एशियन राइफल/पिस्टल चैंपियनशिप 2026: भारत 94 मेडल के साथ मेडल टैली में टॉप पर

भारत ने डॉ. कर्णी सिंह शूटिंग रेंज में हुई एशियन राइफल/पिस्टल चैंपियनशिप 2026 में शानदार प्रदर्शन किया और 94 मेडल जीतकर मेडल टेबल में टॉप पर रहा।

भारत की मेडल टैली

  • 51 गोल्ड
  • 23 सिल्वर
  • 20 ब्रॉन्ज़
  • कुल: 94 मेडल

सिर्फ आखिरी दिन, भारतीय शूटर्स ने 6 गोल्ड, 3 सिल्वर और 4 ब्रॉन्ज़ मेडल जीते, जिससे कॉन्टिनेंटल शूटिंग में उनका दबदबा और पक्का हो गया।

फाइनल दिवस की मुख्य झलकियाँ

25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल (सीनियर)

अमनप्रीत सिंह ने 589-24x के स्कोर के साथ स्वर्ण पदक जीता। ओलंपियन गुरप्रीत सिंह ने 584-20x के साथ रजत पदक हासिल किया, जबकि अंकुर गोयल ने 570-11x के स्कोर के साथ कांस्य पदक अपने नाम किया। इस तिकड़ी ने टीम स्पर्धा में भी भारत को स्वर्ण पदक दिलाया।

25 मीटर पिस्टल (जूनियर)

सूरज शर्मा ने 585-25x के शानदार प्रदर्शन के साथ स्वर्ण पदक जीता। मुकेश नेलावल्ली ने 582-21x के साथ रजत पदक प्राप्त किया, जबकि डेफलंपिक्स पदक विजेता अभिनव देशवाल ने 573-17x के साथ कांस्य पदक हासिल किया। भारत ने इस स्पर्धा में पोडियम स्वीप करते हुए टीम स्वर्ण पदक भी जीता।

50 मीटर राइफल प्रोन (महिला – सीनियर)

सिफ्ट कौर समरा ने 623.2 के स्कोर के साथ रजत पदक जीता। वर्ष 2010 की विश्व चैंपियन तेजस्विनी सावंत ने कांस्य पदक हासिल किया, जबकि स्वर्ण पदक कजाखस्तान की खिलाड़ी ने जीता। समरा, सावंत और मनीनी कौशिक की तिकड़ी ने टीम स्वर्ण पदक भी अपने नाम किया।

50 मीटर राइफल प्रोन (महिला – जूनियर)

धवलिका देवी न्यामुरुस ने 614.1 के स्कोर के साथ कांस्य पदक जीता। कजाखस्तान की तोमिरिस अमानोवा और दर्या पोनोमारेंको ने क्रमशः स्वर्ण और रजत पदक हासिल किए। भारतीय टीम की प्राची गायकवाड़, अनुष्का ठाकुर और देवी ने मिलकर टीम स्वर्ण पदक जीता।

महत्व

भारत ने कई स्पर्धाओं में पोडियम स्वीप करते हुए शानदार प्रदर्शन किया। सीनियर और जूनियर दोनों वर्गों में मजबूत प्रदर्शन ने एशिया में भारत की एक अग्रणी निशानेबाजी राष्ट्र के रूप में स्थिति को और सुदृढ़ किया। पिस्टल और राइफल दोनों स्पर्धाओं में प्रतिभा की गहराई स्पष्ट रूप से देखने को मिली। यह चैंपियनशिप भारतीय निशानेबाजों के लिए व्यक्तिगत और टीम दोनों स्तरों पर अत्यंत सफल रही।

भारतीय सेना पहले इंटरनेशनल मिलिट्री एडवेंचर चैलेंज कप (IMACC) 2026 की मेज़बानी करेगी

भारतीय सेना 18 से 23 फरवरी 2026 तक पूर्वी हिमालय की तराई में पहली बार अंतरराष्ट्रीय सैन्य एडवेंचर चैलेंज कप (IMACC) 2026 की मेजबानी करेगा। इस आयोजन का उद्देश्य सैन्य सहयोग को सुदृढ़ करना तथा कठिन और चुनौतीपूर्ण भू-भाग में सैनिकों की सहनशक्ति और परिचालन क्षमताओं की परीक्षा लेना है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, IMACC 2026 में भारत और मित्र देशों की सैन्य टीमें भाग लेंगी। एक सप्ताह तक चलने वाली इस प्रतियोगिता में साहसिक गतिविधियों और सहनशक्ति आधारित चुनौतियों की श्रृंखला आयोजित की जाएगी, जिससे सैनिकों के कौशल, टीमवर्क और रणनीतिक क्षमता का व्यापक परीक्षण किया जाएगा।

भाग लेने वाले देश और बल

IMACC 2026 में सात मित्र देशों की टीमें भाग लेंगी—
भूटान, ब्राज़ील, कज़ाकिस्तान, किर्गिस्तान, नेपाल, श्रीलंका और सऊदी अरब।

भारत की ओर से भारतीय सेना, भारतीय वायु सेना, भारतीय तटरक्षक बल तथा भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) की टीमें भाग लेंगी।

IMACC 2026 के उद्देश्य

यह प्रतियोगिता सैनिकों की शारीरिक क्षमता, मानसिक दृढ़ता, टीमवर्क, नेतृत्व कौशल और दबाव में निर्णय लेने की क्षमता की परीक्षा लेने के लिए डिज़ाइन की गई है। सभी प्रतियोगिताएँ दुर्गम पर्वतीय क्षेत्र में आयोजित की जाएँगी, जो सशस्त्र बलों द्वारा वास्तविक परिचालन परिस्थितियों का अनुकरण करेंगी।

वैश्विक सैन्य खेल सहयोग

अंतरराष्ट्रीय सैन्य खेल आयोजन सशस्त्र बलों के बीच विश्वास, सहयोग और सौहार्द को बढ़ावा देते हैं। ये आयोजन अंतर्राष्ट्रीय सैन्य खेल परिषद (CISM) के बैनर तले आयोजित किए जाते हैं, जिसका आदर्श वाक्य है— “Friendship through Sport।”

भारत CISM की गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेता रहा है और वर्ष 2007 में 4वें CISM मिलिट्री वर्ल्ड गेम्स की मेजबानी भी कर चुका है।

महत्व

IMACC 2026 रक्षा कूटनीति को सुदृढ़ करेगा, मित्र देशों के बीच पारस्परिक सहयोग (Interoperability) को बढ़ावा देगा, वैश्विक सैन्य सहयोग में भारत की भूमिका को मजबूत करेगा तथा सैनिकों में शारीरिक और मानसिक उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करेगा। यह आयोजन सैन्य तत्परता और अंतरराष्ट्रीय खेल सहयोग के समन्वय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

नेशनल स्टैटिस्टिकल सिस्टम्स ट्रेनिंग एकेडमी ने 18वां स्थापना दिवस मनाया

राष्ट्रीय सांख्यिकी प्रणाली प्रशिक्षण अकादमी (NSSTA), जो सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के अंतर्गत कार्यरत है, ने उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित महालनोबिस ऑडिटोरियम, नॉलेज पार्क-II में अपना 18वां स्थापना दिवस मनाया। इस वर्ष की थीम थी — “विकसित भारत@2047 के विज़न को प्राप्त करने के लिए आधिकारिक सांख्यिकी में क्षमता निर्माण की पुनर्कल्पना”। इस अवसर पर NSSTA की उस यात्रा को रेखांकित किया गया, जिसके तहत यह भारत की आधिकारिक सांख्यिकीय प्रणाली को कौशल विकास, नैतिक मानकों और तकनीकी उन्नति के माध्यम से सशक्त बनाने वाली एक प्रमुख केंद्रीय प्रशिक्षण संस्था के रूप में स्थापित हुई है।

कार्यक्रम की मुख्य झलकियाँ

क्षमता निर्माण पर विशेष जोर

P. R. Meshram, महानिदेशक (डेटा गवर्नेंस) ने कहा कि आधुनिक क्षमता निर्माण पारंपरिक प्रशिक्षण से आगे बढ़कर लोगों (People), प्रक्रियाओं (Processes) और प्लेटफॉर्म (Platforms) में निवेश पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सांख्यिकी को आम जनता के लिए सरल और समझने योग्य बनाने में प्रभावी संचार कौशल की महत्वपूर्ण भूमिका है।

केंद्रीय मंत्री का संबोधन

केंद्रीय मंत्री Rao Inderjit Singh ने कहा कि सांख्यिकी साक्ष्य-आधारित शासन की आधारशिला है। उन्होंने क्षमता निर्माण में बिग डेटा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने मजबूत संस्थानों के निर्माण में सक्षम व्यक्तियों की भूमिका को रेखांकित करते हुए इस पहल को “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास” की भावना से जोड़ा।

डेटा: उत्पादन का पाँचवाँ कारक

Saurabh Garg, सचिव, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने डेटा को भूमि, श्रम, पूंजी और प्रौद्योगिकी के साथ “उत्पादन का पाँचवाँ कारक” बताया। उन्होंने भारतीय सांख्यिकी सेवा (ISS) के पुनर्गठन, 60 मंत्रालयों में ISS अधिकारियों की तैनाती तथा जिला स्तर पर सूक्ष्म (ग्रैन्युलर) डेटा प्रसार पर विशेष ध्यान देने की बात कही।

डिजिटल डेटा लैब का उद्घाटन

केंद्रीय मंत्री ने डिजिटल डेटा लैब का उद्घाटन किया, जिसका उद्देश्य—

  • डिजिटल कौशल को बढ़ावा देना
  • उभरती तकनीकों में व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना
  • AI-सक्षम सांख्यिकीय प्रणालियों को समर्थन देना
  • मिशन कर्मयोगी को सशक्त बनाना

अंतरराष्ट्रीय मान्यता

स्टीफन प्रीसनर, संयुक्त राष्ट्र रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर ने सांख्यिकी को “विकास का व्याकरण” बताते हुए कहा कि यह संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) 2030 और भारत के विजन 2047 को प्राप्त करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

अन्य प्रमुख बिंदु

  • ISS प्रशिक्षुओं द्वारा “AAROHAN” और “PRATIBIMB” पत्रिकाओं का विमोचन।
  • “नीतिनिर्माताओं और जनता तक सांख्यिकी का संप्रेषण” विषय पर पैनल चर्चा।
  • iGOT कर्मयोगी पाठ्यक्रमों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।

महत्व

18वें स्थापना दिवस समारोह ने National Statistical Systems Training Academy (NSSTA) की प्रतिबद्धता को दोहराया, जिसमें आधिकारिक सांख्यिकी को मजबूत करना, डेटा-आधारित नीति निर्माण के माध्यम से सुशासन को बढ़ावा देना, AI और उन्नत विश्लेषण को अपनाना तथा भविष्य के लिए तैयार सांख्यिकीय कार्यबल का निर्माण शामिल है।

यह आयोजन विकसित भारत@2047 की दीर्घकालिक विकास दृष्टि के अनुरूप है और इस बात पर बल देता है कि सुदृढ़ डेटा प्रणाली प्रभावी शासन और समावेशी विकास की केंद्रीय आधारशिला है।

नीति आयोग ने “ट्रेड वॉच क्वार्टरली” का छठा संस्करण जारी किया

NITI Aayog ने वित्त वर्ष 2025–26 की दूसरी तिमाही (जुलाई–सितंबर 2025) के लिए अपनी प्रमुख प्रकाशन “Trade Watch Quarterly” का छठा संस्करण जारी किया। यह रिपोर्ट नई दिल्ली में उपाध्यक्ष Suman Bery द्वारा सदस्य Arvind Virmani की उपस्थिति में जारी की गई। इस प्रकाशन में वैश्विक और घरेलू व्यापार रुझानों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है, साथ ही भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स व्यापार पर विशेष फोकस किया गया है।

Q2 FY26 में व्यापार प्रदर्शन के प्रमुख निष्कर्ष

  • भारत के कुल निर्यात (सेवाएँ + वस्तुएँ) में लगभग 8.5% की वृद्धि दर्ज की गई।
  • निर्यात वृद्धि आयात से अधिक रही, जिससे व्यापार विस्तार कायम रहा।
  • वैश्विक व्यापार वृद्धि की गति कुछ धीमी रही, लेकिन सकारात्मक बनी रही।
  • वैश्विक स्तर पर सेवाओं का प्रदर्शन वस्तुओं की तुलना में बेहतर रहा।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि 2005 से विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार लगभग चार गुना बढ़ा है, जो वैश्विक दक्षिण के साथ भारत के बढ़ते एकीकरण को दर्शाता है।

थीमैटिक फोकस: इलेक्ट्रॉनिक्स व्यापार

इलेक्ट्रॉनिक्स भारत के निर्यात बास्केट में दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र बनकर उभरा है।

मुख्य बिंदु:

  • 2015–2024 के बीच वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मांग में भारत की हिस्सेदारी 17.2% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बढ़ी, जबकि वैश्विक वृद्धि दर 4.4% रही।
  • 2016 से 2024 के बीच इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात लगभग पाँच गुना बढ़कर 42.1 अरब डॉलर तक पहुँच गया।
  • वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स व्यापार का आकार 4.6 ट्रिलियन डॉलर है।

प्रमुख निर्यात गंतव्य:

  • संयुक्त राज्य अमेरिका
  • यूनाइटेड किंगडम
  • संयुक्त अरब अमीरात

भारत ने निम्न क्षेत्रों में मजबूत स्थिति बनाई है—

  • मोबाइल फोन
  • उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स
  • संचार उपकरण

नीतिगत समर्थन

केंद्रीय बजट में इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण योजना के तहत 40,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, ताकि घरेलू उत्पादन और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा मिल सके।

भविष्य के विकास क्षेत्र:

  • प्रिंटेड सर्किट बोर्ड डिजाइन
  • सेमीकंडक्टर असेंबली और परीक्षण
  • पावर इलेक्ट्रॉनिक्स
  • एम्बेडेड सिस्टम्स

ई-कॉमर्स की भूमिका

भारत विश्व के शीर्ष छह ई-कॉमर्स बाजारों में शामिल है, जहाँ ऑनलाइन खुदरा व्यापार में इलेक्ट्रॉनिक्स की हिस्सेदारी लगभग आधी है।

हालाँकि ई-कॉमर्स निर्यात वर्तमान में सीमित हैं, लेकिन 2030 तक इनके भारत के वस्तु निर्यात में 20–30% योगदान देने का अनुमान है। इसे समर्थन मिलेगा—

  • लॉजिस्टिक्स सुधारों से
  • नियामकीय सुविधा से
  • एमएसएमई की बढ़ती भागीदारी से

महत्व

रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मकता निम्न कारकों पर निर्भर करेगी—

  • वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में गहरा एकीकरण
  • टैरिफ तर्कसंगतीकरण
  • लॉजिस्टिक्स दक्षता
  • उद्योग-अनुकूल कौशल विकास

इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र को भारत के विनिर्माण परिवर्तन, निर्यात वृद्धि और तकनीकी प्रगति के प्रमुख चालक के रूप में देखा जा रहा है।

उदय कोटक गिफ्ट सिटी के चेयरमैन नियुक्त

गुजरात सरकार ने कोटक महिंद्रा बैंक के फाउंडर उदय कोटक को गांधीनगर में मौजूद GIFT सिटी (गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस-टेक सिटी) का नया चेयरमैन अपॉइंट किया है। उन्होंने हसमुख अढिया की जगह ली है, जो पहले नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर काम कर रहे थे। अपॉइंटमेंट ऑर्डर गुजरात सरकार के अर्बन डेवलपमेंट और अर्बन हाउसिंग डिपार्टमेंट ने जारी किया है।

गिफ्ट सिटी के बारे में

GIFT City भारत का पहला परिचालन (operational) स्मार्ट सिटी और देश का पहला अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (IFSC) है। यह एक प्रमुख वित्तीय हब है, जिसकी परिकल्पना प्रधानमंत्री Narendra Modi ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए की थी।

मुख्य बिंदु:

  • बैंकिंग परिसंपत्तियाँ (सितंबर तक): 100.14 अरब डॉलर
  • संचयी बैंकिंग लेनदेन: 142.98 अरब डॉलर
  • 35 IFSC बैंकिंग इकाइयाँ कार्यरत, जिनमें कोटक महिंद्रा बैंक भी शामिल
  • हाल ही में दावोस में विश्व आर्थिक मंच में भागीदारी

नियुक्ति का महत्व

वित्तीय क्षेत्र से जुड़े अनुभवी नेता की नियुक्ति से GIFT City की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूती मिलने की संभावना है। उदय कोटक अपने साथ—

  • बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र का व्यापक अनुभव
  • मजबूत वैश्विक वित्तीय नेटवर्क
  • पूंजी बाजार और वित्तीय सेवाओं में विशेषज्ञता

लेकर आते हैं। हालांकि, सरकार ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि यह पद कार्यकारी होगा या गैर-कार्यकारी।

हालिया घटनाक्रम

पिछले वर्ष जुलाई में गुजरात कैडर के IAS अधिकारी संजय कौल को GIFT City का एमडी एवं सीईओ नियुक्त किया गया था। GIFT City लगातार एक प्रमुख वैश्विक वित्तीय सेवा केंद्र के रूप में विस्तार कर रहा है।

क्यों महत्वपूर्ण है?

यह नियुक्ति दर्शाती है—

  • भारत के IFSC इकोसिस्टम को मजबूत करने की रणनीतिक पहल
  • वैश्विक वित्तीय संस्थानों को आकर्षित करने के प्रयास
  • वित्तीय हब में उद्योग-नेतृत्व आधारित प्रशासन को बढ़ावा

उदय कोटक का नेतृत्व GIFT City को एक प्रमुख वैश्विक वित्तीय गंतव्य के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

RBI ने Sanjay Agarwal को AU Small Finance Bank के एमडी और सीईओ के रूप में 3 वर्ष का सेवा विस्तार दिया

AU Small Finance Bank ने घोषणा की है कि Reserve Bank of India (RBI) ने Sanjay Agarwal को प्रबंध निदेशक (MD) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के रूप में तीन वर्ष के लिए पुनर्नियुक्ति की मंजूरी दे दी है। उनका नया कार्यकाल 19 अप्रैल 2026 से 18 अप्रैल 2029 तक प्रभावी रहेगा।

पुनर्नियुक्ति से जुड़े प्रमुख तथ्य

  • नियुक्त व्यक्ति: संजय अग्रवाल
  • पद: एमडी एवं सीईओ
  • कार्यकाल: 3 वर्ष (19 अप्रैल 2026 – 18 अप्रैल 2029)
  • नियामक स्वीकृति: भारतीय रिजर्व बैंक

इस पुनर्नियुक्ति को पहले 17 अक्टूबर 2025 को बैंक के निदेशक मंडल और 26 दिसंबर 2025 को शेयरधारकों की स्वीकृति मिल चुकी थी। 2017 में बैंक में रूपांतरण के बाद यह उनका लगातार तीसरा कार्यकाल है, जिसे RBI की मंजूरी प्राप्त हुई है।

नेतृत्व यात्रा

  • 14 फरवरी 2008: AU फाइनैंसियर्स के एमडी बने
  • 19 अप्रैल 2017: AU स्मॉल फाइनेंस बैंक के एमडी एवं सीईओ बने (बैंक में रूपांतरण के बाद)
  • वर्तमान कार्यकाल: 19 अप्रैल 2023 – 18 अप्रैल 2026
  • उनके नेतृत्व में बैंक ने डिजिटल बैंकिंग विस्तार, वित्तीय समावेशन, रिटेल और एसएमई ऋण वृद्धि तथा तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया है।

रणनीतिक महत्व

AU स्मॉल फाइनेंस बैंक वह पहला स्मॉल फाइनेंस बैंक है जिसे एक दशक से अधिक समय बाद सार्वभौमिक बैंक (Universal Bank) में परिवर्तन के लिए RBI से सैद्धांतिक मंजूरी मिली।

यह विस्तार दर्शाता है—

  • नियामक संस्थान का भरोसा
  • स्थिर और मजबूत प्रशासन
  • नेतृत्व में निरंतरता
  • सतत विकास की दिशा

बैंक ने इस संबंध में Securities and Exchange Board of India (SEBI) के LODR विनियम, 2015 के तहत बीएसई और एनएसई को आवश्यक खुलासे भी किए हैं।

परीक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बिंदु

  • RBI ने संजय अग्रवाल को 3 वर्ष का विस्तार दिया
  • प्रभावी तिथि: 19 अप्रैल 2026
  • बैंक में रूपांतरण के बाद तीसरा लगातार कार्यकाल
  • AU SFB का लक्ष्य यूनिवर्सल बैंक में रूपांतरण
  • यह निर्णय भारत के स्मॉल फाइनेंस बैंकिंग क्षेत्र में नेतृत्व स्थिरता और विकास की गति को मजबूत करता है।

भारत में लौंग का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य कौन सा है?

जानें भारत में लौंग का प्रमुख उत्पादक राज्य कौन सा है, यह मसाला विशेष रूप से कहाँ उगाया जाता है, इसकी कटाई का समय कब होता है, इसकी विशिष्ट सुगंध क्या है, और लौंग की खेती देशभर में किसानों और मसाला व्यापार को किस प्रकार समर्थन करती है।

क्या आप जानते हैं कि आपकी रसोई में मौजूद एक छोटा सा मसाला आपकी थाली तक पहुँचने से पहले एक बहुत लंबा सफर तय करता है? लौंग भारतीय खाना पकाने, मिठाइयों और यहाँ तक कि पारंपरिक औषधियों में इस्तेमाल होने वाले सबसे सुगंधित मसालों में से एक है। आइए जानें कि किस भारतीय राज्य को यह अनूठी उपलब्धि प्राप्त है।

भारत में लौंग का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य

तमिलनाडु भारत में लौंग का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। 2021-22 के बागवानी आंकड़ों के अनुसार, राज्य ने लगभग 0.99 हजार टन लौंग का उत्पादन किया, जिससे यह देश में शीर्ष योगदानकर्ता बन गया।

यह फसल अधिकतर छोटे बागानों में उगाई जाती है। किसान अक्सर लौंग के साथ-साथ काली मिर्च, जायफल, नारियल या अन्य बागवानी फसलें भी उगाते हैं। इस मिश्रित खेती से किसानों को स्थिर आय प्राप्त करने में मदद मिलती है और मिट्टी की उर्वरता में सुधार होता है।

तमिलनाडु से आने वाली लौंग स्थानीय बाजारों में बिकती है और साथ ही पूरे भारत में मसाला व्यापारियों को भी इसकी आपूर्ति की जाती है।

तमिलनाडु में लौंग उगाने वाले प्रमुख क्षेत्र

राज्य में लौंग की खेती मुख्य रूप से दक्षिणी पश्चिमी घाट क्षेत्र में केंद्रित है, जहां की जलवायु आर्द्र और ठंडी है।

कन्याकुमारी जिला – लौंग का प्रमुख केंद्र

कन्याकुमारी जिले में अकेले भारत के कुल लौंग उत्पादन का लगभग 65% हिस्सा होता है। जिले की वर्षा, छायादार वृक्ष और उपजाऊ मिट्टी इसे मसाला खेती के लिए आदर्श बनाती है।

अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्र

कन्याकुमारी के अलावा, लौंग की खेती इन स्थानों पर भी की जाती है:

  • मरमलाई
  • करुमपराई
  • वेल्लीमलाई

इन पहाड़ी ढलानों पर छाया और नमी उपलब्ध होती है, जो लौंग के पेड़ों के सही ढंग से बढ़ने के लिए आवश्यक हैं।

लौंग की कटाई का मौसम

लौंग के पेड़ों को परिपक्व होने में कई साल लगते हैं। एक बार जब पेड़ों पर कलियाँ आने लगती हैं, तो कटाई आमतौर पर दिसंबर और फरवरी के बीच होती है।

किसान फूल खिलने से पहले ही कलियों को तोड़ लेते हैं। कटाई के बाद, कलियों को धूप में तब तक सुखाया जाता है जब तक कि वे गहरे भूरे रंग की न हो जाएं। इन्हीं सूखी कलियों का इस्तेमाल हम खाना पकाने में करते हैं।

स्थानीय अर्थव्यवस्था में लौंग की खेती का महत्व

पहाड़ी क्षेत्रों में लौंग की खेती से कई छोटे किसानों को आय प्राप्त होती है। चूंकि यह फसल छाया में उगती है, इसलिए किसान इसके साथ-साथ अन्य मसाले भी उगा सकते हैं और वित्तीय जोखिम को कम कर सकते हैं।

यह मसाला निम्नलिखित में भी सहायक है:

  • स्थानीय व्यापारी
  • सुखाने और प्रसंस्करण इकाइयाँ
  • निर्यात व्यवसाय

इस प्रकार, लौंग ग्रामीण आजीविका में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

विश्व में लौंग का सबसे बड़ा उत्पादक

विश्व स्तर पर, इंडोनेशिया लौंग का सबसे बड़ा उत्पादक है। देश की उष्णकटिबंधीय जलवायु और भारी घरेलू मांग — विशेष रूप से लौंग वाली सिगरेट की — उत्पादन को बहुत अधिक बनाए रखती है।

ऐतिहासिक रूप से, ज़ांज़ीबार “लौंग के द्वीप” के रूप में प्रसिद्ध था, लेकिन आज इंडोनेशिया विश्व में लौंग के उत्पादन में अग्रणी है।

पुडुचेरी से वाशिंगटन डीसी तक! डॉक्टरों ने चांग-क्रैंडल मानवीय पुरस्कार 2026 जीता

पुडुचेरी के डॉक्टर हरिप्रिया अरविंद और डॉक्टर आर वेंकटेश को मोतियाबिंद उपचार के लिए चांग-क्रैंडल मानवतावादी पुरस्कार 2026 प्राप्त हुआ है। एएससीआरएस फाउंडेशन द्वारा दिए गए इस पुरस्कार के तहत अरविंद आई केयर सिस्टम को 100,000 डॉलर का वित्तीय सहायता मिलेगा।

भारत के लिए यह एक सम्मानजनक क्षण है, जब पुडुचेरी के दो प्रमुख नेत्र रोग विशेषज्ञों को प्रतिष्ठित चांग-क्रैंडल मानवतावादी पुरस्कार 2026 के लिए नामित किया गया है। अरविंद आई केयर सिस्टम के डॉ. हरिप्रिया अरविंद और डॉ. आर. वेंकटेश को यह सम्मान 11 अप्रैल, 2026 को वाशिंगटन डीसी में अमेरिकन सोसाइटी ऑफ कैटरेक्ट एंड रिफ्रैक्टिव सर्जरी फाउंडेशन के सम्मेलन में दिया जाएगा। यह पुरस्कार मोतियाबिंद से दृष्टिहीनता से निपटने और सस्ती नेत्र सेवा की उपलब्धता को बढ़ाने में उनके उल्लेखनीय योगदान को स्वीकार करता है।

चांग-क्रैंडल मानवीय पुरस्कार क्या है?

  • चांग -क्रैंडल मानवीय पुरस्कार की स्थापना 2017 में डेविड और विक्टोरिया चांग द्वारा दिए गए दान के माध्यम से की गई थी।
  • यह विश्वभर में मोतियाबिंद के उपचार में असाधारण मानवीय योगदान को सम्मानित करता है।
  • इस पुरस्कार के साथ 100,000 डॉलर का अनुदान भी शामिल है, जिसे डॉ. हरिप्रिया अरविंद और डॉ. आर वेंकटेश ने अरविंद आई केयर सिस्टम को वापस दान करने का निर्णय लिया है ताकि इसकी गैर-लाभकारी पहलों को मजबूत किया जा सके।
  • यह निर्णय टिकाऊ और समुदाय-केंद्रित स्वास्थ्य सेवा वितरण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

पुरस्कार विजेताओं के विशिष्ट कैरियर

डॉ. हरिप्रिया अरविंद

  • डॉ. हरिप्रिया अरविंद मोतियाबिंद और इंट्राओकुलर लेंस (आईओएल) सेवाओं की प्रमुख के रूप में कार्यरत हैं।
  • उन्होंने बाल चिकित्सा नेत्र विज्ञान में अपना करियर शुरू किया और बाद में वयस्क मोतियाबिंद सर्जरी की ओर रुख किया।
  • एक उच्च-मात्रा वाले अस्पताल के वातावरण में काम करते हुए, उन्होंने शल्य चिकित्सा के परिणामों में सुधार और बड़े पैमाने पर रोगी देखभाल को सुव्यवस्थित करने पर ध्यान केंद्रित किया है।

डॉ. आर वेंकटेश

  • मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आर. वेंकटेश ने 1997 में अपनी रेजीडेंसी पूरी की और सामान्य मोतियाबिंद इकाई में शामिल हो गए।
  • उन्होंने मैनुअल स्मॉल इनसिजन कैटरेक्ट सर्जरी (एमएसआईसीएस) में विशेषज्ञता हासिल की, जो कम संसाधनों वाले क्षेत्रों में व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली एक किफायती और उच्च मात्रा वाली सर्जिकल तकनीक है।
  • उन्होंने युवा नेत्र रोग विशेषज्ञों को प्रशिक्षित भी किया है और जागरूकता कार्यक्रमों का नेतृत्व भी किया है।

किफायती नेत्र देखभाल के विस्तार में भूमिका

  • डॉ. वेंकटेश ने 2003 में अरविंद द्वारा पुडुचेरी में अपनी सुविधा स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
  • मदुरै में ग्लूकोमा में फेलोशिप पूरी करने के बाद, वह वहां स्थानांतरित हो गए और आउटरीच सेवाओं के विस्तार में मदद की।
  • पिछले दो दशकों में, दोनों डॉक्टरों ने वंचित समुदायों को किफायती मोतियाबिंद सर्जरी प्रदान करने वाले कार्यक्रमों को मजबूत किया है।
  • उनका काम नैदानिक ​​उत्कृष्टता, नवाचार और बड़े पैमाने पर सेवा वितरण को जोड़ता है – एक ऐसा मॉडल जिसने अरविंद आई केयर सिस्टम को विश्व स्तर पर सम्मानित बनाया है।

वैश्विक स्तर पर मोतियाबिंद का इलाज क्यों महत्वपूर्ण है?

  • मोतियाबिंद विश्व स्तर पर, विशेष रूप से निम्न और मध्यम आय वाले देशों में, अंधत्व का प्रमुख कारण है।
  • इस बीमारी का इलाज एक साधारण सर्जिकल प्रक्रिया के माध्यम से संभव है, फिर भी लाखों लोग इलाज की कमी के कारण इससे वंचित रह जाते हैं।
  • एमएसआईसीएस जैसे उच्च मात्रा वाले, कम लागत वाले मॉडल बड़े पैमाने पर अंधत्व को कम करने में मदद करते हैं।
  • चांग-क्रैंडल मानवीय पुरस्कार रोकी जा सकने वाली अंधता को खत्म करने के वैश्विक प्रयासों को उजागर करता है।
  • पुरस्कार विजेताओं का उद्देश्य पुरस्कार राशि को अपने संस्थान में पुनर्निवेश करके शल्य चिकित्सा हस्तक्षेपों तक पहुंच को और अधिक विस्तारित करना और टिकाऊ नेत्र देखभाल प्रणालियों को मजबूत करना है।

पृष्ठभूमि: अरविंद नेत्र देखभाल मॉडल

  • तमिलनाडु में स्थापित , अरविंद आई केयर सिस्टम अपने उस अनूठे मॉडल के लिए जाना जाता है जो कम लागत पर उच्च गुणवत्ता वाली नेत्र देखभाल प्रदान करता है।
  • यह एक क्रॉस-सब्सिडी प्रणाली पर काम करता है जहां भुगतान करने वाले मरीज गरीबों के लिए मुफ्त या कम लागत वाले उपचार को सब्सिडी देने में मदद करते हैं।
  • अरविंद ने लाखों मोतियाबिंद की सर्जरी की हैं और उन्हें सामुदायिक नेत्र विज्ञान में वैश्विक स्तर पर एक मिसाल माना जाता है।
  • इसके आउटरीच शिविरों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों ने विश्व भर की स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों को प्रेरित किया है। चांग-क्रैंडल मानवीय पुरस्कार 2026 इस मॉडल को और भी पुष्ट करता है।

सवाल

प्रश्न: चांग-क्रैंडल मानवीय पुरस्कार 2026 किस क्षेत्र से संबंधित है?

ए) कार्डियोलॉजी
बी) ऑन्कोलॉजी
सी) ऑप्थैल्मोलॉजी
डी) न्यूरोलॉजी

भारत बोधन एआई कॉन्क्लेव 2026, भारत मंडपम में हुआ शुरू

भारत मंडपम में भारत बोधन एआई कॉन्क्लेव 2026 की शुरुआत बोधन एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के उद्घाटन और पूरे देश में एआई-सक्षम शिक्षा के लिए भारत एडुएआई स्टैक बनाने के प्रयास के साथ हुई। केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने सभा को संबोधित किया, वहीं शिक्षा राज्य मंत्री श्री सुकांत मजूमदार भी इस कार्यक्रम में उपस्थित थे। सम्मेलन के दौरान, श्री प्रधान ने बोधन एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का शुभारंभ किया।

सम्मेलन की परिकल्पना और उद्देश्य

भारत बोधन एआई कॉन्क्लेव 2026 को एआई-सक्षम शिक्षा में परिदृश्य की खोज, रणनीतिक संरेखण और साझेदारी निर्माण के लिए एक राष्ट्रीय मंच के रूप में परिकल्पित किया गया है।

इसके प्राथमिक उद्देश्यों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • एआई-आधारित शिक्षा में कमियों और अवसरों की पहचान करने के लिए पारिस्थितिकी तंत्र मानचित्रण
  • सरकार, शिक्षा जगत, स्टार्टअप और उद्योग जगत के बीच रणनीतिक साझेदारियों का समर्थन करना।
  • भारत एडुएआई स्टैक के विकास की शुरुआत करना

भारत एडुएआई स्टैक को भारत भर में एआई-संचालित शिक्षण समाधानों के निर्माण, एकीकरण और विस्तार के लिए एक खुली और अंतरसंचालनीय वास्तुकला के रूप में प्रस्तावित किया गया है।

प्रमुख फोकस क्षेत्र

यह सम्मेलन चार प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में समाधानों पर विचार-विमर्श करता है:

  • स्कूली शिक्षा के लिए एआई
  • उच्च शिक्षा के लिए एआई
  • कौशल विकास और कार्यबल तत्परता के लिए एआई
  • एआई अनुसंधान और डीप टेक्नोलॉजी

इन फोकस क्षेत्रों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एआई को अपनाने का दायरा मूलभूत शिक्षा से लेकर उन्नत अनुसंधान और उद्योग की तैयारी तक फैला हो।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री का संबोधन

श्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस बात पर जोर दिया कि यह सम्मेलन शिक्षाविदों, नीति निर्माताओं, स्टार्टअप्स, नवप्रवर्तकों और उद्योग जगत के नेताओं को एक साथ लाता है ताकि बड़े पैमाने पर एआई को एकीकृत किया जा सके। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा व्यक्त किए गए भारत को एआई-तैयार बनाने के दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत का एआई इकोसिस्टम डिजाइन में समावेशी, आर्किटेक्चर में अंतरसंचालनीय और क्षमता में संप्रभु होगा। मंत्री ने शिक्षा में बदलाव लाने और विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नैतिक, जिम्मेदार और भारत-केंद्रित एआई मॉडल के महत्व को भी रेखांकित किया।

प्रमुख लॉन्च और सहयोग

सम्मेलन के दौरान कई महत्वपूर्ण पहलों और साझेदारियों की घोषणा की गई:

  • विनिर्माण क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का केंद्र स्थापित करने के लिए आईआईटी बॉम्बे और कोलंबिया विश्वविद्यालय के बीच समझौता ज्ञापन
  • आईआईएम लखनऊ के एआई कार्यक्रम का शुभारंभ
  • आईआईएम जम्मू और एआईटी बैंकॉक के साथ संस्थागत सहयोग
  • आईआईएम रांची की “टीचिंग विद एआई” नामक पहल

आईआईटी मद्रास में बोधन.एआई पर आयोजित एक विशेष सत्र में भारत एजुएआई स्टैक के निर्माण के लिए रोडमैप पर चर्चा की गई।

तकनीकी सेशन और प्रदर्शनी

इस सम्मेलन में दो तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें निम्नलिखित विषयों पर ध्यान केंद्रित किया गया:

  1. स्कूल शिक्षा और कक्षा समाधान
  2. शिक्षक क्षमता निर्माण, मूलभूत साक्षरता और संख्यात्मक कौशल (एफएलएन), और प्रणालीगत सुधार

स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा और कौशल विकास में एआई-आधारित नवाचारों को प्रदर्शित करने वाली एक प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया गया। सम्मेलन में डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई), एआई प्लेटफॉर्म, उभरती प्रौद्योगिकियों और उच्च शिक्षा सुधारों पर चर्चा जारी रहेगी।

आधारित प्रश्न

प्रश्न 1. भारत बोधन एआई सम्मेलन 2026 किस स्थान पर आयोजित किया गया था?
(a) विज्ञान भवन
(b) भारत मंडपम
(c) आईआईटी दिल्ली
(d) इंडिया हैबिटेट सेंटर

Q2. बोधन एआई उत्कृष्टता केंद्र का शुभारंभ किसने किया?
(a) नरेंद्र मोदी
(b) सुकांत मजूमदार
(c) धर्मेंद्र प्रधान
(d) एस कृष्णन

प्रश्न 3. भारत एडुएआई स्टैक का लक्ष्य है:
(a) क्लोज्ड-सोर्स और केंद्रीकृत
(b) ओपन और इंटरऑपरेबल
(c) निजी और प्रतिबंधित
(d) उद्योग-विशिष्ट

प्रश्न 4. निम्नलिखित में से कौन सा सम्मेलन के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में से एक नहीं है?
(a) स्कूली शिक्षा के लिए एआई
(b) उच्च शिक्षा के लिए एआई
(c) कृषि के लिए एआई
(d) कौशल विकास और कार्यबल तत्परता के लिए एआई

प्रश्न 5. आईआईटी बॉम्बे और किस अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए?
(a) हार्वर्ड विश्वविद्यालय
(b) ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय
(c) कोलंबिया विश्वविद्यालय
(d) स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय

प्रश्न 6. सम्मेलन ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास पर जोर दिया जो:
(a) वाणिज्यिक और लाभ-प्रेरित हो
(b) अनन्य और केंद्रीकृत हो
(c) नैतिक, जिम्मेदार और समावेशी हो
(d) बिना किसी नियमन के पूरी तरह स्वचालित हो

‘पीएनबी सोल्जरथॉन 2026’: 132वें स्थापना दिवस समारोह से पहले सोल्जरथॉन की घोषणा

भारत के प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में से एक, पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) ने द्वारका में अपने कॉर्पोरेट कार्यालय में ‘पीएनबी सोल्जरथॉन 2026’ के शुभारंभ की जानकारी दी है। यह जानकारी बैंक के 132वें स्थापना दिवस समारोह की शुरुआत का प्रतीक है।

यह पीएनबी के प्रमुख मैराथन आयोजन का दूसरा संस्करण है। इस वर्ष की हाफ मैराथन “पीएनबी सोल्जरथॉन 2026 – सैनिकों के साथ दौड़ें, सैनिकों के लिए दौड़ें” विषय के तहत आयोजित की जाएगी, जो भारतीय सशस्त्र बलों की सराहना करने के साथ-साथ फिटनेस और राष्ट्रीय गर्व को बढ़ावा देने के प्रति बैंक की निष्ठा को प्रदर्शित करती है।

लॉन्च से पहले का समारोह और गणमान्य व्यक्ति

लॉन्च से पहले के समारोह में लिम्का बुक रिकॉर्ड धारक और भारतीय सेना के पूर्व स्पेशल फोर्सेज अधिकारी मेजर सुरेंद्र पूनिया, वीएसएम मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे।

इस कार्यक्रम में निम्नलिखित लोगों ने भाग लिया:

  • अशोक चंद्र, एमडी एवं सीईओ, पीएनबी
  • पीएनबी के कार्यकारी निदेशक
  • वरिष्ठ बैंक अधिकारी
  • सशस्त्र बलों और पूर्व सैनिकों के समुदाय के प्रतिनिधि
  • मैराथन धावक और फिटनेस के शौकीन

समारोह के दौरान, पीएनबी ने इस आयोजन की आधिकारिक थीम, नाम, टी-शर्ट और पदक का अनावरण किया। पीएनबी हाफ मैराथन 2025 की मुख्य झलकियाँ दर्शाने वाली एक लघु फिल्म भी प्रस्तुत की गई।

विषय और महत्व

यह मैराथन 5 अप्रैल 2026 को आयोजित की जाएगी और इसका विषय राष्ट्रीय एकजुटता और सशस्त्र बलों को श्रद्धांजलि देना है। अशोक चंद्र के अनुसार, यह थीम ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का प्रतीक है और राष्ट्र की रक्षा करने वाले बहादुर सैनिकों को श्रद्धांजलि है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय द्वारा स्थापित पीएनबी हमेशा से राष्ट्र निर्माण और सामाजिक जिम्मेदारी के लिए प्रतिबद्ध रहा है।

इस पहल का उद्देश्य निम्नलिखित है:

  • फिटनेस और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा दें
  • राष्ट्रीय गौरव को मजबूत करें
  • युवाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करें
  • नागरिक-सैन्य संबंधों को मजबूत करना

एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन

पीएनबी सोल्जरथॉन 2026 को एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन के रूप में परिकल्पित किया गया है जो सैनिकों, पूर्व सैनिकों, नागरिकों, युवाओं और फिटनेस के प्रति उत्साही लोगों को एक साथ लाता है।

यह पहल पीएनबी के सामुदायिक सहभागिता और सामाजिक उत्तरदायित्व के व्यापक मिशन के अनुरूप है। फिटनेस को देशभक्ति के साथ जोड़कर, इस आयोजन का उद्देश्य एकता और सामूहिक भागीदारी को प्रेरित करना है।

मेजर सुरेंद्र पूनिया ने बैंक के निरंतर प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की पहल राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने और अनुशासन और फिटनेस की संस्कृति को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

आधारित प्रश्न

प्रश्न 1. पंजाब नेशनल बैंक ने किस स्थापना दिवस से पहले ‘पीएनबी सोल्जरथॉन 2026’ की घोषणा की?
(a) 125वां
(b) 130वां
(c) 132वां
(d) 135वां

प्रश्न 2. पीएनबी सोल्जरथॉन 2026 का आयोजन निम्नलिखित तिथियों में से किस तिथि को निर्धारित है?
(a) 1 अप्रैल 2026
(b) 5 अप्रैल 2026
(c) 10 अप्रैल 2026
(d) 15 अप्रैल 2026

प्रश्न 3. पीएनबी सोल्जरथॉन 2026 का विषय है:
(a) फिटनेस के लिए दौड़ें
(b) भारत के लिए दौड़ें
(c) सैनिकों के साथ दौड़ें, सैनिकों के लिए दौड़ें
(d) फिट इंडिया मूवमेंट

प्रश्न 4. पूर्व-उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि कौन थे?
(a) अशोक चंद्र
(b) लाला लाजपत राय
(c) मेजर सुरेंद्र पूनिया
(d) नरेंद्र मोदी

प्रश्न 5. पीएनबी की स्थापना किस स्वतंत्रता सेनानी ने की थी?
(a) भगत सिंह
(b) लाला लाजपत राय
(c) सुभाष चंद्र बोस
(d) बाल गंगाधर तिलक

प्रश्न 6. पीएनबी सोल्जरथॉन 2026 का आयोजन किसके लिए किया जा रहा है?
(a) अंतर्राष्ट्रीय व्यापार
(b) वित्तीय साक्षरता
(c) फिटनेस और राष्ट्रीय गौरव
(d) डिजिटल बैंकिंग

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