फरवरी 2026 में भारत की कोर सेक्टर वृद्धि 2.3%: क्या संकेत देते हैं आंकड़े?

फरवरी 2026 में भारत के आठ प्रमुख उद्योगों के सूचकांक (Index of Eight Core Industries – ICI) में 2.3% की वृद्धि दर्ज की गई, जो पिछले वर्ष के समान स्तर पर रही। इस वृद्धि का मुख्य कारण स्टील, सीमेंट, उर्वरक, कोयला और बिजली क्षेत्रों का मजबूत प्रदर्शन रहा। वहीं दूसरी ओर कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और रिफाइनरी उत्पादों में गिरावट के कारण कुल वृद्धि दर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा और समग्र विस्तार सीमित रहा।

फरवरी 2026 में ICI की वृद्धि प्रदर्शन

फरवरी 2026 में 2.3% की वृद्धि, जनवरी 2026 के 4.7% की तुलना में मध्यम विस्तार को दर्शाती है। यह रुझान औद्योगिक गति में कुछ मंदी का संकेत देता है, जिसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। हालांकि, अप्रैल से फरवरी 2025-26 के दौरान कुल वृद्धि 2.9% रही, जो स्थिर लेकिन नियंत्रित विस्तार को दर्शाती है। ये आंकड़े बताते हैं कि कुछ सेक्टर अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि अन्य अभी भी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

सेक्टर-वार प्रदर्शन: स्टील और सीमेंट से वृद्धि

फरवरी 2026 में बुनियादी ढांचा (Infrastructure) से जुड़े क्षेत्रों में सबसे मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। स्टील उत्पादन में 7.2% की वृद्धि हुई, जबकि सीमेंट उत्पादन में 9.3% की तेज बढ़त देखी गई, जो इन क्षेत्रों में मजबूत मांग का संकेत देती है। इसके अलावा उर्वरक क्षेत्र में 3.4%, कोयला में 2.3% और बिजली में 0.5% की वृद्धि हुई, जिससे समग्र सूचकांक पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा और कुल वृद्धि को सहारा मिला।

घटते सेक्टर: तेल और गैस का प्रभाव

दूसरी ओर, कुछ क्षेत्रों में गिरावट ने समग्र वृद्धि दर को प्रभावित किया। कच्चे तेल के उत्पादन में 5.2% की कमी आई, प्राकृतिक गैस में 5.0% की गिरावट दर्ज की गई और पेट्रोलियम रिफाइनरी उत्पादों में 1.0% की कमी देखी गई। ये गिरावट ऊर्जा क्षेत्र की संरचनात्मक चुनौतियों, वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों और मांग में उतार-चढ़ाव को दर्शाती हैं, जिसके कारण कुल औद्योगिक वृद्धि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा।

मुख्य उद्योगों का सूचकांक (ICI) क्या है?

मुख्य उद्योगों का सूचकांक (ICI) एक महत्वपूर्ण सूचकांक है, जो भारत की औद्योगिक अर्थव्यवस्था के आठ प्रमुख क्षेत्रों के प्रदर्शन को मापता है। इन क्षेत्रों में कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, स्टील, सीमेंट और बिजली शामिल हैं, जो देश की औद्योगिक संरचना की रीढ़ माने जाते हैं। इनका औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में लगभग 40.27% योगदान होता है, इसलिए इनका प्रदर्शन सीधे तौर पर देश की समग्र औद्योगिक वृद्धि और अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है। ICI को आर्थिक गतिविधियों का एक प्रारंभिक संकेतक माना जाता है, जो नीति-निर्माताओं और विश्लेषकों को आर्थिक रुझानों को समझने और आवश्यक कदम उठाने में मदद करता है।

[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]
vikash

Recent Posts

पायलट फेज के बाद SEBI ने लॉन्च किया PaRRVA सिस्टम

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने 'पास्ट रिस्क एंड रिटर्न वेरिफिकेशन एजेंसी' (PaRRVA) को…

14 hours ago

कैबिनेट का अहम निर्णय: महाराष्ट्र में AI नीति 2026 लागू

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र राज्य कैबिनेट ने महत्वाकांक्षी 'महाराष्ट्र आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नीति…

14 hours ago

सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: हर आरोपी को त्वरित सुनवाई का अधिकार

सुप्रीम कोर्ट ने 29 अप्रैल 2026 को एक केस की सुनवाई के दौरान मौलिक अधिकारों…

15 hours ago

अब नहीं खोएंगे PF के पैसे, EPFO का नया प्लेटफॉर्म करेगा मदद

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) 'E-PRAAPTI' नाम से एक नया डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च करने जा…

15 hours ago

आपदा पीड़ितों को राहत: RBI ने लागू किए नए लोन पुनर्गठन नियम

भारतीय रिज़र्व बैंक ने आपदा-प्रभावित क्षेत्रों के लिए लोन रीस्ट्रक्चरिंग के लिए संशोधित दिशानिर्देश पेश…

16 hours ago

समुद्री साझेदारी मजबूत: भारत और श्रीलंका ने किया DIVEX 2026 अभ्यास

भारत और श्रीलंका ने 21 से 28 अप्रैल तक कोलंबो में द्विपक्षीय डाइविंग अभ्यास 'IN–SLN…

17 hours ago