एथलेटिक्स इंटीग्रिटी यूनिट के अनुसार, कुछ चिंताजनक संकेत सामने आ रहे हैं, जिनके मुताबिक भारत उन एथलीटों की वैश्विक सूची में शीर्ष पर पहुँच गया है जिन्हें डोपिंग नियमों के उल्लंघन के कारण निलंबित किया गया है। 148 ट्रैक एंड फील्ड एथलीटों को अयोग्य घोषित किए जाने के साथ ही, भारत ने केन्या और रूस को पीछे छोड़ दिया है। यह भारत में एथलेटिक्स की शुचिता और विश्वसनीयता को लेकर गंभीर चिंताएँ पैदा कर रहा है।
एथलेटिक्स इंटीग्रिटी यूनिट (AIU) क्या है?
एथलेटिक्स इंटीग्रिटी यूनिट एक स्वतंत्र संस्था है, जिसकी स्थापना ‘वर्ल्ड एथलेटिक्स’ द्वारा की गई थी। यह संस्था डोपिंग पर नज़र रखती है और साथ ही, विश्व स्तर पर एथलेटिक्स में निष्पक्ष खेल (फेयर प्ले) सुनिश्चित करती है।
AIU की ज़िम्मेदारियों में डोपिंग के उल्लंघनों की जाँच करना, और इसके साथ-साथ प्रतिबंधों व निलंबनों को लागू करना शामिल है। वे अंतर्राष्ट्रीय स्तर के एथलीटों और उनके सहायक कर्मचारियों (सपोर्ट स्टाफ) पर भी नज़र रखते हैं।
वैश्विक खेलों में पारदर्शिता और अनुशासन बनाए रखने में AIU ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
भारत बनाम अन्य देश: मुख्य डेटा की झलकियाँ
AIU की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार,
भारत: AIU द्वारा 148 एथलीट निलंबित किए गए हैं, जो दुनिया में सबसे ज़्यादा है।
केन्या: दूसरे स्थान पर
रूस: तीसरे स्थान पर, जहाँ 66 एथलीट निलंबित किए गए।
इस सूची में शामिल प्रमुख भारतीय एथलीट
इस सूची में कई प्रमुख नाम शामिल हैं।
दुती चंद – उन पर चार साल का प्रतिबंध लगा हुआ है।
परवेज खान – उन पर 2030 तक के लिए प्रतिबंध लगाया गया था।
धनलक्ष्मी सेकर – बार-बार नियम तोड़ने के कारण उन्हें भी आठ साल के निलंबन का सामना करना पड़ रहा है।
डोपिंग के अलावा अन्य उल्लंघन
इस सूची में केवल डोपिंग ही शामिल नहीं है; बल्कि कई अन्य कारणों से भी एथलीटों को निलंबित किया गया है। इसमें एथलीटों के नमूनों के साथ छेड़छाड़ करना और डोपिंग परीक्षणों की रिपोर्ट से बचने की कोशिश करना भी शामिल है।
इसके अलावा, उन्हें प्रतिबंधित पदार्थों की तस्करी करने और उससे संबंधित जानकारी देने में विफल रहने के कारण भी निलंबित किया गया था।
इस तरह के उल्लंघनों पर भी डोपिंग अपराधों के समान ही दंड दिया जाता है, जो कि सख्त वैश्विक डोपिंग-रोधी (Anti-Doping) ढांचे का हिस्सा है।
भारत की डोपिंग समस्या पर WADA की रिपोर्ट
वर्ल्ड एंटी-डोपिंग एजेंसी (WADA) की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 260 भारतीय एथलीट डोपिंग टेस्ट में पॉज़िटिव पाए गए।
भारत में पॉज़िटिविटी दर 3.6% दर्ज की गई है, जो दुनिया भर में सबसे ज़्यादा दरों में से एक है।
नेशनल एंटी-डोपिंग एजेंसी (NADA) द्वारा 7,100 से ज़्यादा सैंपल इकट्ठा किए गए थे।
हैरानी की बात यह है कि किसी भी अन्य देश में डोपिंग के मामले तीन अंकों में दर्ज नहीं किए गए हैं, जो भारत में इस समस्या की गंभीरता को उजागर करता है।
समस्या को हल करने के लिए उठाए गए कदम
जैसे ही 2024 के पेरिस ओलंपिक समाप्त हुए, एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (AFI) ने प्रशिक्षण प्रणालियों में सुधार के लिए कदम उठाए हैं।
इन सुधारों में राष्ट्रीय शिविरों का विकेंद्रीकरण करना और साथ ही निजी संगठनों के साथ प्रशिक्षण को बढ़ावा देना शामिल है।
इसके अलावा, वे एथलीटों के लिए निगरानी और सहायता प्रणालियों में भी सुधार कर रहे हैं। हालाँकि, तकनीकी विशेषज्ञों की राय है कि इस समस्या को हल करने के लिए अभी भी अधिक सख्ती से नियमों को लागू करने और जागरूकता की आवश्यकता है।


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