भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास साझेदारी निधि: भारत ने किया 15.46 मिलियन अमरीकी डालर का योगदान

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भारत ने सतत विकास लक्ष्यों के प्रति अपनी विकासात्मक प्राथमिकताओं में विकासशील राष्ट्रों का समर्थन करने की अपनी प्रतिबद्धता के अंतर्गत, भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास साझेदारी निधि में USD 15.5 मिलियन डॉलर की राशि दी है। 6 मिलियन अमरीकी डालर के समग्र फंड सहित 15.46 मिलियन अमरीकी डालर के इस कुल फंड में सभी विकासशील देश भागीदारी के लिए पात्र हैं, और जिसमे से 9.46 मिलियन अमरीकी डालर राष्ट्रमंडल देशों को समर्पित है।
इस राशि का चेक संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टी. एस. तिरुमूर्ति द्वारा United Nations Office for South-South Cooperation के निदेशक जॉर्ज चेडिएक को सौंपा गया।
India-UN Development Partnership Fund के बारे में:
  • वर्ष 2030 तक सतत विकास के लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में विकासशील देशों का समर्थन करने के लिए बहुपक्षवाद और साझा समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए 2017 में भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास साझेदारी कोष का गठन किया गया था।
  • इस फंड को भारत सरकार द्वारा समर्थित और नेतृत्व किया गया है, जिसे संयुक्त राष्ट्र कार्यालय द्वारा दक्षिण-दक्षिण सहयोग (UNOSSC) द्वारा प्रबंधित और संयुक्त राष्ट्र प्रणाली के सहयोग से कार्यान्वित किया गया है।
  • अब तक, 55 परियोजनाओं और प्रस्तावों को भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास साझेदारी निधि में 150 मिलियन अमरीकी डालर के कई उद्देश्य वाले 41.8 मिलियन अमरीकी डालर के कुल योगदान के साथ अनुमोदित किया गया है।

भारतीय रिजर्व बैंक ने 2020-21 की दूसरी द्वि-मासिक मौद्रिक नीति का वक्तव्य किया जारी: LAF और MSF दर रहेगी अपरिवर्तित

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भारतीय रिज़र्व बैंक की वित्त वर्ष 2020-21 की मौद्रिक नीति समिति की दूसरी बैठक 4, 5 और 6 अगस्त को की गई । दूसरी मौद्रिक नीति की बैठक के दौरान, एमपीसी ने वर्तमान और विकसित व्यापक आर्थिक और वित्तीय स्थितियों का विश्लेषण किया और विकास को पुनर्जीवित करने के साथ-साथ COVID-19 के प्रभाव को कम करने के लिए समायोजन रुख के साथ जारी रखने का निर्णय लिया है। अपने निर्णयों के साथ, एमपीसी का लक्ष्य मुद्रास्फीति को लक्ष्य के भीतर रखना है और इस प्रकार वित्तीय स्थिरता को बनाए रखना है।

इसके अलावा, वित्त वर्ष 2020-21 में पूरी वास्तविक जीडीपी विकास द्वारा नेगेटिव रहने की उम्मीद जताई गई है।


मौद्रिक नीति समिति की बैठक में लिए गए प्रमुख निर्णय हैं:
  • चलनिधि समायोजन सुविधा (एलएएफ) के तहत रेपो दर को 4.00% पर अपरिवर्तित रखा गया है.
  • LAF के तहत रिवर्स रेपो दर को 3.35% पर अपरिवर्तित रखा गया है.
  • सीमांत स्थायी सुविधा (MSF) दर और बैंक दर को 4.25% पर अपरिवर्तित रखा गया है

क्या होती है मौद्रिक नीति?


मौद्रिक नीति रिज़र्व बैंक की नीति है जो अधिनियम में वर्णित लक्ष्यों को हासिल करने के लिए रेपो दर, रिवर्स रेपो दर, लिक्विडिटी समायोजन सुविधा जैसे और कई अन्य मौद्रिक साधनों का उपयोग करती है। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) को भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के तहत अनिवार्य रूप से मौद्रिक नीति के संचालन की जिम्मेदारी सौपीं गई है।

मौद्रिक नीति के उद्देश्य?


देश में मौद्रिक नीति का मुख्य लक्ष्य विकास के साथ-साथ मूल्य स्थिरता को बनाए रखना है। सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए मूल्य स्थिरता को एक आवश्यक पूर्व शर्त के रूप में देखा जाता है।

भारतीय रिज़र्व बैंक को मई 2016 में किए भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) अधिनियम, 1934 संशोधन के अनुसार भारत सरकार के साथ-साथ लचीली मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण का कार्य भी दिया गया हैं। यह प्रत्येक पाँच में एक बार किया जाता है। भारत सरकार ने आधिकारिक राजपत्र में 5 अगस्त, 2016 से 31 मार्च, 2021 की अवधि के लिए लक्ष्य के रूप में 4 प्रतिशत उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) मुद्रास्फीति को अधिसूचित किया है। लक्ष्य को ऊपरी सहन सीमा 6 प्रतिशत और निचली सहन सीमा 2 प्रतिशत तय की गई है।

मौद्रिक नीति फ्रेमवर्क:


भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अधिनियम, 1934 में संशोधित भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम स्पष्ट रूप से रिज़र्व बैंक के लिए देश के मौद्रिक नीति ढांचे को परिचालित करने के लिए विधायी अधिदेश का प्रावधान करता है। इस ढांचे का लक्ष्य वर्तमान और उभरती समष्टि-आर्थिक स्थिति और मुद्रा बाजार दरों को रेपो दर के आसपास संचालित करने के लिए चलनिधि स्थिति के उतार-चढ़ाव के आकलन के आधार पर नीति (रेपो) दर निर्धारित करना है।




मौद्रिक नीति समिति की संरचना?


केंद्र सरकार ने सितंबर 2016 में संशोधित RBI अधिनियम, 1934 की धारा 45ZB के तहत, छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) का गठन किया है।


मौद्रिक नीति समिति की संरचना इस प्रकार की गई है:

  1. भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर – अध्यक्ष, शक्तिकांत दास
  2. भारतीय रिजर्व बैंक के उप-गवर्नर, मौद्रिक नीति के प्रभारी – सदस्य, डॉ. माइकल देवव्रत पात्रा
  3. भारतीय रिजर्व बैंक के एक ओर अधिकारी को केंद्रीय बोर्ड द्वारा नामित किया जाना है – सदस्य, पदेन सदस्य: डॉ. मृदुल सागर.
  4. चेतन घाटे, प्रोफेसर, भारतीय सांख्यिकी संस्थान (ISI) – सदस्य
  5. प्रोफेसर पामी दुआ, निदेशक, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स – सदस्य
  6. डॉ. रवींद्र ढोलकिया, प्रोफेसर, भारतीय प्रबंधन संस्थान, अहमदाबाद – सदस्य
मौद्रिक नीति की कुछ महत्वपूर्ण लिखत :


RBI की मौद्रिक नीति में मौद्रिक नीति के कार्यान्वयन में कई प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लिखतों का उपयोग किया जाता है। मौद्रिक नीति के कुछ महत्वपूर्ण लिखत इस प्रकार हैं:
  • रेपो दर: निर्धारित ब्याज दर जिस पर रिजर्व बैंक चलनिधि समायोजन सुविधा (एलएएफ) के तहत बैंकों को सरकार के संपार्श्विक के विरुद्ध और अन्य अनुमोदित प्रतिभूतियों के विरुद्ध ओवरनाईट चलनिधि प्रदान करता है।
  • रिवर्स रेपो दर: निर्धारित ब्याज दर जिस पर रिजर्व बैंक चलनिधि समायोजन सुविधा (एलएएफ) के तहत बैंकों से पात्र सरकारी प्रतिभूतियों के संपार्श्विक के विरुद्ध, ओवरनाइट आधार पर, चलनिधि को अवशोषित करता है।
  • चलनिधि समायोजन सुविधा (Liquidity Adjustment Facility): एलएएफ में ओवरनाईट और साथ ही आवधि रेपो नीलामियां शामिल हैं। आवधि रेपो का उद्देश्य अंतर-बैंक आवधि मुद्रा बाजार को विकसित करने में मदद करना है, जो बदले में ऋण और जमा की कीमत के लिए बाजार आधारित बैंचमार्क निर्धारित कर सकते हैं,और इस कारण से मौद्रिक नीति के प्रसारण में सुधार किया जा सकता हैं। रिज़र्व बैंक बाजार स्थितियों के तहत आवश्यक होने पर, भी परिवर्तनीय ब्याज दर रिवर्स रेपो नीलामियों का संचालन करता है।
  • सीमांत स्थायी सुविधा (Marginal Standing Facility): एक सुविधा जिसके तहत अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक रिज़र्व बैंक से ओवरनाईट मुद्रा की अतिरिक्त राशि को एक सीमा तक अपने सांविधिक चलनिधि अनुपात (एसएलआर) पोर्टफोलियो में गिरावट कर ब्याज की दंडात्मक दर ले सकते हैं। यह बैंकिंग प्रणाली को अप्रत्याशित चलनिधि झटकों के खिलाफ सुरक्षा वाल्व प्रदान करता है।

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति वक्तव्य का स्थिर रुख:


विकास की गति धीमी होने पर अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए समग्र मुद्रा आपूर्ति का विस्तार करने के लिए आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति द्वारा समायोजनात्मक रुख अपनाया जाता है।


उपरोक्त समाचार से सभी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य-
  • RBI के 25 वें गवर्नर: शक्तिकांत दास; मुख्यालय: मुंबई; स्थापित: 1 अप्रैल 1935, कोलकाता.

यतीश यादव ने “RAW: A History of India”s Covert Operations” नामक पुस्तक का किया लेखन

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जांच पड़ताल करने वाले पत्रकार और लेखक यतीश यादव द्वारा “RAW: A History of India”s Covert Operations” शीर्षक पुस्तक लिखी गई है। इस नई किताब में भारत की जासूसी एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) द्वारा किए गए वीरतापूर्ण कार्य संचालन की एक झलक मिलेगी, जिसमे बताया गया है कि किस तरह जासूसी कम्युनिटी में ग्रे दीवारों के पीछे वास्तव में कैसे ऑपरेशंस को अंजाम दिया जाता है। 

पुस्तक का सार:

  • इस पुस्तक में वास्तविक जासूसों के बारे में विस्तृत जानकरी दी गई, जिसमे उनके जीवन के अज्ञात पहलुओं, आघात और प्रलोभन, विजय और उनके प्रत्येक “मिशन इम्पॉसिबल” के निष्पादन में असफलताओं का कारण का भी जिक्र किया गया है।
  • यह पुस्तक एक गहन अंतर्दृष्टि प्रदान करती है और बताती है कि अपरिवर्तित क्षेत्र में गुप्त संचालन कैसे किया जाता है, वास्तविकता को दिखाने के लिए उसे किस बुना जाता है।
Research and Analysis Wing (RAW):

RAW, जिसके संस्थापक महान स्पाईमास्टर रामेश्वर नाथ काओ थे, ने इसकी स्थापना 1968 में 1962 के चीन-भारतीय सीमा युद्ध और 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान पहचानी गई इंटेलिजेंस की आवश्यकता को पूरा करने के लिए की गई थी।

उपरोक्त समाचारों से आने-वाली परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य-
  • RAW प्रमुख: सामंत गोयल.
  • RAW का मुख्यालय :: नई दिल्ली.
  • RAW की स्थापना: 21 सितंबर 1968.

“हाइड्रो-मौसम संबंधी खतरों के जोखिम को कम करने” पर वेबिनार श्रृंखला का हुआ आयोजन

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भारत मौसम विज्ञान विभाग के सहयोग से राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान द्वारा “Hydro-Meteorological Hazards Risk Reduction” यानि “जल-मौसम संबंधी खतरों के जोखिम को कम करने” के विषय पर एक वेबिनार श्रृंखला का आयोजन किया गया। वेबिनार श्रृंखला में तूफ़ान और आकाशीय बिजली’, बादल का फटना और बाढ़’, चक्रवात और तूफ़ान का बढ़ना तथा जलवायु परिवर्तन और चरम मौसम घटनाएं से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित 4 वेबिनार शामिल थे।
“हाइड्रो-मौसम संबंधी खतरों के जोखिम को कम करने” पर आयोजित वेबिनार श्रृंखला में जल-मौसम संबंधी जोखिमों की बेहतर समझ और प्रभावी सहयोगात्मक कार्रवाइयों के सम्बन्ध में मानवीय क्षमता बढाने और सुधार करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

छत्तीसगढ़ सरकार ने तेंदू पत्ता संग्राहकों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजना का किया शुभारंभ

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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा राज्य में तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए एक सामाजिक सुरक्षा योजना “शहीद महेन्द्र कर्मा तेंदूपत्ता संघर्ष समाज सुरक्षा योजना” की शुरूआत की गई है। तेंदू के पत्ते, बीड़ी बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली (बीड़ी पर लपेटी हुई पत्ती) राज्य के वनवासियों द्वारा एकत्र की जाती है और जिसे बाद राज्य सरकार द्वारा खरीदा जाता है। कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा के नाम पर तैयार की गई इस योजना का उद्घाटन उनकी जयंती के अवसर पर किया गया।

महेंद्र कर्मा के बारे में:

कर्मा, जिन्हें नक्सलियों के खिलाफ अपने कड़े रुख के लिए बस्तर टाइगर के नाम से जाना जाता था, वे कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं सहित उन 29 लोगों में शामिल थे, जिनकी 25 मई, 2013 को बस्तर जिले के झीरम घाटी में नक्सलियों द्वारा किए एक हमले में हत्या कर दी गई थी।

योजना के बारे में:

  • इस योजना के तहत, राज्य के वन विभाग और छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज महासंघ द्वारा संयुक्त रूप से निष्पादित किए जाने के लिए, पंजीकृत तेंदू कलेक्टरों के परिवार को उनके मुखिया की सामान्य मृत्यु (यदि परिवार के मुखिया की आयु 50 वर्ष से अधिक नहीं है) हो जाने पर नॉमिनी अथवा वारिस को 2 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
  • साथ ही दुर्घटना के कारण मृत्यु होने पर, 2 लाख रुपये की अतिरिक्त वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी, जबकि दुर्घटना के कारण स्थायी विकलांगता की स्थिति में, 2 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी और आंशिक विकलांगता की स्थिति में 1 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। 
  • यदि किसी परिवार के मुखिया की उम्र 50 से 59 वर्ष के बीच है, और उसकी सामान्य मृत्यु हो जाती है, तो उनके परिजनों या नामांकित व्यक्ति को 30,000 रुपये की वित्तीय सहायता, जबकि आकस्मिक मृत्यु के मामले में 75,000 रुपये वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी
  • इसी तरह इस श्रेणी में दुर्घटना में परिवार के मुखिया के स्थायी विकलांगता की स्थिति में 75,000 रुपये और आंशिक विकलांगता की स्थिति में 37,500 रुपये दिए जाएंगे.
  • वरिष्ट नेता के नाम पर शुरू की गई इस योजना से तेंदू पत्ते के संग्रह में शामिल लगभग 12.50 लाख परिवारों को लाभ मिलेगा।
उपरोक्त समाचारों से आने-वाली परीक्षाओं के लिए
महत्वपूर्ण तथ्य-
  • छत्तीसगढ़  राज्यपाल: अनुसुइया उइके.

सेबी के अध्यक्ष के तौर पर 18 महीने ओर आगे बढ़ाया गया अजय त्यागी का कार्यकाल

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कार्मिक मंत्रालय के अनुसार, बाजार नियामक सेबी के अध्यक्ष के रूप में अजय त्यागी के कार्यकाल को 18 महीने के लिए ओर आगे बढ़ा दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने त्यागी के कार्यकाल को 18 महीने यानि 1 सितंबर, 2020 से 28 फरवरी, 2022 तक बढ़ाने की मंजूरी दे दी है।
त्यागी 1984 बैच के आईएएस (सेवानिवृत्त) अधिकारी है, जिन्हें मार्च 2017 को सेबी के अध्यक्ष के रूप में तीन साल के लिए नियुक्त किया गया था। इससे पहले उनके कार्यकाल को मार्च में अगस्त तक छह महीने का विस्तार दिया गया था।

महाराष्ट्र के पूर्व सीएम शिवाजीराव पाटिल निलांगेकर का निधन

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महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री शिवाजीराव पाटिल निलांगेकर का निधन। वह एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता थे, जिन्होंने जून 1985 और मार्च 1986 के दौरान महाराष्ट्र मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया गया था। हालाँकि, उन्हें 1985 में राज्य के मेडिकल कॉलेज की परीक्षाओं में उनके खिलाफ कथित धोखाधड़ी के आरोपों के चलते मज़बूरी में सीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

मनोज सिन्हा को नियुक्त किया गया जम्मू और कश्मीर का नया उपराज्यपाल

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राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद द्वारा पूर्व केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा को जम्मू-कश्मीर का नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति इस पद से इस्तीफा देने वाले गिरीश चंद्र मुर्मू के स्थान पर की गई। मुर्मू का इस्तीफा राष्ट्रपति द्वारा स्वीकार करने के बाद यह घोषणा की गई है।
सिन्हा ने लोकसभा में तीन बार पूर्वी उत्तर प्रदेश के गाजीपुर संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया है। इसके अलावा सिन्हा रेल राज्य मंत्री के रूप में भी काम किया है।

हिरोशिमा डे: 6 अगस्त

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हर साल 6 अगस्त को द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम की सालगिरह का प्रतीक है। यह भयावह घटना 6 अगस्त, 1945 को हुई, जब संयुक्त राज्य अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा शहर पर “लिटिल बॉय” नामक एक परमाणु बम गिराया। यह परमाणु हमला 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध को समाप्त करने के मकसद से किया गया था। इस दिन को परमाणु ऊर्जा और परमाणु हथियारों के खतरे के बारे में शांति को बढ़ावा देने और जागरूकता फैलाने के लिए याद किया जाता है।

हिरोशिमा दिवस का इतिहास

Hiroshima Day:  द्वितीय विश्व युद्ध 1939- 1945 तक चला था, जो तैनात किया गया दुनिया का पहला परमाणु बम था, जिसमें 9000 पाउंड से अधिक यूरेनियम -235 लोड किया गया था और जिसे US B-29 bomber aircraft द्वारा 6 अगस्त 1945 को हिरोशिमा के जापानी शहर एनोला पर गिराया गया था। यह विस्फोट इतना विशाल था कि इससे शहर की लगभग 90% आबादी खत्म कर दी थी, जिसमे 70,000 लोगों की तत्काल मृत्यु हो गई थी और बाद में विकिरण के प्रभाव के कारण लगभग 10,000 लोगों की मृत्यु हो गई।

जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मुर्मू ने अपने पद से दिया इस्तीफा

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जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल गिरीश चंद्र मुर्मू ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। मुर्मू ने अनुच्छेद 370 हटाने की पहली वर्षगांठ पर इस्तीफा दिया जिससे तत्कालीन राज्य का विशेष दर्जा समाप्त हो गया था। मुर्मू ने केंद्र सरकार को अपना त्याग पत्र सौंपा है। सूत्रों के अनुसार, मुर्मू को नया नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) नियुक्त किए जाने की संभावना जताई जा रही है। वह कैग प्रमुख के रूप में राजिव महर्षि का स्थान लेंगे।
मुर्मू ने आधिकारिक तौर पर जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के तहत 31 अक्टूबर, 2019 को जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के पहले उपराज्यपाल के रूप में कार्यभार संभाला था।

गिरीश चंद्र मुर्मू के बारे में:

गिरीश चन्द्र मुर्मू 1985 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा के गुजरात कैडर के अधिकारी हैं। उन्होंने केंद्र शासित प्रदेश का पहला उपराज्यपाल नियुक्त जाने से पहले, वित्त मंत्रालय में व्यय सचिव के पद पर भी कार्य कर चुके है। इसके अलावा उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी के प्रमुख सचिव के रूप में भी कार्य किया है।

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