पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक समुद्री व्यापार पर गंभीर असर पड़ा है। हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट देखी गई है। 1 मार्च से शुरू हुए तनाव के बाद शिप ट्रैफिक लगभग 95% तक घट गया, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। हालांकि, भारत, चीन और थाईलैंड जैसे कुछ देशों को सीमित रूप से सुरक्षित मार्ग मिल पाया है।
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य का वैश्विक महत्व
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यह फारस की खाड़ी को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ता है और दुनिया की लगभग 20% तेल आपूर्ति इसी रास्ते से गुजरती है।
इस मार्ग में किसी भी प्रकार की बाधा सीधे तौर पर तेल की कीमतों, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक व्यापार को प्रभावित करती है। मौजूदा संकट ने यह भी दिखाया है कि भू-राजनीतिक तनाव के समय वैश्विक सप्लाई चेन कितनी कमजोर हो सकती है।
क्यों कुछ देशों को ही मिल रही है अनुमति?
- इस संकट के दौरान ईरान ने चयनात्मक (Selective) नीति अपनाई है। ईरान केवल उन देशों के जहाजों को अनुमति दे रहा है जिन्हें वह “गैर-शत्रुतापूर्ण” मानता है।
- हालांकि “गैर-शत्रुतापूर्ण” की स्पष्ट परिभाषा नहीं दी गई है, जिससे वैश्विक शिपिंग कंपनियों में अनिश्चितता बनी हुई है।
- भारत, चीन, पाकिस्तान और थाईलैंड जैसे देशों को कूटनीतिक संतुलन और तटस्थ रुख के कारण मार्ग मिल पाया है।
देशवार स्थिति: कौन गुजर पा रहा है?
- भारत: कई भारतीय टैंकर सफलतापूर्वक पार हुए, जिससे ऊर्जा आपूर्ति बनी हुई है।
- चीन: मजबूत आर्थिक संबंधों के कारण पारगमन संभव हुआ, रिपोर्ट्स के अनुसार ट्रांजिट शुल्क भी दिया गया।
- थाईलैंड: कूटनीतिक प्रयासों के बाद एक टैंकर को अनुमति मिली।
- पाकिस्तान: मिश्रित स्थिति—एक जहाज को अनुमति, जबकि दूसरे को नियमों के उल्लंघन के कारण रोका गया।
- तुर्की और जापान: अभी भी अनुमति के लिए प्रयास जारी हैं।
वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति पर प्रभाव
- कम जहाजों के गुजरने से वैश्विक तेल आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है। इससे ईंधन की कीमतों में वृद्धि और महंगाई का खतरा बढ़ गया है।
- शिपिंग कंपनियों के लिए जोखिम बढ़ गया है, जिससे बीमा प्रीमियम और परिवहन लागत भी काफी बढ़ गई है।
- भारत जैसे तेल आयात पर निर्भर देशों के लिए यह स्थिति आर्थिक चुनौती बन सकती है।
क्यों कहा जाता है ‘चोकपॉइंट’?
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को “ग्लोबल एनर्जी चोकपॉइंट” कहा जाता है क्योंकि:
- इसकी चौड़ाई सबसे संकरे स्थान पर केवल 33 किमी है
- विश्व के तेल और LNG का बड़ा हिस्सा यहीं से गुजरता है
यह ईरान, इराक और सऊदी अरब जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों के बीच स्थित है


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