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IGNCA में कैलाश सत्यार्थी की आत्मकथा ‘दियासलाई’ पर विशेष चर्चा

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA), संस्कृति मंत्रालय के तहत, सत्यार्थी मूवमेंट फॉर ग्लोबल कंपैशन के सहयोग से “दियासलाई” पर एक साहित्यिक चर्चा का आयोजन किया। यह पुस्तक नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलेश सत्यार्थी की आत्मकथा है, जो सामाजिक न्याय, बाल अधिकारों और वैश्विक करुणा पर केंद्रित है।

“दियासलाई” पुस्तक के बारे में

“दियासलाई” नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी की आत्मकथा है, जो बाल अधिकारों और सामाजिक न्याय के लिए एक वैश्विक आवाज हैं। इस पुस्तक में उन्होंने बाल श्रम उन्मूलन और अपने संघर्षों की कहानी साझा की है। सत्यार्थी ने अपनी विदिशा (मध्य प्रदेश) के विनम्र प्रारंभिक जीवन से लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बाल अधिकारों के लिए आंदोलन तक की यात्रा को दर्शाया है।

यह आत्मकथा 186 देशों तक पहुंचे “ग्लोबल मार्च अगेंस्ट चाइल्ड लेबर” आंदोलन, बच्चों की शिक्षा और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष, और समाज में करुणा के महत्व को उजागर करती है। यह पुस्तक पाठकों को न केवल प्रेरित करती है, बल्कि उन्हें करुणा को लोकतांत्रिक मूल्य के रूप में अपनाने का संदेश भी देती है।

कैलाश सत्यार्थी का संदेश: साहित्य के माध्यम से करुणा की पुकार

इस अवसर पर कैलाश सत्यार्थी ने “दियासलाई” की मूल भावना को व्यक्त करते हुए कहा:
“आज दुनिया पहले से ज्यादा समृद्ध है, फिर भी अपने सबसे गंभीर मुद्दों को हल करने में असमर्थ है। एक समस्या का समाधान ढूंढते ही नई चुनौतियाँ खड़ी हो जाती हैं।”

इस आत्मकथा में उन्होंने बताया:

  • विदिशा में एक पुलिस कांस्टेबल के बेटे के रूप में उनकी विनम्र शुरुआत।
  • बाल शोषण के खिलाफ उनका अडिग संघर्ष।
  • नोबेल शांति पुरस्कार तक की उनकी प्रेरणादायक यात्रा।

उन्होंने आश्वासन दिया कि बच्चों के अधिकारों और वैश्विक न्याय के लिए उनकी लड़ाई जारी रहेगी, जिसमें साहित्य, सामाजिक आंदोलन और करुणा प्रमुख भूमिका निभाएंगे।

IGNCA में कैलाश सत्यार्थी की आत्मकथा 'दियासलाई' पर विशेष चर्चा |_3.1