संयुक्त सैन्य अभ्यास से भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा संबंध और मजबूत हुए

भारत ने पहली बार ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास एक्सरसाइज़ टैलिस्मन सेबर में भाग लिया है, जो भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा सहयोग में एक ऐतिहासिक क्षण है। यह सैन्य अभ्यास 13 जुलाई 2025 को आधिकारिक रूप से शुरू हुआ, जिसमें अमेरिका सहित 19 देशों की सेनाएं हिस्सा ले रही हैं। इस भागीदारी से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की सुरक्षा भूमिका और अधिक मज़बूत हुई है।

भारत की ऐतिहासिक भागीदारी
ऑस्ट्रेलिया में आयोजित इस उच्च स्तरीय युद्धाभ्यास में भारत की पहली भागीदारी को एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक और सैन्य कदम माना जा रहा है। इस बात की जानकारी ऑस्ट्रेलिया के भारत में उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन ने सोशल मीडिया मंच ‘X’ पर साझा की। यह अभ्यास भारत की बढ़ती वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा भागीदारी को दर्शाता है।

टैलिस्मन सेबर 2025 के बारे में
एक्सरसाइज़ टैलिस्मन सेबर 2025 इस अभ्यास का 11वां संस्करण है और अब तक ऑस्ट्रेलिया में हुआ सबसे बड़ा सैन्य युद्धाभ्यास है। इसमें ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, भारत समेत 19 देशों के 35,000 से अधिक सैनिक भाग ले रहे हैं। यह अभ्यास क्वींसलैंड, नॉर्दर्न टेरिटरी, न्यू साउथ वेल्स, वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया और क्रिसमस द्वीप तक फैला है। इस बार पहली बार पापुआ न्यू गिनी में भी युद्धाभ्यास आयोजित किया जा रहा है।

उद्घाटन समारोह HMAS Adelaide युद्धपोत पर हुआ, जिसमें ऑस्ट्रेलिया के वाइस एडमिरल जस्टिन जोन्स और अमेरिका के लेफ्टिनेंट जनरल जोएल बी. वॉवेल ने गार्डन आइलैंड, सिडनी में नेतृत्व किया।

अभ्यास के उद्देश्य और गतिविधियाँ
इस अभ्यास में लाइव फायर ड्रिल, फील्ड ट्रेनिंग, समुद्री और वायु अभियान, उभयचर लैंडिंग और संयुक्त सैन्य रणनीति जैसे युद्ध कौशल शामिल हैं। साथ ही, इसमें ऑस्ट्रेलिया के नए रक्षा उपकरणों जैसे UH-60M ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर और प्रिसीजन स्ट्राइक मिसाइल का प्रदर्शन भी किया जाएगा।

भाग लेने वाले अन्य देशों में कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, जापान, दक्षिण कोरिया, इंडोनेशिया, ब्रिटेन, फिलीपींस आदि शामिल हैं, जबकि मलेशिया और वियतनाम पर्यवेक्षक देशों के रूप में उपस्थित हैं। इस बहुपक्षीय सहयोग का उद्देश्य संयुक्त रक्षा तैयारियों को मज़बूत करना, रणनीतिक ज्ञान साझा करना और क्षेत्रीय शांति को बढ़ावा देना है।

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vikash

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