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राष्ट्रीय पक्षी दिवस 2026: इतिहास, महत्व और मुख्य तथ्य

राष्ट्रीय पक्षी दिवस 2026 (National Bird Day 2026) 5 जनवरी को मनाया जाएगा। यह दिवस पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में पक्षियों की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका की ओर ध्यान आकर्षित करता है। परागण से लेकर कीट नियंत्रण तक, पक्षी स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र को सहारा देते हैं। साथ ही यह दिन याद दिलाता है कि आवास विनाश, जलवायु परिवर्तन और अवैध वन्यजीव व्यापार आज भी दुनिया भर में पक्षी आबादी के लिए गंभीर खतरे बने हुए हैं, जिससे संरक्षण प्रयास और भी आवश्यक हो गए हैं।

क्यों चर्चा में है?

राष्ट्रीय पक्षी दिवस 2026 को 5 जनवरी 2026 को विश्व स्तर पर मनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य पक्षी संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना और पक्षियों तथा उनके आवासों की रक्षा के लिए व्यक्तिगत एवं सामुदायिक स्तर पर कार्रवाई को प्रोत्साहित करना है।

राष्ट्रीय पक्षी दिवस क्या है?

राष्ट्रीय पक्षी दिवस एक वार्षिक आयोजन है, जो पक्षियों के कल्याण और संरक्षण को समर्पित होता है। यह दिवस पक्षियों को आवास विनाश, अवैध वन्यजीव व्यापार, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन जैसे खतरों से बचाने के महत्व को उजागर करता है। साथ ही, यह पक्षियों के नैतिक और मानवीय संरक्षण को बढ़ावा देता है तथा जंगली पक्षियों को कैद में रखने से हतोत्साहित करता है, यह स्पष्ट संदेश देते हुए कि पक्षी अपने प्राकृतिक आवास में ही सुरक्षित और स्वतंत्र रहते हैं।

राष्ट्रीय पक्षी दिवस का इतिहास

राष्ट्रीय पक्षी दिवस की शुरुआत 2002 में एवियन वेलफेयर कोएलिशन द्वारा की गई थी। यह अमेरिका के ऐतिहासिक क्रिसमस बर्ड काउंट के साथ जुड़ा हुआ है, जो दुनिया के सबसे पुराने वन्यजीव सर्वेक्षणों में से एक है। इस दिवस का उद्देश्य विशेष रूप से पालतू पक्षी व्यापार में होने वाले शोषण के प्रति जागरूकता फैलाना और पक्षियों के सामने मौजूद दीर्घकालिक संरक्षण चुनौतियों पर लोगों को शिक्षित करना था।

राष्ट्रीय पक्षी दिवस 2026 का महत्व

राष्ट्रीय पक्षी दिवस 2026 इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पक्षी पर्यावरणीय स्वास्थ्य के प्रमुख संकेतक होते हैं। उनकी संख्या में गिरावट अक्सर पारिस्थितिक असंतुलन का संकेत देती है। यह दिवस लोगों को प्रेरित करता है कि वे—

  • पारिस्थितिकी तंत्र में पक्षियों की भूमिका को समझें
  • आवास संरक्षण और पुनर्स्थापन का समर्थन करें
  • वन्यजीवों के साथ सह-अस्तित्व को बढ़ावा दें
  • पक्षियों को नुकसान पहुँचाने वाली मानवीय गतिविधियों को कम करें

यह शिक्षा और सामुदायिक पहलों में संरक्षण मूल्यों को भी सुदृढ़ करता है।

भारत का राष्ट्रीय पक्षी

  • भारतीय मोर (Peacock), जिसका वैज्ञानिक नाम Pavo cristatus है, भारत का राष्ट्रीय पक्षी है।
  • इसे 1963 में इसके सांस्कृतिक, धार्मिक और पारिस्थितिक महत्व के कारण राष्ट्रीय पक्षी घोषित किया गया।
  • मोर को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के अंतर्गत संरक्षण प्राप्त है और यह भारतीय कला, लोककथाओं और परंपराओं में व्यापक रूप से दर्शाया जाता है।

भारत में पक्षी संरक्षण

भारत में पक्षियों की समृद्ध जैव विविधता पाई जाती है और यहाँ 70 से अधिक पक्षी अभयारण्य हैं।
प्रमुख स्थलों में—

  • केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (भरतपुर)
  • वेदांतंगल पक्षी अभयारण्य

भारत में संरक्षण प्रयास मुख्य रूप से आर्द्रभूमि संरक्षण, वन संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता पर केंद्रित हैं, ताकि प्रवासी और स्थानीय पक्षी प्रजातियों की रक्षा की जा सके।

भारत के “बर्डमैन”

  • डॉ. सलीम अली को प्रेमपूर्वक “भारत का बर्डमैन” कहा जाता है।
  • वे एक अग्रणी पक्षी विज्ञानी थे, जिनके व्यापक सर्वेक्षणों ने भारत में आधुनिक पक्षी विज्ञान (ऑर्निथोलॉजी) की नींव रखी।
  • उनके कार्यों ने देश में पक्षी संरक्षण नीतियों और जन-जागरूकता को गहराई से प्रभावित किया।
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