सीपी राधाकृष्णन भारत के 15वें उपराष्ट्रपति चुने गए

भारत के नए उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृण्णन को चुन लिया गया है। उन्हें 452 वोट मिले हैं। इसी के साथ सीपी राधाकृष्णन भारत के 15वें उपराष्ट्रपति बन गए हैं। 67 वर्षीय राधाकृष्णन, जो वर्तमान में महाराष्ट्र के राज्यपाल रहे हैं। अब वह उपराष्ट्रपति का पद संभालेंगे। उन्होंने विपक्ष के उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी (वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश) को पराजित किया। इस चुनाव में 98.3% की रिकॉर्ड मतदान प्रतिशतता दर्ज की गई, जो संसद सदस्यों की एकजुटता और सक्रिय भागीदारी को दर्शाता है।

सीपी राधाकृष्णन का जन्म तमिलनाडु के तिरुप्पुर जिले में हुआ। 17 साल की उम्र से ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े हुए हैं। बीजेपी के साथ उनका लंबा सफर रहा है। उनका राजनीतिक सफर 1998 में शुरू हुआ, जब वे कोयंबटूर से लोकसभा के लिए चुने गए। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान वे 1998 और 1999 के आम चुनावों में लगातार दो बार सांसद बने।

चुनाव प्रक्रिया और मुख्य विवरण

  • चुनाव तिथि: 9 सितंबर 2025

  • मतदान प्रतिशत: 781 में से 767 सांसदों ने वोट डाले, जिनमें से 752 मान्य और 15 अमान्य पाए गए।

  • निर्वाचन मंडल की कुल शक्ति: 781 सांसद (लोकसभा + राज्यसभा)

  • एनडीए उम्मीदवार: सी. पी. राधाकृष्णन

  • विपक्षी उम्मीदवार: बी. सुदर्शन रेड्डी

  • परिणाम: सी. पी. राधाकृष्णन ने स्पष्ट बहुमत से जीत दर्ज की।

एनडीए की संख्या बल

  • एनडीए के पास कुल 425 सांसद, जिनमें से भाजपा के 342 सांसद थे।

  • विपक्षी खेमे के पास 324 सांसद, जिनमें से कांग्रेस के पास 126 सीटें थीं।

  • बीजेडी, बीआरएस और शिरोमणि अकाली दल जैसी क्षेत्रीय पार्टियों ने मतदान से दूरी बनाई, जिससे विपक्ष की संभावनाएँ कमजोर हो गईं।

दिन की मुख्य झलकियाँ

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुबह 10 बजे सबसे पहले वोट डाला।

  • दोपहर 3 बजे तक 96% मतदान दर्ज हुआ, जो बाद में बढ़कर 98.3% हो गया।

  • राधाकृष्णन के गृह नगर तिरुप्पुर में लोगों ने जश्न मनाया—भोजन स्टॉल लगाए गए, पटाखे फोड़े गए और विशेष प्रार्थनाएँ की गईं।

  • प्रमुख मतदाता: सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अमित शाह, राजनाथ सिंह, अखिलेश यादव और देवगौड़ा ने मतदान किया।

  • इंजीनियर राशिद, जो बारामूला से जेल में बंद सांसद हैं, ने विशेष सुरक्षा व्यवस्था के तहत वोट डाला।

चुनाव का महत्व

  • सी. पी. राधाकृष्णन तमिलनाडु से चुने जाने वाले दूसरे उपराष्ट्रपति बने, उनसे पहले डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन यह पद संभाल चुके थे।

  • उनकी जीत एनडीए की संसद में मजबूत पकड़ और सहयोगी दलों, विशेषकर वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के समर्थन को दर्शाती है।

  • उपराष्ट्रपति राज्यसभा के पदेन सभापति भी होते हैं, जिससे राधाकृष्णन को संसदीय कार्यों में अहम भूमिका निभाने का अवसर मिलेगा।

नेपाल में हिंसक प्रदर्शन के बाद सरकार ने हटाया सोशल मीडिया बैन

नेपाल सरकार ने फेसबुक, एक्स (पूर्व में ट्विटर) और यूट्यूब जैसे प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लगाया गया विवादास्पद प्रतिबंध आधिकारिक रूप से हटा दिया है। यह फैसला देशभर में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद लिया गया, जिनमें 19 लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों लोग घायल हुए। इन प्रदर्शनों का नेतृत्व मुख्य रूप से जेनरेशन ज़ेड (Gen Z) कार्यकर्ताओं ने किया था।

पृष्ठभूमि: सोशल मीडिया पर कार्रवाई

  • सरकार ने इन प्लेटफॉर्म्स पर यह कहते हुए रोक लगाई थी कि उन्होंने स्थानीय प्राधिकरणों के साथ पंजीकरण नहीं कराया और नेपाल के इंटरनेट नियमों का पालन नहीं किया।

  • अचानक लगाए गए इस प्रतिबंध ने युवाओं में आक्रोश फैला दिया, क्योंकि शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सक्रियता के लिए वे डिजिटल माध्यम पर निर्भर हैं।

  • इस कदम को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला माना गया, जिसके चलते सड़कों पर विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए।

विरोध और हिंसा

  • प्रदर्शन सबसे पहले काठमांडू से शुरू हुए और फिर अन्य शहरी क्षेत्रों तक फैल गए।

  • हजारों की संख्या में छात्र और युवा पेशेवर सड़कों पर उतर आए और डिजिटल एक्सेस बहाल करने की मांग की।

  • संसद भवन के पास प्रदर्शनकारियों और दंगा-रोधी पुलिस के बीच झड़पें हुईं।

  • इन झड़पों में 19 लोगों की मौत और सैकड़ों लोग घायल हुए।

  • यह आंदोलन नेपाल के हाल के इतिहास में सबसे तीव्र युवा-नेतृत्व वाले आंदोलनों में से एक बन गया।

सरकार की प्रतिक्रिया और प्रतिबंध हटाने का फैसला

आपातकालीन कैबिनेट बैठक के बाद संचार, सूचना और प्रसारण मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुङ ने घोषणा की कि,

  • सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लगाया गया प्रतिबंध हटा दिया है।

  • सूचना मंत्रालय ने सभी एजेंसियों को तुरंत डिजिटल एक्सेस बहाल करने के निर्देश दिए।

  • सरकार ने युवाओं की चिंताओं को वैध मानते हुए संवाद के लिए अपनी तत्परता जताई।

गुरुङ ने यह भी अपील की कि जेनरेशन ज़ेड के विरोध समूह अपने अभियान को वापस लें। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार डिजिटल नियामक ढांचे की समीक्षा सभी हितधारकों के साथ परामर्श करके करेगी।

भारत, इज़राइल ने द्विपक्षीय निवेश समझौते पर हस्ताक्षर किए

भारत और इज़राइल ने नई दिल्ली में एक द्विपक्षीय निवेश समझौते (Bilateral Investment Agreement) पर हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य आपसी निवेश को बढ़ावा देना, निवेशकों को सुरक्षा प्रदान करना और प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा तथा वित्तीय नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करना है। यह समझौता भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और इज़राइल के वित्त मंत्री बेज़ालेल स्मोट्रिच द्वारा हस्ताक्षरित किया गया।

समझौते के प्रमुख उद्देश्य

  • द्विपक्षीय निवेश को बढ़ावा देना

  • निवेशकों को कानूनी निश्चितता प्रदान करना

  • अधिग्रहण (Expropriation) से सुरक्षा और पारदर्शी नियम सुनिश्चित करना

  • नुकसान की स्थिति में निष्पक्ष मुआवज़े की गारंटी

  • विवाद समाधान हेतु स्वतंत्र मध्यस्थता (Arbitration) व्यवस्था

  • पूंजी और लाभांश का सुगम हस्तांतरण

यह सभी प्रावधान भारत और इज़राइल के बीच निवेश माहौल को और मजबूत व पारदर्शी बनाएंगे।

वर्तमान निवेश स्थिति और विकास की संभावनाएँ

  • वर्तमान में भारत-इज़राइल के बीच निवेश का मूल्य लगभग 800 मिलियन अमेरिकी डॉलर है।

  • समझौते से निम्नलिखित क्षेत्रों में निवेश बढ़ने की संभावना है:

    • साइबर सुरक्षा

    • रक्षा तकनीक

    • फिनटेक और डिजिटल पेमेंट्स

    • नवाचार एवं हाई-टेक उद्योग

निर्मला सीतारमण ने दोनों देशों के उद्योग जगत से नए निवेश अवसर तलाशने का आह्वान किया।

रणनीतिक सहयोग और साझा दृष्टिकोण

इज़राइल के वित्त मंत्री बेज़ालेल स्मोट्रिच ने दोनों देशों की साझा लोकतांत्रिक एवं आर्थिक मूल्यों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा चुनौतियों के बावजूद भारत और इज़राइल ने उच्च आर्थिक विकास बनाए रखा है। सहयोग के प्रमुख क्षेत्र:

  • साइबर डिफेंस

  • वित्तीय विनियमन

  • डिजिटल भुगतान संपर्क

  • अवसंरचना विकास

दोनों मंत्रियों ने प्रौद्योगिकी-आधारित सहयोग और आर्थिक लचीलापन बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

परीक्षा हेतु मुख्य तथ्य

  • घटना: भारत-इज़राइल द्विपक्षीय निवेश समझौते पर हस्ताक्षर

  • स्थान: नई दिल्ली

  • तारीख: सितंबर 2025

  • हस्ताक्षरकर्ता: निर्मला सीतारमण (भारत), बेज़ालेल स्मोट्रिच (इज़राइल)

  • निवेश फोकस: फिनटेक, रक्षा, साइबर सुरक्षा, डिजिटल पेमेंट्स

  • वर्तमान निवेश मूल्य: 800 मिलियन अमेरिकी डॉलर

  • प्रमुख विशेषताएँ: मध्यस्थता, निवेशक सुरक्षा, मुआवज़ा, पारदर्शिता

भारत ने CAFA नेशंस कप 2025 में कांस्य पदक जीता

भारतीय फुटबॉल टीम ने ताजिकिस्तान के हिसोर सेंट्रल स्टेडियम में खेले गए सीएएफए नेशंस कप 2025 के तीसरे स्थान के मैच में ओमान को पेनल्टी शूटआउट में 3-2 से हराकर कांस्य पदक हासिल किया। यह भारत की ओमान पर पहली अंतरराष्ट्रीय जीत है, जो इस उपलब्धि को और भी खास बनाती है।

मैच सारांश

  • निर्धारित समय में मैच 1-1 से बराबरी पर खत्म हुआ।

  • उदंता सिंह ने भारत के लिए बराबरी का गोल दागा, जबकि ओमान ने पहले बढ़त बनाई थी।

  • पेनल्टी शूटआउट में:

    • ओमान ने अपनी शुरुआती दो पेनल्टी मिस कीं।

    • गुरप्रीत सिंह संधू ने शानदार प्रदर्शन करते हुए निर्णायक पेनल्टी बचाई।

    • भारत ने 3 पेनल्टी बदलीं, जबकि ओमान केवल 2 ही कर पाया।

  • नतीजा: भारत 1-1 ओमान (भारत ने पेनल्टी शूटआउट 3-2 से जीता)।

ऐतिहासिक महत्व

  • ओमान पर भारत की पहली जीत।

  • सीएएफए नेशंस कप में भारत का पहला पदक।

  • एशियाई मंच पर भारतीय फुटबॉल के लिए बड़ा मनोबल बढ़ाने वाला क्षण।

मुख्य खिलाड़ी

  • उदंता सिंह – नियमित समय में भारत का बराबरी का गोल।

  • गुरप्रीत सिंह संधू – पेनल्टी शूटआउट में निर्णायक बचाव।

  • पूरी टीम – अनुशासित डिफेंस और मानसिक मजबूती का प्रदर्शन।

परीक्षा हेतु मुख्य तथ्य

  • आयोजन: सीएएफए नेशंस कप 2025

  • स्थान: हिसोर सेंट्रल स्टेडियम, ताजिकिस्तान

  • परिणाम: भारत 1-1 ओमान (भारत ने 3-2 से पेनल्टी शूटआउट जीता)

  • उपलब्धि: कांस्य पदक (Bronze Medal)

28वीं यूनिवर्सल पोस्टल कांग्रेस में भारत ने एजेंडा का नेतृत्व किया

28वीं यूनिवर्सल पोस्टल कांग्रेस, जो पहली बार संयुक्त अरब अमीरात में आयोजित की जा रही है, 8 सितंबर 2025 को दुबई वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में शुरू हुई। इसमें 192 सदस्य देशों से आए 2,000 से अधिक प्रतिनिधि शामिल हुए। भारत की ओर से केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने भाग लिया और नवाचार, स्थिरता एवं डिजिटल समावेशन के माध्यम से वैश्विक डाक सेवाओं के भविष्य को आकार देने की भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया।

भारत की रणनीतिक प्राथमिकताएँ
1874 से यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन (UPU) का संस्थापक सदस्य होने के नाते भारत ने 2026–2029 की रणनीतिक रोडमैप में सक्रिय योगदान देने का संकल्प लिया। भारत ने खासकर तीन क्षेत्रों पर ज़ोर दिया:

  • डाक सेवाओं का डिजिटल रूपांतरण

  • सतत लॉजिस्टिक्स और परिचालन

  • सुरक्षित और सुलभ ई-कॉमर्स ढाँचा

भारत ने UPU की काउंसिल ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन और पोस्टल ऑपरेशंस काउंसिल में उम्मीदवार बनने की घोषणा भी की।

वैश्विक सहयोग और द्विपक्षीय वार्ता
कांग्रेस के दौरान सिंधिया ने जापान, स्पेन, पुर्तगाल, पैन अफ्रीकन पोस्टल यूनियन, कैरेबियन पोस्टल यूनियन और पोस्टल यूनियन ऑफ द अमेरिकाज के समकक्षों से मुलाकात की। वार्ता में इन विषयों पर ज़ोर दिया गया:

  • सीमा-पार लॉजिस्टिक्स समाधान

  • डाक सेवाओं में डिजिटल नवाचार

  • दक्षिण-दक्षिण सहयोग

भारत अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और कैरेबियन के कई देशों के साथ लेटर्स ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर भी कर रहा है।

UPI–UPU एकीकरण: ऐतिहासिक पहल
एक अहम घोषणा रही UPI–UPU Integration Project, जिसे भारत के डाक विभाग, NPCI International Payments Limited और UPU ने संयुक्त रूप से लॉन्च किया। इसके तहत,

  • अंतरराष्ट्रीय धन प्रेषण को कम लागत और सुरक्षित बनाया जाएगा

  • ग्रामीण भारत तक तेज़ी से पैसे पहुँचेंगे

  • प्रवासी भारतीयों को वित्तीय समावेशन का लाभ मिलेगा

यह पहल भारतीय परिवारों, विशेषकर NRI और प्रवासी मज़दूरों के लिए बड़ी राहत होगी।

इंडिया पोस्ट का रूपांतरण
सिंधिया ने बताया कि 6.8 लाख गाँवों तक फैले विश्व के सबसे बड़े डाक नेटवर्क इंडिया पोस्ट को अब एक लॉजिस्टिक्स और वित्तीय सेवाओं की दिग्गज संस्था में बदला जा रहा है। प्रमुख कदम:

  • छह नए व्यवसायिक वर्टिकल्स का गठन

  • पासपोर्ट सेवा केंद्र, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण और डिजिटल पहचान जैसी सेवाओं का विस्तार

  • आधुनिक सीआरएम टूल्स और पोस्टल सॉफ्टवेयर का उपयोग

सिंधिया ने कहा कि विश्वसनीयता और पहुँच के मामले में इंडिया पोस्ट बेजोड़ है, जिसका मुकाबला कोई निजी कूरियर सेवा नहीं कर सकती।

परीक्षा हेतु मुख्य बिंदु

  • आयोजन: 28वीं यूनिवर्सल पोस्टल कांग्रेस, दुबई

  • भारत का प्रतिनिधित्व: ज्योतिरादित्य सिंधिया (संचार मंत्री)

  • प्रमुख पहल: UPI–UPU Integration Project

  • भारत की उम्मीदवारी: UPU की काउंसिल ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन और पोस्टल ऑपरेशंस काउंसिल

भारत की अर्थव्यवस्था में 15–20% योगदान करता है कृषि क्षेत्र: पीएसए

भारत के प्रधानमंत्री के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (पीएसए) अजय कुमार सूद ने भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि की केंद्रीय भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि यह क्षेत्र देश के आर्थिक उत्पादन में 15–20% का योगदान करता है और 60% से अधिक कार्यबल को आजीविका प्रदान करता है। उन्होंने ये बातें नई दिल्ली में आयोजित Dialogue NEXT 2025 कार्यक्रम के दौरान कहीं, जिसे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने आयोजित किया था।

ग्रामीण भारत की आर्थिक रीढ़

दो दिवसीय कार्यक्रम में बोलते हुए सूद ने बताया कि भले ही सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में कृषि का हिस्सा अपेक्षाकृत कम दिखता हो, लेकिन यह लाखों ग्रामीण आजीविकाओं का आधार है। उन्होंने कृषि को भारत की सामाजिक-आर्थिक संरचना का स्तंभ बताया और बदलते जलवायु एवं पारिस्थितिकीय संकटों के बीच कृषि को आधुनिक और सुरक्षित बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

नई पहल: राष्ट्रीय पादप स्वास्थ्य मिशन

सूद ने एक अहम नीति पहल की घोषणा की कि ICAR जल्द ही राष्ट्रीय पादप स्वास्थ्य मिशन (National Plant Health Mission) शुरू करेगा। इसका उद्देश्य है –

  • पौधों की बीमारियों और कीट संक्रमण से होने वाले नुकसान को कम करना

  • समन्वित पादप स्वास्थ्य प्रबंधन (Integrated Plant Health Management)

  • कीट एवं रोगों की निगरानी (Pest & Disease Surveillance)

  • प्रकोप रोकथाम हेतु अर्ली-वॉर्निंग सिस्टम

  • किसानों और कृषि-विशेषज्ञों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम

यह मिशन फसल उत्पादन बढ़ाने, किसानों की आय स्थिर करने और देशभर में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

Dialogue NEXT 2025: वैश्विक सहयोग का मंच

Take it to the Farmer” थीम के तहत आयोजित Dialogue NEXT 2025 में वैश्विक कृषि विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं और वैज्ञानिकों ने भाग लिया। यह कार्यक्रम ICAR, CIMMYT (International Maize and Wheat Improvement Centre) और BISA (Borlaug Institute for South Asia) के सहयोग से आयोजित हुआ। इसमें खास फोकस रहा –

  • जलवायु-प्रतिरोधी कृषि

  • एग्री-टेक का प्रसार

  • संसाधनों का सतत उपयोग

  • किसान-केंद्रित नवाचार

क्यों है महत्वपूर्ण

भारत कृषि क्षेत्र में बदलती चुनौतियों का सामना कर रहा है – जैसे मृदा क्षरण, जलवायु परिवर्तन, कीट प्रतिरोध और कम उत्पादकता। ऐसे में राष्ट्रीय पादप स्वास्थ्य मिशन जैसे कदम छोटे और सीमांत किसानों की सुरक्षा और देश की खाद्य प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए बेहद अहम हैं।

परीक्षा के लिए प्रमुख तथ्य

  • कार्यक्रम: Dialogue NEXT 2025, नई दिल्ली

  • आयोजक: ICAR, CIMMYT, BISA

  • मुख्य वक्ता: अजय कुमार सूद (प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार)

  • कृषि का योगदान: भारत की अर्थव्यवस्था में 15–20%

डेल की मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) इवॉन मैकगिल सितंबर 2025 में पद छोड़ेंगी

डेल टेक्नोलॉजीज़ ने घोषणा की है कि मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) इवॉन मैकगिल 9 सितंबर 2025 से पद छोड़ देंगी, जिससे कंपनी के साथ उनके लगभग 30 साल लंबे कार्यकाल का अंत होगा। हालांकि यह एक बड़े स्तर का नेतृत्व परिवर्तन है, कंपनी ने मौजूदा तिमाही और पूरे वित्तीय वर्ष के लिए अपने वित्तीय अनुमान को बरकरार रखा है, जिससे स्थिरता का संकेत मिलता है।

संक्रमण योजना और अंतरिम नेतृत्व

अंतरिम CFO के रूप में डेविड कैनेडी जिम्मेदारी संभालेंगे, जो वर्तमान में डेल में ग्लोबल बिज़नेस ऑपरेशंस, फाइनेंस के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट हैं। डेल में 27 साल से कार्यरत कैनेडी गहरी संस्थागत समझ रखते हैं और उनसे निरंतरता बनाए रखने की उम्मीद है। मैकगिल 31 अक्तूबर 2025 तक सलाहकार के रूप में कंपनी से जुड़ी रहेंगी ताकि संक्रमण सुचारू रूप से हो सके।

इस्तीफे में कोई विवाद नहीं

कंपनी ने स्पष्ट किया है कि मैकगिल का इस्तीफा वित्तीय रिपोर्टिंग, अनुपालन, संचालन या आंतरिक नियंत्रण से जुड़े किसी भी मतभेद से संबंधित नहीं है। यह प्रस्थान एक संरचित कार्यकारी संक्रमण का हिस्सा है।

बाज़ार की प्रतिक्रिया और कंपनी का दृष्टिकोण

घोषणा के बाद आफ्टर-ऑवर्स ट्रेडिंग में डेल के शेयर लगभग 1.8% गिर गए—जो कि बड़े नेतृत्व परिवर्तन के दौरान आम बात है। हालांकि, तीसरी तिमाही और पूरे वर्ष की कमाई के अनुमान को बरकरार रखना डेल के परिचालन और वित्तीय प्रदर्शन पर भरोसे को दर्शाता है।

परीक्षा के लिए मुख्य तथ्य

  • प्रस्थान की तिथि: 9 सितंबर 2025

  • जाने वाली CFO: इवॉन मैकगिल

  • अंतरिम CFO: डेविड कैनेडी

  • CEO: माइकल डेल

हिमाचल प्रदेश 99.3% साक्षरता के साथ पूर्ण साक्षर घोषित

भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित करते हुए हिमाचल प्रदेश को पूर्ण साक्षर राज्य घोषित किया गया है। राज्य ने 99.3% साक्षरता दर हासिल कर ली है। यह घोषणा मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शिमला में आयोजित उल्लास मेला 2025 (अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर) में की।

7% से 99.3% तक: एक ऐतिहासिक सफ़र

सीएम सुक्खू ने बताया कि स्वतंत्रता के बाद हिमाचल की साक्षरता दर मात्र 7% थी। अब राज्य ने राष्ट्रीय मानक 95% साक्षरता दर को पार कर लिया है और देश के सबसे शिक्षित क्षेत्रों में शामिल हो गया है।

उन्होंने इस सफर को “चुनौतियों से भरा लेकिन लगातार गुणवत्ता युक्त शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करने वाला” बताया, विशेषकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में।

छात्र-शिक्षक अनुपात में शीर्ष स्थान

साक्षरता के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश ने छात्र-शिक्षक अनुपात में भी देशभर में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। यह उपलब्धि हासिल हुई है:

  • योग्य शिक्षकों की रणनीतिक भर्ती

  • सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढाँचे का विस्तार

  • पाठ्यक्रम का आधुनिकीकरण और शिक्षक प्रशिक्षण

शिक्षा सुधार और भविष्य की दिशा

सीएम सुक्खू ने शिक्षा क्षेत्र में और सुधारों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। आने वाली योजनाओं में शामिल हैं:

  • सरकारी संस्थानों को उत्कृष्टता केंद्र में बदलना

  • कक्षाओं में तकनीक और नवाचार का समावेश

  • ग्रामीण स्कूलों के लिए डिजिटल अवसंरचना को सुदृढ़ करना

  • व्यावसायिक और जीवन कौशल शिक्षा को बढ़ावा देना

शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने भी इस उपलब्धि को दशकों से चल रहे निवेश और साक्षरता अभियानों का परिणाम बताया, जिसने सार्वभौमिक प्राथमिक शिक्षा को वास्तविकता बनाया।

परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य

  • घटना: हिमाचल प्रदेश पूर्ण साक्षर राज्य घोषित (अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस, 8 सितंबर 2025)

  • साक्षरता दर: 99.3%

  • राष्ट्रीय मानक: 95%

  • छात्र-शिक्षक अनुपात: भारत में प्रथम स्थान

सेना के ऑपरेशन राहत ने बाढ़ प्रभावित उत्तरी क्षेत्र में 6,000 लोगों को बचाया

भारतीय सेना की पश्चिमी कमान (Western Command) ने पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में आई भीषण बाढ़ के बाद ऑपरेशन राहत के तहत बड़े पैमाने पर मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) अभियान शुरू किया है। केवल दो हफ्तों में सेना ने 6,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला, 13,000 नागरिकों को चिकित्सीय सहायता दी और प्रभावित समुदायों तक 48 टन आवश्यक सामग्री पहुँचाई।

राहत अभियानों का पैमाना

अब तक 59 आर्मी कॉलम (जिसमें 17 इंजीनियर टास्क फोर्स शामिल हैं) का उपयोग कर 82 HADR मिशन पूरे किए गए।

  • इनमें से 300 अर्धसैनिक बल के जवानों सहित हजारों फंसे हुए नागरिकों को बचाया गया।

मुख्य राहत कार्य:

  • चिकित्सीय सहायता: 13,000 से अधिक लोगों का उपचार, गंभीर मरीजों को एयरलिफ्ट किया गया।

  • आपूर्ति वितरण: दवाएँ, पानी और राशन हवाई मार्ग से गिराए गए या जमीनी काफिलों से पहुँचाए गए।

  • निकासी: नागरिकों को डूबे हुए गाँवों और सीमा चौकियों से सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया।

हवाई संसाधनों की भूमिका

भारतीय सेना और वायुसेना ने 250 से अधिक उड़ान घंटे पूरे करते हुए शक्तिशाली एविएशन फ़्लीट तैनात किया:

  • 3 एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर (ALH)

  • 6 एमआई-17 हेलिकॉप्टर

  • 6 चीता हेलिकॉप्टर

  • 1 चिनूक भारी-भरकम हेलिकॉप्टर

इन विमानों ने फंसे लोगों को बचाने, जरूरी सामग्री पहुँचाने और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी में अहम भूमिका निभाई।

पुनर्स्थापन के लिए इंजीनियरिंग कार्य

इंजीनियर इकाइयाँ दिन-रात काम कर रही हैं:

  • बाढ़ के पानी को संवेदनशील क्षेत्रों से मोड़ना

  • पुलों और ध्वस्त सड़कों की मरम्मत

  • तटबंधों (बुंदों) को मज़बूत करना

  • जम्मू में मोबाइल कनेक्टिविटी बहाल करने के लिए 2 किमी से अधिक ऑप्टिकल फ़ाइबर केबल बिछाना

विशेष प्राथमिकता सीमा चौकियों और अलग-थलग पड़े गाँवों को दी जा रही है, जहाँ सड़क संपर्क और संचार व्यवस्था बहाल करना अत्यंत आवश्यक है।

नागरिक एजेंसियों के साथ समन्वय

ऑपरेशन राहत को नागरिक प्रशासन, NDRF और SDRF के साथ करीबी समन्वय में संचालित किया जा रहा है।
सभी कमांड मुख्यालयों पर फ्लड कंट्रोल एवं वॉटर लेवल मॉनिटरिंग सेल स्थापित किए गए हैं, जो भाखड़ा नंगल बांध, रणजीत सागर बांध और अन्य प्रमुख बिंदुओं पर जल स्तर की निगरानी कर रहे हैं।

यह समेकित दृष्टिकोण एक राष्ट्रीय एकजुटता और संकट प्रबंधन में लचीलापन दर्शाता है।

परीक्षा हेतु मुख्य तथ्य

  • ऑपरेशन: राहत (पश्चिमी कमान)

  • कवर किए गए क्षेत्र: पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर

  • निकाले गए लोग: 6,000+ (300 अर्धसैनिक कर्मी सहित)

  • चिकित्सीय सहायता: 13,000+ नागरिक

  • राहत सामग्री वितरित: 48 टन

रूस की एंटरोमिक्स कैंसर वैक्सीन ने शुरुआती परीक्षणों में 100% प्रभावकारिता दिखाई

रूस ने एक क्रांतिकारी चिकित्सा उपलब्धि हासिल की है। देश ने एंटरोमिक्स (Enteromix) नामक mRNA-आधारित कैंसर टीके की घोषणा की है, जिसने शुरुआती नैदानिक परीक्षणों में 100% प्रभावकारिता और सुरक्षा दिखाई है। यह टीका कोलोरेक्टल कैंसर से लड़ने के लिए बनाया गया है और यह व्यक्तिगत प्रतिरक्षा उपचार (Personalized Immunotherapy) प्रदान करता है, जो प्रत्येक व्यक्ति के ट्यूमर प्रोफ़ाइल के अनुसार तैयार किया जाता है।

एंटरोमिक्स का विकास

  • निर्माण संस्थान: रूस का नेशनल मेडिकल रिसर्च रेडियोलॉजिकल सेंटर एवं एंगलहार्ट इंस्टीट्यूट ऑफ मॉलिक्यूलर बायोलॉजी

  • प्रौद्योगिकी: mRNA प्लेटफ़ॉर्म पर आधारित (COVID-19 वैक्सीन की तरह)

  • विधि: रोगी के ट्यूमर जीनोमिक्स का उन्नत म्यूटेशन-मैपिंग एल्गोरिद्म से विश्लेषण कर प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया तैयार करना

  • परीक्षण आकार: 48 स्वयंसेवकों पर किया गया

  • परिणाम: ट्यूमर में कमी देखी गई और कोई गंभीर दुष्प्रभाव नहीं पाया गया

एंटरोमिक्स की विशेषताएँ

  • व्यक्तिगत दृष्टिकोण: प्रत्येक डोज़ रोगी के ट्यूमर की आनुवंशिकी (genetics) के अनुसार अनुकूलित

  • mRNA प्लेटफ़ॉर्म: अन्य प्रकार के कैंसरों के लिए तेज़ी से अनुकूलन और वैक्सीन विकास संभव

  • पिछली सीमाओं पर काबू: पारंपरिक कैंसर वैक्सीन “वन-साइज़-फिट्स-ऑल” मॉडल पर आधारित थे, जिनकी सफलता सीमित रही

वैश्विक और भारतीय प्रभाव

  • वैश्विक स्तर पर: यह कठोर उपचार जैसे कीमोथेरेपी की जगह सुरक्षित और लक्षित इम्यूनोथेरेपी ला सकता है।

  • भारत में:

    • कोलोरेक्टल और गर्भाशय ग्रीवा (cervical) कैंसर का भारी बोझ

    • यदि यह किफायती और सुलभ हुआ तो कैंसर उपचार में क्रांति ला सकता है

    • चुनौतियाँ: लागत, ढांचा, जीनोमिक प्रोफाइलिंग की सुविधा, कोल्ड-चेन स्टोरेज, नियामकीय स्वीकृति

सावधानी आवश्यक

  • शुरुआती परीक्षण उत्साहजनक हैं, लेकिन बड़े स्तर पर परीक्षण आवश्यक हैं

  • उत्पादन और वितरण की चुनौतियों को हल करना होगा

  • रूस के स्वास्थ्य मंत्रालय से नियामकीय स्वीकृति अगला महत्वपूर्ण पड़ाव है

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