नए म्यूचुअल फंड नियम: SEBI ने अप्रैल 2026 से परफॉर्मेंस-बेस्ड खर्च स्ट्रक्चर की अनुमति दी

भारत का म्यूचुअल फंड उद्योग एक बड़े नियामकीय परिवर्तन की ओर बढ़ रहा है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने म्यूचुअल फंड नियमों में व्यापक संशोधन को अधिसूचित किया है, जिसके तहत पहली बार प्रदर्शन से जुड़ी शुल्क व्यवस्था (Performance-linked Expense Charging) की अनुमति दी गई है। दिसंबर 2025 में स्वीकृत यह नया ढांचा 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा और इसका मुख्य उद्देश्य पारदर्शिता, सुशासन और निवेशक संरक्षण को मजबूत करना है।

क्यों चर्चा में है?

SEBI ने नए म्यूचुअल फंड विनियम अधिसूचित किए हैं, जिनके तहत योजनाओं को प्रदर्शन-आधारित बेस एक्सपेंस रेशियो (BER) वसूलने की अनुमति दी गई है। इसके साथ ही अधिक कड़े प्रकटीकरण (डिस्क्लोज़र) मानक और मजबूत गवर्नेंस नियम लागू होंगे, जो 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगे।

SEBI के म्यूचुअल फंड नियमों में प्रमुख बदलाव

  • यह लगभग तीन दशकों में म्यूचुअल फंड ढांचे का पहला व्यापक सुधार है।
  • नए नियमों में नई खर्च संरचना, सख्त डिस्क्लोज़र मानक और एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMC) के ट्रस्टी व वरिष्ठ प्रबंधन की जिम्मेदारियों का विस्तार किया गया है।
  • उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निवेशकों पर लगने वाले खर्च पारदर्शी, उचित और फंड के प्रदर्शन से जुड़े हों।

प्रदर्शन-आधारित खर्च व्यवस्था

  • सुधारों का सबसे महत्वपूर्ण पहलू प्रदर्शन से जुड़ी शुल्क व्यवस्था है।
  • इसके तहत म्यूचुअल फंड योजनाएं बेस एक्सपेंस रेशियो (BER) को योजना के प्रदर्शन से जोड़कर वसूल सकेंगी, बशर्ते SEBI द्वारा तय शर्तों का पालन किया जाए।
  • इसका अर्थ है कि AMC तभी अधिक शुल्क कमा पाएंगी जब वे बेहतर रिटर्न देंगी, जिससे फंड मैनेजर और निवेशकों के हितों में बेहतर तालमेल बनेगा।

बेस एक्सपेंस रेशियो (BER) की शुरुआत

  • नए नियमों में BER की अवधारणा लाई गई है, जो केवल निवेशकों के धन के प्रबंधन के लिए AMC द्वारा लिया जाने वाला शुल्क दर्शाता है।
  • पहले सभी खर्च टोटल एक्सपेंस रेशियो (TER) में शामिल होते थे।
  • अब ब्रोकरेज, सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT), स्टांप ड्यूटी और एक्सचेंज शुल्क जैसे खर्च अलग-अलग दिखाने होंगे।
  • इससे निवेशकों के लिए लागत की स्पष्टता और तुलना आसान होगी।

मजबूत डिस्क्लोज़र और पारदर्शिता नियम

  • खर्चों के अलग-अलग प्रकटीकरण से निवेशकों को यह साफ़ तौर पर पता चलेगा कि उनका पैसा कहां खर्च हो रहा है।
  • SEBI का मानना है कि इससे विभिन्न योजनाओं और AMC के बीच तुलना सरल होगी।
  • बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े फंड्स पर कुछ असर पड़ सकता है, लेकिन कुल मिलाकर निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा।

कड़ा गवर्नेंस और निगरानी तंत्र

  • संशोधित ढांचे में ट्रस्टी और प्रमुख प्रबंधकीय कर्मियों की भूमिका और जवाबदेही बढ़ाई गई है।
  • निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया गया है ताकि AMC निवेशकों के सर्वोत्तम हित में काम करें।
  • यह SEBI की व्यापक रणनीति के अनुरूप है, जिसका लक्ष्य वित्तीय संस्थानों में सुशासन को सुदृढ़ करना है।

ब्रोकरेज सीमा का युक्तिकरण

  • SEBI ने ट्रेडिंग लागत घटाने के लिए ब्रोकरेज सीमा भी कम की है।
  • कैश मार्केट में ब्रोकरेज कैप को लगभग 8.59 बेसिस प्वाइंट से घटाकर 6 bps किया गया है।
  • डेरिवेटिव्स सेगमेंट में यह सीमा 3.89 bps से घटाकर 2 bps कर दी गई है।
  • इससे म्यूचुअल फंड योजनाओं की कुल लेन-देन लागत कम होने की उम्मीद है।
[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]
vikash

Recent Posts

भारतीय अभिनेत्री ऋतुपर्णा सेनगुप्ता को यूके में अंतरराष्ट्रीय सम्मान

भारतीय अभिनेत्री ऋतुपर्णा सेनगुप्ता को 'महिला सशक्तिकरण पुरस्कार' से सम्मानित किया गया है। उन्हें वर्ष…

1 day ago

अंतर्राष्ट्रीय नवरोज़ दिवस 2026: परंपरा, संस्कृति और एकता का उत्सव

अंतर्राष्ट्रीय नवरोज़ दिवस (International Nowruz Day) हर वर्ष 21 मार्च को मनाया जाता है। यह…

1 day ago

विश्व हिमनद दिवस 2026: पृथ्वी के जमे हुए जल भंडारों की सुरक्षा

विश्व हिमनद दिवस 2026 हर वर्ष 21 मार्च को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य पृथ्वी…

1 day ago

फरवरी 2026 में भारत की कोर सेक्टर वृद्धि 2.3%: क्या संकेत देते हैं आंकड़े?

फरवरी 2026 में भारत के आठ प्रमुख उद्योगों के सूचकांक (Index of Eight Core Industries…

1 day ago

अंतर्राष्ट्रीय नस्लीय भेदभाव उन्मूलन दिवस 2026: इतिहास और महत्व

अंतर्राष्ट्रीय नस्लीय भेदभाव उन्मूलन दिवस हर वर्ष 21 मार्च को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य…

2 days ago

क्लाइमेट चेंज का असर: 2050 तक घटेगी दुनियाभर में फिजिकल एक्टिविटी

हाल ही में The Lancet Global Health में प्रकाशित एक अध्ययन में चेतावनी दी गई…

2 days ago