ऑस्ट्रेलिया के ग्रेट बैरियर रीफ को विश्व धरोहर स्थल के रूप में सूचीबद्ध किया जाएगा

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संयुक्त राष्ट्र के एक पैनल ने 29 नवंबर, 2022 को सिफारिश की ऑस्ट्रेलिया के ग्रेट बैरियर रीफ को विश्व विरासत स्थल के रूप में सूचीबद्ध किया जाना चाहिए जो “खतरे में” है। दुनिया का सबसे बड़ा प्रवाल भित्ति पारिस्थितिकी तंत्र जलवायु परिवर्तन और महासागरों के गर्म होने से काफी प्रभावित हुआ है।

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बार-बार ब्लीचिंग की घटनाएं और ला नीना रीफ को खतरे में डाल रहे हैं। ब्लीचिंग तब होता है जब पानी बहुत अधिक गर्म हो जाता है, जिससे कोरल अपने ऊतकों में रहने वाले रंगीन शैवाल को बाहर निकाल देते हैं और सफेद हो जाते हैं। ऑस्ट्रेलिया की हाल ही में चुनी गई सरकार ने रीफ की रक्षा के लिए आने वाले वर्षों में $1.2 बिलियन ($800 मिलियन) खर्च करने का संकल्प लिया है।

 

प्रवाल भित्तियाँ पृथ्वी पर सबसे जैविक रूप से विविध समुद्री पारिस्थितिक तंत्रों में से एक हैं। ये समुद्री पारिस्थितिक तंत्र में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और समुद्र में वनस्पतियों और जीवों के आवासों का समर्थन करती हैं। प्रत्येक कोरल को पॉलीप कहा जाता है और ऐसे हजारों पॉलीप्स एक कॉलोनी बनाने के लिए एक साथ रहते हैं।

 

यह ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड के उत्तर-पूर्वी तट में 1400 मील तक फैला हुआ है जो विश्व का सबसे व्यापक और समृद्ध प्रवाल भित्ति पारिस्थितिकी तंत्र है। यह 2,900 से अधिक भित्तियों और 900 से अधिक द्वीपों से मिलकर बना है। यह जीवों द्वारा बनाई गई विश्व की सबसे बड़ी एकल संरचना है। इस चट्टान को 1981 में विश्व विरासत स्थल के रूप में चुना गया था।

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भारत बायोटेक ने लॉन्च की दुनिया की पहली नेजल कोविड-19 वैक्सीन

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हैदराबाद की बायोटेक्नोलॉजी कंपनी भारत बायोटेक ने दुनिया की पहली नेजल कोविड-19 वैक्सीन लॉन्च की है। सोमवार शाम को भारत बायोटेक द्वारा किए गए एक ट्वीट के अनुसार, iNCOVACC को हाल ही में आपातकालीन स्थिति में प्रतिबंधित उपयोग के तहत 18 वर्ष और उससे अधिक उम्र के बूस्टर खुराक के लिए मंजूरी मिली है। इस बयान के अनुसार iNCOVACC कोविड के लिए दुनिया का पहला इंट्रानेजल वैक्सीन है, जिसे प्राइमरी 2-डोज शेड्यूल और हेट्रोलॉगस बूस्टर डोज के लिए मंजूरी मिली है।

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DBT के सचिव और BIRAC के चेयरपर्सन राजेश एस गोखले ने कहा, “DCGI द्वारा भारत बायोटेक के इंट्रानेजल वैक्सीन iNCOVACC (BBV154) को वर्तमान में उपलब्ध COVID-19 वैक्सीन के खिलाफ बूस्टर खुराक के रूप में इस्तेमाल करने की मंजूरी हमारे लिए बहुत गर्व का क्षण है। यह कदम महामारी के खिलाफ हमारी सामूहिक लड़ाई को और मजबूत करेगा और वैक्सीन कवरेज को व्यापक करेगा।

 

इस टीके का सफल परिणामों के साथ चरण I, II और III नैदानिक ​​​​परीक्षणों में मूल्यांकन किया गया था और विशेष रूप से नाक की बूंदों के माध्यम से इंट्रानेजल डिलीवरी की अनुमति देने के लिए तैयार किया गया है।iNCOVACC को पहले प्राथमिक 2-खुराक अनुसूची के लिए 18 वर्ष और उससे अधिक आयु के लिए आपातकालीन स्थिति में प्रतिबंधित उपयोग के तहत अनुमोदन प्राप्त हुआ था।

 

देश भर में 14 साइटों पर 3100 विषयों में सुरक्षा, प्रतिरक्षण क्षमता के लिए तीसरे चरण के परीक्षण किए गए। BBV154 इंट्रानेजल वैक्सीन के साथ 875 विषयों में विषम बूस्टर खुराक अध्ययन आयोजित किए गए थे, जिन्हें आमतौर पर प्रशासित कोविड-19 टीकों की दो खुराक के बाद प्रोसेस किया गया था। 9 जगहों पर ट्रायल किया गया।

 

iNCOVACC एक पूर्व-संलयन स्थिर SARS-CoV-2 स्पाइक प्रोटीन के साथ एडेनोवायरस वेक्टरेड वैक्सीन है।भारत बायोटेक ने कहा कि नेजल डिलीवरी सिस्टम को कम और मध्यम आय वाले देशों में लागत प्रभावी बनाने के लिए डिजाइन और विकसित किया गया है।

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नासा के आर्टेमिस-1 ने बनाया नया रिकॉर्ड

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नासा के आर्टेमिस-1 ने नया रिकॉर्ड बनाया है। पृथ्वी से 4 लाख किलोमीटर दूर पहुंच कर इतिहास बनाया है। अपोलो 13 को पछाड़ अर्टेमिस-1 मून मिशन का नया हीरो बन गया है। पांच दिनों की लंबी यात्रा और अंतरिक्ष में लाखों किलोमीटर का सफर, नासा के आर्टेमिस वन ने इस मुश्किल सफर को आसानी से तय कर लिया और आखिरी अपोलो मिशन के बाद, चांद की सतह में दाखिल होने वाला ये पहला अंतरिक्ष यान बन गया।

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नासा के मुताबिक, अर्टेमिस 1 का ओरियन कैप्सूल पृथ्वी से करीब 4 लाख 19 हजार 378 किलोमीटर दूर पहुंच गया है। इससे पहले साल 1972 में अपोलो-13 पृथ्वी से 2 लाख 48 हजार 655 मील यानी 4,00,171 किमी दूर पहुंचा था। नासा के मुताबिक अर्टेमिस 1 का ओरियन कैप्सूल लगभग 6 दिन तक चांद की कक्षा में चक्कर लगाएगा। जिसके बाद 11 दिसंबर को प्रशांत महासागर में इसकी लैंडिंग होगी।

 

स्पेस एजेंसी के मुताबिक, इस मिशन की सफलता 2024 में आर्टेमिस 2 मिशन का भविष्य तय करेगी, नासा ने 53 साल बाद अपने मून मिशन आर्टिमिस के जरिये इंसानों को दोबारा चांद पर भेजने की योजना बनाई है। नासा के मिशन के मुताबिक इंसान 2025 में ना सिर्फ चांद पर कदम रख सकता है, बल्कि 1972 के अपोलो मिशन के यात्रियों से ज्यादा समय तक वहां समय भी गुजार सकता है।

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‘मरिएम वेबस्टर’ ने वर्ष 2022 के लिए शब्द ‘गैसलाइटिंग’ को वर्ड ऑफ ऑफ द ईयर घोषित किया

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दुनिया के जाने माने प्रकाशक ‘मरिएम वेबस्टर’ ने वर्ष 2022 के लिए एक शब्द ‘गैसलाइटिंग’ (Gaslighting) को वर्ड ऑफ ऑफ द ईयर घोषित किया है। शब्दकोश में इस शब्द को इस प्रकार परिभाषित किया गया है: “विशेष रूप से अपने स्वयं के लाभ के लिए किसी को व्यापक रूप से गुमराह करने का कार्य या अभ्यास।”

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गैसलाइटिंग का अर्थ किसी के साथ मनोवैज्ञानिक स्तर पर लंबे समय तक खेलने से है, ताकि पीड़ित व्यक्ति स्वयं के विचारों की वैधता और स्वयं के वास्तविक बोध पर संदेह करने लगे। गैसलाइटिंग एक काॅरपोरेट चालबाजी भी हो सकती है ताकि जनता को भ्रमित किया जा सके। आसान भाषा में गैसलाइटिंग, किसी के साथ मनोवैज्ञानिक तौर पर धोखा करना है।

 

किसी व्यक्ति के साथ छल करते हुए या उसपर हावी होते हुए वास्तविकता पर सवाल करने को मनोवैज्ञानिक गैसलाइटिंग कहते हैं। मनोवैज्ञानिक तरीके से किसी से बात करते हुए उसके अस्तित्व पर, उसकी सच्चाई पर, उसके फैसलों या फिर उसकी यादों पर सवाल खड़ा करना गैसलाइटिंग के दायरे में आता है।

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Monkey Pox का नाम बदलकर हुआ एमपॉक्स: WHO

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विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सोमवार को कहा है कि मंकीपॉक्स बीमारी को अब एमपॉक्स (mpox) के नाम से जाना जाएगा। वैश्विक विशेषज्ञों के साथ सिलसिलेवार विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया है। हालांकि, एक साल तक दोनों नामों को इस्तेमाल में लाया जाता रहेगा। उसके बाद मंकीपॉक्स नाम को इस्तेमाल करने पर पूर्ण विराम लगा दिया जाएगा।

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यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा कि दोनों नामों के इस्तेमाल के जरिए वैश्विक महामारी के प्रकोप के दौरान नाम बदलने से उत्पन्न होने वाले भ्रम को दूर करने में मदद मिलेगी। एमपॉक्स एक दुर्लभ वायरल बीमारी है। इसका संक्रमण मध्य व पश्चिमी अफ्रीका के वर्षा वन वाले इलाकों में सामने आए हैं।

बता दें, मई 2022 की शुरुआत से मंकीपॉक्स के मामले कई देशों में सामने आए हैं। अमेरिकी रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्रों के अनुसार देश में लगभग 30,000 केस दर्ज किए हैं। अमेरिका में मंकीपॉक्स वायरस के अधिकांश केस पश्चिमी या मध्य अफ्रीकी देशों की बजाए यूरोप व उत्तर अमेरिका की यात्रा करने वालों में मिले हैं। अफ्रीकी देशों में यह वायरस स्थानीय स्तर पर फैल रहा है।

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इंदौर ने सोलर प्लांट के लिए भारत के पहले रिटेल म्युनिसिपल ग्रीन बॉन्ड की योजना बनाई

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इंदौर एक मजबूत पर्यावरण रिकॉर्ड के साथ देश का पहला स्थानीय सरकार बांड जारी करने की योजना बना रहा है, जो व्यक्तिगत निवेशकों को लक्षित करता है, जिसमें सौर ऊर्जा परियोजना को निधि देने के लिए आय का उपयोग किया जाता है।

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इंदौर स्मार्ट सिटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिव्यांक सिंह के अनुसार, इंदौर नगर निगम अगले महीने 10 साल की बॉन्ड बिक्री के माध्यम से 2.6 अरब रुपये (31.8 मिलियन डॉलर) जुटाने की योजना बना रहा है, जो पेशकश को अंतिम रूप देने के लिए विभिन्न हितधारकों के साथ काम कर रहे हैं। इंदौर, जो कि मध्य प्रदेश राज्य में है, की पेशकश खुदरा निवेशकों के लिए डिज़ाइन किया गया देश का पहला म्यूनिसिपल ग्रीन बॉन्ड भी है।

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विद्युत मंत्रालय ने 5 वर्षों के लिए कुल 4500 मेगावाट बिजली की खरीद के लिए योजना शुरू की

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बिजली की कमी का सामना कर रहे राज्यों की मदद करने और उत्पादन संयंत्रों को उनकी क्षमता बढ़ाने में मदद करने के लिए सरकार बिजली खरीदेगी। विद्युत मंत्रालय ने पांच साल के लिए कुल 4500 मेगावाट बिजली खरीदने की तैयारी कर ली है। मंत्रालय ने खरीद के लिए पीएफसी कंसल्टिंग लिमिटेड नोडल एजेंसी नामित किया है। ठंड के मौसम में बिजली की खपत अन्य दिनों की तुलना में अधिक रहती है। ऐसे में अब कुछ राज्य बिजली की कमी झेल रहे हैं। इस समस्या को दूर करने और बिजली उत्पादन ढांचे का आगे तक के लिए तैयार रखने के उद्देश्य से विद्युत मंत्रालय ने पीएफसी कंसल्टिंग लिमिटेड को बिजली खरीद योजना के लिए नोडल एजेंसी नामित किया है।

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योजना के तहत पीएफसी कंसल्टिंग लिमिटेड ने 4,500 मेगावाट की आपूर्ति के लिए बोलियां आमंत्रित की हैं। ऐसा पहली बार है कि शक्ति योजना के बी (v) के तहत बोली लगाई जा रही है। साथ ही इस बोली में मध्यम अवधि के लिए संशोधित पीपीए का इस्तेमाल किया जा रहा है। मंत्रालय के अनुसार अप्रैल 2023 से बिजली की आपूर्ति शुरू कर दी जाएगी। कोयला मंत्रालय से इसके लिए करीब 27 एमटीपीए कोयला आवंटित करने का अनुरोध किया गया है। इस योजना से बिजली की कमी का सामना कर रहे राज्यों को मदद मिलने की उम्मीद है और इससे उत्पादन संयंत्रों को क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

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नीति आयोग ने 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन लक्ष्य हासिल करने के लिए ‘कार्बन कैप्चर’ पर अध्ययन रिपोर्ट जारी की

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नेशनल इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (नीति) आयोग ने 29 नवंबर 2022 को ‘कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन एंड स्टोरेज पॉलिसी फ्रेमवर्क एंड इट्स डिप्लॉयमेंट मैकेनिज्म इन इंडिया’ शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट 2070 तक भारत के शुद्ध शून्य लक्ष्य को पूरा करने के लिए उत्सर्जन में कमी की रणनीति के रूप में कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण के महत्व की पड़ताल करती है। यह रिपोर्ट इसके अनुप्रयोग के लिए विभिन्न क्षेत्रों में आवश्यक व्यापक स्तर के नीतिगत हस्तक्षेपों की रूपरेखा प्रस्तुत करती है।

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भारत ने गैर-जीवाश्म-आधारित ऊर्जा स्रोतों से अपनी कुल स्थापित क्षमता का 50% प्राप्त करने, 2030 तक उत्सर्जन तीव्रता में 45% की कमी और 2070 तक नेट शून्य प्राप्त करने की दिशा में कदम उठाने के लिए अपने अद्यतन राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) के माध्यम से प्रतिबद्ध किया है। इसका मतलब है कि भारत को कोयला, तेल और गैस जैसे जीवाश्म ईंधन की खपत को कम करना होगा। हालाँकि, हाल के अध्ययन से पता चलता है कि बिजली उत्पादन के लिए जीवाश्म ईंधन विशेष रूप से कोयले पर भारत की निर्भरता कम होने के बजाय बढ़ने की संभावना है।

 

नीति आयोग के वाइस चेयरमैन सुमन बेरी के अनुसार, कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन एंड स्टोरेज (सीसीएसयू) कोयले के हमारे समृद्ध भंडार का उपयोग करते हुए स्वच्छ उत्पादों के उत्पादन को सक्षम कर सकता है।

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सेबी ने अधिग्रहण नियमों की समीक्षा के लिए समिति की गठित

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सेबी ने अधिग्रहण नियमों की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। इस पहल का मकसद उचित वैश्विक व्यवहार को अपनाकर मौजूदा नियमों को सरल और मजबूत बनाना है। नियामक की वेबसाइट पर दी जानकारी के मुताबिक, 20 सदस्यीय समिति की अध्यक्षता पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एसजे वजीफादार करेंगे। समिति में सेबी, शेयर बाजार बीएसई और एनएसई के साथ ही विधि फर्मों के प्रतिनिधि शामिल हैं। समिति नियामक को शेयरों के अधिग्रहण और कारोबारी सुगमता से संबंधित मामलों पर सलाह देगी।

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बाजार नियामक सेबी ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआइ) और सामाजिक शेयर बाजार से संबंधित अपनी सलाहकार समितियों का पुनर्गठन किया है। सेबी ने अपनी एफपीआइ सलाहकार समिति में फेरबदल करते हुए कहा कि पूर्व वित्त सचिव हसमुख अधिया अब 16 सदस्यीय समिति की अध्यक्षता करेंगे। पहले इस समिति की अध्यक्षता भारत सरकार के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रमण्यम कर रहे थे।

 

उधर, सेबी ने सामाजिक शेयर बाजार से संबंधित समिति में समुन्नति फाइनेंशियल इंटरमीडिएशन एंड सर्विसेज के संस्थापक एवं सीईओ अनिल कुमार, सस्टेनेबिलिटी (एचसीएल टेक) के वैश्विक प्रमुख संतोष जयरामन, गाइडस्टार इंडिया की संस्थापक एवं सीईओ पुष्पा अमन सिंह और बीआइएल रायर्सन टेक्नोलाजी स्टार्टअप इनक्यूबेटर फाउंडेशन के प्रबंध निदेशक हेमंत गुप्ता को शामिल किया है। इस 18 सदस्यीय समिति की अध्यक्षता अब ग्रासरूट रिसर्च एंड एडवोकेसी मूवमेंट (जीआरएएएम) के अध्यक्ष आर बालासुब्रमण्यम करेंगे।

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आम लोगों के लिए एक दिसंबर को लॉन्च होगा डिजिटल रुपया, आरबीआई ने किया बड़ा एलान

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भारतीय रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने डिजिटल मुद्रा – ‘डिजिटल रुपया’ को लेकर बड़ा एलान किया है। आरबीआई ने कहा है कि वह एक दिसंबर को खुदरा डिजिटल रुपये (e₹-R) के लिए पहली खेप लॉन्च करेगी। E₹-R एक डिजिटल टोकन के रूप में होगा। यह कानूनी निविदाओं का प्रतिनिधित्व भी करेगा। आरबीआई ने यह भी बताया कि डिजिटल रुपया उसी मूल्यवर्ग में जारी किया जाएगा जिसमें वर्तमान में कागजी मुद्रा और सिक्के जारी किए जाते हैं।

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रिज़र्व बैंक ने 01 दिसंबर, 2022 को खुदरा डिजिटल रुपये का पहला पायलट लॉन्च करने की घोषणा की है। इससे पूर्व आरबीआई ने 31 अक्टूबर, 2022 की एक प्रेस विज्ञप्ति में संकेत दिया था कि खुदरा डिजिटल रुपये का पायलट प्रोजेक्ट एक महीने में शुरू होगा।

 

ई डिजिटल रुपया पायलट प्रोजेक्ट में भाग लेने वाले ग्राहकों और व्यापारियों के क्लोज्ड यूजर ग्रुप (सीयूजी) में चुनिंदा लोकेशन पर उपलब्ध होगा। ई डिजिटल रुपया एक टोकन के रूप में लीगल टेंडर होगा। यह उसी मूल्यवर्ग में जारी किया जाएगा जो वर्तमान में कागजी मुद्रा और सिक्के के रूप में जारी किए जाते हैं।

 

यह सब्सिडियरीज यानी बैंकों के माध्यम से वितरित किया जाएगा। इसके उपयोगकर्ता बैंकों की ओर से उपलब्ध कराए गए एप के जरिए इसे खरीद सकेंगे और अपने मोबाइल फोन में सुरक्षित कर सकेंगे। इसमें व्यक्ति से व्यक्ति और व्यक्ति व व्यापारियों के बीच लेनदेन किया जा सकेगा। मर्चेंट् स्टोर पर लगे क्यूआर कोड का उपयोग करके व्यापारियों को भुगतान किया जा सकेगा।

 

रिटेल डिजिटल रुपये के पहले चरण के पायलट प्रोजेक्ट में चार बैंक शामिल होंगे। इनमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, आईसीआईसीआई बैंक, यस बैंक, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक शामिल हैं। दूसरे चरण के पायलट प्रोजेक्ट में बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, एचडीएफसी बैंक व कोटक महिंद्रा बैंक शामिल रहेंगे।

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