जम्मू-कश्मीर ने घरेलू क्रिकेट में नया इतिहास रच दिया है। रणजी ट्रॉफी के फाइनल में जम्मू-कश्मीर की टीम ने दमदार प्रदर्शन करते हुए मजबूत मानी जा रही कर्नाटक की टीम को हराकर पहली बार खिताब अपने नाम कर लिया। जम्मू-कश्मीर ने 1959-60 में रणजी ट्रॉफी में पहली बार हिस्सा लिया था। तब से 67 साल बीत चुके हैं, और टीम को अब तक कोई खिताब नहीं मिला था। उनकी पहली जीत 1982-83 में सेना के खिलाफ आई थी, लेकिन अब वह चैंपियन बन गई है।
हुब्बल्ली के KSCA Cricket Stadium में खेले गए मुकाबले में जम्मू-कश्मीर ने आठ बार की चैंपियन कर्नाटक क्रिकेट टीम को 291 रनों की विशाल पहली पारी बढ़त के आधार पर पराजित किया। कप्तान पारस डोगरा के नेतृत्व में टीम ने शानदार प्रदर्शन किया, जबकि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला स्टैंड्स से मुकाबला देख रहे थे। इस जीत के साथ जम्मू-कश्मीर 92 वर्षों के इतिहास में अपनी पहली फाइनल उपस्थिति में रणजी ट्रॉफी जीतने वाली केवल 10वीं टीम बन गई।
यह जीत टीम के क्रिकेट इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई।
टीम ने संतुलित बल्लेबाजी और अनुशासित गेंदबाजी का प्रदर्शन किया, जिसने उनकी ऐतिहासिक जीत सुनिश्चित की।
जम्मू-कश्मीर रणजी ट्रॉफी के इतिहास में अपनी पहली फाइनल में खिताब जीतने वाली 10वीं टीम बनी।
यह दुर्लभ उपलब्धि जम्मू-कश्मीर को घरेलू क्रिकेट की विशिष्ट टीमों की श्रेणी में शामिल करती है।
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