बालेंद्र शाह, जिन्हें लोकप्रिय रूप से ‘बालन’ के नाम से जाना जाता है, ने 27 मार्च, 2026 को देश के 47वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के इस 35 वर्षीय नेता ने शीतल निवास स्थित राष्ट्रपति कार्यालय में शपथ ग्रहण की। उनकी नियुक्ति राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल द्वारा संवैधानिक प्रावधानों के तहत की गई थी, और यह नेपाल के राजनीतिक परिदृश्य में आए बदलाव को दर्शाता है।
रैपर से प्रधानमंत्री तक: अनोखा सफर
बालेन शाह की यात्रा काफी अलग और प्रेरणादायक रही है। राजनीति में आने से पहले वे एक रैपर, इंजीनियर और युवा आइकन के रूप में प्रसिद्ध थे।
काठमांडू के मेयर के रूप में उनके कार्यकाल ने उन्हें एक सुधारवादी नेता की छवि दी।
35 वर्ष की उम्र में वे:
- नेपाल के इतिहास के सबसे युवा प्रधानमंत्री बने
- मधेश क्षेत्र से शीर्ष पद तक पहुंचने वाले पहले नेता बने
Gen-Z आंदोलनों ने बदली राजनीति
उनकी जीत 2025 में हुए बड़े पैमाने पर युवाओं (Gen-Z) के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में आई। इन प्रदर्शनों में मुख्य मुद्दे थे:
- भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद
- सोशल मीडिया पर प्रतिबंध
- शासन में जवाबदेही की कमी
इन आंदोलनों के कारण K P Sharma Oli की सरकार गिर गई, जो नेपाल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ।
ऐतिहासिक जनादेश और पारंपरिक दलों का पतन
5 मार्च 2026 को हुए आम चुनावों में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने 275 में से 182 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया।
वहीं पारंपरिक दलों को भारी नुकसान हुआ:
- नेपाली कांग्रेस: 38 सीट
- CPN-UML: 25 सीट
बालेन शाह ने झापा में के.पी. शर्मा ओली को हराकर बड़ी राजनीतिक जीत दर्ज की।
शपथ ग्रहण समारोह की सांस्कृतिक झलक
शपथ ग्रहण समारोह में नेपाल की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता देखने को मिली, जिसमें हिंदू और बौद्ध परंपराओं का सुंदर समावेश था:
- शंखनाद (ब्राह्मणों द्वारा)
- वैदिक मंत्रोच्चार
- बौद्ध लामाओं द्वारा मंत्र पाठ


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