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दिल्ली-मुंबई मार्ग के मथुरा-कोटा खंड पर कवच 4.0 का संचालन शुरू

रेलवे सुरक्षा के आधुनिकीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, भारतीय रेलवे ने उच्च-घनत्व वाले दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर के मथुरा-कोटा खंड पर उन्नत कवच 4.0, एक स्वदेशी रेलवे सुरक्षा प्रणाली, को चालू कर दिया है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 30 जुलाई, 2025 को इसकी घोषणा की, जो भारत में सुरक्षित और स्मार्ट रेल यात्रा की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

कवच 4.0: विश्वस्तरीय रेल सुरक्षा में भारत की क्रांतिकारी पहल

कवच 4.0, सुरक्षा की सर्वोच्च श्रेणी (Safety Integrity Level 4 – SIL 4) पर डिज़ाइन किया गया है और यह भारत की अत्याधुनिक प्रणाली है जो रेल हादसों को रोकने के लिए तैयार की गई है।
यह प्रणाली अपने आप ट्रेन की गति की निगरानी और नियंत्रण करती है तथा कोहरे जैसे कम दृश्यता वाले हालात में भी प्रभावी रूप से ब्रेक लगाती है।
अब ट्रेन चालकों को केबिन के अंदर लगे डैशबोर्ड पर सिग्नल और गति से जुड़ी सभी जानकारियाँ दिखाई देती हैं, जिससे उन्हें बाहर देखकर संकेत खोजने की आवश्यकता नहीं रहती।

देशभर में लागू होने की तैयारी और प्रशिक्षण

रेल मंत्री ने घोषणा की है कि कवच 4.0 को अगले छह वर्षों में पूरे देश में लागू किया जाएगा। इस बड़े विस्तार के लिए —

  • 30,000 से अधिक कर्मियों को कवच प्रणाली पर पहले ही प्रशिक्षित किया जा चुका है।

  • IRISET (भारतीय रेलवे सिग्नल इंजीनियरिंग और दूरसंचार संस्थान) ने AICTE से मान्यता प्राप्त 17 इंजीनियरिंग कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के साथ एमओयू किए हैं, ताकि बी.टेक पाठ्यक्रम में कवच तकनीक को शामिल किया जा सके और एक दक्ष कार्यबल तैयार किया जा सके।

कवच 4.0 की तकनीकी विशेषताएँ

कवच प्रणाली को उसकी जटिलता के कारण एक स्वतंत्र टेलीकॉम कंपनी की स्थापना के बराबर माना जाता है। इसमें शामिल हैं:

  • हर 1 किलोमीटर और प्रत्येक सिग्नल पर लगाए गए RFID टैग, जो ट्रेनों की सटीक लोकेशन ट्रैक करने में मदद करते हैं।

  • ऑप्टिकल फाइबर कनेक्टिविटी और विद्युत आपूर्ति से युक्त टेलीकॉम टावर, जो हर कुछ किलोमीटर पर स्थापित किए गए हैं।

  • लोकोमोटिव कवच, RFID टैग, और स्टेशन कवच कंट्रोलर के बीच सतत संचार सुनिश्चित करने वाली प्रणाली।

  • ब्रेकिंग सिस्टम का कवच से एकीकरण, जिससे आपात स्थिति में स्वत: ब्रेक लग जाते हैं।

कड़े परीक्षण और गति स्वीकृति

कवच प्रणाली का तीन वर्षों तक दक्षिण मध्य रेलवे में कठोर परीक्षण किया गया। अनुभवों के आधार पर मई 2025 में कवच 4.0 को 160 किमी प्रति घंटे की गति तक संचालन की अनुमति मिली, जो इसे रेल सुरक्षा तकनीक में एक बड़ा परिवर्तनकारी कदम बनाता है।

यात्री सुरक्षा को नया आयाम

भारतीय रेलवे हर वर्ष सुरक्षा संबंधी गतिविधियों पर ₹1 लाख करोड़ से अधिक निवेश करता है। कवच 4.0 इन पहलों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो यह सुनिश्चित करता है कि भारत का तीव्र गति से बढ़ता रेलवे नेटवर्क विश्व के सबसे सुरक्षित नेटवर्कों में शामिल रहे।

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