रभावी और जलवायु-संवेदनशील परिवहन

  • यह पहल मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट नेटवर्क के भारत के व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप है

फसल कटाई के बाद की मंदी के बीच मई 2025 में भारत की बेरोजगारी दर बढ़कर 5.6%

भारत में मई 2025 में बेरोजगारी दर बढ़कर 5.6% हो गई, जो अप्रैल में 5.1% थी। यह वृद्धि मुख्य रूप से फसल कटाई के बाद कृषि क्षेत्र में नौकरियों में आई तेज गिरावट के कारण हुई है। शहरी और ग्रामीण युवाओं तथा महिलाओं के बीच बेरोजगारी दर में भी इज़ाफा हुआ है, जो यह दर्शाता है कि रोज़गार के क्षेत्रीय और लिंग आधारित बदलाव देश की आर्थिक चुनौतियों को उजागर कर रहे हैं।

समाचार में क्यों?

भारत सरकार द्वारा 16 जून 2025 को मई महीने के श्रम बल आंकड़े (Labour Force Statistics) जारी किए गए। यह केवल दूसरा अवसर है जब शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों को कवर करने वाला मासिक श्रम आंकड़ा प्रकाशित हुआ है। यह रिपोर्ट फसल कटाई के बाद के रुझानों को दर्शाती है और यह दिखाती है कि मौसमी रोज़गार किस तरह व्यापक श्रम बाजार को प्रभावित करता है।

मुख्य आंकड़े (मई 2025)

  • कुल बेरोजगारी दर:

    • मई में 5.6% (अप्रैल में 5.1%)

  • महिला बेरोजगारी दर:

    • बढ़कर 5.8% (पुरुषों के लिए 5.6%)

  • युवा (15–29 वर्ष) बेरोजगारी दर:

    • शहरी: 17.9% (अप्रैल में 17.2%)

    • ग्रामीण: 13.7% (अप्रैल में 12.3%)

क्षेत्रीय व लैंगिक रोजगार परिवर्तन

कृषि क्षेत्र में गिरावट

  • कृषि में कार्यरत श्रमिकों की हिस्सेदारी अप्रैल में 45.9% से घटकर मई में 43.5% हो गई।

  • यह गिरावट फसल कटाई के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में मौसमी मंदी के कारण हुई।

महिलाओं की श्रम भागीदारी दर 

  • अप्रैल में 28.8% से घटकर मई में 27.8% हुई।

  • यह दर्शाता है कि फसल कटाई के बाद ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार के अवसरों में कमी आई है।

रोजगार प्रवास 

  • कई श्रमिकों ने कृषि क्षेत्र छोड़कर विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों की ओर रुख किया।

ईरान का इजरायल के खिलाफ ट्रू प्रॉमिस 3 ऑपरेशन लॉन्च

ईरान-इज़राइल संघर्ष में एक महत्वपूर्ण वृद्धि के रूप में, ईरान ने “ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 3” शुरू किया है, जो लगातार तीसरे दिन इज़राइली बुनियादी ढांचे पर मिसाइल हमलों की श्रृंखला है। यह अभियान, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा संचालित है, और ईरान के परमाणु तथा सैन्य ठिकानों पर इज़राइली हमलों की प्रत्यक्ष प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। इसमें AI आधारित मिसाइल प्रणाली और डिकॉय सैचुरेशन (भ्रम फैलाने की तकनीक) जैसे नए रणनीतिक हथियारों का प्रयोग किया गया है।

चर्चा में क्यों?

ईरान ने ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 3 इज़राइल द्वारा ईरानी परमाणु केंद्रों (जैसे नतान्ज, इस्फहान) और उच्च रैंक के सैन्य अधिकारियों पर हमले के जवाब में शुरू किया। यह अभियान सैन्य संघर्ष में नई मिसाइल रणनीतियों की शुरुआत करता है जिसका वैश्विक रक्षा प्रणालियों पर गहरा प्रभाव हो सकता है।

ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 3 क्या है?

  • प्रकार: ईरान का प्रतिशोधात्मक सैन्य अभियान

  • नेतृत्व: इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC)

  • कारण:

    • इज़राइली हमले: परमाणु संयंत्रों पर

    • वरिष्ठ जनरलों की हत्या

  • लक्ष्य:

    • प्रमुख इज़राइली शहर – तेल अवीव, हैफा, रेहोवोत

    • बिजली संयंत्र, तेल रिफाइनरी, वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र

    • नागरिक और शहरी क्षेत्रों में भारी व्यवधान

मिसाइल युद्ध की “नई तकनीक”

IRGC द्वारा इज़राइल की वायु रक्षा प्रणाली, खासकर Iron Dome, को चकमा देने के लिए नई रणनीति अपनाई गई है।

मुख्य तत्व:

  • डिकॉय सैचुरेशन: नकली लक्ष्यों के जरिए रडार को भ्रमित करना

  • आंतरिक गड़बड़ी: हमले के साथ-साथ साइबर हस्तक्षेप

  • मल्टी-टारगेट पेनिट्रेशन: एक साथ कई लक्ष्यों पर हमला

  • AI-आधारित ट्रैजेक्टरी परिवर्तन: मिसाइल मार्ग को उड़ान के दौरान बदलना

रणनीतिक और वैश्विक महत्व

  • साइबर और काइनेटिक युद्ध का मिलन (Cyber-Kinetic Convergence): डिजिटल और भौतिक दोनों मोर्चों पर हमला

  • रक्षा प्रणालियों की सीमाएं उजागर: इज़राइल की उन्नत रक्षा प्रणाली भी पूरी तरह प्रभावी नहीं रही

  • शहरी युद्ध की नई परिभाषा: आधुनिक शहर अब फ्रंटलाइन युद्धक्षेत्र बनते जा रहे हैं

  • भविष्य पर असर:

    • वैश्विक रक्षा प्रणाली को नया रूप देने की आवश्यकता

    • AI और स्मार्ट मिसाइल प्रौद्योगिकी का बढ़ता महत्व

    • मध्य-पूर्व में और अधिक अस्थिरता की आशंका

छोटे देशों को बढ़ावा देने के लिए ICC चार दिवसीय टेस्ट के लिए तैयार

इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) टेस्ट क्रिकेट में बड़े बदलाव की योजना बना रही है। रिपोर्ट है कि ICC विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) 2027-29 चक्र में छोटे देशों को 4 दिवसीय टेस्ट मैच खेलने की अनुमति देने को तैयार हो गई है। इस कदम का उद्देश्य छोटी टीमों को अधिक टेस्ट मैच खेलने और लंबी टेस्ट सीरीज की मेजबानी करने के लिए सक्षम बनाना है। हालांकि, भारत, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड परंपरागत रूप से 5 दिवसीय मैच खेल सकते हैं।

क्या बदल रहा है?

  • चार दिवसीय टेस्ट को 2027–29 WTC चक्र में आधिकारिक अनुमति दी जाएगी।

  • इंग्लैंड, भारत और ऑस्ट्रेलिया की प्रतिष्ठित श्रृंखलाएं पांच दिवसीय टेस्ट के रूप में ही खेली जाएंगी।

चार दिवसीय टेस्ट क्यों?

  • लागत में कमी: पांच दिवसीय टेस्ट की मेज़बानी छोटे क्रिकेट बोर्ड्स के लिए महंगी होती है।

  • समय की बचत: तीन मैचों की टेस्ट सीरीज को तीन सप्ताह से भी कम में समेटा जा सकता है।

  • रुचि में वृद्धि: छोटा प्रारूप प्रसारकों और दर्शकों को अधिक आकर्षित कर सकता है।

चार दिवसीय टेस्ट की प्रमुख विशेषताएं:

  • प्रति दिन 98 ओवर खेलने का लक्ष्य (पांच दिवसीय टेस्ट में 90 ओवर)।

  • दिन का खेल थोड़ा लंबा चलेगा ताकि कम दिन की भरपाई हो सके।

  • अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कैलेंडर में अधिक लचीलापन।

पृष्ठभूमि:

  • चार दिवसीय टेस्ट की मंज़ूरी पहली बार 2017 में द्विपक्षीय टेस्ट के रूप में दी गई थी।

  • इंग्लैंड ने पहले चार दिवसीय टेस्ट खेले हैं:

    • आयरलैंड के खिलाफ (2019, 2023)

    • जिम्बाब्वे के खिलाफ (2025, ट्रेंट ब्रिज)

वैश्विक प्रभाव:

  • जिम्बाब्वे, आयरलैंड और अफगानिस्तान जैसे छोटे देशों को इससे बड़ा लाभ हो सकता है।

  • टेस्ट मैचों की आवृत्ति बढ़ेगी, और रैंकिंग में नीचे की टीमों को अंतरराष्ट्रीय अनुभव मिलेगा।

  • 2025–27 WTC चक्र (श्रीलंका बनाम बांग्लादेश से शुरू) पांच दिवसीय प्रारूप में ही रहेगा।

OpenAI को अमेरिकी रक्षा विभाग से 200 मिलियन डॉलर का एआई अनुबंध मिला

OpenAI, जो ChatGPT का निर्माता है, को अमेरिकी रक्षा विभाग (U.S. Department of Defense) द्वारा $200 मिलियन (लगभग ₹1,670 करोड़) का अनुबंध प्रदान किया गया है। यह अनुबंध राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य अभियानों के लिए उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) उपकरणों के विकास के उद्देश्य से किया गया है। 16 जून 2025 को पेंटागन द्वारा इस सौदे की घोषणा की गई, जो जुलाई 2026 तक चलेगा और मुख्य रूप से वॉशिंगटन डी.सी. के आस-पास संचालित होगा।

समाचार में क्यों?

अमेरिकी रक्षा विभाग ने OpenAI को $200 मिलियन का अनुबंध दिया है। इसका उद्देश्य है – रक्षा से जुड़ी जटिल राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों के समाधान के लिए एडवांस AI प्रोटोटाइप तैयार करना। यह अनुबंध ऐसे समय पर आया है जब अमेरिका रक्षा AI में वैश्विक नेतृत्व सुनिश्चित करने के लिए निवेश बढ़ा रहा है।

पृष्ठभूमि

  • OpenAI आज वैश्विक स्तर पर एक अग्रणी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) कंपनी के रूप में उभरी है, जिसका प्रमुख कारण ChatGPT और अन्य बड़े भाषा मॉडल्स (Large Language Models) की व्यापक लोकप्रियता और अपनाया जाना है।
  • वहीं दूसरी ओर, अमेरिका सरकार रक्षा प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में चीन जैसे समकक्ष प्रतिद्वंद्वियों के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए AI में अपने निवेश को लगातार बढ़ा रही है। यह निवेश अमेरिका की रणनीतिक बढ़त बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

अनुबंध की प्रमुख जानकारियाँ

  • अनुबंध मूल्य: 200 मिलियन अमेरिकी डॉलर

  • उद्देश्य: उन्नत सीमांत AI (Frontier AI) क्षमताओं के प्रोटोटाइप विकसित करना, जो निम्नलिखित क्षेत्रों में उपयोगी हों:

    • युद्ध परिदृश्य (Warfighting Scenarios)

    • एंटरप्राइज डोमेन जैसे लॉजिस्टिक्स, खुफिया जानकारी और संचालन (Enterprise domains: logistics, intelligence, operations)

  • समयसीमा: परियोजना के जुलाई 2026 तक पूर्ण होने की संभावना

  • स्थान: मुख्य रूप से वाशिंगटन डी.सी. और उसके आसपास के क्षेत्र

OpenAI की बाज़ार स्थिति

  • जून 2025 तक, OpenAI का वार्षिक राजस्व दर (Annualized Revenue Run Rate) 10 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच चुका है।

  • मार्च 2025 में, OpenAI ने SoftBank के नेतृत्व में 40 बिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाने की योजना की घोषणा की, जिससे कंपनी का मूल्यांकन 300 बिलियन डॉलर तक पहुँच गया।

  • मार्च 2025 के अंत तक, OpenAI के साप्ताहिक सक्रिय उपयोगकर्ताओं की संख्या 500 मिलियन (50 करोड़) तक पहुँच गई, जो इसके AI मॉडल्स की बढ़ती मांग को दर्शाता है।

सरकारी परिप्रेक्ष्य 

  • अप्रैल 2025 में, व्हाइट हाउस के प्रबंधन और बजट कार्यालय (Office of Management and Budget – OMB) ने AI खरीद (procurement) के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए।
  • जहाँ नागरिक एजेंसियों को AI सेवाओं की खरीद में उचित प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करनी होगी, वहीं रक्षा प्रणालियों (Defense Systems) को इससे छूट दी गई, जिससे पेंटागन जैसे रक्षा संस्थान सीधे OpenAI जैसे शीर्ष AI विक्रेताओं से अनुबंध कर सकते हैं।

महत्त्व 

  • यह अनुबंध तकनीकी कंपनियों और रक्षा संस्थानों के बीच बढ़ते सहयोग को दर्शाता है।

  • यह OpenAI की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी AI प्रणालियों में पहली औपचारिक भागीदारी को चिह्नित करता है, जो इसके सिर्फ वाणिज्यिक उपयोग से आगे बढ़ने का संकेत देता है।

  • यह अमेरिका के रक्षा, सुरक्षा और खुफिया क्षेत्रों में AI वर्चस्व की रणनीतिक महत्वाकांक्षा को मजबूती प्रदान करता है

RBI ने सरकारी लेनदेन पर बैंकों के लिए एजेंसी कमीशन बढ़ाया

सरकारी बैंकिंग सेवाओं में दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने सरकार से संबंधित लेन-देन को संभालने के लिए बैंकों को दिए जाने वाले एजेंसी कमीशन दरों में संशोधन किया है। यह संशोधित ढांचा 1 अप्रैल 2025 से प्रभावी होगा और इसमें इलेक्ट्रॉनिक लेन-देन, पेंशन वितरण, और गैर-पेंशन सरकारी भुगतानों पर बढ़ा हुआ भुगतान शामिल है। इसका उद्देश्य सरकारी धन के डिजिटल प्रबंधन को प्रोत्साहन देना और बैंकों को इस दिशा में प्रेरित करना है।

समाचार में क्यों?

RBI ने केंद्र और राज्य सरकारों के लेन-देन को संभालने के लिए बैंकों को दिए जाने वाले एजेंसी कमीशन को बढ़ाया है। यह निर्णय डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने और बैंकों को प्रोत्साहन देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नई दरें 1 अप्रैल 2025 से लागू होंगी।

पृष्ठभूमि

  • RBI द्वारा अधिकृत बैंक, जिन्हें एजेंसी बैंक कहा जाता है, सरकार के लिए टैक्स संग्रह, पेंशन भुगतान, अन्य प्राप्तियों और भुगतानों जैसे काम संभालते हैं।

  • RBI समय-समय पर ऑपरेशनल लागत, महंगाई, और नीतिगत दिशा के आधार पर इन बैंकों को मिलने वाले कमीशन की दरें संशोधित करता है।

एजेंसी कमीशन में मुख्य बदलाव

सेवा पुरानी दर नई दर (1 अप्रैल 2025 से)
राजस्व प्राप्तियाँ व भुगतान (इलेक्ट्रॉनिक माध्यम) ₹9 प्रति लेन-देन ₹12 प्रति लेन-देन
राजस्व प्राप्तियाँ व भुगतान (भौतिक माध्यम) ₹40 प्रति लेन-देन कोई बदलाव नहीं
पेंशन भुगतान (केंद्र/राज्य सरकार) ₹75 प्रति लेन-देन ₹80 प्रति लेन-देन
अन्य सरकारी भुगतान (गैर-पेंशन) ₹100 के कारोबार पर 6.5 पैसे ₹100 के कारोबार पर 7 पैसे
  • यह कमीशन सभी पात्र लेन-देन पर लागू होगा जो बैंक सरकार के लिए संभालते हैं।

  • अपवाद:

    • उन लेन-देन पर कमीशन नहीं मिलेगा जो पहले से प्रति-वित्त पोषित (pre-funded) हैं।

    • जहां सरकार पहले से बैंकों को अलग से भुगतान करती है, वहां भी कमीशन लागू नहीं होगा।

संशोधन के उद्देश्य

  • डिजिटल माध्यम से सरकारी लेन-देन की मात्रा और दक्षता बढ़ाना।

  • ई-गवर्नेंस और डिजिटल भुगतान प्रणाली को मजबूत करना।

  • बढ़ती ऑपरेशनल जिम्मेदारियों के लिए बैंकों को उचित क्षतिपूर्ति देना।

व्यापक महत्व

  • डिजिटल इंडिया और वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को समर्थन।

  • छोटे बैंकों को सरकारी लेन-देन के संचालन में आर्थिक रूप से सक्षम बनाना।

  • लोक धन हस्तांतरण में पारदर्शिता, गति और सटीकता को बढ़ावा देना।

यह संशोधन बैंकों को सरकारी डिजिटल सेवा प्रदाता के रूप में अधिक सक्रिय और उत्तरदायी बनाएगा और देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई ऊँचाई देगा।

सस्टेनेबल गैस्ट्रोनॉमी दिवस 2025: 18 जून

गैस्ट्रोनॉमी, जिसे अक्सर भोजन की कला कहा जाता है, केवल खाना पकाने तक सीमित नहीं है। यह किसी क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक पाक विरासत को दर्शाता है। चाहे वह बैंकॉक की सड़क पर मिलने वाला स्ट्रीट फूड हो या मोरक्को का कोई पारंपरिक स्टू — गैस्ट्रोनॉमी एक स्थान और उसके लोगों की कहानी कहती है।

सस्टेनेबल गैस्ट्रोनॉमी: भोजन के माध्यम से बदलाव का रास्ता

जब स्थिरता (सस्टेनेबिलिटी) के साथ जोड़ा जाता है, तो गैस्ट्रोनॉमी एक शक्तिशाली परिवर्तनकारी साधन बन जाती है।
सस्टेनेबल गैस्ट्रोनॉमी का अर्थ है — ऐसा भोजन और पाक अभ्यास जो पर्यावरण के अनुकूल, सामाजिक रूप से उत्तरदायी और आर्थिक रूप से व्यवहार्य हो।

इसमें ध्यान दिया जाता है:

  • सामग्री (ingredients) कहाँ से आती हैं

  • वे कैसे उगाई जाती हैं

  • कैसे परिवहन किया जाता है

  • और अंततः, कैसे खपत की जाती हैं — इस सबके दौरान प्रकृति और सार्वजनिक स्वास्थ्य को न्यूनतम नुकसान हो।

संक्षेप में: सस्टेनेबल गैस्ट्रोनॉमी का मतलब है स्थानीय, मौसमी, संसाधन-कुशल और संस्कृति-सम्मानजनक भोजन विकल्प अपनाना।

संयुक्त राष्ट्र और सस्टेनेबल गैस्ट्रोनॉमी को बढ़ावा

  • संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 18 जून को “सस्टेनेबल गैस्ट्रोनॉमी दिवस” के रूप में घोषित किया, जिसे A/RES/71/246 प्रस्ताव के तहत 21 दिसंबर 2016 को अपनाया गया था।
  • इस दिन को मनाने का उद्देश्य है — भोजन और पाक परंपराओं की भूमिका को स्थायी विकास के एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में पहचानना।

सहयोगी संगठन:

  • UNESCO (संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन)

  • FAO (खाद्य और कृषि संगठन)

ये संस्थाएं सदस्य देशों, अंतर्राष्ट्रीय निकायों और सिविल सोसायटी के साथ मिलकर सस्टेनेबल गैस्ट्रोनॉमी को बढ़ावा देती हैं।

यूनेस्को द्वारा सतत पाककला को बढ़ावा देने के प्रयास

  • UNESCO ने 2004 में “UNESCO Creative Cities Network (UCCN)” की स्थापना की, जिसमें गैस्ट्रोनॉमी सहित 7 रचनात्मक क्षेत्रों को बढ़ावा दिया जाता है।
  • 2025 तक, 56 शहरों को Creative Cities of Gastronomy के रूप में मान्यता दी गई है, जो स्थानीय खाद्य विरासत और सस्टेनेबिलिटी को प्रोत्साहित करते हैं।

अन्य पहलें:

  • कोयले की जगह स्वच्छ ऊर्जा (जैसे गैस या बिजली) का उपयोग करने वाले रेस्तरां को बढ़ावा

  • टीवी कार्यक्रमों, फूड शोज़ और सांस्कृतिक प्रदर्शनियों के माध्यम से जन जागरूकता

  • स्थानीय किसानों और खाद्य उद्योगों को पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण और आधुनिक टिकाऊ पद्धतियों को अपनाने में सहायता

FAO और हरित आहार 

FAO पौधों पर आधारित, स्थानीय सामग्री वाले और कम पर्यावरणीय प्रभाव वाले “हरित संस्कृति आहार” की वकालत करता है।

प्रमुख प्रयास:

  • “Fish on our mind, fish on your plate” और “Celebrating nutrition” जैसे कुकबुक प्रकाशित करना

  • Lebanon में फ्रीकह और अफ्रीका में दालों जैसे पारंपरिक खाद्य तत्वों को उजागर करना

  • ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाना

  • खाद्य विरासत को समझने के लिए सांस्कृतिक शिक्षा को बढ़ावा (जैसे – चाय या वसाबी की खेती की परंपरा)

आज सस्टेनेबल गैस्ट्रोनॉमी क्यों जरूरी है?

COVID-19 के बाद की दुनिया में, जहां हम तीनहरी पारिस्थितिकीय संकट (जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता का नुकसान और प्रदूषण) का सामना कर रहे हैं, ऐसे समय में सस्टेनेबल गैस्ट्रोनॉमी अत्यधिक प्रासंगिक हो गई है।

इसके लाभ:

  • जलवायु परिवर्तन में कमी — स्थानीय और मौसमी खाद्य सामग्री के उपयोग से

  • जैव विविधता का संरक्षण — देसी फसलों और पशुओं को महत्व देकर

  • खाद्य सुरक्षा में वृद्धि — स्थानीय खाद्य प्रणालियों को मज़बूत बनाकर

  • सांस्कृतिक विरासत की रक्षा — पारंपरिक व्यंजनों को जीवित रखकर

निष्कर्ष:

सस्टेनेबल गैस्ट्रोनॉमी केवल भोजन नहीं है, यह प्रकृति, संस्कृति और समुदाय की जिम्मेदारी से जुड़ा एक आंदोलन है। यह हमें बेहतर भोजन चुनने, बेहतर सोचने और एक स्थायी भविष्य की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है।

बिहार ने भारत की पहली मोबाइल-आधारित ई-वोटिंग प्रणाली की शुरुआत की

बिहार राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) ने मोबाइल आधारित ई-वोटिंग प्रणाली की शुरुआत की है, जिससे बिहार ऐसा करने वाला भारत का पहला राज्य बन गया है। यह नई प्रणाली 28 जून को होने वाले नगर निकाय चुनावों में लागू की जाएगी, जिसकी पुष्टि राज्य निर्वाचन आयुक्त दीपक प्रसाद ने की है।

क्या है ई-वोटिंग?

ई-वोटिंग का मतलब है मोबाइल या इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के जरिए दूरस्थ मतदान करना। इस प्रणाली में मतदाता एंड्रॉइड मोबाइल ऐप का उपयोग करके बिना मतदान केंद्र गए ही अपना वोट डाल सकते हैं।

बिहार में ई-वोटिंग दो मोबाइल ऐप्स के माध्यम से संचालित होगी:

  1. “e-Voting SECBHR” – इसे सी-डैक (Centre for Development of Advanced Computing) ने विकसित किया है।

  2. बिहार राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा विकसित एक अन्य ऐप।

समावेशी मतदान: जिन्हें वोट देने में कठिनाई होती थी, अब उनका भी अधिकार सुरक्षित

राज्य निर्वाचन आयुक्त के अनुसार, इस प्रणाली का उद्देश्य उन मतदाताओं को सक्षम बनाना है जो पारंपरिक मतदान में शामिल नहीं हो पाते:

  • प्रवासी श्रमिक

  • दिव्यांग मतदाता

  • गर्भवती महिलाएं

  • वरिष्ठ नागरिक

  • गंभीर रूप से बीमार लोग

अब उन्हें मतदान केंद्र पर उपस्थित होना अनिवार्य नहीं है, जिससे मतदान प्रतिशत बढ़ने और लोकतंत्र को और समावेशी और सुलभ बनाने की उम्मीद है।

डिजिटल सुरक्षा और पारदर्शिता

बिहार की ई-वोटिंग प्रणाली में अत्याधुनिक तकनीक के माध्यम से सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित की गई है:

  • ब्लॉकचेन तकनीक – डेटा का सुरक्षित और पारदर्शी प्रबंधन

  • लाइवनेस डिटेक्शन – यह सुनिश्चित करता है कि मतदाता खुद उपस्थित है

  • चेहरे की पहचान (Face Match) और लाइव फेस स्कैन

  • पूर्व-रिकॉर्डेड डेटा से चेहरा मिलान

  • ऑडिट ट्रेल, ठीक वैसे ही जैसे EVM में VVPAT के माध्यम से वोट सत्यापन होता है

ये सभी सुविधाएं मिलकर यह सुनिश्चित करती हैं कि हर वोट प्रामाणिक, सत्यापित और सुरक्षित रूप से दर्ज हो।

अन्य राज्यों के लिए आदर्श मॉडल

बिहार पहले भी डिजिटल चुनावी नवाचार में अग्रणी रहा है:

  • FRS (फेस रिकग्निशन सिस्टम) – मतदाता की पहचान

  • OCR (ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन) – मतगणना और परिणाम

  • डिजिटल लॉक – ईवीएम स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा

इन तकनीकों के माध्यम से बिहार ने चुनावी पारदर्शिता और दक्षता में मिसाल कायम की है।

वैश्विक मानकों की ओर कदम

मोबाइल आधारित ई-वोटिंग को अपनाकर बिहार अब उन देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जैसे:

  • एस्टोनिया – यूरोप का एकमात्र देश जहां राष्ट्रव्यापी ई-वोटिंग सफलतापूर्वक लागू है।

बिहार की यह पहल भारत के डिजिटल लोकतंत्र को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

Maruti Suzuki ने खुदरा कार वित्तपोषण को बढ़ावा देने के लिए इक्विटास बैंक के साथ साझेदारी की

मारुति सुज़ुकी इंडिया लिमिटेड (MSIL) — भारत की अग्रणी कार निर्माता कंपनी — ने इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक (ESFB) के साथ एक रणनीतिक वाहन वित्तपोषण साझेदारी की है। इस साझेदारी का उद्देश्य नए वाहनों, पुराने वाहनों और व्यावसायिक वाहनों के लिए बेहतर खुदरा वित्तीय समाधान उपलब्ध कराना है। यह समझौता ग्राहकों को सुलभ, किफायती और अनुकूलित ऋण सुविधाएँ प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

समाचार में क्यों?

मारुति सुज़ुकी और इक्विटास बैंक के बीच यह MoU (सहमति ज्ञापन) हाल ही में हस्ताक्षरित किया गया है ताकि भारत भर में, विशेष रूप से टियर-2 और टियर-3 शहरों में कंपनी के वित्तपोषण नेटवर्क को मजबूत किया जा सके। यह साझेदारी ऐसे समय में हुई है जब वाहन बिक्री को बढ़ावा देने के लिए आसान फाइनेंसिंग की बड़ी भूमिका है।

साझेदार संगठन

  • MSIL (मारुति सुज़ुकी इंडिया लिमिटेड) – भारत की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी

  • ESFB (इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक) – भारत के प्रमुख स्मॉल फाइनेंस बैंकों में से एक

MoU पर हस्ताक्षर करने वाले अधिकारी

  • मारुति सुज़ुकी की ओर से:

    • पार्थो बनर्जी (सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर – मार्केटिंग एवं सेल्स)

    • विशाल शर्मा (उपाध्यक्ष – मारुति सुज़ुकी फाइनेंस)

  • इक्विटास बैंक की ओर से:

    • जगदीश जे. (हेड – रिटेल एसेट्स)

  • घोषणा की तिथि: जून 2025

  • स्थान: नई दिल्ली

उद्देश्य एवं सेवाएं

साझेदारी का मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित है:

  • नई कारों के लिए आसान और किफायती ऋण

  • पुरानी (सेकंड हैंड) कारों के लिए वित्तीय सुविधा

  • व्यावसायिक वाहनों के लिए ऋण विकल्प

अतिरिक्त लाभ:

  • प्रतिस्पर्धी ब्याज दरें

  • तेज़ ऋण वितरण प्रक्रिया

  • ग्राहक-हितैषी ऋण शर्तें

  • अर्ध-शहरी और ग्रामीण इलाकों में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना

महत्त्व

यह साझेदारी न केवल मारुति सुज़ुकी की ग्राहक पहुँच को बढ़ाएगी बल्कि वित्तीय सशक्तिकरण और वाहन स्वामित्व को बढ़ावा देने में भी अहम भूमिका निभाएगी, विशेषकर उन ग्राहकों के लिए जिनके पास पारंपरिक बैंकिंग विकल्प सीमित हैं।

‘साइबर सुरक्षा’ अभ्यास शुरू

डिफेन्स साइबर एजेंसी (Defence Cyber Agency) ने 16 जून 2025 को ‘Cyber Suraksha’ नामक एक बहु-चरणीय साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण अभ्यास की शुरुआत की। यह 12 दिवसीय कार्यक्रम (16 जून से 27 जून 2025 तक) रक्षा और सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े 100 से अधिक प्रतिभागियों को वास्तविक साइबर खतरों का अनुकरण कर साइबर सुरक्षा, लचीलापन (resilience) और रणनीतिक निर्णय क्षमता का प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है।

समाचार में क्यों?

यह अभ्यास इसके पैमाने, नेतृत्व की भागीदारी, और यथार्थवादी साइबर सिमुलेशन के कारण चर्चा में है। यह रक्षा क्षेत्र में भारत की राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

Cyber Suraksha: उद्देश्य और विशेषताएँ

  • आयोजक: डिफेन्स साइबर एजेंसी, इंटीग्रेटेड डिफेन्स स्टाफ मुख्यालय, रक्षा मंत्रालय

  • अवधि: 16 जून से 27 जून 2025 (12 दिन)

  • प्रतिभागी: राष्ट्रीय रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र की विभिन्न एजेंसियों से 100+ अधिकारी

प्रमुख उद्देश्य

  • वास्तविक साइबर हमलों की नकल कर प्रशिक्षण देना

  • रक्षा क्षेत्र में साइबर-सुरक्षा की संस्कृति को बढ़ावा देना

  • तकनीकी विशेषज्ञों और नेतृत्व (CISOs) को साइबर हमलों की स्थिति में प्रतिक्रिया देना सिखाना

मुख्य घटक

साइबर अटैक सिमुलेशन

  • गमिफाइड (gamified), तेज गति वाले साइबर खतरों के सिमुलेशन

  • व्यावहारिक कौशल बढ़ाने के लिए चुनौतीपूर्ण परिदृश्य

CISOs कॉन्क्लेव

  • मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारियों (Chief Information Security Officers) का नेतृत्व सम्मेलन

  • साइबर विशेषज्ञों के व्याख्यान, और

  • टेबल-टॉप अभ्यास, जिसमें साइबर संकट के दौरान निर्णय लेने की रणनीति का अभ्यास कराया जाएगा

प्रशिक्षण की चरणबद्ध योजना

  • संरचित शिक्षण मॉड्यूल

  • वास्तविक समय की चुनौतियाँ

  • मूल्यांकन सत्र

  • दबाव में निर्णय लेने का प्रशिक्षण

रणनीतिक महत्त्व

  • जैसे-जैसे साइबर खतरों की जटिलता बढ़ रही है, यह अभ्यास सुनिश्चित करता है कि भारत की सशस्त्र सेनाएँ तकनीकी रूप से तैयार और सामरिक रूप से प्रशिक्षित रहें।

  • यह अभ्यास भारत की साइबर सुरक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप है।

भविष्य की योजना

  • रक्षा मंत्रालय ने संकेत दिया है कि इस तरह के साइबर प्रशिक्षण अभ्यास नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे ताकि हर स्तर पर साइबर तत्परता (cyber readiness) सुनिश्चित की जा सके। Cyber Suraksha अभ्यास भारत की डिजिटल रक्षा क्षमताओं को मज़बूती प्रदान करने की दिशा में एक रणनीतिक और समयोचित प्रयास है।

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