सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने अपनी संस्थागत पहचान को आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए नया लोगो और शुभंकर (मास्कॉट) लॉन्च किया है। यह पहल डेटा-आधारित शासन, पारदर्शिता और नीति निर्माण में विश्वसनीय आँकड़ों की भूमिका को सशक्त रूप से रेखांकित करती है।
खबरों में क्यों?
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने लोगों तक अपनी पहुंच बढ़ाने, सरकारी आंकड़ों पर भरोसा बेहतर करने और पॉलिसी बनाने और राष्ट्र निर्माण में डेटा की भूमिका को मज़बूत करने के लिए एक नया ऑफिशियल लोगो और मैस्कॉट लॉन्च किया है।
नए लोगो की थीम और दृष्टि
- नवीन रूप से लॉन्च किया गया यह लोगो “Data for Development (विकास के लिए डेटा)” की थीम पर आधारित है, जो यह दर्शाता है कि किस प्रकार सांख्यिकी भारत की आर्थिक और सामाजिक प्रगति को समर्थन देती है।
- यह लोगो MoSPI के उस मिशन को दृश्य रूप में प्रस्तुत करता है, जिसके तहत मंत्रालय विश्वसनीय, समयबद्ध और पारदर्शी आँकड़े उपलब्ध कराता है, जो अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, शिक्षा और अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण और निर्णय प्रक्रिया में सहायक होते हैं।
लोगो के प्रमुख डिज़ाइन तत्व
- अशोक चक्र: सत्य, पारदर्शिता और सुशासन का प्रतीक।
- केंद्र में रुपये का चिह्न (₹): आर्थिक योजना और राजकोषीय नीति निर्माण में सांख्यिकी की भूमिका को दर्शाता है।
- संख्यात्मक आकृतियाँ और ऊपर की ओर बढ़ती ग्रोथ बार: आधुनिक डेटा प्रणालियों और सटीक आँकड़ों से संचालित प्रगति का संकेत।
रंग योजना और उसका महत्व
- लोगो में केसरिया, सफेद, हरा और गहरा नीला रंग उपयोग किए गए हैं।
- ये रंग राष्ट्रीय तिरंगे से प्रेरित हैं और विकास, स्थिरता, सततता, विश्वास और ज्ञान जैसे मूल्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
- समग्र रूप से, ये डिज़ाइन तत्व MoSPI की ईमानदारी, राष्ट्रीय विकास और आधुनिक सांख्यिकी विज्ञान के प्रति प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।
शुभंकर (मास्कॉट) का परिचय
- लोगो के साथ MoSPI ने अपना शुभंकर “सांख्यिकी” लॉन्च किया है।
- यह एक मित्रवत और नागरिक-केंद्रित चरित्र के रूप में डिज़ाइन किया गया है।
- इसका उद्देश्य जटिल सांख्यिकीय अवधारणाओं को सरल और सहज बनाकर आम लोगों तक पहुँचाना है।
जनसंपर्क में शुभंकर की भूमिका
- यह मास्कॉट MoSPI की सार्वजनिक पहचान के रूप में कार्य करेगा और इसका उपयोग सर्वेक्षणों, जागरूकता अभियानों, शैक्षणिक पहलों, डिजिटल प्लेटफॉर्मों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में किया जाएगा।
- इससे राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा किए जाने वाले सर्वेक्षणों में जनभागीदारी बढ़ने और प्रतिक्रिया की गुणवत्ता में सुधार होने की उम्मीद है।


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