भारत में चीता की संख्या बढ़कर 53 हो गई है, जब नामीबिया से लाई गई मादा चीता ज्वाला ने कुनो राष्ट्रीय उद्यान में पाँच शावकों को जन्म दिया। इस उपलब्धि की जानकारी 9 मार्च 2026 को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने दी और इसे प्रोजेक्ट चीता के लिए एक बड़ी सफलता बताया। इन शावकों के जन्म के बाद भारत में जन्मे चीता शावकों की संख्या बढ़कर 33 हो गई है। यह घटना भारत में चीते का 10वां सफल लिटर (जन्म समूह) भी दर्शाती है, जो यह संकेत देती है कि देश में चीता पुनर्स्थापन कार्यक्रम धीरे-धीरे सफल होता जा रहा है और भारत की वन्यजीव संरक्षण यात्रा को नई मजबूती मिल रही है।
भारत में चीता की संख्या बढ़कर 53 हो गई है। यह वृद्धि उस समय दर्ज की गई जब नामीबिया से लाई गई मादा चीता ज्वाला ने कुनो राष्ट्रीय उद्यान में पाँच शावकों को जन्म दिया। इस खबर की जानकारी केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के माध्यम से साझा की और इसे भारत की वन्यजीव संरक्षण यात्रा के लिए गर्व का क्षण बताया।
यह घटना भारत में चीते के 10वें सफल लिटर (शावक जन्म) का प्रतिनिधित्व करती है और यह दर्शाती है कि प्रोजेक्ट चीता धीरे-धीरे अपने पारिस्थितिक पुनर्स्थापन (ecological restoration) के लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
चीता के संरक्षण के क्षेत्र में भारत को एक और सकारात्मक संकेत मिला है। मादा चीता ज्वाला के शावकों के जन्म के बाद भारत में जन्मे चीता शावकों की संख्या बढ़कर 33 हो गई है। यह उपलब्धि भारत में चीता संरक्षण के लिए उत्साहजनक मानी जा रही है। ज्वाला अब तीसरी बार सफलतापूर्वक मां बनी है, जो यह दर्शाता है कि कुनो राष्ट्रीय उद्यान का आवास चीता प्रजनन के लिए तेजी से अनुकूल होता जा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार यह प्रगति भारत में चीता आबादी की बढ़ती स्थिरता को दर्शाती है। पशु चिकित्सक और फील्ड स्टाफ शावकों की शुरुआती महीनों में लगातार निगरानी कर रहे हैं, ताकि उनके स्वास्थ्य और जीवित रहने की संभावना को सुनिश्चित किया जा सके।
प्रोजेक्ट चीता के तहत हाल के समय में कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम हुए हैं, जिन्होंने भारत में चीता की आबादी को मजबूत करने में मदद की है। कुछ सप्ताह पहले दक्षिण अफ्रीका से लाई गई मादा चीता गामिनी ने चार शावकों को जन्म दिया, जो भारत आने के बाद उसका दूसरा सफल लिटर है। इसके अलावा 28 फरवरी 2026 को बोत्सवाना से नौ चीते (छह मादा और तीन नर) भारत लाए गए। इन चीतों को फिलहाल कुनो राष्ट्रीय उद्यान में क्वारंटीन बाड़ों में रखा गया है, जहां उनकी स्वास्थ्य जांच और नए वातावरण के अनुकूल बनने की प्रक्रिया जारी है। बाद में उन्हें धीरे-धीरे जंगल के बड़े क्षेत्र में छोड़ा जाएगा।
कुनो राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश में स्थित यह पार्क भारत में चीता पुनर्स्थापन कार्यक्रम का प्रमुख केंद्र बन चुका है। यहां का विशाल घासभूमि पारिस्थितिकी तंत्र चीतों के लिए शिकार, प्रजनन और भारतीय पर्यावरण के अनुकूल ढलने के लिए उपयुक्त माना जाता है।
कुनो में चल रहे चीता संरक्षण प्रयास वन विभाग, वन्यजीव जीवविज्ञानियों, पशु चिकित्सकों और संरक्षण विशेषज्ञों के समन्वित सहयोग का परिणाम हैं। रेडियो कॉलर और फील्ड अवलोकन के माध्यम से लगातार निगरानी की जाती है, जिससे भारत में बढ़ती चीता आबादी को स्वस्थ और स्थिर बनाए रखने में मदद मिलती है।
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