हर साल 12 दिसंबर को दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय तटस्थता दिवस मनाया जाता है। यह दिन संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) द्वारा घोषित किया गया है और देशों के बीच तटस्थता, यानी बिना पक्ष लिए शांति बनाए रखने के सिद्धांत को महत्व देता है।
सरकारी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए यह दिन महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह वैश्विक शांति, संयुक्त राष्ट्र की पहल और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति से सीधे जुड़ा है।
तटस्थता (Neutrality) का अर्थ है कि कोई देश:
युद्ध या संघर्ष में किसी भी पक्ष का समर्थन न करे,
सभी पक्षों के प्रति निष्पक्ष और समान दूरी बनाए रखे,
तटस्थ देश के रूप में अन्य देशों द्वारा मान्यता प्राप्त हो।
तटस्थता से देशों के बीच विश्वास बढ़ता है और ऐसे राष्ट्र शांति वार्ता, मध्यस्थता और मानवीय सहायता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
UN Charter के Article 2 के अनुसार देशों को:
विवादों का शांतिपूर्ण समाधान करना चाहिए,
बल प्रयोग या धमकी से बचना चाहिए।
UNGA ने 21/275 प्रस्ताव अपनाकर माना कि तटस्थता अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
तटस्थता से:
राजनीतिक तनाव कम होते हैं
संवाद के लिए सुरक्षित स्थान मिलता है
शांतिपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संबंध मजबूत होते हैं
बिना हिंसा से विवाद सुलझाने में सहायता मिलती है
यह दिन 2 फरवरी 2017 को UNGA द्वारा सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करने के बाद घोषित किया गया।
प्रस्ताव को तुर्कमेनिस्तान ने प्रस्तुत किया था, जिसे 12 दिसंबर 1995 को स्थायी तटस्थ राष्ट्र का दर्जा मिला था।
संयुक्त राष्ट्र ने इस दिन को सतत विकास लक्ष्य (SDGs 2030) से भी जोड़ा है, क्योंकि शांतिपूर्ण समाज विकास का आधार होते हैं।
इसी कारण 12 दिसंबर को आधिकारिक रूप से अंतर्राष्ट्रीय तटस्थता दिवस मनाया जाने लगा।
वर्तमान समय में बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के बीच तटस्थता निम्न सिद्धांतों को मजबूत बनाती है:
राज्यों की संप्रभुता (Sovereignty)
समानता का सिद्धांत
सीमाओं की अखंडता
गैर-हस्तक्षेप (Non-intervention)
आत्मनिर्णय का अधिकार
तटस्थ देश अक्सर:
संघर्ष रोकथाम (Preventive Diplomacy)
मध्यस्थता (Mediation)
शांति स्थापना और शांति निर्माण (UN Peacekeeping & Peacebuilding)
मानवीय सहायता
में बड़ी भूमिका निभाते हैं।
UN का मुख्य लक्ष्य है संघर्ष शुरू होने से पहले रोकना। इसके अंतर्गत:
शुरुआती चेतावनी
मध्यस्थता
वार्ता और परामर्श
शांति निर्माण
शामिल हैं।
संयुक्त राष्ट्र संघर्षरत पक्षों को बातचीत करने और समझौते तक पहुंचने में मदद करता है।
सफल मध्यस्थता के लिए जरूरी है:
अनुभवी विशेष दूत
मजबूत लॉजिस्टिक समर्थन
विशेषज्ञ सलाहकार टीमें
UN राजनीतिक समाधान को बढ़ावा देता है।
शीत युद्ध के बाद कई अंतरराष्ट्रीय संघर्ष UN-नेतृत्व वाले समझौतों से समाप्त हुए।
आज भी क्षेत्रीय संगठनों के सहयोग से संकटों को जल्दी सुलझाने पर काम किया जाता है।
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