जापान की साने ताकाइची को 18 फरवरी 2026 को औपचारिक रूप से दोबारा प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया। 8 फरवरी को हुए आकस्मिक निचले सदन (लोअर हाउस) चुनावों में उनकी भारी जीत के बाद यह फैसला हुआ। 64 वर्षीय ताकाइची अक्टूबर 2025 में जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी थीं। उनकी पार्टी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) ने दो-तिहाई बहुमत हासिल किया।
उनकी पुनर्नियुक्ति रक्षा, राजकोषीय प्रबंधन और राष्ट्रीय सुरक्षा सुधारों जैसे बड़े नीतिगत बदलावों के लिए जनसमर्थन को दर्शाती है।
ऐतिहासिक चुनावी जीत और राजनीतिक जनादेश
- 8 फरवरी को हुए चुनावों में ताकाइची ने दो-तिहाई बहुमत के साथ निर्णायक जीत दर्ज की। यह मजबूत जनादेश सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी को संवैधानिक और सुरक्षा सुधारों को आगे बढ़ाने की शक्ति देता है।
- प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि चुनाव परिणाम “जिम्मेदार और सक्रिय राजकोषीय नीति” तथा मजबूत राष्ट्रीय सुरक्षा उपायों की सार्वजनिक मांग को दर्शाते हैं।
मजबूत रक्षा नीति और ताइवान पर टिप्पणी
- ताकाइची ने जापान की क्षेत्रीय सीमाओं और समुद्री हितों की रक्षा के लिए रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने का वादा किया है।
- उन्होंने पहले यह संकेत दिया था कि यदि चीन बलपूर्वक ताइवान पर कब्ज़ा करने की कोशिश करता है, तो जापान सैन्य हस्तक्षेप कर सकता है। इस बयान पर चीन ने आलोचना करते हुए जापानी सेना पर “सैन्यवाद को पुनर्जीवित करने” का आरोप लगाया।
- जापान की बदली हुई सुरक्षा नीति पूर्वी एशिया और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की क्षेत्रीय गतिशीलता को प्रभावित कर सकती है।
फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक (FOIP) रणनीति का अद्यतन
ताकाइची जापान की फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक (FOIP) रणनीति में संशोधन कर सकती हैं। इस रणनीति का उद्देश्य है—
- आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती
- मुक्त व्यापार साझेदारियाँ
- क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा
जापान ट्रांस-पैसिफिक पार्टनरशिप के लिए व्यापक और प्रगतिशील समझौता (CPTPP) का प्रमुख सदस्य है, जिसमें यूके, कनाडा और मेक्सिको जैसे देश शामिल हैं। रणनीति में बदलाव बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक सुरक्षा चिंताओं को दर्शाता है।
राष्ट्रीय खुफिया एजेंसी और जासूसी विरोधी कानून का प्रस्ताव
ताकाइची ने एक राष्ट्रीय खुफिया एजेंसी स्थापित करने के लिए विधेयक लाने की योजना की घोषणा की, जिससे खुफिया समन्वय और सुरक्षा क्षमताएँ मजबूत होंगी।
उन्होंने जासूसी-रोधी कानून (Anti-Espionage Law) पर भी चर्चा का संकेत दिया। इन कदमों का उद्देश्य वैश्विक साइबर खतरों और क्षेत्रीय तनाव के बीच जापान की आंतरिक सुरक्षा को सुदृढ़ करना है।
आर्थिक चुनौतियाँ और राजकोषीय बहस
जापान कई वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रहा है, जिनमें शामिल हैं—
- बढ़ता सरकारी कर्ज
- महंगाई का दबाव
- वृद्ध होती जनसंख्या
- श्रम की कमी
ताकाइची ने महंगाई से राहत देने के लिए खाद्य पदार्थों पर उपभोग कर (Consumption Tax) को दो वर्षों के लिए निलंबित करने का वादा किया है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इससे राजस्व आधार कमजोर हो सकता है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुसार, 2025 से 2031 के बीच जापान के कर्ज पर ब्याज भुगतान दोगुना होने का अनुमान है।


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