PM मोदी ने असम के डिब्रूगढ़ में ₹10,601 करोड़ के फर्टिलाइजर प्लांट का उद्घाटन किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 दिसंबर, 2025 को असम के डिब्रूगढ़ ज़िले के नामरूप में ₹10,601 करोड़ के अमोनिया यूरिया फर्टिलाइज़र प्लांट का शिलान्यास किया। यह प्रोजेक्ट असम वैली फर्टिलाइज़र एंड केमिकल कंपनी लिमिटेड (AVFCCL) के तहत बनाया गया है और यह हर साल 12.7 लाख टन यूरिया का उत्पादन करेगा। यह फर्टिलाइज़र के मामले में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिससे किसानों का कल्याण होगा और पूर्वोत्तर भारत में औद्योगिक विकास को गति मिलेगी।

परियोजना विवरण

  • परियोजना प्रकार: ब्राउनफील्ड विस्तार (मौजूदा परिसर में)
  • निवेश: ₹10,601 करोड़
  • वार्षिक उत्पादन क्षमता: 12.7 लाख मीट्रिक टन यूरिया
  • स्थान: नामरूप, डिब्रूगढ़ ज़िला, असम
  • अपेक्षित कमीशनिंग: 2030 तक
  • केंद्रीय मंत्रिमंडल की स्वीकृति: मार्च 2025
  • AVFCCL का गठन: जुलाई 2025

संयुक्त उपक्रम (JV) साझेदार

  • असम सरकार
  • ऑयल इंडिया लिमिटेड
  • नेशनल फ़र्टिलाइज़र्स लिमिटेड
  • हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (HURL)
  • ब्रह्मपुत्र वैली फ़र्टिलाइज़र कॉरपोरेशन लिमिटेड (BVFCL)
  • यह साझेदारी परियोजना की वित्तीय मजबूती, तकनीकी दक्षता और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करती है।

नामरूप उर्वरक परिसर का महत्व

  • नामरूप दशकों से उर्वरक उत्पादन का प्रमुख केंद्र रहा है।
  • यहाँ स्थित BVFCL पूर्वोत्तर भारत की सबसे पुरानी उर्वरक इकाई है।
  • बढ़ती मांग और पुरानी अवसंरचना के कारण आधुनिक, उच्च क्षमता वाले संयंत्र की आवश्यकता थी।
  • नई परियोजना से यूरिया की निर्बाध आपूर्ति, आयात पर निर्भरता में कमी और क्षेत्र की कृषि सुदृढ़ता बढ़ेगी।

मुख्य बिंदु

  • ₹10,601 करोड़ की उर्वरक परियोजना की आधारशिला पीएम मोदी द्वारा रखी गई।
  • वार्षिक 12.7 लाख मीट्रिक टन यूरिया उत्पादन क्षमता।
  • AVFCCL द्वारा विकसित, जो एक मल्टी-PSU संयुक्त उपक्रम है।
  • किसानों को समर्थन और यूरिया आयात में कमी का लक्ष्य।
  • 2030 तक संचालन शुरू होने की उम्मीद।

राष्ट्रीय गणित दिवस 2025: गणित में रामानुजन के योगदान का सम्मान

हर साल 22 दिसंबर को पूरे भारत में राष्ट्रीय गणित दिवस मनाया जाता है। यह दिन श्रीनिवास रामानुजन की जयंती के रूप में मनाया जाता है, जो भारत के अब तक के सबसे महान गणितज्ञों में से एक थे। 2025 में, स्कूल, कॉलेज, रिसर्च संस्थान और एकेडमिक संस्थाएं एक बार फिर शिक्षा, विज्ञान, टेक्नोलॉजी और रोज़मर्रा की ज़िंदगी में गणित के महत्व को बताने के लिए यह दिन मना रहे हैं।

राष्ट्रीय गणित दिवस का उद्देश्य 

राष्ट्रीय गणित दिवस केवल श्रीनिवास रामानुजन को श्रद्धांजलि देने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके व्यापक शैक्षिक और सामाजिक उद्देश्य हैं। इस दिवस को मनाने के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं—

  • छात्रों में गणित के प्रति रुचि और जिज्ञासा विकसित करना
  • वैज्ञानिक सोच, तार्किक क्षमता और समस्या-समाधान कौशल को बढ़ावा देना
  • तकनीक, अंतरिक्ष विज्ञान, अर्थशास्त्र और दैनिक जीवन में गणित की भूमिका को उजागर करना
  • भारत की प्राचीन और समृद्ध गणितीय विरासत को पहचान और सम्मान दिलाना

इन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए शैक्षणिक संस्थानों द्वारा व्याख्यान, कार्यशालाएँ, प्रश्नोत्तरी, प्रदर्शनी और विभिन्न शैक्षिक गतिविधियों का आयोजन किया जाता है, जिससे गणित को अधिक सरल, रोचक और उपयोगी बनाया जा सके।

22 दिसंबर को राष्ट्रीय गणित दिवस क्यों मनाया जाता है? 

  • 22 दिसंबर महान भारतीय गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की जन्मतिथि है। उनका जन्म वर्ष 1887 में हुआ था।
  • रामानुजन के गणितीय कार्य आज भी आधुनिक गणित को गहराई से प्रभावित करते हैं और उनकी खोजें समय से बहुत आगे थीं।
  • भारत सरकार ने वर्ष 2011 में औपचारिक रूप से 22 दिसंबर को राष्ट्रीय गणित दिवस घोषित किया।
  • यह निर्णय रामानुजन के असाधारण, मौलिक और ऐतिहासिक योगदानों को सम्मान देने के उद्देश्य से लिया गया।
  • गणितीय शिक्षा और अनुसंधान को और अधिक बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2012 को राष्ट्रीय गणित वर्ष के रूप में मनाया गया।

इस प्रकार, 22 दिसंबर न केवल रामानुजन की स्मृति को सम्मान देता है, बल्कि भारत में गणितीय सोच और शिक्षा को सुदृढ़ करने का भी प्रतीक है।

भारत की प्राचीन और समृद्ध गणितीय परंपरा 

भारत में गणित की परंपरा अत्यंत प्राचीन और गहरी रही है, जिसकी जड़ें कई हजार वर्षों पुरानी हैं। प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) द्वारा उद्धृत आधिकारिक अभिलेखों के अनुसार, भारत के गणितीय योगदानों का इतिहास 1200–1800 ईसा पूर्व तक जाता है।

भारत में उत्पन्न हुए कुछ प्रमुख गणितीय सिद्धांत और अवधारणाएँ इस प्रकार हैं—

  • दशमलव संख्या पद्धति
  • शून्य की अवधारणा
  • ऋणात्मक संख्याओं के प्रारंभिक विचार

चौथी से सोलहवीं शताब्दी के बीच का काल, जिसे भारतीय गणित का शास्त्रीय और मध्यकालीन दौर माना जाता है, अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। इस अवधि में आर्यभट्ट, ब्रह्मगुप्त, वराहमिहिर और भास्कराचार्य द्वितीय जैसे महान विद्वानों ने अंकगणित, बीजगणित, ज्यामिति और त्रिकोणमिति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया।

राष्ट्रीय गणित दिवस न केवल श्रीनिवास रामानुजन के योगदान को सम्मान देता है, बल्कि उन्हें भारत की इसी दीर्घकालिक और निरंतर चली आ रही बौद्धिक एवं गणितीय परंपरा से भी जोड़ता है।

श्रीनिवास रामानुजन: जीवन और योगदान 

  • श्रीनिवास रामानुजन को संख्या सिद्धांत (Number Theory), अनंत श्रेणियों (Infinite Series), सतत भिन्नों (Continued Fractions) और गणितीय विश्लेषण (Mathematical Analysis) में उनके क्रांतिकारी योगदान के लिए याद किया जाता है।
  • औपचारिक शिक्षा बहुत सीमित होने के बावजूद, रामानुजन ने स्वतंत्र रूप से लगभग 3,900 गणितीय सूत्रों और परिणामों की खोज की। इनमें से अनेक खोजें बाद में न केवल मौलिक सिद्ध हुईं, बल्कि अत्यंत गहन और महत्वपूर्ण भी पाई गईं।
  • गणित के प्रति उनका दृष्टिकोण अत्यंत सहज और अंतर्ज्ञान-आधारित था। उनकी कई संकल्पनाएँ और सूत्र प्रारंभ में अन्य गणितज्ञों के लिए रहस्यमय थे, लेकिन समय के साथ वे आधुनिक गणितीय अनुसंधान के केंद्र बन गए।
  • आज रामानुजन का कार्य सैद्धांतिक भौतिकी, कंप्यूटर विज्ञान, क्रिप्टोग्राफी (गोपनीयता विज्ञान) और उन्नत गणित जैसे क्षेत्रों में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।

उनका जीवन-प्रसंग छात्रों के लिए निरंतर प्रेरणा का स्रोत है, जो यह दर्शाता है कि प्रतिभा, जिज्ञासा और दृढ़ संकल्प कठिन परिस्थितियों को भी पार कर सकते हैं।

आज के समय में राष्ट्रीय गणित दिवस का महत्व 

आज की दुनिया में गणित की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। यह निम्नलिखित प्रमुख क्षेत्रों की आधारशिला है—

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) और डेटा साइंस
  • अंतरिक्ष अनुसंधान और इंजीनियरिंग
  • अर्थशास्त्र और वित्तीय प्रणाली
  • जलवायु मॉडलिंग और चिकित्सा अनुसंधान

राष्ट्रीय गणित दिवस मनाकर भारत यह संदेश देता है कि नवाचार, तकनीकी प्रगति और राष्ट्रीय विकास के लिए गणित एक मजबूत आधार है। यह दिवस देश में गणितीय साक्षरता बढ़ाने, अनुसंधान को प्रोत्साहित करने और छात्रों को गणित की ओर आकर्षित करने के प्रयासों को भी मजबूती प्रदान करता है।

मुख्य तथ्य 

  • राष्ट्रीय गणित दिवस हर वर्ष 22 दिसंबर को मनाया जाता है।
  • यह महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन (1887–1920) की जयंती पर मनाया जाता है।
  • भारत सरकार ने इसे वर्ष 2011 में घोषित किया था।
  • वर्ष 2012 को पूरे देश में राष्ट्रीय गणित वर्ष के रूप में मनाया गया।
  • रामानुजन ने संख्या सिद्धांत और अनंत श्रेणियों में उल्लेखनीय योगदान दिया।
  • भारत की गणितीय परंपरा अत्यंत प्राचीन और समृद्ध है, जिसमें शून्य और दशमलव प्रणाली का आविष्कार शामिल है।

 

प्रधानमंत्री ने WHO ग्लोबल समिट में अश्वगंधा पर स्मारक डाक टिकट जारी किया

नई दिल्ली में आयोजित द्वितीय WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के प्रसिद्ध औषधीय पौधे अश्वगंधा पर एक स्मारक डाक टिकट जारी किया। यह पहल पारंपरिक चिकित्सा को बढ़ावा देने और इसे समग्र (Holistic) एवं निवारक स्वास्थ्य सेवा के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में वैश्विक पहचान दिलाने की भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

डाक टिकट जारी करने का महत्व

  • स्मारक डाक टिकट प्रतीकात्मक और शैक्षणिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण होते हैं।
  • डाक टिकट किसी देश की संस्कृति, विरासत और प्राथमिकताओं के सांस्कृतिक दूत के रूप में कार्य करते हैं।
  • अश्वगंधा को दर्शाकर भारत ने पारंपरिक औषधीय पौधों के वैज्ञानिक और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित किया है।
  • यह कदम आयुष प्रणालियों (आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी) को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने और पारंपरिक चिकित्सा को आधुनिक स्वास्थ्य प्रणालियों से जोड़ने के भारत के प्रयासों को मजबूत करता है।

अश्वगंधा के बारे में

  • अश्वगंधा (Withania somnifera) आयुर्वेद में सदियों से उपयोग की जाने वाली एक प्रमुख औषधीय जड़ी-बूटी है।
  • यह तनाव कम करने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, ऊर्जा और समग्र स्वास्थ्य के लिए जानी जाती है।
  • इसे एक “एडैप्टोजेन” माना जाता है, जो शरीर को शारीरिक और मानसिक तनाव से निपटने में मदद करता है।
  • हाल के वर्षों में अश्वगंधा ने वैश्विक वेलनेस, न्यूट्रास्यूटिकल और इंटीग्रेटिव मेडिसिन बाजारों में व्यापक लोकप्रियता हासिल की है।

पृष्ठभूमि

  • भारत के पास पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों, विशेषकर आयुर्वेद, की समृद्ध विरासत है, जो औषधीय पौधों और प्राकृतिक उपचारों पर आधारित है।
  • पिछले एक दशक में भारत ने संस्थागत ढांचे, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और नीतिगत समर्थन के माध्यम से अपने पारंपरिक ज्ञान के वैश्वीकरण पर विशेष ध्यान दिया है।

मुख्य बिंदु 

  • अश्वगंधा पर स्मारक डाक टिकट नई दिल्ली में जारी किया गया।
  • यह टिकट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा द्वितीय WHO वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन के दौरान जारी किया गया।
  • अश्वगंधा एक प्रमुख आयुर्वेदिक औषधीय पौधा है, जो तनाव निवारण और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए प्रसिद्ध है।
  • यह पहल भारत की पारंपरिक चिकित्सा विरासत को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देती है।
  • कदम आयुष प्रणालियों की अंतरराष्ट्रीय पहुंच को मजबूत करता है।

भारत और नीदरलैंड ने संयुक्त व्यापार और निवेश समिति (JTIC) का गठन किया

भारत और नीदरलैंड्स ने अपने आर्थिक साझेदारी संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए संयुक्त व्यापार एवं निवेश समिति (Joint Trade and Investment Committee – JTIC) की स्थापना की है। इस निर्णय को एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर के माध्यम से औपचारिक रूप दिया गया, जिसका उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार और निवेश सहयोग के लिए एक समर्पित संस्थागत ढांचा तैयार करना है।

संयुक्त व्यापार एवं निवेश समिति (JTIC) क्या है

संयुक्त व्यापार एवं निवेश समिति (JTIC) भारत और नीदरलैंड्स के बीच आर्थिक संबंधों की समीक्षा, मार्गदर्शन और विस्तार के लिए एक द्विपक्षीय तंत्र के रूप में कार्य करेगी।
यह समिति—

  • व्यापार प्रवाह को सुदृढ़ करने
  • द्विपक्षीय निवेश को प्रोत्साहित करने
  • आपसी हित के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर केंद्रित होगी।

JTIC का उद्देश्य अस्थायी बैठकों से आगे बढ़कर नियमित और संस्थागत संवाद सुनिश्चित करना है।

JTIC के उद्देश्य

  • द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को बढ़ावा देना
  • व्यापार एवं निवेश से जुड़ी नियामक और प्रक्रियागत बाधाओं की पहचान कर उन्हें दूर करना
  • उभरते और रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएँ तलाशना
  • प्रौद्योगिकी, स्थिरता (Sustainability) और नवाचार आधारित विकास में साझेदारी को बढ़ावा देना

संरचना और कार्यप्रणाली

  • JTIC की बैठकें हर वर्ष आयोजित की जाएँगी
  • बैठकें बारी-बारी से भारत और नीदरलैंड्स में होंगी

समिति की सह-अध्यक्षता—

  • भारत की ओर से: अतिरिक्त सचिव, वाणिज्य विभाग, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय
  • नीदरलैंड्स की ओर से: महानिदेशक (Foreign Economic Relations), विदेश मंत्रालय
  • दोनों देशों के संबंधित सरकारी अधिकारी एवं नामित सदस्य बैठकों में भाग लेंगे

पहल का महत्व

JTIC की स्थापना से—

  • आर्थिक संवाद के लिए एक औपचारिक और संरचित मंच उपलब्ध होगा
  • व्यापार और निवेश से जुड़ी समस्याओं का व्यवस्थित समाधान संभव होगा
  • निवेशकों के लिए ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस और पूर्वानुमेय कारोबारी माहौल बेहतर होगा

भारत के लिए यह पहल यूरोपीय देशों के साथ आर्थिक जुड़ाव मजबूत करने की रणनीति के अनुरूप है, जबकि नीदरलैंड्स के लिए यह यूरोप में भारतीय व्यापार और निवेश का प्रमुख प्रवेश द्वार बनने की भूमिका को और सुदृढ़ करती है।

मुख्य बिंदु 

  • भारत और नीदरलैंड्स ने संयुक्त व्यापार एवं निवेश समिति (JTIC) की स्थापना की
  • समिति को औपचारिक रूप देने के लिए MoU पर हस्ताक्षर किए गए
  • JTIC द्विपक्षीय व्यापार और दोतरफा निवेश को बढ़ावा देगी
  • व्यापार और निवेश बाधाओं की पहचान व समाधान इसका प्रमुख लक्ष्य है
  • समिति की बैठकें प्रतिवर्ष, दोनों देशों में बारी-बारी से होंगी

जम्मू-कश्मीर को अपना पहला Gen Z पोस्ट ऑफिस मिला

जम्मू-कश्मीर ने सार्वजनिक सेवाओं के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। AIIMS विजयपुर परिसर में प्रदेश के पहले ‘जेन Z पोस्ट ऑफिस’ का शुभारंभ किया गया है। यह पहल डाक विभाग (India Post) की उस बदलती सोच को दर्शाती है, जिसका उद्देश्य डाक सेवाओं को डिजिटल, सुलभ और युवाओं की अपेक्षाओं के अनुरूप बनाना है। इसके साथ ही AIIMS विजयपुर देश का पहला AIIMS बन गया है, जहाँ जेन Z पोस्ट ऑफिस स्थापित किया गया है।

AIIMS विजयपुर में उद्घाटन

  • जेन Z पोस्ट ऑफिस का उद्घाटन 17 दिसंबर 2025 को AIIMS विजयपुर में किया गया।
  • इसका उद्घाटन प्रो. (डॉ.) शक्ति कुमार गुप्ता, कार्यकारी निदेशक एवं CEO, AIIMS विजयपुर द्वारा किया गया।
  • इस अवसर पर जम्मू-कश्मीर सर्कल के मुख्य पोस्टमास्टर जनरल सहित वरिष्ठ डाक अधिकारी उपस्थित रहे।
  • कार्यक्रम में फैकल्टी सदस्य, छात्र, स्वास्थ्यकर्मी और डाक विभाग के अधिकारी शामिल हुए, जो India Post और एक प्रमुख चिकित्सा संस्थान के बीच सहयोग को दर्शाता है।

जेन Z पोस्ट ऑफिस की परिकल्पना

  • जेन Z पोस्ट ऑफिस का मुख्य उद्देश्य युवाओं के बीच डाक सेवाओं की छवि को नए सिरे से परिभाषित करना है।
  • यह ग्राहक-केंद्रित, तकनीक-सक्षम और आधुनिक उपयोगकर्ता व्यवहार के अनुरूप डिज़ाइन किया गया है।
  • शैक्षणिक एवं संस्थागत परिसरों में ऐसे पोस्ट ऑफिस स्थापित करने से सेवाओं तक आसान पहुंच सुनिश्चित होती है।
  • यह पहल वित्तीय समावेशन और जागरूकता को भी बढ़ावा देती है, खासकर छात्रों और युवा पेशेवरों के बीच।

विशेषताएं और युवा-उन्मुख सेवाएं

  • AIIMS विजयपुर का जेन Z पोस्ट ऑफिस आधुनिक वातावरण और सरल सेवा प्रणाली प्रदान करता है।
  • यहां डाक, बैंकिंग और बीमा सेवाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध हैं।
  • डिजिटल भुगतान विकल्प और तेज़ लेन-देन प्रक्रिया इस केंद्र की प्रमुख विशेषताएं हैं।
  • यह केंद्र डाक बचत योजनाओं, इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक सेवाओं और बीमा उत्पादों को बढ़ावा देने का भी मंच है, विशेष रूप से उन युवाओं के लिए जो औपचारिक वित्तीय प्रणाली से पहली बार जुड़ रहे हैं।

मुख्य बिंदु 

  • जम्मू-कश्मीर का पहला जेन Z पोस्ट ऑफिस AIIMS विजयपुर में शुरू।
  • AIIMS विजयपुर भारत का पहला AIIMS बना जहाँ जेन Z पोस्ट ऑफिस स्थापित हुआ।
  • उद्देश्य: डाक सेवाओं को डिजिटल, युवा-केंद्रित और आधुनिक बनाना।
  • डाक, बैंकिंग और बीमा सेवाएं एक साथ उपलब्ध।
  • युवाओं में वित्तीय समावेशन और जागरूकता को बढ़ावा।

ISRO ने RESPOND बास्केट 2025 लॉन्च किया

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने RESPOND Basket 2025 जारी किया है, जिसके तहत देशभर के विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों से अनुसंधान प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं। इस पहल का उद्देश्य शैक्षणिक अनुसंधान को ISRO की वर्तमान और भविष्य की अंतरिक्ष मिशन आवश्यकताओं के साथ जोड़ना है, ताकि उन्नत वैज्ञानिक शोध सीधे राष्ट्रीय अंतरिक्ष लक्ष्यों में योगदान दे सके।

RESPOND Basket 2025 क्या है

  • RESPOND Basket 2025, ISRO तथा अंतरिक्ष विभाग (Department of Space – DoS) के अंतर्गत विभिन्न केंद्रों द्वारा चिन्हित मिशन-उन्मुख अनुसंधान समस्या विवरणों (Problem Statements) का एक संकलन है।
  • ये समस्या विवरण ISRO की तत्काल परिचालन आवश्यकताओं और दीर्घकालिक अनुसंधान एवं विकास (R&D) प्राथमिकताओं से सीधे जुड़े हुए हैं।
  • इस पहल के तहत सामान्य या सैद्धांतिक शोध के बजाय व्यावहारिक और अनुप्रयोग-आधारित अनुसंधान को प्रोत्साहित किया जाता है, जिसे वास्तविक अंतरिक्ष मिशनों में लागू किया जा सके।

RESPOND Basket 2025 के उद्देश्य

  • शैक्षणिक अनुसंधान और राष्ट्रीय अंतरिक्ष मिशनों के बीच की दूरी को कम करना
  • जटिल अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी चुनौतियों के समाधान में अकादमिक नवाचार को दिशा देना
  • भारत की विशाल शैक्षणिक प्रतिभा और युवा शोधकर्ताओं को रणनीतिक राष्ट्रीय कार्यक्रमों से जोड़ना

पहल की प्रमुख विशेषताएँ

  • मिशन-अलाइन रिसर्च फोकस: सभी समस्या विवरण ISRO की कार्यक्रमगत आवश्यकताओं से जुड़े
  • देश के विश्वविद्यालयों और मान्यता प्राप्त शैक्षणिक/अनुसंधान संस्थानों के लिए खुला
  • ISRO वैज्ञानिकों द्वारा तकनीकी मार्गदर्शन और ओरिएंटेशन प्रदान किया जाएगा
  • सभी शोध प्रस्तावों का I-GRASP पोर्टल के माध्यम से डिजिटल सबमिशन
  • प्रक्रिया में पारदर्शिता, दक्षता और उद्देश्य की स्पष्टता

कौन प्रकाशित करता है

RESPOND Basket 2025 को ISRO, अंतरिक्ष विभाग (DoS), भारत सरकार के अंतर्गत प्रकाशित करता है।

ISRO के विभिन्न केंद्र अपने-अपने विशेषज्ञ क्षेत्रों के अनुसार समस्या विवरण प्रदान करते हैं, जैसे—

  • प्रक्षेपण यान (Launch Vehicles)
  • उपग्रह प्रणालियाँ
  • प्रणोदन (Propulsion)
  • अंतरिक्ष विज्ञान
  • उन्नत सामग्री एवं तकनीक

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • RESPOND Basket 2025 ISRO द्वारा जारी किया गया
  • इसमें मिशन-उन्मुख अनुसंधान समस्या विवरण शामिल हैं
  • उद्देश्य: शैक्षणिक शोध को ISRO की मिशन आवश्यकताओं से जोड़ना
  • अंतरिक्ष विभाग (DoS) के अंतर्गत प्रकाशित
  • भारत के विश्वविद्यालयों और मान्यता प्राप्त संस्थानों के लिए खुला
  • प्रस्ताव I-GRASP पोर्टल के माध्यम से जमा किए जाएंगे

PM मोदी ने किया गुवाहाटी एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 दिसंबर 2025 को असम में लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया। बता दें कि अदाणी समूह द्वारा संचालित गोपीनाथ बरदोलोई इंटरनेशनल एयरपोर्ट का बड़े पैमाने पर विस्तार किया जा रहा है, ताकि गुवाहाटी को पूर्वोत्तर भारत का प्रमुख विमानन केंद्र और दक्षिणपूर्व एशिया का प्रवेश द्वार बनाया जा सके। यह उद्घाटन पूर्वोत्तर भारत में विमानन अवसंरचना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और इससे क्षेत्र में कनेक्टिविटी, पर्यटन तथा आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।

नए टर्मिनल की प्रमुख विशेषताएँ

  • नव उद्घाटित टर्मिनल की वार्षिक यात्री क्षमता 1.31 करोड़ (13.1 मिलियन) है, जिससे यह पूर्वी भारत के सबसे आधुनिक हवाई अड्डों में शामिल हो जाता है।
  • आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह एकीकृत टर्मिनल रनवे, एप्रन, टैक्सीवे और एयरफील्ड सिस्टम में बड़े उन्नयन से समर्थित है, जिससे विमानों का संचालन अधिक सुचारु होगा।
  • इस टर्मिनल को भारत का पहला ‘नेचर-थीम्ड’ एयरपोर्ट टर्मिनल बताया जा रहा है, जो टिकाऊ और यात्री-अनुकूल डिजाइन में एक नया मानक स्थापित करता है।

प्रकृति-थीम आधारित वास्तुकला: “बैंबू ऑर्किड्स”

  • टर्मिनल की सबसे आकर्षक विशेषता इसकी प्रकृति-आधारित, इमर्सिव डिजाइन है, जो असम की समृद्ध जैव विविधता और सांस्कृतिक विरासत से प्रेरित है।
  • इसका केंद्रीय विषय “बैंबू ऑर्किड्स” है, जो राज्य की प्राकृतिक पहचान को दर्शाता है।

प्रमुख डिजाइन तत्वों में शामिल हैं—

  • पूर्वोत्तर क्षेत्र से प्राप्त लगभग 140 मीट्रिक टन बाँस का व्यापक उपयोग
  • ऑर्किड-प्रेरित स्तंभ, जो कोपौ (Kopou) फूल का प्रतीक हैं
  • जापी आकृतियाँ और काजीरंगा से प्रेरित एक-सींग वाला गैंडा
  • इसके अलावा, लगभग एक लाख स्वदेशी पौधों से युक्त एक अनोखा “स्काई फॉरेस्ट” यात्रियों को हवाई अड्डे पर पहुँचते ही जंगल जैसा अनुभव प्रदान करता है।

स्थिरता और प्रौद्योगिकी पर विशेष ध्यान

  • नया टर्मिनल सतत हवाई अड्डा संचालन और डिजिटल नवाचार में उच्च मानक स्थापित करता है।
  • इसमें ऊर्जा दक्षता, पर्यावरण संवेदनशीलता और परिचालन उत्कृष्टता सुनिश्चित करने वाली आधुनिक प्रणालियाँ शामिल हैं।

यात्रियों की सुविधा के लिए उन्नत सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं—

डिजी यात्रा (DigiYatra) आधारित संपर्क-रहित यात्रा

  • त्वरित सुरक्षा जांच के लिए फुल-बॉडी स्कैनर
  • स्वचालित बैगेज हैंडलिंग सिस्टम
  • फास्ट-ट्रैक इमिग्रेशन सुविधाएँ
  • AI-आधारित एयरपोर्ट संचालन

इन उपायों का उद्देश्य सुचारु, सुरक्षित और कुशल यात्रा अनुभव प्रदान करना है।

मिची बेंटहॉस अंतरिक्ष में जाने वाली पहली व्हीलचेयर यूज़र बनकर इतिहास रचेंगी

जर्मन एयरोस्पेस इंजीनियर मिची बेंटहॉस अंतरिक्ष यात्रा करने वाली पहली व्हीलचेयर उपयोगकर्ता व्यक्ति बनने जा रही हैं। वह ब्लू ओरिजिन (Blue Origin) के न्यू शेपर्ड रॉकेट की आगामी NS-37 सबऑर्बिटल मिशन पर उड़ान भरेंगी। यह उपलब्धि मानव अंतरिक्ष उड़ान को अधिक समावेशी और सुलभ बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है।

मिची बेंटहॉस कौन हैं

  • मिची बेंटहाउस एक जर्मन एयरोस्पेस और मेकाट्रॉनिक्स इंजीनियर हैं।
  • वह 2024 से यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) में यंग ग्रेजुएट ट्रेनी के रूप में कार्यरत हैं।
  • वर्ष 2018 में माउंटेन बाइकिंग दुर्घटना के कारण उन्हें रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट लगी, जिसके बाद से वह व्हीलचेयर का उपयोग कर रही हैं।
  • इस जीवन बदलने वाली घटना के बावजूद उन्होंने एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में अपना करियर जारी रखा और अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत किया।

पेशेवर अनुभव और अंतरिक्ष प्रशिक्षण

  • मिची बेंटहॉस को मानव अंतरिक्ष उड़ान से जुड़ा महत्वपूर्ण अनुभव प्राप्त है।
  • उन्होंने पैराबोलिक ज़ीरो-ग्रैविटी फ्लाइट्स में भाग लिया है, जिनमें भारहीनता की स्थिति का अभ्यास कराया जाता है।
  • वह पोलैंड के लुनारेस रिसर्च स्टेशन में आयोजित दो सप्ताह के एनालॉग एस्ट्रोनॉट मिशन में मिशन कमांडर भी रह चुकी हैं, जो व्हीलचेयर-सुलभ सुविधा है।
  • ये अनुभव यह दर्शाते हैं कि समावेशी अंतरिक्ष प्रशिक्षण पूरी तरह संभव है।

NS-37 मिशन के बारे में

  • NS-37 मिशन एक सबऑर्बिटल फ्लाइट है, जिसमें माइकेला सहित कुल छह यात्री सवार होंगे।
  • यह उड़ान पृथ्वी के वायुमंडल से बाहर जाकर कार्मान रेखा (Kármán Line) को पार करेगी, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अंतरिक्ष की सीमा माना जाता है।
  • यात्रियों को कुछ मिनटों तक माइक्रोग्रैविटी (भारहीनता) का अनुभव होगा, इसके बाद यान पृथ्वी पर वापस लौट आएगा।
  • मिची की भागीदारी इस मिशन को ऐतिहासिक बनाती है।

इस उपलब्धि का महत्व

  • मिची बेंटहॉस की अंतरिक्ष यात्रा STEM और अंतरिक्ष अन्वेषण में समावेशन का प्रतीक है।
  • यह धारणा को चुनौती देती है कि अंतरिक्ष मिशन केवल शारीरिक रूप से सक्षम लोगों तक सीमित हैं।
  • यह उपलब्धि सुलभ अंतरिक्ष यान, प्रशिक्षण केंद्र और मिशन प्रक्रियाओं के विकास को भी प्रोत्साहित करेगी।
  • साथ ही, यह दुनिया भर के दिव्यांग व्यक्तियों को यह संदेश देती है कि शारीरिक सीमाएं सपनों की सीमा नहीं होतीं।

मुख्य बिंदु 

  • मिची बेंटहॉस अंतरिक्ष जाने वाली पहली व्हीलचेयर उपयोगकर्ता बनेंगी।
  • वह ब्लू ओरिजिन के न्यू शेपर्ड NS-37 मिशन पर उड़ान भरेंगी।
  • वह एक जर्मन एयरोस्पेस और मेकाट्रॉनिक्स इंजीनियर हैं और ESA से जुड़ी हैं।
  • वर्ष 2018 से वह रीढ़ की चोट के कारण व्हीलचेयर का उपयोग कर रही हैं।
  • यह मिशन अंतरिक्ष अन्वेषण में समावेशन और सुलभता की दिशा में एक बड़ा कदम है।

विदेशी मुद्रा भंडार 1.68 अरब डॉलर बढ़कर 688.94 अरब डॉलर हुआ

भारत की बाह्य क्षेत्र (External Sector) की स्थिति और मज़बूत हुई है, क्योंकि 12 दिसंबर 2025 को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) 1.68 अरब डॉलर बढ़कर 688.94 अरब डॉलर हो गया। यह जानकारी भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा जारी साप्ताहिक आँकड़ों में दी गई है। इस वृद्धि का प्रमुख कारण स्वर्ण भंडार में तेज़ बढ़ोतरी और विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों (FCA) में हल्की वृद्धि रही।

RBI के ताज़ा आँकड़े

  • RBI के अनुसार, रिपोर्टिंग सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार
  • 687.26 अरब डॉलर से बढ़कर 688.94 अरब डॉलर हो गया।
  • इससे पहले, 5 दिसंबर 2025 को समाप्त सप्ताह में भंडार में लगभग 1.03 अरब डॉलर की वृद्धि हुई थी।

यह लगातार बढ़ता रुझान वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक तनावों और पूंजी प्रवाह में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत के बाह्य खातों में स्थिरता को दर्शाता है।

विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियाँ (FCA)

विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियाँ, जो कुल भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा हैं,

  • 0.91 अरब डॉलर बढ़कर 557.79 अरब डॉलर हो गईं।
  • FCA में अमेरिकी डॉलर, यूरो, पाउंड स्टर्लिंग और जापानी येन जैसी प्रमुख मुद्राओं में रखी गई परिसंपत्तियाँ शामिल होती हैं।
  • गैर-अमेरिकी मुद्राओं की डॉलर के मुकाबले विनिमय दर में बदलाव से FCA का मूल्य प्रभावित होता है।

स्वर्ण भंडार में तेज़ वृद्धि

  • भारत का स्वर्ण भंडार 0.76 अरब डॉलर बढ़कर 107.74 अरब डॉलर हो गया।
  • यह वृद्धि RBI की भंडार विविधीकरण रणनीति को दर्शाती है।
  • वैश्विक अनिश्चितता के समय सोना एक सुरक्षित निवेश (Safe Haven Asset) माना जाता है।
  • सोने में निवेश बढ़ाकर RBI विदेशी मुद्राओं पर निर्भरता कम कर रहा है और दीर्घकालिक सुरक्षा मज़बूत कर रहा है।

SDR और IMF में स्थिति

  • अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के साथ भारत के विशेष आहरण अधिकार (SDR) में मामूली वृद्धि होकर यह 18.74 अरब डॉलर हो गया।
  • IMF में भारत की रिज़र्व स्थिति भी हल्की बढ़कर 4.69 अरब डॉलर हो गई।
  • भले ही यह राशि छोटी हो, लेकिन ये घटक वैश्विक स्तर पर भारत की तरलता सुरक्षा को मज़बूत करते हैं।

विदेशी मुद्रा भंडार क्या है?

विदेशी मुद्रा भंडार वे परिसंपत्तियाँ हैं जिन्हें किसी देश का केंद्रीय बैंक रखता है, जिनका उपयोग किया जाता है—

  • घरेलू मुद्रा को स्थिर रखने के लिए
  • बाहरी भुगतान दायित्वों को पूरा करने के लिए
  • अर्थव्यवस्था में विश्वास बनाए रखने के लिए
  • वैश्विक वित्तीय बाज़ारों की अस्थिरता से निपटने के लिए

भारत में विदेशी मुद्रा भंडार में शामिल हैं—

  • विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियाँ
  • स्वर्ण भंडार
  • SDR
  • IMF में रिज़र्व स्थिति

मुख्य बिंदु 

  • भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 1.68 अरब डॉलर बढ़कर 688.94 अरब डॉलर हुआ।
  • वृद्धि का मुख्य कारण स्वर्ण भंडार और FCA में इज़ाफ़ा रहा।
  • स्वर्ण भंडार 107.74 अरब डॉलर तक पहुँचा।
  • विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियाँ बढ़कर 557.79 अरब डॉलर हुईं।
  • SDR और IMF में रिज़र्व स्थिति में मामूली वृद्धि।
  • मज़बूत विदेशी मुद्रा भंडार से आर्थिक स्थिरता और निवेशक विश्वास बढ़ता है।

अंतरराष्ट्रीय मानव एकजुटता दिवस 2025: इतिहास और महत्व

अंतरराष्ट्रीय मानव एकजुटता दिवस 2025 हर वर्ष 20 दिसंबर को मनाया जाता है। यह दिवस मानवता के सामने मौजूद साझा चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक एकता, सहयोग और साझा जिम्मेदारी के महत्व को दोहराता है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा स्थापित यह दिवस गरीबी उन्मूलन, बेहतर स्वास्थ्य परिणामों, सामाजिक न्याय और समावेशी विकास के लिए एकजुटता को एक सार्वभौमिक मूल्य के रूप में रेखांकित करता है। बढ़ती वैश्विक परस्पर-निर्भरता के दौर में यह संदेश देता है कि वैश्विक समस्याओं का समाधान सामूहिक प्रयासों से ही संभव है।

अंतरराष्ट्रीय मानव एकजुटता दिवस कब मनाया जाता है

यह दिवस हर साल 20 दिसंबर को मनाया जाता है। यह तिथि विश्व एकजुटता कोष (World Solidarity Fund) की स्थापना की स्मृति में चुनी गई है, जिसका उद्देश्य गरीबी में जीवन यापन करने वाले लोगों के लिए लाभकारी पहलों को समर्थन देना और न्यायसंगत विकास को बढ़ावा देना है।

अंतरराष्ट्रीय मानव एकजुटता दिवस के उद्देश्य

  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना
  • गरीबी घटाने के लिए सामूहिक प्रयासों को संगठित करना
  • सामाजिक न्याय के प्रति वैश्विक प्रतिबद्धता को मजबूत करना
  • सरकारों, संस्थानों और नागरिक समाज के बीच संवाद को प्रोत्साहित करना ताकि विकास की प्रक्रिया में कोई भी पीछे न छूटे

इसके साथ ही यह दिवस स्वास्थ्य असमानताओं, संक्रामक रोगों, मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों और आवश्यक सेवाओं तक पहुंच जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान देता है, खासकर कमजोर और हाशिए पर पड़े वर्गों के लिए।

मानव एकजुटता की अवधारणा

मानव एकजुटता केवल दान या अस्थायी सहायता तक सीमित नहीं है। यह साझा जिम्मेदारी और परस्पर निर्भरता के सिद्धांत पर आधारित है, यह मानते हुए कि गरीबी, महामारी, जलवायु परिवर्तन और असमानता जैसी समस्याएं प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सभी देशों को प्रभावित करती हैं।

स्वास्थ्य के संदर्भ में, एकजुटता का अर्थ है संसाधनों, ज्ञान और तकनीक का न्यायसंगत साझा उपयोग, ताकि किसी एक क्षेत्र का स्वास्थ्य संकट वैश्विक खतरा न बन जाए। यही टिकाऊ प्रगति की बुनियाद है।

वैश्विक स्तर पर आयोजन और गतिविधियां

  • दुनिया भर में सेमिनार, कार्यशालाएं, जागरूकता अभियान और सम्मेलन आयोजित किए जाते हैं।
  • सरकारें, अंतरराष्ट्रीय संगठन, स्वास्थ्य संस्थान और नागरिक समाज संगठन असमानताओं को उजागर करते हैं और सहयोगात्मक समाधान प्रस्तुत करते हैं।
  • कई देश SDGs की दिशा में अपनी प्रगति की समीक्षा करते हैं और स्वास्थ्य समानता, सामाजिक सुरक्षा और सामुदायिक लचीलापन बढ़ाने वाली जमीनी पहलों को सामने लाते हैं।

दिवस का इतिहास

  • संयुक्त राष्ट्र सहस्राब्दी घोषणा (Millennium Declaration) में मानव एकजुटता को 21वीं सदी के अंतरराष्ट्रीय संबंधों के मूल्यों में शामिल किया गया।
  • इसे व्यवहार में लाने के लिए 20 दिसंबर 2002 को विश्व एकजुटता कोष की स्थापना की गई।
  • बाद में 22 दिसंबर 2005 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 20 दिसंबर को आधिकारिक रूप से अंतरराष्ट्रीय मानव एकजुटता दिवस घोषित किया।

सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) से संबंध

यह दिवस संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) से गहराई से जुड़ा है। एकजुटता निम्नलिखित लक्ष्यों को समर्थन देती है:

  • गरीबी उन्मूलन (No Poverty)
  • अच्छा स्वास्थ्य और कल्याण (Good Health and Well-being)
  • लैंगिक समानता (Gender Equality)
  • असमानताओं में कमी (Reduced Inequalities)

साथ ही यह शांति, न्याय और सशक्त संस्थानों को भी मजबूत करती है।

मुख्य बिंदु 

  • अंतरराष्ट्रीय मानव एकजुटता दिवस 20 दिसंबर को मनाया जाता है।
  • संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इसे 2005 में आधिकारिक रूप से घोषित किया।
  • विश्व एकजुटता कोष की स्थापना 2002 में हुई।
  • यह दिवस वैश्विक एकता, गरीबी उन्मूलन और स्वास्थ्य समानता को बढ़ावा देता है।
  • मानव एकजुटता, संयुक्त राष्ट्र सहस्राब्दी घोषणा का एक मूल मूल्य है।
  • यह दिवस सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति से सीधे जुड़ा हुआ है।

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