संयुक्त राष्ट्र ने पहली बार पेरिस समझौते के कार्बन बाज़ार तंत्र के तहत आधिकारिक रूप से कार्बन क्रेडिट को मंज़ूरी दे दी है। ये क्रेडिट म्यांमार में एक स्वच्छ खाना पकाने (क्लीन कुकिंग) परियोजना से जुड़े हैं, जिसका उद्देश्य ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करना और वनों की रक्षा करना है।
यह कदम वैश्विक जलवायु शासन में एक ऐतिहासिक क्षण माना जा रहा है। इससे दक्षिण कोरिया और म्यांमार जैसे देश सत्यापित उत्सर्जन कटौती का आपसी व्यापार कर सकेंगे। हालांकि, विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि निगरानी और पारदर्शिता सख्त नहीं रही तो “ग्रीनवॉशिंग” का जोखिम भी हो सकता है।
जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र का फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) ने पेरिस समझौते के तहत पेरिस समझौता ऋण तंत्र (PACM) के अंतर्गत पहले कार्बन क्रेडिट को स्वीकृति दी है।
यह नया तंत्र देशों और कंपनियों को विदेशों में उत्सर्जन घटाने वाली परियोजनाओं में निवेश करके अपने अतिरिक्त उत्सर्जन की भरपाई (offset) करने की अनुमति देता है।
यह पेरिस समझौते के तहत वैश्विक कार्बन व्यापार प्रणाली की औपचारिक शुरुआत है।
इस परियोजना के तहत ईंधन-कुशल चूल्हों का वितरण किया जा रहा है, जो लकड़ी आधारित बायोमास को अधिक दक्षता से जलाते हैं।
इसके लाभ:
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया भर में 2 अरब से अधिक लोग अभी भी असुरक्षित खाना पकाने के तरीकों पर निर्भर हैं।
यह परियोजना न केवल जलवायु परिवर्तन को कम करने में मदद करती है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सुधार और महिलाओं के सशक्तिकरण में भी योगदान देती है, क्योंकि घरेलू वायु प्रदूषण से महिलाएं सबसे अधिक प्रभावित होती हैं।
Paris Agreement (2015) का उद्देश्य वैश्विक तापमान वृद्धि को 2°C से नीचे और आदर्श रूप से 1.5°C तक सीमित रखना है।
इसके अनुच्छेद 6 (Article 6) के तहत देशों को सीमा-पार कार्बन व्यापार की अनुमति दी गई है।
नए तंत्र की विशेषताएँ:
उत्सर्जन कटौती की गणना पिछले सिस्टम की तुलना में 40% अधिक सख्त मानकों पर
यह वैश्विक कार्बन बाज़ार विकासशील देशों के लिए अरबों डॉलर की जलवायु वित्त जुटाने में मदद कर सकता है।
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