राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस 2025 (11 मई) के अवसर पर विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST), भारत सरकार ने सीमेंट क्षेत्र के लिए देश का पहला कार्बन कैप्चर और यूटिलाइजेशन (CCU) टेस्टबेड क्लस्टर लॉन्च किया। यह पहल Public-Private Partnership (PPP) मॉडल पर आधारित है और नेट ज़ीरो 2070 लक्ष्य की दिशा में भारत का एक बड़ा कदम है।
भारत ने 5 CCU परीक्षण केंद्र लॉन्च किए हैं जो विशेष रूप से सीमेंट उद्योग पर केंद्रित हैं — एक ऐसा क्षेत्र जिसे कम कार्बन करना बेहद कठिन माना जाता है। यह पहल देशी नवाचार, उद्योग-अकादमिक साझेदारी और हरित औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देने के लिए की गई है।
सीमेंट उद्योग, CO₂ उत्सर्जन में प्रमुख योगदानकर्ता है।
CCU तकनीक औद्योगिक प्रक्रियाओं से निकलने वाली CO₂ को पकड़कर उपयोगी उत्पादों में बदलने की क्षमता रखती है।
यह पहल भारत के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs) और 2070 तक नेट ज़ीरो लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक होगी।
औद्योगिक क्षेत्रों में CCU तकनीकों का विकास और तैनाती।
अकादमिक और उद्योग के बीच सहयोग को बढ़ावा देना।
सीमेंट उत्पादन में स्केलेबल डिकार्बनाइजेशन समाधान प्रदर्शित करना।
CO₂ कैप्चर और यूटिलाइजेशन में नवाचार को प्रोत्साहन देना।
PPP मॉडल: प्रत्येक टेस्टबेड एकेडेमिक संस्थानों और सीमेंट कंपनियों के बीच साझेदारी से विकसित।
Translational R&D: प्रयोगशाला स्तर से औद्योगिक पैमाने पर तकनीकों का स्थानांतरण।
विविध तकनीकी दृष्टिकोण: जैसे कैटलिसिस, वैक्यूम स्विंग एड्सॉर्प्शन, मिनरलाइजेशन आदि।
| स्थान एवं साझेदार | मुख्य कार्य |
|---|---|
| बल्लभगढ़, हरियाणा (JK Cement + NCCBM) | ऑक्सीजन-संवर्धित कैल्सिनेशन द्वारा प्रति दिन 2 टन CO₂ कैप्चर; इसका उपयोग कंक्रीट ब्लॉक्स व ओलेफिन्स बनाने में। |
| IIT कानपुर + JSW Cement | CO₂ को ठोस खनिजों में स्थायी रूप से बंद करना (कार्बन-नकारात्मक प्रक्रिया)। |
| IIT बॉम्बे + डालमिया सीमेंट | कैटलिस्ट आधारित CO₂ कैप्चर को सक्रिय सीमेंट संयंत्र में लागू करना। |
| CSIR-IIP, IIT तिरुपति, IISc + JSW Cement | वैक्यूम स्विंग एड्सॉर्प्शन से CO₂ को अलग करना और पुनः उपयोग में लाना। |
| IIT मद्रास और BITS पिलानी गोवा + Ultratech Cement | व्यापक औद्योगिक उपयोग के लिए प्रयोगात्मक कार्बन-कम समाधान। |
औद्योगिक क्षेत्र के लिए स्केलेबल डिकार्बनाइजेशन मॉडल प्रस्तुत करता है।
सीमेंट उद्योग की कार्बन फुटप्रिंट को कम करता है।
भविष्य में वाणिज्यिक विस्तार और तैनाती की संभावना बढ़ाता है।
हरित सीमेंट, सतत निर्माण सामग्री, और CO₂ के उन्नत उपयोग पर अनुसंधान को मजबूती देता है।
| सारांश/स्थैतिक तथ्य | विवरण |
| क्यों है खबरों में? | भारत ने सीमेंट क्षेत्र में डिकार्बनाइजेशन के लिए पहला CCU टेस्टबेड क्लस्टर लॉन्च किया |
| पहल | सीमेंट क्षेत्र में 5 CCU टेस्टबेड का शुभारंभ |
| आयोजक | विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST), भारत सरकार |
| मॉडल | पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) |
| उद्देश्य | औद्योगिक डिकार्बनाइजेशन और नेट ज़ीरो लक्ष्य की प्राप्ति |
| केन्द्रित क्षेत्र | सीमेंट (उच्च उत्सर्जन वाला क्षेत्र) |
| शुभारंभ तिथि | 11 मई, 2025 (राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस) |
| महत्त्व | जलवायु कार्रवाई एवं NDC कार्यान्वयन में अग्रणी कदम |
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