कौन हैं जस्टिस बीआर गवई, जो होंगे देश के अगले CJI

भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना ने 16 अप्रैल 2025 को सुप्रीम कोर्ट के दूसरे वरिष्ठतम न्यायाधीश न्यायमूर्ति बीआर गवई को अपना उत्तराधिकारी नामित किया। यह नामांकन कानून मंत्रालय को भेजे गए पत्र के माध्यम से किया गया। सरकार की मंजूरी के बाद, न्यायमूर्ति गवई भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदभार ग्रहण करेंगे। वे 13 मई 2025 को न्यायमूर्ति खन्ना के सेवानिवृत्त होने के बाद इस पद को संभालेंगे। न्यायमूर्ति गवई 2019 में सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त हुए थे और उनका कानूनी सफर दशकों तक फैला है। उन्होंने विशेष रूप से संवैधानिक और प्रशासनिक कानून में भारतीय न्यायशास्त्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

न्यायमूर्ति बीआर गवई का करियर विवरण

पृष्ठभूमि और प्रारंभिक करियर

न्यायमूर्ति बी. आर. गवई का जन्म महाराष्ट्र के अमरावती में हुआ था। उन्होंने 1985 में वकालत की शुरुआत की।
शुरुआत में वे बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व महाधिवक्ता और न्यायाधीश राजा एस. भोसले के अधीन कार्यरत रहे (1985–1987)।
उन्होंने मुख्यतः बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ में संवैधानिक और प्रशासनिक कानून पर प्रैक्टिस की।

सरकारी भूमिकाएं

1992-93 में उन्हें नागपुर पीठ के लिए सहायक सरकारी वकील एवं अतिरिक्त लोक अभियोजक नियुक्त किया गया।
2000 में वे सरकारी वकील और लोक अभियोजक के पद पर पदोन्नत हुए।

न्यायिक करियर

  • नवंबर 2003 में बॉम्बे हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त हुए।

  • नवंबर 2005 में स्थायी न्यायाधीश बनाए गए।

  • मई 2019 में उन्हें भारत के सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया।

न्यायमूर्ति गवई के प्रमुख न्यायिक योगदान

1. विमुद्रीकरण पर फैसला (जनवरी 2023)

न्यायमूर्ति गवई उस बहुमत पीठ का हिस्सा थे, जिसने केंद्र सरकार के 2016 में ₹500 और ₹1000 के नोटों को विमुद्रीकृत करने के फैसले को वैध ठहराया।

2. अनुसूचित जाति एवं जनजातियों का उपवर्गीकरण (अगस्त 2024)

इस ऐतिहासिक मामले में उन्होंने “क्रीमी लेयर” की अवधारणा को अनुसूचित जातियों और जनजातियों पर लागू करने की वकालत की, ताकि केवल वास्तविक जरूरतमंदों को आरक्षण का लाभ मिले।

3. अनुच्छेद 370 की समाप्ति (2019)

न्यायमूर्ति गवई उस पाँच-न्यायाधीशों की पीठ में शामिल थे, जिसने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को हटाने के केंद्र सरकार के निर्णय को संवैधानिक ठहराया।

4. बुलडोजर से तोड़फोड़ की आलोचना (नवंबर 2024)

एक द्वि-न्यायाधीशीय पीठ में, न्यायमूर्ति गवई ने अपराध के संदिग्धों की संपत्ति को बिना उचित प्रक्रिया के बुलडोजर से गिराए जाने की आलोचना की और इसे कानून के शासन के विरुद्ध बताया।

[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]
vikash

Recent Posts

UPI ने नया बेंचमार्क बनाया: अब तक के सबसे ज़्यादा ट्रांज़ैक्शन का रिकॉर्ड

भारत की डिजिटल भुगतान क्रांति ने एक और ऐतिहासिक मुकाम हासिल कर लिया है। जनवरी…

1 hour ago

सरकार द्वारा ₹17.2 लाख करोड़ का रिकॉर्ड उधार-इसका क्या मतलब है

केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026–27 (FY27) के लिए अब तक की सबसे अधिक ₹17.2…

1 hour ago

क्या भारत के ₹17.2 लाख करोड़ के उधार में बढ़ोतरी के बाद RBI दखल दे सकता है?

बजट FY27 में वित्तीय अनुशासन का संदेश देने के बावजूद बांड बाजार में दबाव के…

16 hours ago

अरुणाचल में ‘अग्नि परीक्षा’ अभ्यास के लिए सेना और ITBP का संयुक्त अभियान

हाल ही में अरुणाचल प्रदेश में आयोजित अभ्यास अग्नि परीक्षा ने खास ध्यान आकर्षित किया…

16 hours ago

आदमपुर हवाई अड्डे का नाम बदलकर श्री गुरु रविदास महाराज जी हवाई अड्डा रखा गया

पंजाब के विमानन मानचित्र में 02 फरवरी 2026 को एक महत्वपूर्ण और प्रतीकात्मक बदलाव देखने…

16 hours ago

केरल के कंथल्लूर में ऑर्किड की नई प्रजाति खोजी गई

भारत की जैव विविधता को एक बार फिर नई पहचान मिली है, जब वैज्ञानिकों ने…

16 hours ago