भारत में बाघों की आबादी छह दशमलव एक प्रतिशत (6.1%) की वार्षिक वृद्धि दर के साथ 3 हजार 925 होने का अनुमान है। विश्व बाघ दिवस के अवसर पर पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री अश्विनी कुमार ने एक रिपोर्ट जारी की। पिछले साल मैसूर में प्रोजेक्ट टाइगर के 50 साल पूरे होने के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाघों की न्यूनतम आबादी 3 हजार 167 घोषित की थी। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने कहा है कि भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा एकत्रित आंकडों के अनुसार बाघों की आबादी प्रति वर्ष छह दशमलव एक प्रतिशत की दर से बढी है।
केंद्रीय वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने उत्तराखंड के रामनगर में 2022 के आंकड़े जारी करते हुए कहा कि इसके साथ ही भारत में बाघ की आबादी वैश्विक आंकड़ों का 75 प्रतिशत हो गया है। बाघ पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण अंग है। जिस उद्देश्य से टाइगर रिजर्व का गठन हुआ है हम उसमें आगे बढ़े हैं। बाघ संरक्षण के 50 वर्ष उपलब्धियों से भरे रहे हैं। भारत विश्व में सबसे अधिक बाघों वाला देश है। देश में 785 बाघों के साथ मध्य प्रदेश अव्वल है और उसका टाइगर स्टेट का दर्जा कायम है।
इस वृद्धि के पीछे विशेषज्ञों का कहना है कि यह देश के 20 साल पुराने विज्ञान आधारित बाघ संरक्षण कार्यक्रम की सफलता को दर्शाती है। लगभग 80% बाघ (2,885) अब 18 राज्यों में से आठ में रहते हैं, जिनमें मध्य प्रदेश, कर्नाटक, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और असम शामिल हैं। मध्य प्रदेश में बाघों की सबसे अधिक संख्या 785 है, इसके बाद नंबर आता है कर्नाटक का, जहां 563 बाघ हैं और महाराष्ट्र में 444 हैं।
रिपोर्ट के अनुसार भी टाइगर रिजर्व में सबसे ज्यादा 260 बाघ उत्तराखंड के कार्बेट रिजर्व में हैं। इसके बाद बांदीपुर में 150, नागरहोल में 141, बांधवगढ़ में 135, दुधवा में 135, मधुमलई में 114, कान्हा में 105, काजीरंगा में 104, सुंदरबनों में 100, ताडोबा में 97, सत्यमंगलम में 85 और पेंच में 77 बाघ मिले हैं। कुछ रिजर्व में हालात चुनौतीपूर्ण हैं, करीब 35 प्रतिशत को तत्काल सुधारों और संरक्षण के प्रयासों की जरूरत है।
राष्ट्रीय बाघ संस्करण प्राधिकरण (एनटीसीए) की ओर से हर चार साल में टाइगर रिजर्व व आसपास के क्षेत्र में बाघों की गणना कराई जाती है। 2018 के बाद 2022 में कराई गई गणना का समग्र परिणाम इस साल नौ अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मैसुरु में घोषित किया था। इसमें देश भर में न्यूनतम 3167 बाघ होने की घोषणा की गई थी। तब राज्यवार व टाइगर रिजर्व के हिसाब से सूची जारी नहीं हुई थी।
भारत में बाघ परियोजना के 50 साल पूरे हो गए। इस उपलक्ष्य में शनिवार को कार्बेट टाइगर रिजर्व में कार्यक्रम आयोजित किया गया। भारत सरकार ने 1973 में बाघ परियोजना शुरू की थी। इसका प्राथमिक उद्देश्य देश में बाघों की सुरक्षा और जैव विविधता का संरक्षण करना था।
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