भारत के लोकपाल ने 16 जनवरी 2026 को अपना स्थापना दिवस मनाया, जो भ्रष्टाचार के विरुद्ध भारत की लड़ाई में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और जवाबदेही बनाए रखने के उद्देश्य से स्थापित इस संस्था ने इस अवसर पर अब तक की अपनी यात्रा की समीक्षा की और संवैधानिक मूल्यों पर आधारित पारदर्शी एवं नैतिक शासन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।
क्यों चर्चा में?
भारत के लोकपाल ने 16 जनवरी 2026 को अपना स्थापना दिवस मनाया। यह दिवस लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 के लागू होने की स्मृति में मनाया जाता है, जिसके तहत 2014 में लोकपाल संस्था की स्थापना हुई थी।
स्थापना दिवस का आयोजन और महत्व
- स्थापना दिवस का कार्यक्रम नई दिल्ली स्थित लोकपाल कार्यालय में सादे, आंतरिक स्वरूप में आयोजित किया गया, जो वित्तीय अनुशासन और मितव्ययिता को दर्शाता है।
- यह दिवस लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 की धारा 3 के अंतर्गत लोकपाल की विधिक स्थापना का प्रतीक है।
- यह अवसर संस्था की प्रगति, चुनौतियों और लोकतांत्रिक जवाबदेही तथा शासन में जनविश्वास को सुदृढ़ करने में उसकी विकसित होती भूमिका पर चिंतन का अवसर प्रदान करता है।
नेतृत्व और प्रमुख गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति
- कार्यक्रम की अध्यक्षता लोकपाल के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर ने की, जिनके साथ लोकपाल के कई न्यायिक एवं गैर-न्यायिक सदस्य भी उपस्थित रहे।
- वरिष्ठ सदस्यों ने संस्था को सौंपे गए संवैधानिक दायित्वों और उसकी उस विशिष्ट भूमिका को रेखांकित किया, जिसके तहत वह सर्वोच्च स्तर के सार्वजनिक पदाधिकारियों सहित भ्रष्टाचार के आरोपों की स्वतंत्र जांच करने के लिए अधिकृत है।
- यह आयोजन निरंतरता, संस्थागत परिपक्वता और निष्पक्षता व विधिक प्रक्रिया के पालन के सामूहिक संकल्प का प्रतीक रहा।
लोकपाल संस्था के पीछे की परिकल्पना
- अपने संबोधन में अध्यक्ष ने अन्ना हजारे और पूर्व लोकायुक्त न्यायमूर्ति एन. संतोष हेगड़े जैसे व्यक्तित्वों के त्याग और प्रयासों को याद किया, जिनके संघर्ष ने एक सशक्त भ्रष्टाचार-रोधी तंत्र की लंबे समय से चली आ रही जन-आकांक्षा को अभिव्यक्ति दी।
- लोकपाल की परिकल्पना “जनता का, जनता द्वारा और जनता के लिए” एक ऐसी संस्था के रूप में की गई थी, जो कानून के शासन और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का सख्ती से पालन करते हुए स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करे।
बढ़ता जनविश्वास और कार्यप्रदर्शन
- अध्यक्ष ने बताया कि पिछले दो वर्षों में लोकपाल को प्राप्त शिकायतों की संख्या में निरंतर वृद्धि हुई है और 2025–26 के लिए यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में तेज़ बढ़ोतरी दर्शा रही है।
- यह वृद्धि लोकपाल के प्रति बढ़ती जन-जागरूकता और भरोसे को दर्शाती है।
- अधिक पीठ बैठकों और सक्रिय मामले प्रबंधन के माध्यम से न्यूनतम लंबित मामलों और समयबद्ध निपटान को सुनिश्चित किया गया है, जिससे संस्था की कार्यकुशलता और निष्पक्षता में जनता का विश्वास और मजबूत हुआ है।
भारत का लोकपाल
| शीर्षक | विवरण |
| लोकपाल क्या है? | • एक वैधानिक भ्रष्टाचार-रोधी संस्था • लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 के तहत स्थापित • केंद्र स्तर पर संस्थागत जवाबदेही को सुदृढ़ करने हेतु गठित |
| दायित्व (Mandate) | • भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करना • कुछ निर्दिष्ट सार्वजनिक पदाधिकारियों के विरुद्ध • भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 से संबंधित मामलों में |
| संगठनात्मक संरचना | • कुल 9 सदस्य – 1 अध्यक्ष – 8 सदस्य • 4 सदस्य न्यायिक होना अनिवार्य • कम-से-कम 50% सदस्य निम्न वर्गों से: – अनुसूचित जाति / जनजाति / अन्य पिछड़ा वर्ग – अल्पसंख्यक – महिलाएं |
| पात्रता मापदंड | अध्यक्ष: • भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश, या • सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश, या • निर्धारित योग्यता वाला कोई प्रतिष्ठित व्यक्तिन्यायिक सदस्य: • सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश, या • किसी उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश |
| सदस्यों की नियुक्ति | • भारत के राष्ट्रपति द्वारा नियुक्ति • चयन समिति की सिफारिश पर, जिसमें शामिल हैं: – प्रधानमंत्री (अध्यक्ष) – लोकसभा अध्यक्ष – लोकसभा में विपक्ष के नेता – भारत के मुख्य न्यायाधीश (या उनके द्वारा नामित न्यायाधीश) – एक प्रतिष्ठित विधिवेत्ता |
| कार्यकाल | • पद ग्रहण की तिथि से 5 वर्ष • या 70 वर्ष की आयु तक • जो भी पहले हो |
| लोकपाल का अधिकार क्षेत्र | • भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच, जिनके विरुद्ध: – प्रधानमंत्री – केंद्रीय मंत्री – संसद सदस्य – केंद्रीय सरकारी अधिकारी (समूह A, B, C और D)• इसके अतिरिक्त शामिल: – संसद द्वारा स्थापित या केंद्र/राज्य सरकार से पूर्ण या आंशिक रूप से वित्तपोषित बोर्ड, निगम, सोसायटी, ट्रस्ट एवं स्वायत्त निकायों के अध्यक्ष, सदस्य, अधिकारी एवं निदेशक – ₹10 लाख से अधिक विदेशी अंशदान प्राप्त करने वाले निकाय |


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