विश्वजीत सहाय को रक्षा लेखा महानियंत्रक नियुक्त किया गया

श्री विश्वजीत सहाय — भारतीय रक्षा लेखा सेवा (IDAS) के वरिष्ठ अधिकारी — ने नए नियंत्रक जनरल ऑफ डिफेंस अकाउंट्स (CGDA) का कार्यभार संभाल लिया है। यह महत्वपूर्ण नियुक्ति ऐसे समय पर हुई है जब भारत का रक्षा क्षेत्र आधुनिकीकरण और वित्तीय विस्तार के दौर से गुजर रहा है। श्री सहाय तीन दशकों से अधिक के सार्वजनिक प्रशासन और रक्षा वित्त अनुभव के साथ इस जिम्मेदारी को संभाल रहे हैं।

कौन हैं विश्वजीत सहाय?

श्री विश्वजीत सहाय 1990 बैच के IDAS अधिकारी हैं और दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफन्स कॉलेज के पूर्व छात्र हैं।
उनका प्रशासनिक करियर वित्त, नीति-निर्माण और योजना से जुड़े कई अहम पदों पर रहा है।

सरकारी भूमिकाएँ

श्री सहाय ने कई केंद्रीय मंत्रालयों में उच्च वित्तीय सलाहकार भूमिकाएँ निभाई हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • अतिरिक्त सचिव एवं वित्तीय सलाहकार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग

  • संयुक्त सचिव, भारी उद्योग विभाग

  • वित्त प्रबंधक, अधिग्रहण विंग, रक्षा मंत्रालय

इन भूमिकाओं में उन्होंने वित्तीय निर्णय-निर्माण और नीतिगत क्रियान्वयन के बीच सेतु का कार्य किया — विशेष रूप से प्रोक्योरमेंट, पेंशन और रणनीतिक अधिग्रहण जैसे क्षेत्रों में।

रक्षा लेखा विभाग में योगदान

रक्षा लेखा विभाग (Defence Accounts Department) में श्री सहाय ने कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है, जैसे:

  • प्रिंसिपल कंट्रोलर ऑफ डिफेंस अकाउंट्स (पेंशन्स), प्रयागराज – जहाँ उन्होंने लाखों पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों की पेंशन व्यवस्था का प्रबंधन किया।

  • संयुक्त CGDA – रक्षा लेखा के रणनीतिक पर्यवेक्षण में योगदान।

  • विशेष CGDA – उच्च-स्तरीय सुधार और विशेष पहल का नेतृत्व।

इन भूमिकाओं ने उन्हें रक्षा पेंशन, बजट प्रबंधन और सैन्य वित्तीय प्रणालियों की गहरी समझ प्रदान की है।

नियंत्रक जनरल ऑफ डिफेंस अकाउंट्स (CGDA) की भूमिका

CGDA रक्षा मंत्रालय का मुख्य वित्तीय सलाहकार होता है। इसका दायित्व शामिल करता है:

  • थलसेना, नौसेना, वायुसेना और DRDO के बजट का प्रबंधन

  • 32 लाख से अधिक रक्षा पेंशनधारकों के भुगतान की निगरानी

  • सैन्य व्यय का लेखा परीक्षण और ऑडिट

  • बड़े पैमाने पर रक्षा खरीद में वित्तीय नियंत्रण

CGDA के रूप में, विश्वजीत सहाय रक्षा वित्तीय प्रक्रियाओं के आधुनिकीकरण, वित्तीय अनुशासन और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्यों के समर्थन में केंद्रीय भूमिका निभाएँगे।

स्थायी तथ्य (Static Facts)

  • नाम: श्री विश्वजीत सहाय

  • पद: नियंत्रक जनरल ऑफ डिफेंस अकाउंट्स (CGDA)

  • नियुक्ति तिथि: 1 नवम्बर 2025

  • सेवा: 1990 बैच, भारतीय रक्षा लेखा सेवा (IDAS)

यूआईडीएआई ने भविष्य की डिजिटल आईडी के लिए ‘आधार विजन 2032’ का अनावरण किया

भारत की डिजिटल पहचान प्रणाली को भविष्य के अनुरूप बनाने की दिशा में एक साहसिक कदम उठाते हुए, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने ‘आधार विज़न 2032’ की शुरुआत की है। यह रूपांतरकारी रोडमैप आधार को अधिक सुरक्षित, बुद्धिमान और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने का लक्ष्य रखता है — जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ब्लॉकचेन, क्वांटम कम्प्यूटिंग और अगली पीढ़ी की एन्क्रिप्शन तकनीकें शामिल हैं।

क्या है ‘आधार विज़न 2032’?

‘आधार विज़न 2032’ UIDAI की एक समग्र रूपरेखा है, जिसके माध्यम से वर्ष 2032 तक भारत की आधार प्रणाली को तकनीकी रूप से उन्नत किया जाएगा। इसके प्रमुख फोकस क्षेत्र हैं —

  • AI आधारित स्मार्ट प्रमाणीकरण प्रणाली

  • ब्लॉकचेन के माध्यम से छेड़छाड़-रोधी सत्यापन और ऑडिटेबिलिटी

  • क्वांटम कम्प्यूटिंग के खतरों से निपटने की तैयारी

  • भारत के डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) अधिनियम के अनुरूप उन्नत एन्क्रिप्शन प्रणाली

इसका उद्देश्य एक मजबूत, सुरक्षित और समावेशी डिजिटल पहचान ढांचा विकसित करना है, जो नागरिकों के साथ-साथ देश की बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था को भी समर्थन दे सके।

कौन कर रहा है इस परिवर्तन का नेतृत्व?

इस तकनीकी परिवर्तन को दिशा देने के लिए UIDAI ने एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति (High-Level Expert Committee) का गठन किया है, जिसकी अध्यक्षता नीलकंठ मिश्रा, अध्यक्ष, UIDAI द्वारा की जा रही है। समिति में तकनीक, कानून, साइबर सुरक्षा और प्रशासन के क्षेत्र के शीर्ष विशेषज्ञ शामिल हैं।

प्रमुख सदस्य:

  • भुवनेश कुमार, CEO, UIDAI

  • विवेक राघवन, सह-संस्थापक, Sarvam AI

  • धीरज पांडे, संस्थापक, Nutanix

  • शशिकुमार गणेशन, हेड ऑफ इंजीनियरिंग, MOSIP

  • राहुल मथन, विधि विशेषज्ञ, Trilegal

  • नवीन बुढिराजा, CTO, Vianai Systems

  • प्रो. अनिल जैन, मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी

  • प्रो. मयंक वत्सा, IIT जोधपुर

  • प्रो. प्रभाकरन पूर्णचंद्रन, अमृता यूनिवर्सिटी

  • अभिषेक कुमार सिंह, उप महानिदेशक, UIDAI

यह बहु-विषयक टीम आधार विज़न 2032 के आधिकारिक रूपरेखा दस्तावेज़ को तैयार करने की जिम्मेदारी निभा रही है।

‘आधार विज़न 2032’ के प्रमुख उद्देश्य:

  • ब्लॉकचेन आधारित डेटा ट्रेल्स से भरोसे में वृद्धि

  • AI द्वारा स्मार्ट सत्यापन प्रणाली

  • DPDP अधिनियम के अनुरूप गोपनीयता और अनुपालन की सुरक्षा

  • पोस्ट-क्वांटम युग के खतरों से पहचान प्रणाली की रक्षा

  • आधार की वैश्विक प्रतिस्पर्धा और पारस्परिकता (interoperability) को सुनिश्चित करना

स्थिर तथ्य 

विषय विवरण
लॉन्च करने वाली संस्था भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI)
लॉन्च तिथि 1 नवंबर 2025
शामिल तकनीकें AI, ब्लॉकचेन, क्वांटम कम्प्यूटिंग, उन्नत एन्क्रिप्शन
विशेषज्ञ समिति के अध्यक्ष नीलकंठ मिश्रा
UIDAI के CEO भुवनेश कुमार
उद्देश्य DPDP अधिनियम और वैश्विक मानकों के अनुरूप अगली पीढ़ी की आधार प्रणाली विकसित करना

भारत ने रचा इतिहास, भारत ने साउथ अफ्रीका को 52 से हराकर जीता महिला वनडे विश्व कप 2025

भारतीय टीम आखिरकार 52 साल लंबे इंतजार के बाद पहली बार ODI वर्ल्ड चैंपियन बन गई है। भारत ने 2025 वर्ल्ड कप फाइनल में दक्षिण अफ्रीका को 52 रनों से हराया। पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने 50 ओवर में सात विकेट पर 298 रन बनाए थे। जवाब में दक्षिण अफ्रीका की टीम 246 रन पर सिमट गई। 52 साल के महिला वनडे विश्व कप के इतिहास में यह भारत का पहला वनडे विश्व कप का खिताब है। पहला महिला वनडे विश्व कप 1973 में खेला गया था।

शेफाली वर्मा और दीप्ति शर्मा के अर्धशतक

भारत ने पहले बैटिंग करते हुए शेफाली वर्मा (78 गेंद में 87 रन) और दीप्ति शर्मा (58 रन) के अर्धशतक की बदौलत सात विकेट पर 298 रन बनाए। शेफाली ने वनडे में अपनी सर्वश्रेष्ठ पारी के दौरान सात चौके और दो छक्के लगाए। दीप्ति ने 58 गेंद में तीन चौके और एक छक्का जड़ा। सलामी बल्लेबाज स्मृति मंधाना ने 45 रन और विकेटकीपर बल्लेबाज ऋचा घोष ने 34 रन का योगदान दिया।

इस लक्ष्य का पीछा करने उतरी दक्षिण अफ्रीका की टीम दीप्ति शर्मा के पांच झटकों के सामने कप्तान लौरा वोलवार्ट (101 रन) के शतक के बावजूद 45.3 ओवर में 246 रन पर सिमट गई। दीप्ति ने 39 रन देकर पांच विकेट झटके। शेफाली वर्मा ने भी दो विकेट और श्री चरणी ने एक विकेट हासिल किया।

2005 में टीम इंडिया पहली बार फाइनल में

2005 में टीम इंडिया पहली बार फाइनल में पहुंची, लेकिन ऑस्ट्रेलिया से हार गई। 2017 में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को ही सेमीफाइनल हराकर फाइनल में एंट्री की, लेकिन इंग्लैंड ने फाइनल हरा दिया। 2025 में टीम ने फिर एक बार ऑस्ट्रेलिया को सेमीफाइनल हराया, लेकिन इस बार फाइनल में साउथ अफ्रीका को हराकर ट्रॉफी जीत ही ली।

पहली ICC ट्रॉफी

इंडिया विमेंस सीनियर टीम की यह किसी भी फॉर्मेट में पहली ICC ट्रॉफी रही। टीम एक बार टी-20 वर्ल्ड कप के फाइनल में भी हार चुकी है। विमेंस वनडे वर्ल्ड कप में 25 साल बाद नई टीम चैंपियन बनी। 2000 में आखिरी बार न्यूजीलैंड ने खिताब जीता था। इनके अलावा 7 बार ऑस्ट्रेलिया और 4 बार इंग्लैंड ही चैंपियन बनी।

भारत की प्लेइंग इलेवन- शेफाली वर्मा, स्मृति मंधाना, जेमिमा रोड्रिग्स, हरमनप्रीत कौर (कप्तान), दीप्ति शर्मा, ऋचा घोष (विकेटकीपर), अमनजोत कौर, राधा यादव, क्रांति गौड़, श्री चरणी, रेणुका सिंह ठाकुर।

साउथ अफ्रीका की प्लेइंग इलेवन- लौरा वोल्वार्ड्ट (कप्तान), तजमिन ब्रिट्स, एनेके बॉश, सुने लुस, मारिजान काप, सिनालो जाफ्टा (विकेटकीपर), एनेरी डर्कसन, क्लो ट्रायॉन, नादिन डी क्लार्क, अयाबोंगा खाका, नॉनकुलुलेको म्लाबा।

विश्व कप जीतने के लिए भारतीय महिला टीम को मिलेगी पुरस्कार राशि?

भारतीय क्रिकेट इतिहास के स्वर्णिम पन्ने में दर्ज होने वाला क्षण — भारत की महिला क्रिकेट टीम ने कप्तान हरमनप्रीत कौर के नेतृत्व में आईसीसी महिला विश्व कप 2025 जीतकर इतिहास रच दिया। फाइनल में भारत ने दक्षिण अफ्रीका को रोमांचक मुकाबले में हराकर अपना पहला महिला विश्व कप खिताब जीता। यह जीत न केवल 2005 और 2017 की हार का बदला थी, बल्कि रिकॉर्ड तोड़ इनामी राशि के साथ भारतीय महिला क्रिकेट के स्वर्ण युग की शुरुआत भी साबित हुई।

भारत द्वारा अर्जित कुल इनामी राशि

स्रोत राशि
आईसीसी (ICC) से विश्व कप विजेता राशि USD 4.48 मिलियन (~₹40 करोड़)
बीसीसीआई (BCCI) द्वारा घोषित बोनस ₹51 करोड़
कुल इनामी राशि ₹91 करोड़

यह किसी भी महिला क्रिकेट टीम को एक ही टूर्नामेंट में मिली अब तक की सबसे बड़ी इनामी राशि है — वैश्विक महिला खेलों के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर।

बीसीसीआई की ऐतिहासिक घोषणा 

बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने भारत की जीत के बाद कहा —

“बीसीसीआई हमारे विश्व चैंपियनों को ₹51 करोड़ का पुरस्कार देकर गर्व महसूस करता है। यह केवल धनराशि नहीं, बल्कि उनके संकल्प, परिश्रम और इतिहास रचने की भावना का सम्मान है।”

उन्होंने पूर्व बीसीसीआई सचिव और वर्तमान आईसीसी अध्यक्ष जय शाह को महिला क्रिकेट में वेतन समानता (pay parity) और वित्तीय सुधारों को आगे बढ़ाने का श्रेय भी दिया।

आईसीसी इनामी पूल में 300% वृद्धि 

जय शाह के नेतृत्व में आईसीसी ने महिला विश्व कप की कुल इनामी राशि 300% बढ़ाई, जो 2022 में $3.5 मिलियन (~₹31 करोड़) से बढ़कर 2025 में $13.88 मिलियन (~₹123 करोड़) हो गई।

स्थान टीम इनामी राशि
विजेता भारत $4.48 मिलियन (~₹40 करोड़)
रनर-अप दक्षिण अफ्रीका $2.24 मिलियन (~₹20 करोड़)
सेमीफाइनल हारने वाली टीमें $1.12 मिलियन (~₹10 करोड़) प्रत्येक

यह 2023 के पुरुष विश्व कप (Prize Pool: $10 मिलियन / ₹89 करोड़) से भी अधिक था।

भारत की विजयी यात्रा 

  • ग्रुप चरण में अपराजित प्रदर्शन, जिसमें शफाली वर्मा, स्मृति मंधाना, और रेणुका सिंह ने शानदार खेल दिखाया।

  • सेमीफाइनल में इंग्लैंड पर जीत, जिसने टीम की गहराई और संतुलन को दर्शाया।

  • फाइनल में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ रोमांचक मुकाबला, जहाँ हरमनप्रीत कौर के ऑल-राउंड प्रदर्शन ने भारत को जीत दिलाई।

यह जीत 2005 और 2017 के फाइनल की निराशा को मिटाते हुए भारतीय महिला क्रिकेट के इतिहास में नए युग की शुरुआत है।

भारतीय महिला क्रिकेट पर प्रभाव 

यह ऐतिहासिक उपलब्धि और इनामी राशि —

  • देश में महिला क्रिकेट में निवेश को बढ़ावा देगी।

  • युवा लड़कियों को क्रिकेट अपनाने के लिए प्रेरित करेगी।

  • कॉर्पोरेट प्रायोजकों और मीडिया ध्यान को आकर्षित करेगी।

  • और भारत को वैश्विक महिला क्रिकेट की महाशक्ति के रूप में स्थापित करेगी।

मुख्य तथ्य 

विवरण जानकारी
टूर्नामेंट आईसीसी महिला विश्व कप 2025
विजेता भारत 🇮🇳
रनर-अप दक्षिण अफ्रीका
भारत की कुल इनामी राशि ₹91 करोड़
आईसीसी हिस्सा ₹40 करोड़
बीसीसीआई बोनस ₹51 करोड़
कुल इनामी पूल (2025) $13.88 मिलियन (~₹123 करोड़)
पिछला विजेता (2022) ऑस्ट्रेलिया (₹12 करोड़ इनामी राशि)
आईसीसी अध्यक्ष जय शाह
भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर

निष्कर्ष:

भारत की यह जीत न केवल ट्रॉफी हासिल करने की कहानी है, बल्कि यह महिला सशक्तिकरण, खेल में समानता और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है। हरमनप्रीत कौर और उनकी टीम ने भारतीय क्रिकेट को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाकर इतिहास रच दिया है।

विश्व जेलीफ़िश दिवस 2025: इतिहास और महत्व

हर साल 3 नवंबर को मनाया जाने वाला विश्व जेलीफ़िश दिवस (World Jellyfish Day) पृथ्वी के सबसे प्राचीन और रहस्यमयी समुद्री जीवों में से एक — जेलीफ़िश (Jellyfish) — के वैश्विक उत्सव का प्रतीक है। ये पारदर्शी, जिलेटिन जैसे जीव पिछले 50 करोड़ वर्षों से महासागरों में तैर रहे हैं — यानी डायनासोरों से भी पहले से अस्तित्व में हैं

हालाँकि कई लोग इनके डंक से डरते हैं, जेलीफ़िश समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र का एक अनिवार्य हिस्सा हैं और अपनी अनोखी जीवविज्ञान व सहनशीलता के कारण वैज्ञानिकों के लिए आज भी अध्ययन का विषय बनी हुई हैं।

जेलीफ़िश दिवस क्यों मनाया जाता है? 

अक्सर गलत समझे जाने वाले जेलीफ़िश केवल समुद्र तटों पर दर्दनाक डंक से जुड़ी नहीं हैं — वे समुद्री जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

वे —

  • समुद्री खाद्य श्रृंखला का हिस्सा हैं — कछुओं के भोजन के रूप में काम करती हैं और छोटी मछलियों के लिए आश्रय देती हैं।

  • दिमाग के बिना तंत्रिका क्रिया (neural function) को समझने में वैज्ञानिकों की मदद करती हैं।

  • समुद्री जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में योगदान देती हैं।

इसके अलावा, कुछ क्षेत्रों में इनकी बढ़ती आबादी जलवायु परिवर्तन और महासागर के स्वास्थ्य के संकेतक के रूप में भी देखी जाती है।

जेलीफ़िश के तीन रोचक तथ्य 

  1. इनके पास दिमाग नहीं होता — फिर भी ये सीख सकती हैं:
    जेलीफ़िश केवल एक साधारण नर्व नेट (nerve net) पर निर्भर होती हैं, लेकिन अध्ययनों से पता चला है कि वे व्यवहार में बदलाव कर सकती हैं और उत्तेजनाओं को याद रख सकती हैं।

  2. ये चमक सकती हैं (Bioluminescent):
    लगभग 50% जेलीफ़िश प्रजातियाँ स्वयं प्रकाश उत्पन्न करती हैं — कुछ शिकार को आकर्षित करने, तो कुछ शत्रुओं को डराने के लिए।

  3. ये आश्रय स्थल होती हैं:
    कई किशोर मछलियाँ जेलीफ़िश की टेंटेकल्स (tentacles) के बीच छिपकर शिकारियों से बचती हैं।

विश्व जेलीफ़िश दिवस 2025 कैसे मनाएँ? 

1. एक्वेरियम का भ्रमण करें

वास्तविक जेलीफ़िश को करीब से देखें — उनकी सुंदर गतियाँ, पारदर्शी शरीर और रंग-बिरंगी आकृतियाँ प्राकृतिक कला का अद्भुत उदाहरण हैं।

2. स्थानीय जेलीफ़िश के बारे में जानें

  • अपने क्षेत्र या समुद्री आरक्षित क्षेत्रों में पाई जाने वाली जेलीफ़िश प्रजातियों पर शोध करें।
  • आपको गैर-डंक देने वाली प्रजातियाँ या मौसमी समूह (blooms) देखने को मिल सकते हैं।

3. रचनात्मक गतिविधियाँ करें 

बच्चों के साथ रोचक तरीके से जेलीफ़िश दिवस मनाएँ —

  • कला परियोजनाएँ (जेलीफ़िश चित्र रंगना)

  • रीसायकल सामग्री से क्राफ्ट बनाना

  • कहानी सुनाना या विज्ञान प्रयोग

4. शैक्षिक संसाधनों का उपयोग करें 

  • All About Jellyfish” स्लाइडशो से छोटे छात्रों को जानकारी दें।

  • फोटो पैक और वर्कशीट्स से अवलोकन एवं चर्चा करें।

  • क्विज़ और गतिविधियों से ज्ञान की जाँच करें।

महत्व 

  • जेलीफ़िश महासागरों के स्वास्थ्य संकेतक (Indicators of Ocean Health) हैं।
  • उनका व्यवहार जलवायु परिवर्तन, पानी के तापमान, और समुद्री प्रदूषण में हो रहे परिवर्तनों को दर्शाता है।
  • जैसे-जैसे समुद्री पर्यावरण पर खतरे बढ़ रहे हैं, विश्व जेलीफ़िश दिवस हमें यह याद दिलाता है कि समुद्री जैव विविधता की रक्षा और सतत समुद्री प्रथाओं (sustainable practices) को बढ़ावा देना कितना आवश्यक है।

स्थिर तथ्य 

विवरण जानकारी
मनाने की तिथि 3 नवंबर हर वर्ष
केंद्र बिंदु जीव जेलीफ़िश (Cnidarians, Invertebrates)
विकास काल (Evolutionary Age) लगभग 50 करोड़ वर्ष पुरानी
जैविक विशेषताएँ न दिमाग, न दिल; ~50% जैव-दीप्त (bioluminescent); नर्व नेट से गति नियंत्रित करती हैं

निष्कर्ष:
विश्व जेलीफ़िश दिवस न केवल इन प्राचीन समुद्री जीवों की सुंदरता का उत्सव है, बल्कि यह महासागरों की नाज़ुक पारिस्थितिकी को समझने और संरक्षित करने का एक अवसर भी प्रदान करता है।

भारत ने एलवीएम3-एम5 रॉकेट से सबसे भारी कॉमसैट सीएमएस-03 का प्रक्षेपण किया

भारत के अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज करते हुए, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 2 नवंबर 2025 को संचार उपग्रह सीएमएस-03 (CMS-03) का सफल प्रक्षेपण किया। यह अब तक भारतीय भूमि से प्रक्षेपित सबसे भारी संचार उपग्रह है, जिसे एलवीएम3-एम5 (LVM3-M5) या जीएसएलवी-मार्क-3 रॉकेट के माध्यम से लॉन्च किया गया। यह प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC) के दूसरे प्रक्षेपण स्थल (Second Launch Pad) से किया गया और यह LVM3 रॉकेट का पाँचवाँ परिचालन उड़ान (operational flight) था। इस मिशन ने भारत की भारी उपग्रहों को भू-समकालिक अंतरण कक्षा (GTO) में स्वयं स्थापित करने की क्षमता को मज़बूती से प्रदर्शित किया।

सीएमएस-03 क्या है? 

सीएमएस-03 एक बहु-बैंड (Multiband) संचार उपग्रह है, जिसे भारत की नागरिक और सामरिक (civilian & strategic) संचार क्षमताओं को सुदृढ़ करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
यह उपग्रह निम्नलिखित सेवाएँ सक्षम करेगा —

  • तेज़ इंटरनेट और डेटा सेवाएँ

  • उन्नत प्रसारण कवरेज (broadcast coverage)

  • दूरस्थ क्षेत्रों में संचार समर्थन

मिशन विवरण 

  • रॉकेट का लिफ्ट-ऑफ भार (Lift-off mass): 642 टन

  • ऊँचाई: 43.5 मीटर

  • उपग्रह का भार: 4,410 किलोग्राम

  • उपग्रह को लॉन्च के लगभग 16 मिनट बाद सफलतापूर्वक GTO कक्षा में स्थापित किया गया।

मुख्य उड़ान अनुक्रम (Flight Sequence Highlights):

  • S200 ठोस बूस्टर: प्रज्वलन के बाद ~131.14 सेकंड में, ~62.3 किमी ऊँचाई पर अलग हुए।

  • L110 तरल चरण: ~106.94 सेकंड पर प्रज्वलित हुआ और ~304.70 सेकंड पर, ~166.9 किमी ऊँचाई पर अलग हुआ।

  • C25 क्रायोजेनिक ऊपरी चरण: ~307.10 सेकंड पर शुरू हुआ, ~950.94 सेकंड तक सक्रिय रहा और ~10.14 किमी/सेकंड की जड़त्वीय वेग प्राप्त की।

  • उपग्रह पृथक्करण: ~965.94 सेकंड पर, ~179.8 किमी ऊँचाई पर हुआ।

लक्ष्य कक्षा:
भू-समकालिक अंतरण कक्षा (GTO) — अपोजी ~29,970 किमी और पेरिजी ~170 किमी,
जो भारी उपग्रह भार के कारण मानक GTO से थोड़ी कम ऊँचाई पर रखी गई।

इस प्रक्षेपण का महत्व 

1. राष्ट्रीय स्तर पर भारी उपग्रह प्रक्षेपण क्षमता

अब तक भारत को इतने भारी उपग्रहों के लिए विदेशी प्रक्षेपण सेवाओं पर निर्भर रहना पड़ता था।
CMS-03 के साथ, भारत ने स्वयं भारी उपग्रहों को GTO में भेजने की क्षमता प्रदर्शित की है।

2. लॉन्च वाहन क्षमता में सुदृढ़ीकरण

LVM3 प्लेटफ़ॉर्म, जिसे पहले मानव अंतरिक्ष मिशन मॉड्यूल परीक्षण और चंद्रयान-3 (14 जुलाई 2023) में उपयोग किया गया था,
अब और भारी पेलोड ले जाने की दिशा में विकसित हो रहा है।

3. रणनीतिक संचार संपत्ति

CMS-03 भारत की स्वदेशी संचार अवसंरचना (indigenous communication infrastructure) को मज़बूत करेगा
और विदेशी उपग्रहों पर निर्भरता को घटाएगा।

4. मानव अंतरिक्ष उड़ान और बड़े पेलोड की तैयारी

यह मिशन भविष्य के मानवीय मिशनों (Gaganyaan) और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन योजनाओं के लिए मार्ग प्रशस्त करता है,
जहाँ नए क्रायोजेनिक चरण (C32) और अर्ध-क्रायोजेनिक (semi-cryogenic) इंजन शामिल किए जाएँगे।

आगे की राह 

  • C32 क्रायोजेनिक ऊपरी चरण (32,000 किग्रा प्रणोदक, ~22-टन थ्रस्ट) विकसित किया जा रहा है ताकि अधिक पेलोड क्षमता प्राप्त हो सके।

  • अर्ध-क्रायोजेनिक दूसरे चरण पर कार्य जारी है, जिसमें केरोसिन + तरल ऑक्सीजन (LOX) का उपयोग होगा, जिससे भार वहन क्षमता और बढ़ेगी।

  • लूनर मॉड्यूल लॉन्च व्हीकल (LMLV) पर प्रारंभिक अध्ययन जारी है, जो 80,000 किग्रा तक का पेलोड निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में भेज सकेगा —
    यह भारत के चंद्र और मानव अंतरिक्ष मिशनों के लिए आधार तैयार करेगा।

मुख्य तथ्य 

विवरण जानकारी
उपग्रह का नाम सीएमएस-03 (CMS-03)
उपग्रह भार 4,410 किलोग्राम
लॉन्च वाहन एलवीएम3-एम5 (GSLV-Mk3 श्रेणी)
प्रक्षेपण स्थल सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा (द्वितीय प्रक्षेपण स्थल)
प्रक्षेपण तिथि 2 नवंबर 2025
लक्ष्य कक्षा भू-समकालिक अंतरण कक्षा (GTO) — अपोजी ~29,970 किमी
रॉकेट की कुल ऊँचाई 43.5 मीटर
लिफ्ट-ऑफ द्रव्यमान 642 टन
प्रक्षेपण एजेंसी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO)

यह प्रक्षेपण न केवल ISRO की तकनीकी आत्मनिर्भरता का प्रमाण है, बल्कि भारत को वैश्विक भारी उपग्रह प्रक्षेपण क्षमताओं की अग्रिम पंक्ति में स्थापित करता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस पर विधानसभा का उद्घाटन किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवा रायपुर (छत्तीसगढ़) का दौरा कर राज्य के रजत जयंती वर्ष — अर्थात् स्थापना के 25 वर्ष (2000–2025) — का ऐतिहासिक उत्सव मनाया। इस अवसर पर उन्होंने नए विधानसभा भवन का उद्घाटन, पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा का अनावरण, तथा ₹14,260 करोड़ से अधिक की विकास और कल्याण परियोजनाओं का शुभारंभ किया। यह कार्यक्रम विकास दृष्टि, सुशासन का प्रतीकात्मक संदेश, और सुरक्षा व प्रगति के संकल्प का संगम रहा, जो छत्तीसगढ़ की भविष्य दिशा और उपलब्धियों को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री मोदी की प्रमुख घोषणाएँ — छत्तीसगढ़ रजत जयंती पर

1. नया विधानसभा भवन (New Legislative Assembly Building)

  • नवा रायपुर में निर्मित नया विधानसभा परिसर लगभग 51 एकड़ क्षेत्रफल में फैला है।

  • भवन का डिज़ाइन छत्तीसगढ़ की स्थानीय कला और विरासत पर आधारित है —
    इसमें बस्तर की हस्तनिर्मित लकड़ी के दरवाज़े और धान के दानों से प्रेरित छत की नक्काशी जैसी विशिष्ट कलात्मक झलकियाँ शामिल हैं।

  • निर्माण लागत लगभग ₹324 करोड़ रही।

2. अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा का अनावरण

  • प्रधानमंत्री ने विधानसभा परिसर में पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा का अनावरण किया।

  • यह श्रद्धांजलि उस महान नेता को समर्पित है जिनके कार्यकाल (2000) में छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हुआ था।

₹14,260 करोड़ की विकास परियोजनाएँ

प्रधानमंत्री मोदी ने विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया, जिनकी कुल लागत ₹14,260 करोड़ से अधिक है। इनमें प्रमुख हैं —

  • 3.5 लाख परिवारों को पक्के घर प्रदान किए गए — प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत।

  • 9 जिलों में 12 स्टार्टअप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम (SVEP) ब्लॉक शुरू किए गए।

  • 5 नए सरकारी मेडिकल कॉलेज

    • मनेंद्रगढ़

    • कबीरधाम

    • जांजगीर-चांपा

    • गीदम

    • बिलासपुर में स्थापित किए जाएंगे।

  • आयुर्वेद कॉलेज और अस्पताल — बिलासपुर में उद्घाटन।

  • नागपुर–झारसुगुड़ा गैस पाइपलाइन (~500 किमी) राष्ट्र को समर्पित की गई,
    जिससे 11 जिलों को राष्ट्रीय गैस ग्रिड से जोड़ा गया।

सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक पहलें

  • शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक तथा जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय का उद्घाटन — नवा रायपुर में।

  • “दिल की बात” पहल के अंतर्गत प्रधानमंत्री ने श्री सत्य साई संजीवनी अस्पताल में 2,500 बच्चों से संवाद किया — यह पहल हृदय रोगी बच्चों के उपचार से जुड़ी है।

  • “शांति शिखर”ब्रहमकुमारीज़ ध्यान एवं आध्यात्मिक केंद्र का उद्घाटन किया।

मुख्य तथ्य 

विवरण जानकारी
राज्य गठन तिथि 1 नवंबर 2000
नए विधानसभा भवन की लागत ₹324 करोड़
विधानसभा क्षेत्रफल लगभग 51 एकड़
घोषित विकास परियोजनाएँ ₹14,260 करोड़
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय
राज्यपाल श्री रमेंद्र (रमेन) डेका

यह दौरा न केवल छत्तीसगढ़ की रजत जयंती का उत्सव था, बल्कि यह संदेश भी देता है कि राज्य विकास, सांस्कृतिक गर्व और सामाजिक समावेशन के नए युग में प्रवेश कर रहा है।

रेट में कटौती के बावजूद अक्टूबर में GST कलेक्शन 4.6% बढ़कर 1.96 लाख करोड़ रुपये हुआ

भारत के वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह अक्टूबर 2025 में बढ़कर ₹1.96 लाख करोड़ हो गए हैं। 1 नवंबर को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, यह पिछले वर्ष की तुलना में 4.6% की वृद्धि को दर्शाता है — जो पिछले 52 महीनों में सबसे धीमी दर है, हालांकि राजस्व संग्रह पांच महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। सितंबर माह में संग्रह ₹1.89 लाख करोड़ था, जिससे कर राजस्व में स्थिर बढ़ोतरी बनी रही।

लगातार दसवां महीना — ₹1.8 लाख करोड़ से ऊपर का संग्रह

अक्टूबर महीने में जीएसटी राजस्व का मजबूत प्रदर्शन जारी रहा, और कुल संग्रह लगातार दसवें महीने ₹1.8 लाख करोड़ से अधिक रहा। आखिरी बार मई 2025 में राजस्व ₹2 लाख करोड़ के पार गया था। यह प्रवृत्ति मजबूत उपभोग और बेहतर कर अनुपालन को दर्शाती है, भले ही आर्थिक वृद्धि की गति कुछ धीमी रही हो।

जीएसटी ढांचे में बदलाव से वृद्धि दर में सुस्ती

हालांकि संग्रह राशि में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, लेकिन वृद्धि दर सितंबर के 9.1% से घटकर अक्टूबर में 4.6% रह गई। विश्लेषकों का कहना है कि यह सुस्ती हाल ही में किए गए जीएसटी ढांचे के पुनर्गठन का परिणाम है।
अगस्त 2025 में सरकार ने कर संरचना में बड़ा बदलाव करते हुए 12% और 28% की दरों को समाप्त कर दिया, और लगभग 90% वस्तुओं को निचली कर दरों में स्थानांतरित किया। इन सुधारों ने कर प्रणाली को सरल बनाया है, लेकिन राजस्व वृद्धि को अस्थायी रूप से धीमा कर दिया है।

राजस्व प्रदर्शन का विवरण

  • शुद्ध जीएसटी संग्रह मामूली रूप से 0.6% बढ़कर ₹1.69 लाख करोड़ हुआ।

  • घरेलू राजस्व पिछले वर्ष की तुलना में लगभग स्थिर रहा।

  • सीमा शुल्क संग्रह (Customs Collections) में 2.5% की वृद्धि दर्ज हुई और यह ₹37,210 करोड़ पर पहुंच गया।

  • रिफंड (Refunds) में उल्लेखनीय तेजी देखी गई —

    • घरेलू स्तर पर 26.5% की वृद्धि,

    • जबकि सीमा शुल्क में 55.3% की बढ़ोतरी हुई।
      यह सुधार तेज़ दावे निपटान और सुधरे हुए कर प्रशासन की दिशा में प्रगति दर्शाता है।

सरकार का दृष्टिकोण और आर्थिक प्रभाव

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) का अनुमान है कि हालिया जीएसटी दरों में कटौती उपभोग और निवेश को बढ़ावा देगी, जिससे आने वाले महीनों में आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी।
इस सकारात्मक दृष्टिकोण के अनुरूप,

  • RBI ने भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.5% से बढ़ाकर 6.8% कर दिया है,

  • जबकि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने अपना अनुमान 6.6% तक बढ़ाया है।

नीतिनिर्माताओं का मानना है कि स्थिर जीएसटी संग्रह और कर दरों का सरलीकरण वित्तीय संतुलन को बनाए रखने में मदद करेगा तथा दीर्घकालिक आर्थिक विकास को गति देगा।

UNESCO की ‘क्रिएटिव सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी’में लखनऊ हुआ शामिल

यूनेस्को (UNESCO) ने आधिकारिक रूप से लखनऊ को अपने क्रिएटिव सिटीज़ नेटवर्क (UCCN) में शामिल किया है, और उसे “सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी” (City of Gastronomy) — अर्थात् “खानपान की नगरी” का दर्जा प्रदान किया है। यह प्रतिष्ठित मान्यता लखनऊ की सदियों पुरानी अवधी पाक-परंपरा (Awadhi Cuisine) और उसकी गंगा-जमुनी तहज़ीब — अर्थात् हिन्दू-मुस्लिम संस्कृति के अनूठे संगम — का सम्मान करती है। इस घोषणा के साथ लखनऊ के विश्वप्रसिद्ध कबाब, मिठाइयाँ और स्ट्रीट फूड अब वैश्विक पाक-संस्कृति के मानचित्र पर और अधिक उजागर हो गए हैं।

यूनेस्को महासम्मेलन में घोषणा

यह घोषणा उज़्बेकिस्तान के समरकंद में आयोजित यूनेस्को के 43वें महासम्मेलन के दौरान की गई। यह लखनऊ और भारत दोनों के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, जिसने शहर को विश्व के शीर्ष खानपान केंद्रों में स्थान दिलाया है और भारत की सांस्कृतिक कूटनीति (Cultural Diplomacy) को सशक्त किया है।

नामांकन प्रक्रिया 

  • उत्तर प्रदेश पर्यटन निदेशालय ने इस नामांकन के लिए संपूर्ण दस्तावेज तैयार किया।

  • प्रस्ताव को 31 जनवरी 2025 को संस्कृति मंत्रालय को भेजा गया।

  • भारत ने आधिकारिक रूप से 3 मार्च 2025 को लखनऊ को “City of Gastronomy” के रूप में नामांकित किया।

  • दस्तावेज़ में शहर की पाक विविधता, नवाचार, और सतत खाद्य परंपराओं को रेखांकित किया गया।

यह सफलता राज्य सरकार, स्थानीय शेफ, कारीगरों, और विरासत विशेषज्ञों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है, जिन्होंने लखनऊ की खानपान संस्कृति को वैश्विक स्तर पर संरक्षित और प्रोत्साहित करने में भूमिका निभाई।

सांस्कृतिक धरोहर और अवधी व्यंजन 

लखनऊ की पहचान उसकी समृद्ध अवधी रसोई से जुड़ी है, जो अपनी राजसी परंपरा और कालजयी व्यंजनों के लिए जानी जाती है।

नामांकन में विशेष रूप से निम्नलिखित पारंपरिक व्यंजनों को प्रमुखता दी गई —

  • गलौटी कबाब और टुंडे कबाब — लखनऊ की शाही रसोई का प्रतीक।

  • निहारी-कुलचा, पुरी-कचौरी, और टोकरी चाट — प्रसिद्ध स्थानीय व्यंजन।

  • मलाई गिलोरी और मक्खन मलाई — मिठाइयाँ जो लखनऊ की सांस्कृतिक नज़ाकत दर्शाती हैं।

ये व्यंजन लखनऊ की संवेदनशील मिश्रित संस्कृति का प्रतिनिधित्व करते हैं, जहाँ सदियों से पाक-कला ने निरंतर सांस्कृतिक आदान-प्रदान और परिष्कार के माध्यम से विकास किया है।

‘सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी’ टैग का महत्व

यूनेस्को द्वारा प्राप्त यह उपाधि लखनऊ को कई प्रकार से लाभ पहुँचाएगी —

  • सतत एवं सांस्कृतिक पर्यटन को प्रोत्साहन मिलेगा।

  • स्थानीय शेफ, कारीगरों और छोटे खाद्य उद्यमों को सहयोग प्राप्त होगा।

  • पारंपरिक व्यंजनों और पाक विधियों का संरक्षण संभव होगा।

  • भारत की सांस्कृतिक कूटनीति और सॉफ्ट पावर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिलेगी।

  • अन्य यूनेस्को क्रिएटिव शहरों के साथ ज्ञान-विनिमय और नवाचार सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।

यह उपलब्धि भारत की विविध पाक परंपराओं को विश्व मंच पर और सशक्त रूप में प्रस्तुत करती है तथा विरासत और आधुनिक नवाचार के समन्वय को प्रोत्साहित करती है।

यूनेस्को क्रिएटिव सिटीज़ नेटवर्क (UCCN) में भारत के शहर

लखनऊ के शामिल होने के साथ अब भारत के कुल नौ शहर इस प्रतिष्ठित नेटवर्क का हिस्सा बन गए हैं —

शहर श्रेणी वर्ष
जयपुर हस्तकला और लोक कला 2015
वाराणसी संगीत 2015
चेन्नई संगीत 2017
मुंबई फिल्म 2019
हैदराबाद खानपान (गैस्ट्रोनॉमी) 2019
श्रीनगर हस्तकला और लोक कला 2021
ग्वालियर संगीत 2023
कोझिकोड साहित्य 2023
लखनऊ खानपान (गैस्ट्रोनॉमी) 2025

इस प्रकार, लखनऊ हैदराबाद के बाद भारत का दूसरा “सिटी ऑफ गैस्ट्रोनॉमी” बन गया है, जो भारत की पाक-समृद्धि और विविधता को पुनः स्थापित करता है।

यूनेस्को क्रिएटिव सिटीज़ नेटवर्क (UCCN) के बारे में

  • स्थापना वर्ष: 2004

  • उद्देश्य: उन शहरों को बढ़ावा देना जो संस्कृति, रचनात्मकता और नवाचार को सतत शहरी विकास की रणनीति के रूप में अपनाते हैं।

  • क्षेत्र: संगीत, फिल्म, साहित्य, डिजाइन, खानपान (गैस्ट्रोनॉमी), हस्तकला और लोक कला, तथा मीडिया आर्ट्स।

  • नेटवर्क का आकार: विश्वभर के 100 से अधिक देशों के 350+ शहर

यह नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय सहयोग, ज्ञान-साझेदारी, और सांस्कृतिक रूप से प्रेरित आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करता है — जिससे शहर अपनी पहचान, विरासत और नवाचार को विश्व स्तर पर सशक्त बना सकें।

यूएससीआईएस ने सभी आव्रजन भुगतानों के लिए चेक और मनी ऑर्डर विकल्प बंद किए

एक बड़े प्रशासनिक बदलाव के तहत, अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS) ने सभी आव्रजन से जुड़ी आवेदनों के लिए चेक और मनी ऑर्डर स्वीकार करना बंद कर दिया है। इस सप्ताह से, आवेदकों को अब फॉर्म G-1650 के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक डेबिट द्वारा भुगतान अधिकृत करना होगा, जिससे एजेंसी सीधे अमेरिकी बैंक खाते से राशि निकाल सकेगी।

USCIS के प्रवक्ता मैथ्यू जे. ट्रैगेसर के अनुसार, यह बदलाव भुगतान प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित, तेज़ और कुशल बनाने के उद्देश्य से किया गया है। पहले 90% से अधिक भुगतान चेक या मनी ऑर्डर से किए जाते थे, जिससे देरी, धोखाधड़ी के जोखिम और भुगतान त्रुटियों की समस्या उत्पन्न होती थी। ट्रैगेसर ने कहा, “अमेरिका को बेहतर सेवा की आवश्यकता है, और हम इसे प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

H-1B आवेदक अब भी क्रेडिट कार्ड का उपयोग कर सकेंगे

हालांकि अब चेक भुगतान स्वीकार नहीं किए जाएंगे, कुछ वीज़ा श्रेणियों में क्रेडिट कार्ड द्वारा भुगतान की सुविधा जारी रहेगी। H-1B प्रोग्राम, ग्रीन कार्ड, या रोज़गार प्राधिकरण (Employment Authorization) के तहत आवेदन करने वाले आवेदक फॉर्म G-1450 के माध्यम से क्रेडिट कार्ड से भुगतान कर सकते हैं।

एकाधिक H-1B याचिकाएं दाखिल करने वाले नियोक्ताओं के लिए यह बदलाव रिकॉर्ड-कीपिंग और भुगतान ट्रैकिंग को सरल बना सकता है, जिससे प्रशासनिक त्रुटियों में कमी आएगी। हालांकि, यह वित्त विभागों और आव्रजन वकीलों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता भी उत्पन्न करेगा ताकि समय पर भुगतान स्वीकृत हो सके और पर्याप्त धन उपलब्ध हो।

अंतरराष्ट्रीय छात्रों और नए आगमन वाले प्रवासियों पर प्रभाव

यह नया नियम अंतरराष्ट्रीय छात्रों और नए वीज़ा धारकों के लिए चुनौतियाँ उत्पन्न कर सकता है। कई F-1 छात्र जो पहली बार अमेरिका पहुंचते हैं, उनके पास अमेरिकी बैंक खाता नहीं होता, जिससे डेबिट भुगतान की अनुमति देना कठिन हो जाता है। इसी तरह, विदेश से आवेदन करने वाले H-1B कर्मचारी या आश्रित भी ऐसी स्थिति का सामना कर सकते हैं जहाँ उन्हें अमेरिकी बैंकिंग सुविधाओं तक पहुंच नहीं होती।

USCIS ने सलाह दी है कि फॉर्म G-1650 जमा करने से पहले आवेदक खाता और राउटिंग नंबरों की सावधानीपूर्वक जांच करें। किसी भी गलत या अधूरी जानकारी से आवेदन अस्वीकृत किया जा सकता है। साथ ही, आवेदकों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके बैंक सरकारी डेबिट लेनदेन की अनुमति देते हैं और खाते में पर्याप्त राशि उपलब्ध है।

वैकल्पिक भुगतान विकल्प

जिनके पास अमेरिकी बैंक खाता नहीं है, उनके लिए प्रीपेड या रीलोडेबल क्रेडिट कार्ड अस्थायी भुगतान साधन के रूप में उपयोग किए जा सकते हैं। हालांकि, आव्रजन वकीलों ने चेतावनी दी है कि इन कार्डों को USCIS भुगतान प्राधिकरण मानकों को पूरा करना आवश्यक है।

विशेषज्ञों की सलाह है कि आवेदक समय रहते अमेरिकी बैंक खाता खोलें या अधिकृत प्रतिनिधियों के साथ मिलकर आवेदन दाखिल करने से पहले आवश्यक तैयारी पूरी करें।

पूरी तरह डिजिटल भविष्य की दिशा में कदम

आव्रजन विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव USCIS की व्यापक डिजिटल रूपांतरण रणनीति का हिस्सा है। एजेंसी मैन्युअल भुगतान खत्म कर कागज़ी कार्यवाही कम, धोखाधड़ी की रोकथाम और प्रक्रिया की गति बढ़ाने का लक्ष्य रखती है।

हालांकि विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि इस बदलाव से मैन्युअल सुधार या देर से भुगतान की गुंजाइश बहुत कम रह जाएगी। इसलिए आवेदकों को भुगतान की सटीकता सुनिश्चित करनी होगी। अंतरराष्ट्रीय आवेदकों के लिए, समय से पहले तैयारी — जैसे अमेरिकी बैंक खाता खोलना या भुगतान अनुमतियों की पुष्टि करना — संभावित देरी या अस्वीकृति से बचा सकता है।

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