भारत और जर्मनी ने 12–13 जनवरी 2026 को जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की आधिकारिक भारत यात्रा के दौरान अपनी दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी में हुई इस यात्रा में रक्षा, आर्थिक विकास, हरित विकास, प्रौद्योगिकी सहयोग और वैश्विक मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई। जारी संयुक्त वक्तव्य दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास और साझा लोकतांत्रिक मूल्यों को दर्शाता है।
क्यों चर्चा में है?
जनवरी 2026 में अहमदाबाद में उच्चस्तरीय वार्ता के बाद भारत और जर्मनी ने संयुक्त वक्तव्य जारी किया। यह चांसलर मर्ज़ की भारत और एशिया की पहली आधिकारिक यात्रा थी। यह वर्ष भारत–जर्मनी 75 वर्षों के राजनयिक संबंधों का भी प्रतीक है और रणनीतिक साझेदारी को नई गति देता है।
सहयोग के प्रमुख क्षेत्र
1. रक्षा और सुरक्षा सहयोग
- संयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण कार्यक्रम और स्टाफ-स्तरीय संवाद बढ़ाने पर सहमति।
- जर्मनी की नौसैनिक अभ्यास MILAN 2026, IONS चीफ्स कॉन्क्लेव और एयर कॉम्बैट एक्सरसाइज TARANG SHAKTI 2026 में भागीदारी की पुष्टि।
- रक्षा औद्योगिक सहयोग रोडमैप के तहत सह-विकास और सह-उत्पादन को बढ़ावा।
- पनडुब्बी, काउंटर-ड्रोन प्रणालियों और उन्नत रक्षा तकनीकों में सहयोग—भारत की कुशल मानव संसाधन क्षमता और जर्मनी की उच्च तकनीकी विशेषज्ञता का संयोजन।
2. आतंकवाद निरोध और वैश्विक सुरक्षा
- जम्मू-कश्मीर और दिल्ली में हालिया आतंकी हमलों सहित आतंकवाद के सभी रूपों की कड़ी निंदा।
- आतंकवादी नेटवर्क, वित्तपोषण और सुरक्षित ठिकानों के विरुद्ध निकट समन्वय का संकल्प।
- काउंटर-टेररिज़्म संयुक्त कार्यसमूह और परस्पर कानूनी सहायता संधि के प्रभावी क्रियान्वयन का स्वागत।
- UN 1267 प्रतिबंध समिति के तहत सूचीबद्ध इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई का समर्थन।
3. व्यापार, अर्थव्यवस्था और निवेश
- 2024 में भारत–जर्मनी व्यापार USD 50 अरब से अधिक; यह भारत–EU व्यापार का 25% से ज्यादा।
- विनिर्माण, स्टार्टअप्स, MSMEs, AI और डिजिटल तकनीकों में निवेश बढ़ाने पर जोर।
- भारत–EU मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के समर्थन की पुनः पुष्टि—वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत करने की उम्मीद।
4. प्रौद्योगिकी, नवाचार और विज्ञान
- सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम साझेदारी के जरिए मूल्य शृंखला में सहयोग।
- इंडो-जर्मन डिजिटल डायलॉग के तहत AI, डिजिटल गवर्नेंस, टेलीकॉम और इंडस्ट्री 4.0 में सहयोग।
- IGSTC का विस्तार और बैटरी तकनीक, हरित परिवहन व स्वास्थ्य में उत्कृष्टता केंद्र।
- ISRO–DLR के बीच अंतरिक्ष सहयोग का विस्तार।
5. हरित और सतत विकास
- ग्रीन एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट पार्टनरशिप (GSDP) के तहत 2030 तक €10 अरब की प्रतिबद्धता (लगभग €5 अरब उपयोग)।
- नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, सतत शहरी परिवहन, जैव विविधता और जलवायु-लचीला बुनियादी ढांचा।
- ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया ऑफटेक समझौते—राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत सहयोग।
6. इंडो-पैसिफिक और वैश्विक मुद्दे
- मुक्त, खुला और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक के समर्थन की पुनः पुष्टि; नया द्विपक्षीय परामर्श तंत्र।
- इंडो-पैसिफिक ओशंस इनिशिएटिव के तहत सहयोग।
- भारत–मध्य पूर्व–यूरोप आर्थिक कॉरिडोर (IMEC) का समर्थन।
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार, यूक्रेन संघर्ष पर चिंता, गाज़ा में शांति प्रयासों का स्वागत और दो-राज्य समाधान के प्रति प्रतिबद्धता।
7. शिक्षा, कौशल और जन-से-जन संबंध
- भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए वीज़ा-फ्री ट्रांजिट की घोषणा।
- माइग्रेशन एंड मोबिलिटी पार्टनरशिप के तहत नैतिक कुशल प्रवासन, विशेषकर स्वास्थ्य और नवीकरणीय ऊर्जा में।
- कौशल विकास, उच्च शिक्षा सहयोग, जर्मन भाषा प्रशिक्षण; IITs और जर्मन विश्वविद्यालयों के बीच साझेदारी।
पृष्ठभूमि: भारत–जर्मनी संबंध
भारत और जर्मनी ने 1951 में राजनयिक संबंध स्थापित किए। रणनीतिक साझेदारी (2000) और अंतर-सरकारी परामर्श (IGC, 2011) ने संबंधों को संस्थागत रूप दिया। जर्मनी, EU में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और स्वच्छ ऊर्जा, तकनीक तथा व्यावसायिक प्रशिक्षण में प्रमुख सहयोगी है।


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