एक ऐतिहासिक खगोलीय उपलब्धि में भारतीय वैज्ञानिक राशी जैन और योगेश वडादेकर ने जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप (JWST) के डेटा की मदद से ‘अलकनंदा’ नाम की एक सर्पिल (Spiral) आकाशगंगा की खोज की है। यह आकाशगंगा उस समय अस्तित्व में थी जब ब्रह्मांड की आयु केवल 1.5 अरब वर्ष थी। यह खोज हमारी प्रारंभिक आकाशगंगाओं के निर्माण से जुड़ी धारणाओं को बदल सकती है।
यह आकाशगंगा Abell 2744 क्लस्टर में पाई गई है। आश्चर्यजनक रूप से यह एक सर्पिल आकाशगंगा है — यानी बिल्कुल हमारी मिल्की वे जैसी — और इतनी प्रारंभिक अवस्था में इतनी व्यवस्थित संरचना पहले कभी नहीं देखी गई।
जिस समय यह अस्तित्व में थी: ब्रह्मांड की आयु केवल 1.5 अरब वर्ष
आकाशगंगा का प्रकार: सर्पिल (Spiral Galaxy)
पृथ्वी से दूरी: लगभग 30,000 प्रकाश-वर्ष
संरचना: दो सुस्पष्ट सर्पिल बाँहें
तारों के बनने की दर: लगभग 63 सौर द्रव्यमान प्रति वर्ष
यह मिल्की वे की वर्तमान दर से 20–30 गुना अधिक है
इतनी तेज़ गति और सुव्यवस्थित संरचना ने वैज्ञानिकों की उस धारणा को चुनौती दी है कि शुरुआती आकाशगंगाएँ छोटी, अव्यवस्थित और अस्थिर हुआ करती थीं।
राशी जैन और योगेश वडादेकर ने इस आकाशगंगा का नाम अलकनंदा नदी के नाम पर रखा, जो गंगा की प्रमुख धारा है। यह नाम प्रतीकात्मक है क्योंकि इसकी बहन नदी मंदाकिनी परंपरागत रूप से हमारी मिल्की वे (आकाशगंगा) से जोड़ी जाती है। इस प्रकार नई खोज और हमारी आकाशगंगा को एक सुंदर सांस्कृतिक संबंध मिलता है।
राशी जैन ने प्रारंभिक ब्रह्मांड की आकाशगंगाओं पर शोध करते हुए JWST के डेटा का अध्ययन किया। Abell 2744 क्षेत्र में लिए गए उच्च गुणवत्ता वाले चित्रों में उन्हें यह संरचना दिखाई दी।
JWST के डेटा ने वैज्ञानिकों को सक्षम बनाया—
युवा आकाशगंगा में स्पष्ट सर्पिल पैटर्न देखने में
तारा निर्माण की गति और द्रव्यमान का अनुमान लगाने में
यह समझने में कि प्रारंभिक ब्रह्मांड में भी सुव्यवस्थित आकाशगंगाएँ विकसित हो सकती थीं
अलकनंदा आकाशगंगा की खोज ने हमारी समझ को बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम रखा है।
यह सिद्ध करता है कि प्रारंभिक आकाशगंगाएँ अव्यवस्थित नहीं, बल्कि संगठित भी हो सकती थीं
तेज़ी से तारे बनने का अर्थ है कि शुरुआती ब्रह्मांड में विकास की गति अपेक्षा से कहीं अधिक थी
इससे यह भी संकेत मिलते हैं कि ग्रहों और संभावित जीवन योग्य वातावरण का निर्माण पहले ही शुरू हो गया होगा
यह खोज आकाशगंगा निर्माण के सिद्धांतों को पुनः परिभाषित कर सकती है
भारत के लिए यह गौरव का क्षण है क्योंकि यह योगदान वैश्विक खगोल शास्त्र में भारतीय वैज्ञानिकों की भूमिका को मज़बूत करता है।
खोज: शुरुआती ब्रह्मांड की एक परिपक्व सर्पिल आकाशगंगा — अलकनंदा
किसने खोजी: राशी जैन और योगेश वडादेकर (भारतीय वैज्ञानिक)
उपकरण: जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप (JWST)
मुख्य गुण: सुव्यवस्थित सर्पिल संरचना, तेज़ तारा निर्माण, लगभग 30,000 प्रकाश-वर्ष दूर
वैज्ञानिक महत्त्व: प्रारंभिक आकाशगंगा निर्माण से जुड़ी पुरानी मान्यताओं को चुनौती
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