भारत राष्ट्रमंडल देशों में संसदीय लोकतंत्र को सशक्त करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने जा रहा है। भारत नई दिल्ली में राष्ट्रमंडल के स्पीकर्स और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन (CSPOC) की मेजबानी करेगा। यह प्रतिष्ठित तीन दिवसीय सम्मेलन 15 जनवरी 2026 से 16 जनवरी 2026 तक आयोजित होगा, जिसमें 60 से अधिक राष्ट्रमंडल देशों और अर्ध-स्वायत्त विधायिकाओं के स्पीकर और पीठासीन अधिकारी भाग लेंगे। यह आयोजन भारत की लोकतांत्रिक यात्रा में एक ऐतिहासिक क्षण है और संसदीय परंपराओं, लोकतांत्रिक मूल्यों तथा संस्थागत शासन में भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को दर्शाता है।
CSPOC सम्मेलन के बारे में
- राष्ट्रमंडल के स्पीकर्स और पीठासीन अधिकारियों का सम्मेलन (CSPOC) एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संसदीय मंच है, जिसका उद्देश्य ज्ञान-साझाकरण, पारस्परिक सीख और राष्ट्रमंडल की विधायिकाओं के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है।
- CSPOC का मुख्य लक्ष्य संसदीय संस्थानों को सुदृढ़ करना और विभिन्न रूपों में संसदीय लोकतंत्र की समझ को गहरा करना है।
- 28वें संस्करण के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला सम्मेलन के अध्यक्ष (Chairperson) होंगे, जो राष्ट्रमंडल संसदीय ढांचे में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका को रेखांकित करता है।
प्रधानमंत्री द्वारा उद्घाटन
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 जनवरी 2026 को ऐतिहासिक संविधान सदन (पूर्व संसद भवन) के केंद्रीय कक्ष में सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन करेंगे।
- इस स्थल पर उद्घाटन भारत की संवैधानिक विरासत और लोकतांत्रिक परंपराओं को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाता है।
- इसके अलावा, प्रधानमंत्री स्पीकर्स और पीठासीन अधिकारियों से अनौपचारिक बातचीत भी करेंगे, जिससे राष्ट्रमंडल देशों के बीच संसदीय कूटनीति और सद्भाव को बल मिलेगा।
प्रमुख सत्र और विषय
- सम्मेलन के दौरान कई उच्चस्तरीय सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें संसदीय कार्यप्रणाली से जुड़े समकालीन मुद्दों और नवाचारों पर चर्चा होगी।
- एक प्रमुख विषय संसद में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग होगा, जिसमें विधायी दक्षता, पारदर्शिता और शोध समर्थन को बेहतर बनाने में AI की भूमिका पर विचार किया जाएगा।
- अन्य महत्वपूर्ण विषयों में संसद सदस्यों पर सोशल मीडिया का प्रभाव, सर्वोत्तम प्रथाओं और नवाचारी विचारों का साझा करना, संसद के प्रति जन-समझ को बढ़ाना, तथा सांसदों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण सुनिश्चित करना शामिल हैं।
- ये विषय डिजिटल युग में बदलती लोकतांत्रिक आवश्यकताओं को दर्शाते हैं।
स्थायी समिति की बैठक
- सम्मेलन के पहले दिन CSPOC की स्थायी समिति (Standing Committee) की बैठक आयोजित की जाएगी।
- 28वें CSPOC के अध्यक्ष के रूप में ओम बिरला इस बैठक की अध्यक्षता करेंगे।
- स्थायी समिति CSPOC की कार्यसूची, निरंतरता और संस्थागत स्मृति को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है।
भारत और राष्ट्रमंडल के लिए महत्व
- 28वें CSPOC की मेजबानी भारत के लिए कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण है।
- यह भारत की छवि को दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और संसदीय मूल्यों, समावेशन तथा संवाद के मजबूत समर्थक के रूप में सुदृढ़ करता है।
- साथ ही, यह राष्ट्रमंडल के साथ भारत की सहभागिता को और मजबूत करता है, जो विविध राजनीतिक प्रणालियों का ऐसा समूह है, जिसे लोकतांत्रिक सिद्धांत एकजुट करते हैं।
- राष्ट्रमंडल के लिए यह सम्मेलन साझा शासन चुनौतियों पर चर्चा, तकनीकी परिवर्तनों के अनुकूलन और लोकतांत्रिक लचीलेपन को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है।
CSPOC अध्यक्ष पद का हस्तांतरण
- सम्मेलन के समापन के बाद, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला औपचारिक रूप से CSPOC का अध्यक्ष पद ब्रिटेन के हाउस ऑफ कॉमन्स के स्पीकर लिंडसे होयल को सौंपेंगे।
- यह हस्तांतरण CSPOC ढांचे की घूर्णनशील और सहयोगात्मक प्रकृति का प्रतीक है।


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