वैश्विक डिजिटल प्रदर्शन में भारत ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। 4 फरवरी 2026 को जारी नेटवर्क रेडीनेस इंडेक्स 2025 रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने चार पायदान की छलांग लगाते हुए 127 अर्थव्यवस्थाओं में 45वाँ स्थान हासिल किया है। रैंकिंग में सुधार के साथ-साथ भारत का कुल स्कोर भी बढ़कर 2024 के 53.63 से 54.43 (2025) हो गया है। रिपोर्ट में प्रौद्योगिकी अपनाने, डिजिटल अवसंरचना और नवाचार-आधारित विकास में भारत की बढ़ती मजबूती को विशेष रूप से रेखांकित किया गया है।
नेटवर्क रेडीनेस इंडेक्स 2025 यह आकलन करता है कि देश विकास और वृद्धि के लिए डिजिटल तकनीकों का कितनी प्रभावी ढंग से उपयोग कर रहे हैं। यह सूचकांक पोर्टुलान्स इंस्टीट्यूट (Portulans Institute) द्वारा तैयार किया जाता है, जो एक स्वतंत्र गैर-लाभकारी शोध संगठन है। इसमें 127 अर्थव्यवस्थाओं का मूल्यांकन चार स्तंभों—प्रौद्योगिकी, लोग, शासन और प्रभाव—के आधार पर किया जाता है, जिनके अंतर्गत 53 संकेतक शामिल हैं। यह सूचकांक अर्थव्यवस्था और समाज में नेटवर्क, डेटा और डिजिटल टूल्स के उपयोग की प्रभावशीलता की एक समग्र तस्वीर प्रस्तुत करता है।
नेटवर्क रेडीनेस इंडेक्स 2025 में भारत का 45वें स्थान पर पहुँचना विभिन्न डिजिटल संकेतकों में निरंतर सुधार को दर्शाता है। देश का स्कोर 54.43 (100 में से) तक बढ़ गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक मजबूत डिजिटल आधार का संकेत देता है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत की नेटवर्क रेडीनेस उसकी आय स्तर की अपेक्षा से अधिक है, जिससे स्पष्ट होता है कि देश की डिजिटल प्रगति आर्थिक सीमाओं से तेज़ गति से आगे बढ़ रही है।
नेटवर्क रेडीनेस इंडेक्स 2025 की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक यह है कि भारत ने कई महत्वपूर्ण संकेतकों में वैश्विक स्तर पर प्रथम स्थान हासिल किया है। भारत दूरसंचार सेवाओं में वार्षिक निवेश, एआई से जुड़े वैज्ञानिक प्रकाशन, आईसीटी सेवा निर्यात और ई-कॉमर्स कानून जैसे क्षेत्रों में दुनिया में पहला स्थान पर रहा। ये रैंकिंग भारत के मजबूत डिजिटल नीति ढांचे, सशक्त नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र और निर्यात-आधारित आईटी सेवा क्षेत्र को दर्शाती हैं। यह प्रदर्शन भारत की एक वैश्विक डिजिटल और प्रौद्योगिकी सेवा केंद्र के रूप में भूमिका को रेखांकित करता है।
कनेक्टिविटी से जुड़े संकेतकों में भी भारत का प्रदर्शन प्रभावशाली रहा है। भारत ने FTTH/बिल्डिंग इंटरनेट सब्सक्रिप्शन, मोबाइल ब्रॉडबैंड इंटरनेट ट्रैफिक और अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट बैंडविड्थ में दूसरा वैश्विक स्थान प्राप्त किया, जो डिजिटल अवसंरचना के तीव्र विस्तार को दर्शाता है। इसके अलावा, भारत ने घरेलू बाज़ार आकार और आय असमानता संकेतक में तीसरा स्थान हासिल किया, जो देश के विशाल डिजिटल उपभोक्ता आधार और डिजिटल समावेशन में हो रहे सुधार को दर्शाता है।
नेटवर्क रेडीनेस इंडेक्स 2025 में भारत को निम्न-मध्यम आय वाले देशों में दूसरा स्थान मिला है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भारत अपनी आर्थिक स्थिति से कहीं आगे बढ़कर डिजिटल तत्परता का प्रदर्शन कर रहा है। यह लक्षित नीतिगत हस्तक्षेपों, निजी क्षेत्र के निवेश और बड़े पैमाने के डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से तेज़ तकनीकी अपनाने का परिणाम है। भारत का यह प्रदर्शन दिखाता है कि विकासशील अर्थव्यवस्थाएँ किस तरह डिजिटल नेटवर्क का उपयोग कर समावेशी विकास को आगे बढ़ा सकती हैं।
उच्च आय (High Income)
उच्च-मध्यम आय (Upper-Middle Income)
निम्न-मध्यम आय (Lower-Middle Income)
निम्न आय (Low Income)
अफ्रीका
अरब देश
एशिया और प्रशांत
CIS (स्वतंत्र राष्ट्रमंडल)
यूरोप
अमेरिका महाद्वीप
नेटवर्क रेडीनेस किसी देश की इस क्षमता को मापता है कि वह डिजिटल नेटवर्क का उपयोग आर्थिक, सामाजिक और शासन से जुड़े परिणामों के लिए कितनी प्रभावी तरह से कर पा रहा है। उच्च नेटवर्क रेडीनेस नवाचार को बढ़ावा देती है, सार्वजनिक सेवाओं को अधिक कुशल बनाती है, ई-कॉमर्स के विकास को समर्थन देती है और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करती है। भारत जैसे देश के लिए नेटवर्क रेडीनेस में सुधार स्टार्टअप्स, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, एआई अनुसंधान और वैश्विक आईटी निर्यात को मजबूती देने के लिए अत्यंत आवश्यक है, जिससे यह एक महत्वपूर्ण दीर्घकालिक विकास संकेतक बन जाता है।
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